एकदम अचानक दीदी ने पूछा, इतना मोटा लंड कहाँ छुपाया हुआ था।

Jan 3, 2026 - 13:14
Jan 6, 2026 - 19:52
 0  3
एकदम अचानक दीदी ने पूछा, इतना मोटा लंड कहाँ छुपाया हुआ था।

मेरा नाम सूरज है। मैं पंजाब के एक अमीर परिवार से हूँ, उम्र 20 साल, कद 6 फीट, और जिम की मेहनत से मेरी बॉडी टाइट और मस्कुलर है। मेरा चेहरा गोरा, आँखें भूरी, और बाल काले-घने हैं, जो मुझे कॉलेज में लड़कियों का फेवरेट बनाते हैं। मेरा लंड 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है, इसका सुपारा गुलाबी और चिकना, जो पूरी तरह खड़ा होने पर लोहे की तरह सख्त हो जाता है। मेरी दीदी, पूजा, 26 साल की हैं। उनका तलाक डेढ़ साल पहले हो चुका है, क्योंकि उनका पति, राकेश, उन्हें बिस्तर पर संतुष्ट नहीं कर पाता था। पूजा दीदी का फिगर 36-28-34 है। उनकी त्वचा दूध-सी गोरी, आँखें काली और गहरी, और बाल लंबे, रेशमी, जो उनकी कमर तक लहराते हैं। उनके बूब्स गोल, टाइट, और रसीले हैं, जिनके निप्पल्स गुलाबी और हमेशा सख्त रहते हैं। उनकी गांड भारी और उभरी हुई है, जो चलते वक्त मटकती है। उनकी चूत साफ, गुलाबी, और इतनी टाइट कि उंगली डालने में भी मेहनत लगे।

ये कहानी उस दिन की है जब मैंने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की थी और घर पर फ्री था। मम्मी-पापा दिल्ली में रिश्तेदार की शादी में गए थे, और घर पर सिर्फ मैं और पूजा दीदी थे। उस दिन दोपहर थी, और गर्मी की वजह से मैं अपने कमरे में सिर्फ नीली टी-शर्ट और काली जीन्स में था। मैं अपने लैपटॉप पर एक देसी ब्लू फिल्म देख रहा था। स्क्रीन पर एक लड़का अपनी बहन को बिस्तर पर पटककर चोद रहा था। लड़की की सिसकियाँ और चुदाई की आवाज़ें मुझे गर्म कर रही थीं। मेरा लंड जीन्स में तंबू बनाकर खड़ा हो गया था। मैंने जीन्स का बटन खोला, अंडरवियर नीचे सरकाया, और अपने लंड को बाहर निकाला। उसका गुलाबी सुपारा चमक रहा था। मैंने उसे हाथ में लिया और ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा। “आहह… उफ्फ… क्या चुदाई है!” मैं जोश में बड़बड़ा रहा था।

अचनक पता चला कि पूजा दीदी मेरे कमरे के दरवाज़े पर खड़ी हैं। लाल टॉप ें  ऐस लग रह ीं,  तन पर चढ़ा ि ो। काली लेगिंग्स में उनकी जाँें और पिछव़ा साफ़- झलक रहा था। आस उनके बदन पर इतन िपकी थी कि   आकि अच  ि रही थी। मेरे लंड को देखकर उनकी आँखों ें चमक  गई। साँसें ी हो गईं, ीमे-ीमे  ओर रन लगीं। ैंने जब मुठ माी, ो पानी निकला, लंड ढीला पड गया। लैपटॉप बंद किया, जीन्स ऊपर खींची, उठकर चल िा। दरवाज़े पर उनें खड़ा दे मेरी  हव िकल गई

“दीदी, यहाँ तुम?” मेरी आवाज़ िसक रही थी। लगा कहीं वो घरवों को खबर न दे ें।

वो शरारती अंदाज़ में मुस्कुराईं और बोलीं, “हाँ, सूरज। जब तू अपने उस मोटे लंड को हिला रहा था, तब से मैं यहीं हूँ।”

मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। “दीदी, प्लीज़, ये बात किसी को मत बताना। मैं मर जाऊँगा।”

वो मुस्कुं, े-े मेरी ओर बढ़ीं। चेहरे पर सां  गरहट लग रही थी। "िंा मत करो, किसी को कुछ नहीं कहूंगी," उनोंने कहा। "पर एक ात ननी होी।"

 आव थरथर, "क... क्या ात है?" ांें ़, छाी में धड़कन ूं रही थी।

वो मेरी आँखों में देखकर बोलीं, “तू मुझे वैसे ही चोदेगा, जैसे उस फिल्म में लड़का अपनी बहन को चोद रहा था। तेरा लंड देखकर मेरी चूत में आग लग गई है, सूरज। मैं सालों से तड़प रही हूँ। राकेश का लंड तो छोटा-सा था, उसने मुझे कभी मज़ा नहीं दिया।”

ान रह गया मैं। उनक ओर खत , ेरी दीदी - जो हमेशा प्यार से फटक लगी थी - ऐसी बातें कर रही थी। इस सह नहीं कह  सकता था, ि ी, उनकी आव़, उनका शर - सब कु मेरे दिमाग ें  रह ा। “ ऐस मत करो…”  आव़ काँ रह ी, लने में ेर लगी।

“क्या ठीक नहीं है? मैं तेरी बहन हूँ, लेकिन औरत भी हूँ। मेरी चूत सालों से प्यासी है। तू मर्द है, और तेरा लंड मेरी ज़रूरत पूरी कर सकता है।” उनकी आवाज़ में हवस थी, लेकिन एक अजीब-सी मायूसी भी।

़ी   ि मैंे कुछ नहीं कहा। दिमाग और दिल में झगड़ा चल रहा था। ि ी, दीदी की तरफ  आई गहरी नज़र  सब सल कर दिा। उनक शर का हर ि ीं रह   तवज्जो। “ठीक है, तुम जो कहो,” मैंने ि े कहा।

अचनक वो मेरे होंठों पर झपटी। उनकी जीभ मेरे दर ुस गई, ्वाद ऐसा मादक था जै  फल  शर बन  ो।  ी मैं महस िा,  शर गर  उठा, और ैंे उन्हें  े चू िा। उनकी सांसें िकन लगीं, गलिाँ मेरे बालों में उलझ रही थीं। मेा हाथ उनके लाल कपड़े के ऊपर से उनके सीे पर पहुँ गया।   एहस  - इतने नरम, इतन तन  कि मेरा लंड फिर से उठ खड़ा हु। मैंने े से दबा ा, ो उनके मुँह से आव़ निकली - “आआहह… सूरज… उफ्फ…”

Sensual Sex Porn Gifs and Pics - MyTeenWebcam

ऊपर  ओर ांकत  मैंने उसका टॉप उठाया, आग बढकर ब्रा दिखी - काली, तन ें।  इतनी भा  ि कप ीला पड़ रहा था। निप्पल ऊपर की तरफ उभर े, ब्रा के  ैं ुं से  िा, गीला कर िा। "उब... सूरज... ऐस  चलत रहो," वह ीमे स्वर में बोी, ां अटकी हु ुक खुला, और बदन े बीोबी   आई - मुयम, लत । निप्पल गुलाबी,   तन  ां। मैंने एक को जी से ़ा, फि ांतों  दबा। "ओह बस… रु नहीं…" उसक गलिां बाल ें उलझी, ीं रही थीं।

उसकी काले  ी लेगिंग्स ैंने ीचे की ओर सरक िा। लेस वाली पैंटी चूत े चिपक गई थी, नम  असर साफ झलक रहा था।  े पैंटी को खींचकर ीचे िा, और ों  मन  एक गुलाबी चूत। क्लिट ऊपर  ओर उठी हुई, चूत नम होकर चमक रही थी। एक गली चूत पर  ी,  वह ाँप उठी। “आआहह… सूरज… जल रही हूँ ैं तर े… कुछ  ो!”

मे गली उनकी चूत में ी, तभी एक झटक  ाथ   गय सब कु ऐस लगा, मा दर  ि   ेरी उंगली को िकलन नहीं  रहा। े- आगे- िलाया, ो सांें तेज़ हो गईं। “आआआहह… सूरज… और कर… मेरी चूत को रगड़ दे!” अंगूठा ि पर पहुँा, और शर एकदम ़ा हो गया। “उफ्फ… सूरज… तू तो मुझे मार डालेगा!” दूसरी उंगली  दर गई, अब िसटन लगी चीज़ें ेज़ी से। नम बढ़ने लगी, वो दब, “आआआहह… मेरी चूत फट जाएगी… और ज़ोर से!”

उसके स्तनों ो चूसते हुए मैं उसक ि ें उंगलियाँ ाईं। वह मेरे कंधों पर ाथ रखकर  उठी, “सूरज… बस… अब तेरा लिं चाहिए… मुझे  तरह भर े!” मैंने  े अपनी जींस और अंडरवेअर े उतारा। मेरा लिं पूरी तरह ऊपर था, उसकी ोपी नम होकर चमक रही थी। दीदी ने ांककर देखा और कहा, “हे भगव… सूरज, ये मोटा लिं ू कहाँ छुपाकर रखा था? मैं इसके लिए सालों से  थी!”

मैं हँा, "मिल गया ा, दीदी। अब तुारी प्यास ी बुझेगी।" उनके हाथ मेे लं को संलन लगे, े-े हिलाने लगे। "ओह... सूरज... ऐस लगत  ो लोहे की छड़ हो,"  ीं। मैं ाँ उठा। उन्हें बितर पर लिटाया, ऊपर  गया। टांगें ोलीं, चूत पर लंड िसन लगा।  तर थी, मेरा सिरा फिसल रहा था। "सूरज... बस कर... डाल दे... चूत कर है!" वो दबं।

उनके होंठों पर मेरे ों आए िर एक झटक लगा, सुपारा दर घुस गया। "आआआ... मम्मी..."  कर उठीं। सूरज  ेड़ा, ो वो िलख पड़ीं। उनके तर इतनी ी थी कि मेरा लं धर टकर गया। पहला झटक पडे ही चीख निकल गई। धीमेपन  आग बढ़ा, मगर दर्द नहीं गया। "सूरज... धीरे..." उनक आव ाँ रह ी। मैं िठक गया। फिर ौका ा - निप्पल्स को ुँ ें  िा, ताकि दर्द  

़ी देर ें वह नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी। "अब , सूरज... अब मस  गई!" मैंने धक्के ि शुरू किए। "ठनठन..." मेरे लंड और उनकी चूत के टकराने की आवाज़ कमरे में भर गई। "आउउऊ... उफ्फ... सूरज... और मजब... मेरी चूत पर ि ा!" मैंने उनकी ांें कंधे पर  िा और गहरे-गहरे धक्के लग। उनकी चूत मेरे लंड को  रही थी। "आओओह... सूरज... तेरा लंड दर तक पहुँ रहा है!" वह बह गईं, और उनकी चूत ने मेरे लंड को तर कर दिया।

"अब घोड़ी बन ," मैंने कहा। वो  उस  ें ुक गईं।    मेरी तरफ, मैंने हल्का सा  मारा। "शररती... अब ़ो  करो!" वो हँस पड़ीं। पीछे से लंड दर गया, धक्के लगा  आगे- िलन लगा। "धम्… धम्…" उनका शरीर काँ उठा। "उऊऊह… सूरज… ऐस  ारी रख !" मैंने बाल पकड़े, एकदम ़ी  आग बढ़ा।

आध े तक े- चलने के बाद मैंने उनके तर सब ुछ ंडे दिया, शरीर ढह गया उनक  ां लते हुए ो बोलीं, “सूरज... ऐस लग  कहीं ऊपर  गए तुम।” मैंने आस े उनके होंठों  , आव ीमी ी, “अब यह ा, हर रोज़ ऐसे ही।”

वो मुस्कुराईं और बोलीं, “हाँ, मेरे राजा। तेरा लंड अब मेरा है।”

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0