जिम में एक सहेली के साथ भाभी का पति मिला
लखनऊ, यूपी में मेरा जन्म हुआ था। उम्र एकबीस साल की है मेरी। लंबाई छह पौव्याई फुट है। मैदान में गेंदबाज़ी और ड्रिबलिंग के बाद शरीर तंग हो गया है। फरूखाबाद में कोचिंग क्लास जॉइन की है मैंने। एक कमरा भी वहीं किराए पर मिल गया। इधर आए दो महीने पूरे हो गए हैं।.
बीस दिन पहले की बात है। पढ़ाई खत्म करके, कोचिंग से निकलने के बाद मैं फिटनेस सेंटर जाने का वक्त निकाल लेता हूँ। शाम के उस वक्त वहाँ कई लड़कियाँ, आंटियाँ भी पहुँच जाती थीं। शुरू में कुछ दिन तक मेरा ध्यान सिर्फ वर्कआउट पर रहता था। एक्सरसाइज खत्म होते ही मैं कमरे में चला जाता था।.
थोड़े दिन बाद एक अलग भाभी फिटनेस सेंटर में आई। उनकी शादी हो चुकी थी, मगर ढांचा ऐसा कि देखते ही दिमाग भड़क जाए। जैसे किसी वीडियो में देखा हुआ शरीर, सही-सही। रंग उनका ऊजला था, पंजाब की तरह की महक लिए हुए।.
थोड़े दिन पहले ही वो फिटनेस सेंटर आई थी। मैं अपनी वर्कआउट में जुटा था, तभी उन्होंने पास में जगह ले ली। नई होने के कारण उनकी गतिविधि ठीक से नहीं चल पा रही थी। डम्बल उठाते समय उनकी पकड़ गलत थी। मदद करने का मन हुआ, तो बोल दिया - यह तरीका सही नहीं है।.
मैंने भाभी को समझाया, कसरत करने का सही तरीका।
मुस्कान छोड़कर उसने धन्यवाद बोल दिया। उस पल तक मेरे अंदर कोई खलबली नहीं थी।.
अगली सुबह वो फिर मेरी बहनोई जिम में आकर टकराईं। उनके होंठों पर एक धुंधली मुस्कान थी, बस इतना कहा – नमस्ते। मैंने सिर्फ इतना जवाब दिया – अच्छा, तुम भी यहाँ।.
अब मैंने व्यायाम शुरू किया, तभी पड़ोस से भाभी ने भी अपनी छोटी-सी हलचल चलानी शुरू कर दी।.
उसने मेरे पास खड़े होकर पूछा - अभ्यास ऐसे ही हो रहा है?
कभी मैं सीधा कह देता - ठीक है, इस तरह करना। कई बार फिर वैसे नहीं।.
ये सिलसिला दो-चार दिन ऐसे ही चलता रहा। जब भी फिटनेस सेंटर से निकलता, अक्सर एक ग्लास जूस पी लेता। वो छोटी दुकान सीधे फिटनेस सेंटर के ठीक बगल में है। इसलिए ज्यादातर सदस्य वहीं रुककर कुछ न कुछ ऑर्डर कर लेते।.
कसरत खत्म करके मैं रोज़ की तरह जूस पी रहा था। अचानक फिटनेस सेंटर की भाभी वहाँ आ गईं, जूस के लिए। मुझसे हैलो कहते हुए मुस्कुरा दिया। उन्होंने भी मुस्कुराकर जवाब दिया, धीमे से।.
उसके बाद मुँह खोला वो ने। मैं हूँ पूनम, सुनाया।.
मेरी बारी आई, तब मैंने धीरे से अपना नाम कहा। फिर हाथ में जूस का गिलास लिया।
फिर मैंने भाभी से जानना चाहा कि वो कहाँ रुकती हैं।?
रहने की जगह उन्होंने आवास विकास में बताई।.
अचानक बस इतना कह दिया - भाभी, आपको फिटनेस सेंटर तक जाने की हलचल क्यों? आप तो पहले से ही कमाल के फिट लगती हो।.
उस पर वो हँस पड़ीं - घर पर ज्यादा समय खाली रहती हूँ, तो कभी-कभी निकल पड़ती हूँ फिटनेस सेंटर चलने। थोड़ी देर में जूस पीना खत्म हो गया, और मैंने अलविदा कहा, फिर चला आया। अपने कमरे में वापस पहुँच गया। उस दिन मन बहुत हल्का महसूस हो रहा था। सिर में भाभी की मुस्कान घूम रही थी, बार-बार।.
पढ़िए यह भी: अब मैं रोज सुबह फिटनेस सेंटर में व्यायाम करते हुए भाभी की सहायता करने लगा। कुछ समय बाद, बातें आगे बढ़ीं तो दोस्ती हो गई। नंबर आदान-प्रदान कर लिए थे दोनों ने। उनके परिवार के बारे में जानकारी लेने की कोशिश अभी तक नहीं की थी मैंने।.
एक शाम को पूनम भाभी के फ़ोन पर मैसेज आ गया।.
पहले मैंने जवाब माँगा - अब तो बताओ, क्या बात है?
फिर उन्होंने कहा - बस इसलिए संदेश भेजा, कि लगातार ऊब महसूस हो रही थी।.
उसने पूछा - क्या वो इतना समय निकालते हैं कि तुम्हें उदासी महसूस न हो?
कहा था उसने - दिल्ली के लिए निकल पड़े हैं, कुछ समय के लिए। खालीपन महसूस हो रहा था, चारदीवारी में तनहा बैठे-बैठे।.
उससे पूछ लिया - तुम्हारे घर में कोई और क्यों नहीं रहता?
घर में अभी सिर्फ सास रहती हैं, क्योंकि ससुर की मृत्यु कई साल पहले हो गई थी।
लैपटॉप पर पोर्न चल रहा था, तभी भाभी का मैसेज आ गया। शरीर में बहुत ताप था उस समय।.
भाभी ने पूछ लिया - तुम अभी क्या सोच रहे हो?
मैंने सिर्फ इतना कहा, मूवी चल रही थी।.
पूछ लिया - कौन सी?
फिर मन में ख्याल आया - अब क्या कहूँगा।.
अचानक संदेश आया। क्या तुम पोर्न देख रहे हो?
मैंने कहा- हां.
फिर उसने कहा - अब तो झिझक क्यों? सीधे सीधे बता दो… मैं तुम्हारी दोस्त हूँ।.
उसके बाद मैंने पूछ डाला - आपके पति के साथ ज़िंदगी कैसे गुज़र रही है?
आज उनकी ओर से मैसेज आया - ठीक है। पर उनके पास इतना काम रहता है कि मुझे बहुत कम वक्त मिलता है।.
इसके बाद भाभी ने पूछा कि लड़की के साथ अब क्या चल रहा है। मैंने कह दिया, रिश्ता टूट गया है। अब कोई साथ नहीं है।.
क्या तुमने कभी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, इतना उसने पूछ लिया।?
कहा था मैंने - हां, कभी-कभी। पर उसका हर बार डर लगता था सेक्स के वक्त।.
थोड़ी देर तक बातें चलती रहीं। भाभी ने अचानक कहा - उदय, कल सुबह आकर मेरे घर से ले जाना, फिटनेस सेंटर जाना है। .
खुशी-खुशी मैंने हां कह दी, फिर वो शाम… बस, भाभी के बारे में लगातार ख्याल आते रहे। अँधेरे में आँखें बंद कीं तो उनका चेहरा तैरने लगा, मन किया बिना कुछ सोचे आगे बढ़ जाऊं।.
शाम को जब मैं उनके घर पहुंचा, तब वो साड़ी पहने हुए थीं।.
क्या मैंने कहा था कि फिटनेस सेंटर नहीं जाऊँगा
वो बोली, मैंने सास को पड़ोस में रिश्तेदार के घर कार से छोड़ा, इसलिए थोड़ी देर हो गई। बैठो, अभी निकलते हैं। मैंने हामी में सिर हिलाया, कहा - आप तैयार हो जाओ, मैं यहीं ठहरा हुआ हूँ।.
अचानक वो मेरे साथ भीतर खींच गई। बैठने को कहा, फिर धीमे से बोली - थोड़ी देर में मिलती हूँ, कोक लेकर आऊँगी। तुम पीते रहना, मैं इधर ही हूँ।.
बैठते ही मैं सोफे पर आराम करने लगा। कोक के लिए पूनम भाभी उठ खड़ी हुईं।.
थोड़ी देर में भाभी आईं। खुद को तैयार करने की बात कहकर सीधे अपने कमरे की ओर चली गईं। दो मिनट के बाद वो ट्रेक सूट में नज़र आईं। हल्का सांस लेते हुए… क्या बात थी। उनकी छाती टी-शर्ट पर इतनी तनाव डाल रही थी, मानो फाड़ देगी।.
आँखें वहीं जड़ी रह गई।
फिर भाभी ने पूछा - क्या बात है, कहीं कोई दिक्कत तो नहीं?
बस मैंने कहा – अरे नहीं भाभी… तुम बहुत खूबसूरत दिख रही हो।.
एक शरारत भरी मुस्कान छोड़कर वे मेरे पास आकर बैठ गईं। जैसे ही उन्होंने जूते पहने, उनका शरीर मेरे संपर्क में आया। उनकी खुशबू धीरे-धीरे मेरे दिमाग पर हावी होने लगी।
एकदम अचानक मेरा लंबा लंड सीधा हो उठा, फिर मैंने तुरंत हाथ से उसे सही किया।.
तभी भाभी की नज़र पड़ गई। उन्होंने पूछा, ये क्या हो रहा है?
मैंने आवाज़ बढ़ाकर कहा - लंड ऊपर उठ चुका है, सीधा कर रहा हूँ।.
हंसते हुए बोलीं, किसी चीज़ को छिपाने की आवश्यकता नहीं।
उसने कहा और तुरंत अपना हाथ मेरे लिंग पर रख दिया। इतनी जल्दी कुछ होगा, ऐसा मैंने कभी सोचा नहीं था। पूरी तरह स्तब्ध रह गया मैं। भाभी के साथ संभोग की इच्छा मेरे अंदर घर कर चुकी थी। मैंने धीरे से उनके हाथ पर हाथ रख दिया। उनकी आंखों में कामुकता की झलक दिखने लगी। समझ आ गया था मुझे - आज यहीं कुछ ‘व्यायाम’ होने वाला है। मैंने चुपचाप उनकी ओर नज़र से इशारा किया।.
फिर वो मेरे से लिपट गई और बोली - मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती थी। इसीलिए आज तुम्हें घर बुलाया है। कृपया अभी मेरी तड़प शांत कर दो। मेरा पति मुझे कभी खुश नहीं कर पाता है।.
मैंने खुद ही कदम बढ़ाया, फिर भाभी के होंठों पर मेरे होंठ आ गए। उनका ऐसा लग रहा था, मानो मेरे चुम्बन की तलाश में थीं। अब दोनों के बीच सब कुछ टूटने लगा। होंठों के साथ होंठ जुड़ गए, एक दूसरे में खो गए। इस तरह हम पांच मिनट तक चुम्बन करते रहे। उधर भाभी ने तेजी से मेरी पैन्ट की जिप उतार दी। फिर मेरा लंड हाथ में आया, धीरे-धीरे आगे-पीछे होने लगा। जैसे ही उन्होंने मेरे बड़े और खड़े लंड को छुआ, उनके अंदर की आग जल उठी। वे बोलीं - आज तुम्हें सेक्स का असली स्वाद चखाऊँगी।.
ख़ुशी का एहसास तब हुआ, जब मैंने भाभी के पास बैठकर गप्पें मारी।.
सोफे पर भाभी को लिटाते हुए मैंने उनका ट्रेक सूट धीरे से नीचे उतार दिया। फिर मैंने उनके चुचों पर मुँह लगाकर चूसना शुरू कर दिया, बड़े जोर से। वो छटपटाते हुए ‘उम्म्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… आःह्ह’ बुदबुदा रही थीं।.
उसकी पैंटी धीरे से नीचे की, फिर वो पूरी तरह बिना कपड़ों के रह गई। आंखों के सामने गुलाबी चमक देखकर लार बाहर आ गई मेरी… वहाँ पर कहीं भी कोई बाल नजर नहीं आया। मक्खन जैसी नरम, गुलाबी जगह देखकर दिमाग बिगड़ गया। रुक पाना मुश्किल हो गया। एकदम से मैंने अपनी जीभ उस तंग जगह में डाल दी।.
भाभी को मज़ा आ गया। मैंने उनकी चूत को कुत्ते की तरह चाटना शुरू कर दिया। वो अपनी टांगें फैलाए, ‘उम्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊऊह …’ की ध्वनि निकाल रही थीं। थोड़ी देर में उनकी चूत नम हो गई, पानी बह निकला। मैंने उस नमी का सारा रस चूस लिया। फिर भाभी की बारी आई। उन्होंने मेरे लंड को रंडी की तरह चूसना शुरू कर दिया। मुझे लगा, मानो स्वर्ग में हूँ। पांच मिनट बाद मैं उनके मुँह में उतर गया, और वो मेरा सारा शीश निगल गईं। .
पढ़ें यह भी: कुछ देर तक हम बस इसी तरह एक-दूसरे को चाहते रहे। फिर मन मचल उठा। मैंने लंड को उनकी चूत के पास ले जाकर टांगें ऊपर उठा दीं। धीरे से अंदर घुसा दिया।.
थोड़ा सिर्फ अंदर गया था कि वो चीख पड़ी – "आय याय ओह... बस!" मैंने उस आवाज़ को नज़रअंदाज़ कर दिया। धक्का और लगाया। पूरे जोश के साथ 6.4 इंच कुछ भीतर घुसा दिया। एकदम तेज़ चीख छूट गई उनकी। आँखों से थोड़ा सा पानी भी आ गया था।.
उसके होंठों पर मेरा मुँह आ गया, फिर स्तन को हथेली से छू दिया।.
दर्द कम होते ही वो खुद-ब-खुद हिलने लगीं। मैंने तेजी से चढ़ाव भर दिया, धीरे-धीरे तेज चुदाई में बदल गया। उठते-बैठते दो बार वो लय में आ चुकी थीं। मैंने रफ्तार नहीं घटाई। पंद्रह मिनट बाद मेरा भी समय आ गया, मैं उनके अंदर ही उतर गया। ऊपर लेट जाने पर भाभी के चेहरे पर खुशी छलक रही थी। आंखों से आंसू बह निकले। हम दोनों फिर से एक-दूसरे को लंबे समय तक चूमने लगे। उन्होंने कहा - इतनी लंबी चुदाई पहले कभी नहीं हुई, न ही लंड के इतना अंदर तक जाने का एहसास हुआ।.
उस दिन मैंने बस इतना कहा - अगली बार मैं और भी बेहतर करूँगा। पहली बार होने के कारण जल्दबाजी हो गई थी। फिर मैंने भाभी के होठों को छुआ, धीरे से। बातें शुरू हो गईं, एक बार फिर करने की ओर।.
फिर भाभी बोली - आज तो नहीं हो पाएगा, सास को उठाने जाना है।.
तब हम तुरंत कपड़े पहनने लगे। मैंने भाभी को बाइक पर बैठाया, आगे बढ़ दिए। उस दिन फिटनेस सेंटर की जगह हमने जूस पीते हुए सवारी की। थोड़ी देर ऐसे ही घूमते रहे। फिर मैंने उन्हें घर के पास उतार दिया। वे वहीं से कार लेकर सास को लेने चली गईं। .
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