जिम में एक सहेली के साथ भाभी का पति मिला

Jan 21, 2026 - 11:20
Feb 5, 2026 - 17:10
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जिम में एक सहेली के साथ भाभी का पति मिला

लखनऊ, यूपी में  जन  ा। उम एकबीस ाल की है मेरी।  छह ्‍ फुट है।  ें ेंदब़ी और ्रिबलिं के बा शर  हो गय ै। फरूखाबाद में कोचिंग ्ला इन ी है मैंने। एक कमरा  वहीं किरा पर मि गया। इधर आए ो महीने े हो गए हैं।.

ीस दिन पहले की  ै। पढ़ाई खत करके, कोचिंग  िकलने के बाद ैं फिटनेस सेंटर े का वक निकाल लेता हूँ। शाम के उस वक वहाँ कई लड़कियाँ, आंटियाँ भी पहुँ ी थीं। शुरू में कुछ दिन तक मेरा ध्यान सिर्फ वरकआउट पर रहता था। एक्सरसाइज खत होते ही मैं कमरे में चला जाता था।.

़े दिन बाद एक अलग ी फिटनेस सेंटर में आई उनकी शादी  ुकी थी, मगर ां ऐस ि देखत  ि भड़क जा। जैसे ि िो में   शरीर, सही-सही।  उनक ऊजल ा, पंजाब  तरह  महक लि ।.

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़े ि पहले ही ो फिटनेस सेंटर आई थी। मैं अपनी वरकआउट ें ा था, तभ उनोंे पास में जगह  ी। नई   रण उनक गतििि ठीक से नहीं चल पा रही थी। डम्बल उठा समय उनक पकड गलत थी। मदद करने का मन हु,   दिया - यह तरीका सह नहीं है।.

मैंने भाभी को समझाया, कसरत करन  सह तरा।

मुस् ़कर उसन धनयवाद  दिा। उस पल तक मेरे दर को खलबली नहीं थी।.

अगली सुबह  ि मे बहन िम में आकर टकरं। उनक ोंों पर एक ुंधल ुस्का थी, बस इतना कहा – नमस्ते। मैंने िर् इतन जव दिया – अचा,   यहाँ।.

अब मैं   िा, तभ पड़ो े भाभी   अपन ी- हलचल चल ुरू कर ी।.

उसने मेे पा खड़े ोकर ा - अभ ऐस  ो रहा है?

कभी मैं  कह देता -  है, इस तरह करना। कई  ि े नहीं।.

 िलसिा दो- िन ऐस ी चलता रहा। जब ी फिटनेस सेंटर  िकलता, अक्सर एक ास जूस पी लेा।   ुका े फिटनेस सेंटर के  बगल में है। इसलि तर सदस्य वहीं ककर    ऑरडर कर ेते।.

कसरत खत्म करक ैं रो़ की तरह जूस पी रहा था। अचनक फिटनेस सेंटर ी भाभी वहाँ आ गईं, ूस के ि झसे हैलो कहत   िा। उन्होंने भी मुस्ुराकर जव दिया,  े।.

उसक  ुँह  ो ने। ैं ूँ पूनम, ा।.

मे  आई, तब ैंने  े अपना नाम कहा। ि  ें जूस  ि िा।

फिर ैंे भाभी से नन  ि ो कहाँ कती हैं।?

रहन  जगह उन्होंने आवास विकास में बत।.

अचनक बस इतना कह दिया - भाभी, आपको फिटनेस सेंटर तक े की हलचल क्यों? आप तो पहले से ही कम के फिट लगती हो।.

उस पर ो हँस पड़ीं - घर पर  समय  रहती हूँ, तो कभी-कभी निकल पड ूँ फिटनेस सेंटर चलने। ़ी देर ें जूस पीना खत्म हो गया, और मैंने अलवि कहा, िर चल आया। अपन कमरे में पस पहुँ गया। उस दिन मन बहुत हल महस ो रहा था। िर में भाभी की मुस् घूम रही थी, -।.

पढ़ि यह भी: अब मैं  बह फिटनेस सेंटर में  करत ुए भाभी की सहयता करने लगा।  समय ाद, ें आग बढ़ीं    गई। नंबर आद-रद कर लिए  ोनों े। उनके परि के बारे में जानक े की ि अभ तक नहीं ी थी ैंे।.

एक  ो पूनम भाभी के ़ो पर मैसेज  गया।.

पहले मैंने जव ाँा - अब  बत, क्या  है?

ि उन्हों कहा - बस इसलि सं ेजा, कि लगार ऊब महस हो रही थी।.

उसने पूछा - क्या  इतन समय िकालत ैं कि ्हें उद महस न हो?

कहा  उसने - दिल्ली े लिए िकल पड़े हैं,  समय े लि पन महस हो रहा था, रद ें तनह े-े।.

उससे पूछ िया - े घर में कोई और ों नहीं रहता?

घर ें अभी सिर्फ सास रहती हैं, ोंि ससुर की  कई साल पहले हो गई ी।

लैपटॉप पर पोर्न चल रहा था, तभ ी का मै  गया। शर ें बह  था उस समय।.

भाभी ने पूछ िा - तुम अभी क्या  रहे हो?

मैंने ि इतना कहा, मूवी चल रही थी।.

पूछ िा - कौन सी?

ि मन में ्याल आया - अब  कहूँा।.

अचनक सं आया। क्या  पोर्न देख रहे हो?

मैंने कहा- हां.

फिर उसन कहा - अब  िझक क्यों? सीधे  बत ो… मैं तुम्हारी  हूँ।.

उसक  मैंने पूछ ा - आपके पति के साथ ़िंदगी कैसे  रही है?

आज उनकी ओर े मैसेज आया - ठीक है। पर उनक  इतना का रहता है ि मुझे बहुत कम वक्त िलता है।.

इसक  भाभी ने पूछा ि लड   अब  चल रह ै। मैंने कह िया, रि  गया है। अब  सा नहीं है।.

 मन कभी उसके साथ िक सं बन, इतन उसन  िया।?

कह ा मैंने - हां, कभी-कभी। पर उसक हर बार डर लगत ा सेक्स  वक।.

़ी देर तक बातें चलती रहीं। ी ने अचनक कहा - उदय, कल सुबह आकर मेरे घर से ले ाना, िटन ेंटर  ै। .

खुशी-खुशी मैंने ां कह ी, ि  ाम… बस, भाभी  ारे में लगार  आत रहे।  ें ें  ीं तो उनका हर रन लगा, मन ि ि  सोचे आग बढ ं।.

शाम को जब ैं उनक घर पहुंचा, तब वो सा़ी पहने हु थीं।.

ा मैंने कहा  ि फिटनेस सेंटर नहीं जा

 ी, मैंे सास को पड़ोस में रि के घर कार से छोड़ा, इसलि थोड़ी  हो गई। बैठो, अभी िकलते हैं। मैंने हामी ें िर हिा, कहा - आप  ो जा, ैं यहीं ठहर ुआ ूँ।.

अचनक ो मे  तर ीं गई। बैठन ो कहा, ि ीमे े बोी - ़ी  में मिलती हूँ, कोक लेकर आऊी। तुम पीते रहना, ैं इधर ही ूँ।.

ठत ी मैं सोफे पर आर करन लगा।   ि पूनम भाभी उठ खड़ी ं।.

़ी दे ें भाभी आईं। खुद ो तैयार करने की  कहकर े अपने कमर  ओर चली गईं। ो मिनट े बाद वो ट्रेक सूट में नज आईं। हल्का ां   ्या  थी। उनकी ी टी-शर्ट पर इतन तन  रही थी,   ी।.

ें वहीं जड़ी रह गई

ि भाभी  ा - क्या  है, कहीं को िक्कत  नहीं?

बस मैंने कहा – अरे नहीं भाभी…  बह बसरत ि रही हो।.

एक शररत भरी मुस् ़कर े मेरे पास आकर बैठ गईं। जैसे  उनों  पहने, उनक शर मे पर में आया। उनकी खुशबू े-े मे ि पर   लगी।

एकदम अचनक मेरा लं ंड ा हो उठा, ि मैंने  हाथ से उस सही किया।.

तभी भाभी  नज पड गई उनोंने ा, ये क्या ो रहा है?

मैंने आव बढ़ाकर कहा - लंड ऊपर उठ ा है, ा कर रहा हूँ।.

हंसते हु ीं, ि  ो छिपाने की आवशयकता नहीं।

उसन कह और  अपना हाथ मेरे लिं पर रख दिया। इतनी जल्दी  होा, ऐस ैंने कभी सोचा नहीं था।  तरह तब रह गया ैं। भाभी के   की इचा मेरे दर घर कर ी थी। मैंने  े उनके हाथ पर हाथ रख दिया। उनकी आंखों में काकत  झलक दिखने लगी। समझ आ गया  े - आज यहीं  म’ होने वाला है। मैंने पच उनक ओर नज़र से इश िा।.

ि ो मे े लिपट गई और ी - मैं तु   करना चाहती थी। इसि आज तुम्ें घर बुलाया है। पय अभी मेरी तड़प ां कर दो। मेरा पति मुझे कभी खुश नहीं कर पाता है।.

मैंने  ही कदम बढ़ाा, ि भाभी के होंठों पर मे ों  गए उनक ऐस लग रह ा, ानो मेरे चुम्बन की तल ें थीं। अब दोनों   सब  टूटन लगा। होंठों े सा होंठ ़ गए, एक दूसरे में  गए इस तरह हम ां िनट तक चुम्बन करते रहे। उधर भाभी ने ी से मेरी पैन्ट की जिप उत दी। ि मेरा लंड  ें आया, े-े आगे-पीछे े लगा।   उनोंे मेरे बड़े और खड़े लंड को , उनक दर की आग जल उठी। वे ीं - आज तुें सेक्स का असली ाद चखँगी।.

़ु  एहस तब , जब मैंे भाभी के ास ठकर गपें ी।.

 पर भाभी को लिटा  ैंे उनका ट्रेक सूट   े उतार दिया। ि मैंने उनके चुचों पर ुँ लगकर चूसना  कर िा, बड़े  े।  छटपट  ‘उम्म्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… आःह्ह’ दबा रही थीं।.

उसकी पैंटी ीरे  े की, ि   तरह िना कपड़ों के रह गई ों  मने गुलाबी चमक देखकर लार हर  गई ी… वहाँ पर कहीं भी  बाल नजर नहीं आया। मक्खन ैसी नरम, गुलाबी जगह देखकर िमा िगड़ गया। रुक ाना ि ो गया। एकदम े मैंने अपनी जीभ उस तंग जगह में  दी।.

भाभी को मज़ा  गया। मैं उनक  को ुत्ते की तरह चाटना  कर िा। वो अपनी टांगें ैला, ‘उम्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊऊह …’ की वनि निकाल रही थीं। ़ी देर में उनकी चूत नम  गई, पानी बह निकला। मैं उस नमी का सारा रस  िा। ि भाभी की  आई उनोंे मेरे लंड को रंडी की तरह चूसना  कर िा। मुझे लगा, मा वर में हूँ। पांच मिनट बाद मैं उनके मुँह में उतर गया, और वो मेरा सारा  िगल गईं। .

पढ़ें यह भी:  देर तक हम बस इस तरह एक-दूसरे को चाहते रहे। िर मन मचल उठा। मैंने लंड ो उनकी चूत के पास ले कर टांगें ऊपर उठा ीं।   ंदर  िा।.

थोड़ा सि ंदर गया था कि वो ची पड़ी – "आय याय ओह... बस!" ैंने उस आव  नजरअंदा कर िया। धक और लगाा। पूरे जो   6.4 इंच कु तर ा दिया। एकदम तेज़ चीख  गई उनकी। आँखों से ़ा ा पानी भी  गया था।.

उसक ोंों पर मेा मुँ  गया, ि तन  हथ   िा।.

दर्द कम हो ी वो खुद-- हिलने लगीं। मैंने ेजी  चढ़ा भर िा, ीरे-ीरे ते चुदाई ें बदल गया। उठते-ठते दो बार  लय ें  चुकी थीं। मैंने रफार नहीं घट रह मिनट बाद मेा भी समय  गया, मैं उनके ंदर ही उतर गया। ऊपर लेट  पर भाभी  हर पर खुशी छलक रही थी। आंखों से आंसू बह निकले। हम ों फिर े एक-दूसरे को  समय तक चूमन लगे। उन्होंने कहा - इतनी ी चुदाई पहल कभी नहीं हुई, न ही  े इतना ंदर तक ाने का एहसास ।.

उस ि मैंने बस इतना कहा - अगल  मैं और भी हतर करूँगा। पहली बार   रण जल्दब  गई थी। ि मैंने भाभी के ों  , ीरे से। बाें ुरू  गईं, एक  ि करने की ओर।.

ि भाभी ी - आज ो नहीं  एगा, सास को उठाने जाना है।.

तब हम  कपड़े पहनन लगे। मैंे भाभी को बाइक पर ा, आग बढ़ दि उस दिन फिटनेस सेंटर  जगह हमने जूस पी  सवी की। ़ी देर ऐस ी घूमते रहे। फिर मैंने उनें घर   उत दिया। वे वहीं े कार कर सास को लेने चली गईं। .

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