उसने बहन को सेक्स के लिए तैयार कर लिया

Jan 16, 2026 - 11:23
Feb 5, 2026 - 17:11
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उसने बहन को सेक्स के लिए तैयार कर लिया

मेरा नाम अनिल है। मैं एक छोटे से गाँव से हूँ, जहाँ मैंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। फिर शहर में फार्मेसी की पढ़ाई के लिए कॉलेज जॉइन किया। अब मुझे वहाँ दो साल हो चुके थे। मेरे बारे में बताऊँ तो मैं 20 साल का हूँ, जिम जाता हूँ, जिससे मेरी बॉडी काफ़ी अच्छी दिखने लगी है। हाइट भी ठीक-ठाक है, लगभग 5 फीट 10 इंच। और हाँ, मेरे लंड की बात करूँ तो वो 6.5 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है। मैंने हमेशा इसका ख्याल रखा, तेल की मालिश की, और कभी-कभी दवाइयाँ भी खा लीं, ताकि मर्दानगी में कोई कमी न आए। लेकिन सच कहूँ, मैंने कभी किसी लड़की को चोदा नहीं था। बस मुठ मारकर ही काम चलाया था

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पढ़ाई पूरी होने वाली थी, तो मैंने एक मेडिकल स्टोर पर काम शुरू कर दिया था। एक दिन दुकान पर एक गाँव की दीदी आईं। क्या माल थी वो! उनके बूब्स इतने बड़े थे कि संतरे से भी बड़े लग रहे थे, हाथ में भी शायद न समाते। उनकी गांड भी काफ़ी भारी थी, एकदम मस्त। मैं ज्यादा देर तक तो नहीं देख पाया, लेकिन जो देखा, वो दिल में उतर गया। उन्होंने एक कंडोम माँगा। मैं उसे ढूँढने लगा, लेकिन मन में सवाल उठा कि पूछ लूँ ये किसके लिए ले रही हैं? डर भी था कि कहीं दुकान के मालिक को शिकायत न कर दें। फिर भी हिम्मत करके पूछ लिया, “ये किसके लिए?”

ो मुस्कुरा, सिर हल्का ाया, ि बोली – "अभ तक  शादी नहीं हुई,   ्रेी है... तो भाई से ही  बना लूँगी।" इतना कहकर वो ठह लगे हुए चली गई। मैं जमे के जम खड़ा रह गया। िर् एक   दिमाग में चककर टने लगी।

फिर मैंने सोचा, मेरी भी तो बहन है, सुहानी। वो अब 18 साल की हो चुकी थी। पूरा दिन मैं बस यही सोचता रहा। दुकान पर काम में मन नहीं लग रहा था। सुहानी के बारे में सोच-सोचकर मेरा दिमाग घूम रहा था। आखिरकार मैंने छुट्टी ली और खेतों की तरफ चला गया। वहाँ एक पेड़ के नीचे बैठकर सुहानी के बारे में सोचने लगा। सुहानी का रंग एकदम गोरा था, जैसे दूध। उसके बूब्स भी पिछले कुछ समय से सलवार-कमीज में उभरे हुए दिखते थे। मतलब, वो अब जवान हो रही थी। उसकी गांड भी पहले से ज्यादा चौड़ी लगने लगी थी। एक बार गलती से उसका तौलिया मेरे सामने खुल गया था, तो उसकी नंगी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था।

अब तय  ुका  मन ें, सुहानी के  होगा  े- िचा आन लगे दिमाग में। घर ाते वक एक छो ुका से कु गोलियाँ ले लीं। पहुँचा तो देखा, रस में ो खाना बना रही थी। माँ कमर ें झपक लगा रही थीं, और पिताी शहर में ही रहते थे अकसर इस  मैंने े से उस खन  कर िा। वो रोटी बेल रही थी, हर बार उसकी कमर हल्के  लती। सलवार पर उभर इतना सा ा, मा कह रहा हो मेरे लि  े। ंड तुरंत ऊपर उठ गया।

ि अचनक सुहानी ने मे तरफ नज ाली, "ओये, यहाँ क्या  रहे हो?" मैं ा, "बस तुझे देख रहा ा…  बदन देखकर  इव  ऊपर उठ गया।" उसक आव़ में झलहट ी, "अपनी बहन को ऐसे देखते हो? शर्म नहीं आती तु्हें?" असल ें, हम आए ि एक-सरे से मज़ाक में ऐसे बोल ेते थे। आज ि वह  चल रह ा, पर मेरे दि ें कुछ और चल रहा था।

एक पल  तकत  मैंने े से उसक े हाथ फिरा दिया। सुहानी झटक   हटी, आव़ काँ रह ी - “अचा, ये क्या ? ऐसा बि  कर!” मुस्  ैं ा, “सुहानी, तू चाहे  े, मे  एगी। बता, मुे तुझसे क्या िलेगा?” उसक ों ें गुस्सा उबल आया। ो अपनी चुनरी  ी पर समटकर खड़ी  गई,  आव ें बोली, “इतन िी नज़र से े देखन ा हौसल  ?”

मैं े- कमर े बाहर निकल आया, ि टीवी  मन  गया। थोड़ी देर े बाद सुहानी पकवान लेकर दर आई। जब उसन  रखी, तो झुकत  ओढ़नी टकर ीचे गिर गई। उसके स्तन सलवार के ऊपर  गए थे, हर िकल । इतने सफ और े देखकर मेरे मुँह में  भर आई एक झटक ें उसने हाथ से   ी, मे तरफ  नजर ी, ि चली गई।

़े दिनों तक मैं हर जगह उससे पूछता रहा – "सुहानी, बोलो न,   चुदाई के लिए तैयार हो?"  ें वो झल ाती। पर ि आहिस्ा-आहिस्ता उसका गुस्सा घटने लगा। अब बस ़ा परेशान होकर नक ें जवाब दे ेती। एक दिन छत पर रस्सी से लटक उसक  नजर आई। मैंने उठाकर देखा, साइज 34D था। ि उसके स्तन वाकई ें बड़े थे। उसके पास ही पैंटी भी लटकी थी, जिसपर चूत का नम  ि रहा था। मैंने उसे सूंघ िा। तभी मेरा लंड और ी सख्त हो उठा।

एक दिन मौका मिल गया। सुहानी कपड़े धो रही थी, मैंने पीछे से उसकी तरफ बढकर उसकी गांड पकड़ ली।  घबरकर धक्का देकर ाग गई, आखिरक अंदर कर दरव  कर लिया। इधर मैंने सोा, एक नय तरीका आजमा। सेक् ी गोलियाँ खरीद ीं, िर ोज उसके खाने में थोड़ी-़ी मा लने लगा। ंद िनों में बदल नजर आने लगा। सुहानी का व्यवहार  पड लगा। अब छेड़ने पर झटक ें ाज नहीं ी थी। मेरे तर  डर कम हो गया। हर  जब मौका िलता, उसकी गांड या बूब्स दबा देता।

एक दिन वो सोफे पर लेटी ीवी देख रही थी। मम्मी सामने बैठी थीं, ध्यान टीवी ें  । शायद उन्हें झपकी भी आ रही थी। मैंने आव  कर दी, ि सुहानी के पास कर बैठ गया। धीरे से उसकी चूत पर हाथ रख दिया। वो छलां लग  ी, फुसफुसा - “बीसी, मम्मी सामने हैं, इतना बेशर्म?” मैंने कहा, “ां रह, अभी मज़ा आएगा।” सलवार के ऊपर से उसक  पर हथ ाने लगा। वो रोकने लगी, लेकिन मैंने उसके दोनों हाथ एक  ें दब लिए। बह  े में ैंने उसके खाने में दो सेक्स गोलियाँ और एक नींद की गोली मिला दी थी, तब े वो ी पड़ रही थी।

पाँच मिनट तक उसकी चूत रगड़ने पर सलवार गीली हो  ी। ि मैंने नाड़ा खोलकर कपड़े नीचे ीं ि िा पैंटी उते, मैंने चूत पर ुँ लगा दिया। सुहानी सिसकते हुए बोली, “आह… भाई, प्लीज़ रुक जा… ऐस नहीं होना ि…” पर मेरा लंड अब ीमा नहीं पड रहा था। तब मैंने झट े मम्मी की ओर नज ी - वो बैठे-बैठे ीं ें ढल गई थीं। इस  मैंने सलवार और पैंटी टनों तक खींच दी। अब उसकी चूत मेरे सामने थी, हल्के बालों से आध ी। मैंने उंगलियों से बाल सरकाए, ि  े चूत पर ि दिा।

सुहानी  गले से आव आई, "उफ... भाई... बस कर..." ों में   गए े, पर मेरा मन लगा ुआ था। दस मिनट तक ैंे उसकी चूत पर ान िा। थो़ी  ें नम बढ गई अचनक मम्मी हिलीं, तो मैं झट से  हट गया। सुहानी  झट से सलवार   और बाथरूम  ओर भाग गई। मम्मी उठीं, टीवी बंद िा, ि सोने चली गईं।

मैं अब और रुक नहीं सकता था। मैंने मौका देखा और सुहानी के कमरे में चला गया। मैंने उसे पकड़ लिया और दरवाज़ा बंद करके लाइट बंद कर दी। सुहानी बोली, “अब क्या है, भाई? इससे ज्यादा क्या करेगा?” मैंने कहा, “देख सुहानी, अब रुकने का नहीं। तुझे भी मज़ा आएगा।” मैंने उसे ज़बरदस्ती पकड़ लिया और उसकी सलवार उतार दी। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी टाँगें फैलाईं। उसकी चूत अब मेरे सामने थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का मारा। खून की पिचकारी निकली। सुहानी चीख रही थी, “आह… भाई… नहीं… दर्द हो रहा है…” लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसे और ज़ोर से चोदा। उसकी चीखें अब सिसकियों में बदल गई थीं। मैंने उसे जमकर चोदा और मज़े लिए।

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