Mamere bhai se kunvaaree chut kee seelatod chudaee
अगले दिन सांसें तेज चल रही थीं। भाई ने कल उंगली से मजबूती से घिस डाला था। झटपट पानी छूट गया था। पर लंड नहीं घुसा पाए थे। आज शरीर मचल रहा था। पहली बार चुदवाने को दिमाग भरा हुआ था।.
यह कहानी सुनें.
दोस्तों, इस बार फिर से मौजूद हूँ मैं - रसीली जान्हवी। भाई-बहन के सेक्स स्टोरी में मस्ती करने के लिए तैयार हूँ।.
पहला हिस्सा था कहानी का।
मामा के बेटे ने मेरी कुंवारी बुर चाटी
अब तक जो कुछ पढ़ा है, वह इस बारे में था कि मेरे ममेरे भाई आशीष ने मुझे गर्म किया था। फिर उसने मुझे ठंडा करते हुए ऐसा कहकर टाल दिया कि अब उसके माँ-बाप आने वाले हैं।.
एकदम शुरू में ही धीमे स्वर में बोला गया - देसी चूत पर फक कहानी।
लग रहा था, जैसे बदन में कोई मोटर अचानक से शुरू हो गयी हो।.
आँखों में बसा एक अजीब सा ख्वाब लिए, भाई की ओर घूर रही थी मैं।.
उसने मेरे दिल की बात पकड़ ली। सीधे शब्दों में पूछा - लंड चूत में डालना है?
सर को ऊपर-नीचे किया मैंने।.
उसने कहा - पर एक समस्या है दोस्त!
तुरंत बोलने को मैंने कहा।.
उसने कहा - इस बात पर विश्वास रखो, हम दोनों कभी किसी को नहीं बताएंगे। सबके सामने हमारा रिश्ता भाई-बहन जैसा ही रहेगा।.
मैंने कहा - हाँ बाबा… अभी तुरंत कर लो।.
उसकी हंसी छिड़ गई - अभी नहीं, शाम को देखेंगे। कंडोम तो है ही नहीं, घरवालों के आने में भी ज्यादा वक्त नहीं बचा।.
एक गुस्से में शब्द निकल पड़े - यार, कुत्ते जैसा हरामी।!
वह हंस दिया.
इस वक्त, बस इतना है कि दोनों की ज़िंदगी में फिर से पुरानी चीज़ें लौट आई हैं।.
कुछ समय बाद मामा के साथ मामी भी पहुंच गए।.
कुछ घंटे बाद आशीष मेडिकल स्टोर पहुँचा, फिर बाजार से वापस लौटते हुए कंडोम ले आया। उधर, दवाइयां भी साथ में खरीद लीं।.
खाने के बाद शाम को हम अपने कमरे में पहुँच गए।.
दरवाज़े के पास पहुंचते ही वो सीधा मेरी ओर बढ़ा। छाती से चिपक गया, बिना कुछ बोले।.
उसने कहा - अभी चुप रहो… माँ-बाप के कमरे तक आवाज़ पहुँच जाएगी।.
अच्छा, मैंने धीरे से कहा।.
उसके बाद सोने का फैसला हुआ।.
उसने अपनी टी-शर्ट व लोअर उतार दिए। फिर मेरे पीछे चिपक गया, बिल्कुल नंगा।.
उसका लंड मेरी गांड को छू रहा था।.
उसकी उँगलियाँ मेरे सीने पर धीमे से दब रही थीं।.
तभी वो मुड़कर मेरे पास आया। चेहरा धीरे से मेरे चेहरे के सामने ले आया था।.
अचानक हमारे होंठ एक-दूसरे को छू लिए।.
कभी-कभी वो मेरे होंठों पर ठहर जाता। फिर गर्दन की ओर बढ़ जाता। कान के पीछे सिलसिला आगे बढ़ता।.
मैंने कहा - भाई, अब यूँ नहीं चलेगा… तुरंत मुझे छुआ दो।!
उसके मुंह से निकला - ओये कमीने, एकदम शांत हो जा, भई।!
उसने अचानक हाथ फैलाए, मेरे मम्मे पर दबाव डाला।.
मैं सांस थोड़ी तेज लेने लगी।.
उसने कहा, अरे भैया, इतना शोर क्यों मचा रहे हो… माँ-बाप को संदेह हो जाएगा।.
उसने धीरे से मेरी टी-शर्ट को हटाया, फिर ब्रा भी उतार दी। पलक झपकते मैं पीठ के बल लेट गई।.
उसने कहा, चलो प्रकाश जला दें।.
मैं बोली- क्यों?
उसके मुँह से निकला - यार, तुझे बिल्कुल नंगा देखना चाहता हूँ!
अचानक वो उठा, फिर बत्ती का स्विच दबा दिया।.
उसकी नजरें मेरे बदन पर टिक गई थीं।.
अचानक वह पास आया, मेरे स्तन को होंठों में लिया, चूसा। दूसरे पर उसकी मुट्ठी घूम रही थी।.
एक के बाद एक दोनों स्तनों को चूसने के बाद उसने पेट की ओर ध्यान दिया। फिर नाभि पर जीभ घुमा दी।.
एक तरफ सिसकी उठ रही थी, वहीं गुदे में लौंड के घुसाव की इच्छा धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी।.
इस बार उसने हाथ को धीमे से नीचे किया। फिर लोअर के ऊपर से ही चूत पर हाथ फेरा।.
थोड़ी देर के बाद वह उठा। मुझे बिस्तर के किनारे तक खींच आया।.
तल पर वह खड़ा हुआ था।.
उस वक्त मेरी पीठ को बिस्तर सहला रहा था।.
एक साथ ही नीचे के कपड़े और पैंटी उसने जमीन पर फेंक दिए।.
इस वक्त सिर्फ हम दोनों - मैं और मेरा चचेरा भाई - बिल्कुल नंगे खड़े थे।.
उसने मेरी चूत को देखा और कहा - भैया, सचमुच… तुझसे ज्यादा प्यारी कोई नहीं।!
अब सुन, इतना बहन बहन मत कर। मैं तो तैयार हूँ लड़की जैसा कुछ नहीं सुनने के लिए, वहीं खड़ा होकर गाली दे रहा है यार।!
उसने हँसते हुए पूछा - अब तुझे क्या कहूँ? कमली?
बोली मैंने - जो तुझे सही लगे कह देना, हाँ पर बहन शब्द मत चढ़ा।.
उसने कहा - ठीक है… अब साफ़ बता, आखिरकार वो मेरी प्रेमिका बनेगी?
ठीक है, मैंने कहा।!
उसके हाथ मेरी जांघों के नीचे सरक गए, फिर वह उन्हें अपने कंधों पर ले गया। इस बीच उसकी जुबान मेरे भोसड़े पर घूमने लगी।.
उसने मेरी चुत में गहराई तक जीभ समोए।.
उसके साथ यौन संबंध बनाते हुए मुझे काफी ख़ुशी मिल रही थी।.
अब मेरी चूत से पानी टपकने लगा था।.
उसने सारा पानी पी लिया।.
वो मुझे बेचैन कर गया था, पर मैं भी ठहराकर जवाब देना जानती थी।.
मैंने कहा - अरे सुन, कल सुबह फिर मिलते हैं… तभी कुछ ठान लेंगे, जब तेरे घरवाले ऑफिस चले जाएँगे।!
उसे यह सुनते ही गुस्सा आ गया।.
थोड़ी देर उसने यही कहा – कर लेते हैं, तू सिर्फ मौन बनाए रख।.
फिर भी मैंने हाँ नहीं कही।.
उसके मन में बात चबती रह गई।.
अंदर से वो मुझ पर गुस्सा कर रहा था।.
खड़ा था वह, सारे कपड़े उतारकर।.
थोड़ी देर पहले उसका लंड सख्त होकर सात इंच का खड़ा था… लेकिन मैंने इनकार कर दिया, अब वो ढीला पड़ चुका था।.
उस दिन सुबह-सुबह घर में सन्नाटा छा गया, कमरे के दरवाज़े पर धीमी खटखटाहट हुई। मैंने दरवाज़ा खोला तो वह वहाँ खड़ा था।.
खुद को चुदासी समझती थी मैं।.
एक गोली निगलते ही वह मेरे पास आया। उसकी बाहें मुझे चारों तरफ से घेर लीं।.
नीचे झुकते हुए मैंने सब कुछ समझ लिया, फिर वहीं उसकी बाँहों में जगह बना ली।.
वह मेरी ब्रा का हुक खोलता गया। मेरे स्तन हवा में लटक उठे।.
टुकड़े-टुकड़े होकर नीचे का हिस्सा अलग हो गया।.
वो वहाँ खड़ा था, मैं सिर्फ पैंटी में लेटी हुई।.
एक बार वो मेरे पास आया, मुझसे पहले ही उसके होंठ खुल गए।.
उसने एक हाथ से पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को छुआ।.
बोल उठी मैं - अरे तू, क्यों पसीना छोड़ रहा है?
उसने कहा – वो हरामखोर पूरी रात मेरी… भगती को झकझोरती रही। अब तूने मेरे भाई की आत्मा को बेचाद उलटा दिया!
मैं हंस दी.
वो मेरी पैंटी नीचे कर गया।.
बिस्तर पर मेरा चचेरा भाई मेरे सामने था, मैं बिलकुल खुली हुई।.
उसने मेरी दोनों जांघें ऊपर उठा लिया, फिर तुरंत ही लंड को चूत में पूरा धँसा दिया।.
उसने मेरी कुंवारी चूत में सीधा लंड घोप दिया, बिना किसी हिचकिचाहट के।.
खून की धार मेरी चूत से छलक उठी।.
चीख निकल गई मेरी, दर्द बहुत तेज़ था।.
मगर वो कुत्ता मुझे बस इतना साफ नज़र आया कि सचमुच गधिया लग रहा था।.
दर्द में लोटते हुए मैंने कहा - साला, इतनी जल्दी क्यों? धीरे भी चलता।!
उसका लंड हिल रहा था जब वो बोला - माफ़ करना जान्हवी तेरी माँ…पहली बार था मेरा, इसलिए धक्के से अंदर चला गया।!
उसकी हरकतों में मुझे शामिल करने का सवाल ही नहीं था। वह बस आगे-पीछे हिल रहा था, धमाकेदार अंदाज में। मैं तब भी चुपचाप वहीं खड़ा था।.
मैं उसे छोड़ने पर मजबूर हो गई, धक्के मारते हुए।.
फिर भी, मेरे धक्के का उस पर क्या असर होता?
थोड़ी देर बाद सुकून महसूस होने लगा।.
चीखते हुए मैं धीरे-धीरे सिसकने लगा।.
बिस्तर पर लेटी मैं सांस भरते हुए चादर को अपनी ओर खींच रही थी।.
उसकी उँगलियाँ मेरे कंधे पर आकर ठहर गई थीं।.
ऊपर की ओर, छत के पास, मेरे दोनों पैर हवा में लटक रहे थे।.
मेरी चूत उन तेज झटकों के आगे ढह गई।.
एकदम से पैरों में ऐंठन हुई, धड़कन तेज हो गई।.
फिर अचानक मेरी चूत से पानी बहने लगा। मैं बेहाल हो चुकी थी।.
मेरी चुत में फिसलन आ गई थी, इसलिए वो अपने लौड़े को और जोर से अंदर धकेलने लगा।.
मैंने कहा - आशीष, बस। अब तो सांस भी नहीं चल रही। हाथ जोड़कर गुजारिश है… छोड़ दो।!
उसने कहा, जबकि मेरे सीने के बीच उसकी जीभ थी - तेरी गुदा ने महज पाँच मिनट में तरल छोड़ दिया, मेरे प्राण।!
फिर मैंने पूछा - अब ऐसे में कोई उपाय है?
उसने कहा - अब तक तो मेरी बात का पूरा आग़ाज़ ही नहीं हुआ… मुझे थोड़ा और वक्त चाहिए।.
मैं बिल्कुल नंगी पड़ी थी, हर धक्के को सह रही थी, मेरी चूत में उसकी छड़ घूम रही थी।.
कुछ समय बाद मेरी चूत में जलन शुरू हो गई।.
बोल उठी मैं - आशीष को बाहर कर दे… यहाँ से निकलवा मुझे, जलन हो रही।!
उसने कहा - मुँह में डाल ले, अब मेरे हाथ से छूट चला है। पिछले दिन सेक्स की गोली खा ली थी, इसलिए शरीर तनकर रह गया है!
बोली मैंने - अच्छा, पहले गधे के मुँह से निकाल दे!
जब उसने लंड बाहर किया, तो चूत में एक अजीब सी राहत महसूस हुई।.
मुझे उसका लंड दिखा, मैं सहम गई। वो पूरा खून से तरबतर था, मेरे ही रंग का लग रहा था।.
उसका लंड नैपकिन से पोछते हुए, मैंने धीरे से मुँह में ले लिया।.
उसने कहा - बस तुम्हारे मुँह में मैं अपना लंड डाल देता हूँ… तुम बस मुँह खोलकर रख दो।.
मेरे होंठों से लेकर उसकी तेज़ियाँ चलने लगी।.
उसके लंड के नीचे टँगे दोनों अंडे धीरे से मेरे होंठों को छूने लगे।.
दवाई का असर उस पर पूरी तरह हावी हो चुका था।.
उसकी नजर मुझ पर पड़ते ही सब कुछ गायब-सा हो जाता।.
उसकी नज़रों में मैं सिर्फ इच्छा की पूर्ति का ज़रिया बनकर दिख रही थी। वह मुझे अपनी हवस का शिकार समझ रहा था, ऐसे जैसे कोई भावनाओं से खाली शरीर हो।.
थोड़ी देर तक मुँह में रखने के बाद उसने लंड को बाहर निकाला। एक तेज धमाके के साथ गर्म पानी मेरे बूब्स पर आ गिरा।.
बिना कुछ कहे वो मेरे पास जमीन पर आकर लेट गया।.
एकदम शांति मिली अब, सुन जान्हवी। वो बोला - तू कमाल है यार।!
मैं बोली- क्यों?
उसने कहा - भई, पहली बार दवा ली थी। अब लंड की नसें तन गई हैं। आज तुझे खूब दर्द हुआ… माफ़ करना।!
उसके होंठो पर चुम्मा देते हुए मैंने कहा - कोई बात नहीं, आशीष।!
उसने कहा - आज बहुत अच्छा लगा यार… तुम पर कैसा गुज़रा?
मैंने कहा - उसे भी बहुत अच्छा लगा। सिर्फ इतना है कि गांड में जलन और तकलीफ़ महसूस हो रही है।
उसने कहा - अच्छा, तुरंत दवाई लेकर आऊँगा।.
जब मैंने उनके छोड़े हुए पानी को अपने मम्मों पर देखा, तभी वह मेरे दोनों स्तनों पर वीर्य फैलाने लगा।.
अलग करते हुए मैंने कहा - वहाँ चले जाओ... अब मैं नहाने जा रही हूँ। नहाकर खाना दोनों के लिये तय है।.
उसने कहा - इतनी जल्दी नहाने क्यों भाग रही है? अभी घड़ी में सिर्फ एक बजा है। मम्मी पापा तो शाम तक पहुँचेंगे। पहले ही वक्त में नहा लेना। फिलहाल इसी तरह खुली छोड़ दे।!
मैंने कहा - ठीक है, मगर थोड़ा खाना तो खाने दो। क्या भूख से पछताओगे?
उसने हँसते हुए कहा - ठीक है, मेरी रंडी... अब तू खाना खा ल, कुतिया!
उठते वक्त ऐसा लगा, मानो सब कुछ खाली हो गया हो।.
शरीर के हर हिस्से में तकलीफ थी।.
तभी वह मुझे कमर पर बैठा चली।.
फिर वो मुझे रसोई के पास ले गया, कहने लगा - तैयार हो जाओ, भोजन शुरू करो।!
मैंने कहा - अरे, इतना गंदा महसूस हो रहा हूँ। जांघों से चूत का पानी और खून बह आया… ऊपर बूब्स और पेट पर तुम्हारा पानी फैला पड़ा है… जिसे तुमने छिड़क दिया था… अब वो सूखकर चिपक गया है। जो नहीं सूखा, वो चिपचिपा सा लगता है।.
उसने कहा - ठीक है। मैं तुम्हें नहला दूँगा। तुम्हारा शरीर भी बहुत तकलीफ झेल रहा है, है न? अच्छा, फिर मेरी गोदी में आकर बैठ जाओ।.
जब मैंने हाथ खोले, वह मुझे गोद में उठाकर स्नानकक्ष की ओर चल पड़ा।.
उस वक्त मेरे पास कुछ नहीं था, बस भाई की गोद में टिके रहने का सहारा।.
वो मुझे बाथरूम में ले गया, खड़ा कर दिया। फिर से मेरी तरफ घूमकर देखने लगा, ध्यान से।.
मैंने पूछा - क्या बात है?
उसने कहा - कुछ भी नहीं दोस्त… मैं सिर्फ तेरी ओर देख रहा हूँ।.
मैंने कहा - अब तक तूने मुझसे नफरत की तरह सलाखों में घसीटा है, कुत्ते।!
उसने हंसते हुए कहा - यार, तेरा शरीर असल में बहुत अच्छा है। तेरी मीठी आंखें, ये गुलाबी होंठ, उनके ठीक नीचे वो पतली गर्दन… फिर धीरे से नज़र जाती है तेरे दूधिया छाती के बटनों पर, जिन पर घीघे के रंग के निप्पल ऐसे टंगे हैं मानो किसी ने रंग छिड़क दिया हो। इसके बाद नज़र खिसकती है नीचे की ओर, एक गहरी नाभि दिखती है, फिर पतली कमर… और उसके नीचे!
मैंने कहा - छोड़ो अब, हाथ जोड़कर कहती हूँ। मेरा पेट सिकुड़ रहा है। इतनी देर मत करो। पहले मुझे नहला लो।!
उसने कहा - यार, इतना तो सपने में भी धुंधला विचार नहीं आया था कि एक दिन तुम्हें बिना कपड़ों के देख पाऊंगा।.
मैंने कहा - बेटा, जब तूने ऐसा कर ही लियa… फिर अब और क्या चाहिए तुझे?
उसके मुँह से निकला - तू कोई सिर्फ इस्तेमाल की वस्तु नहीं, तू उस चीज की तरह है जिसे प्यार से छुआ जाए। ऐसा लगता है जैसे तुझे निगल जाऊँ। तेरा शरीर, जैसे दूध का घड़ा, मेरे दिमाग में आग लगा रहा है।.
उसने कहा - थोड़ा सा मक्खन ही डालना… ज्यादा नहीं। सिर्फ इतना करना जितना चाहिए।.
उसने कमरे में से एक स्टूल निकाला।.
बैठकर मैं स्टूल पर आ गया।.
एकदम अचानक वो मेरे हर पैर पर साबुन को फैलाने लगा।.
हल्के हाथों से साबुन का घोल फैलाया मैंने। उँगलियों से नरमता को छेड़ा गया। त्वचा पर झाग रुक-रुककर ठहरा। गर्म पानी ने साथ दिया।.
उसने पूछा - जान्हवी, क्या तुम हाँ कहोगी मेरे साथ बंधन में बँधने के लिए?
बोली, "तुझे सनक आ गया है क्या? तू तो मेरे मामा का भतीजा है।".
उसने मेरी चूत पर साबुन लगाते हुए कहा - देख, जब तू कुछ दिन बाद वापस अपने घर जाएगी, मैं तेरे बिना क्या करूँगा।?
कहा मैंने - तुझे तो कोई है… फिर मेरा ख़याल क्यों आएगा?
उसने कहा - तुम्हारी समझ में नहीं आएगा!
सोच में पड़ी थी।.
खुद को ऐसा अहसास हो रहा था, मानो पहली बार किसी से जुड़ा हूँ। धीरे-धीरे वो मेरे करीब आने लगा।.
उसने मग से पानी डालकर मेरी जांघें साफ़ की। बाद में, चूत भी अच्छे से धुल गई।.
उसने अब खड़े होने का फैसला कर लिया।.
पानी उड़ाकर वो मेरे कंधे से लग गया, पीठ तुरंत भीग गई।.
इसके बाद साबुन को पीठ पर घिसा। कंधों पर भी फैला दिया। छाती पर हल्के हाथ से रगड़ा। पेट के ऊपर भी अच्छी तरह लगाया।.
उसने धीमे से दूध पर हाथ फेरते हुए कहा - जान्हवी, ये जो कुछ हम दोनों के बीच चल रहा है… हमारी मर्ज़ी से तय हुआ है, है न?
बोली मैं - हां, क्या बात है?
उसने पूछा - तुम घर पहुँचकर मेरे बारे में सोचना छोड़ दोगी क्या?
बस मैंने कहा, अरे नहीं।.
उसने कहा - जब भी तुम्हें सेक्स करने का मन होगा, मैं तुम्हारे घर आ पाऊँगा, है न?
हाँ, मैंने कहा - आशीष।.
उसने मेरे स्तन दबाते हुए कहा - जितना अधिकार तुझ पर तेरा है, उतना अब मेरा भी है। पूरी ज़िंदगी तुझे चोदता रहूँगा।.
हाँ भाई, अब मेरी चूत तेरी है। शादी के बाद भी तू मुझे चोद सकेगा।.
खबर सुनते ही उसके चेहरे पर खुशी आ गई, फिर वह मेरे साथ ध्यान से नहला।.
उसके बाद मैंने तौलिए से अपने शरीर को साफ़ किया।.
खाना शुरू किया, तभी पकड़ मजबूत हुई।.
दवा लेने के लिए वह घर से बाहर गए, मैंने उसे तुरंत चबा डाला।.
अब शाम हो रही थी। मामा-मामी के पहुँचने से पहले, मैं फिर से अपने कपड़े पहन चुका था।.
एक हफ्ता मैंने मामा के घर बिताया।.
कभी-कभी आशीष मुझे अजीबो-ग़रीब भूमिकाएं निभाने को कहता।.
अब मज़ा तब आता है जब वो और मैं साथ-साथ कुछ अभिनय करते।.
आशीष हर दिन उस पूरे सप्ताह मुझे जमकर चोदता रहा।.
घर पहुँच ली मैं, उसके बाद।.
उसकी छुट्टी पड़ते ही वो सीधा मेरे घर आ जाता। कई बार मैं खुद उसके घर पहुँच जाती।.
कभी-कभी मुलाक़ात हो जाती, कहीं रिश्तेदार की शादी या किसी और इवेंट में। फिर संधि भरे पलों का फायदा उठा लेते, गपशप के बहाने करीब आ जाते।.
कभी-कभी ऐसा लगता है, जैसे हम दोनों सिर्फ़ पड़ोसी नहीं, बल्कि परिवार में एक दूसरे के सबसे करीब हैं।.
कितने-कितने अंदाज़ में मैंने उसके साथ वो सब कुछ किया होगा, जहाँ कोई दरवाज़े के बाहर खड़ा हो।.
उस पर शक करना हमें मुश्किल था, वो मेरे मामा का बेटा था।.
उम्र के हिसाब से भी बराबरी थी, तो मज़ाक उड़ाना आम बात रहती।.
दोनों की शादी हो गई है, मेरी भी और उसकी भी।.
एक बार जब किसी ने तुम्हारी सील तोड़ दी हो। या फिर तुमने किसी की। वो चेहरा याद रहता है।.
अभी भी जब भी संधि मिलती है, वो किसी भी जगह बिना रुकावट मेरे साथ सेक्स कर लेता है। मैं भी अपने पहले प्रेमी के साथ खुशी-खुशी ये कर लेती हूँ।.
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