मैं चोदा एक कुंवारी नई शादी सुदा भाभी

Jan 10, 2026 - 11:45
Jan 13, 2026 - 19:49
 0  14
मैं चोदा एक कुंवारी नई शादी सुदा भाभी

अर ,  दि पहल एक बहुत ुराे दोस्त की शादी हुई। मैं घर के ों  ाथ रह रह ा, तब ऐसे ही मौका िल गया। एक अभी-अभ ादी लड़की े सा तच हु। कैसे  आग बढ़ी, नन  ि कहानी पढ़ो।.

एक दस  पुरा ात ै। मेरा परिवार इंदौर का है, ांि। उस वक मुझे छिंदवाड़ा में एक ा कंपनी में  मिली थी। घर बन ा वहीं पर, किराए के मक में। हर मह  दिन बालाघाट,  दिन सिवनी के ौरे पड े। पैसे कम मिलते थे कंपनी से, टल ठहरन  ि इसलि मैं कत  ुकेश कुमार के घर ें।   रग रिेंि ा, सर पन ें। बालाघाट में ैनात, असल में दरभा, िार  रहन ा। जब वो छिंदवाड़ा आता, तो ठहरता मेरे घर ें। का करते थे अकसर एक बाइक पर दोनों। खर्च कम ो जाता था ऐस ें।.

GIF makeout, wow, three, best animated GIFs free download

एक साल ऐस   गया। फिर एक बह उसने बता - अब शादी करन  रहा हूँ, इसलिए बड़ा फ्लैट ाहि, क्योंकि यहाँ सभी के ि नह और   जगह एक ी थी।.

उसने ि एक ुराे परिवार  घर  िा, जिनके सब बच अब बैंगलोर में बस ुके े।.

शाी में   मन ा, पर ूरी  ोक दिया। दरभंगा इतना दूर था कि पहुँ  सका, मीटिंग  उस हफ ी। खैर, ुके  ि  सब समेट िा – शादी, हनीमून, सब  े निपटाा। वो अपनी ी के साथ बालघाट  आए े, ि रह ि में। अगले टूर पर बालाघाट पहुँा तो होटल में ठहर गया। शाम ढलत ी मुकेश के घर  ओर चल पड़ा।.

उसकी पत्नी िशा  बसरत ी, गोरी, लगभग 34-24-34 के आक के  हर कोई पहली झलक में उस पर ोहि हो जाता। मैंने मुकेश और निशा को शादी में न आने के ि मा़ी ाँी। ि उपहार के  पर उनें घड़िों  एक सेट दे िया।.

आज पहल  मुकेश ने निशा  कहा कि बालाघाट ें होटल में ठहरा है। अब तक वो हमा मेरे साथ रह करता था।

बस छूटते ही ैंे कह िा - हाँ भाभीजी, आपके मुकेश जी पहले आपस कम कर इस ानी के साथ रात िा करते थे।.

अचनक निशा भाभी  हर पर झलक गई ी। ंसी आग बढ गई, ो कु ि ो।

भाभी ने रात े खाने पर रोक लिया। ि उन दोनों के साथ हँसते-ुस्कु  ा।  ी मैं होटल टन चला, मुकेश बाइक से पहुँ गया। वह े छोे आया ा। होटल में वह े साथ कमरे तक ी आया।.

चेहरे पर  ि ी, मन ें आया - यद कुछ कहने ा है।.

तब हम दोनों कमरे में कर बै गए,    गया।

मुकेश ने  े कहा, "यार, 15 दिन से ऊपर हो े हैं   ... ि ी निशा के साथ ैं अभी तक  कदम नहीं उठाया।".

मैंने  े पूछ िा - भाभी को देखकर तो मुझे कुछ अज नहीं लगा।  ी, तुममें कोई बदल ि नहीं रहा।!

मुकेश े शरीर पर जबड़े तक ांसपिाँ  िखती थीं।.

दुख े सा  ा - प्रॉब्लम मेरे दर ही है। पेनिस ीला पड ा है, ऊपर नहीं उठता।.

मैंने उससे कहा, ार मत मा ़ार में ऐस  े लिए दवा उपलब है।

मुकेश ा, "दवाइयाँ  ीं, पर कुछ असर नहीं हुआ। पिछले सप्ताह पटना के एक े-े डॉक्टर के  गया था। उसने सीे कह दिया - पिता बनन ें  िकत नहीं, पर बीवी को आन नहीं दे ओगे।" ़ी ेर रुककर, उसन अपने दोस्त की पसा व्हिस्की मँगवाई। िर  वर ें ा - "चलो, घटनं को लने के लि ़ा  ेते हैं।" .

 ो दो पैग के बाद भी उदासी ूती रही। ाँि, आमत पर वो  से अधि नहीं पीता था।.

उस दिन    छह बज  पहल ी पां गि ें शर खत कर  ा।.

उधर उसने दुखी होकर कहा - अजय, भई,  सब तू ही सम सकता है।.

ुमाकर  पड़ा – , मैं कि हक की जगह  नहीं सकता।.

ि उसन कहा - , पहले े बता े कि निशा े कैसी लगती है।?

ि बसरत लग रह ै, मैंने कहा।

ि उसने हंसत  ा - क्या ुम्ें   ि नहीं दे रहा?

ि मैंने कहा - अरे, इतन शर पीकर धब  ा है ा।.

मुकेश  कहा, अगर े बहकना है तो ़ दो।  मेरी बात… तू मेरा कई बातों  ाथी रह ै, इस बात को भी तू पच दफन े। तू निशा के साथ  एगा तो उसकी तलब घट जाएगी। बच्चे की ात आएग ो मैं स्पर्म कर टेस्ट ट्यूब से बाप बन जाऊँगा। किसी को  पता नहीं चलेगा।  ी तेरे साथ सं बने के बाद निशा मुझे नामर् कहकर खुद को बदन करवाने की हिम्मत नहीं करेगी। मैंने का चकर तुझे े करने के लि कहा है।.

ि मैंने ा -  ा अगर निशा भाभी मेरे साथ सेक्स  करना ाहें?

मुकेश ा - ू कोशिश करने से पहले ही घबरा क्यों ाता है? ैं   हूँ । आज उसकी चप से टक पका है… इस ात  अपन   जश मनाएगा।.

 खत्म े के  ेश ने ि े दो चढ़ाए।.

मुकेश  लत ऐस नहीं  ि ो अपनी बाइक चलाकर घर जा सके। मैं उसे पीछे बैठाकर उसके घर पहुँ गया। दरव़ा निशा भाभी ने खोला। वो 2 पीस गाउन में थीं, उनक ुक  आकरषक था।.

उस वक मैंने कहा – भाभी, मुकेश  ़ा ज्यादा शर पी ली, इसिए िर   पड़ा। अब आप इसक खभाल कर िएगा।.

ि निशा भाभी  कहा - पया इन्हें बितर तक पहुँा दो। ये मे बस   नहीं रही। मैं मुकेश को  लेकर उसके कमरे तक चल पड़ा।  िलकुल थककर ेहो   ा।.

निशा भाभी ने उसके जूते-कपड़े बदलव ि ऐस लग रह ा, ानो पत ाज-धज कर रखे हो। ि मैं दूसरे कमरे में चला गया। डर ें वापसी , तभ नज पड़ी - नि ी मुकेश के िं   ें ि ि रह ी, जब ैं उसकी बाइक की चाबी लेने के लिए कमरे में प्रव किा। .

पलटकर ा मैं - अब कुछ नहीं िगड़ सकता। मुकेश ने सब   दिा है, चाहेंी तो मदद करूंा।.

निशा भाभी  मन में डर सम गया। उनके होों  िकला - अगर   पति  पता चली, तो ो मुझे ़ देंगे।.

मैंने कहा, मुकेश  ने कह  ि ुम्े साथ सेक्स कर ूँ। ेकि हौसला नहीं ा पा रहा था ैं। अगर ्हें लगे तो मुकेश को जगाकर पूछ ा। उधर तक मैं बाहर  कमरे में झपकी ले ूँगा।.

दरव़े पर  लग  भाभी बोलीं - यहाँ बस एक ही बितर है। आप मुकेश जी के उधर ी तरफ  जाइए, मैं इधर वाी। अगल कदम के  ें सुबह उनस  करक सल करेंगे।.

तीनों ो एक  बिस्तर पर आर िा।

थोड़ी देर  निशा भाभी े लाइट बुा दी, सो गई। मैं मुकेश के दूसरी तरफ लेा, गत रहा, उसके उठने का इंतजार करत । चाँद की रोशनी ि  दर  रह ी, उसमें निशा भाभी का शरीर किसी ि अभि्री ैसा लग रहा ा। ेरा िं खड़ा हो गया, ऐस लग  इस वस्था को मैं  ा। तभी निशा भाभी ने अपन ोजीशन बदली, अब उनकी बैंगन ्रा साफ झलकने लगी।.

सहनशलत  हद ार  ुकी थी। मैंे मुकेश को ़ बीच में कदम रख िा। िर एक हाथ से े-े ब्रा के तर की वकरत  ूने लगा।.

िा भाभी के तन अब मुलायम नहीं, बलि सख्त पड े थे। धीरे- ैंने उनके गाउन ो ऊपर उठ ू किया, तभ नज पड़ी गहरे जामुनी रंग की पेंटी पर।.

़ी ेर  मैंने उनकी पेंटी के किनारे से अपनी उंगलियाँ दर की ओर िसला दिया। ऐस लग ैसे वहाँ को बाल नहीं ा, ि िकनहट।.

हिम्मत इसलि बढ़ रही थी, क्योंि   नहीं रह ा। उंगलियाँ ि ें डाी, े-े अंदर-बाहर करने लगा, तभी पानी छलक आया। ऊपर, ब्रा से ्तन हर ींचा, चूसन लगा। एहस  - निशा जाग चुकी है, सो नहीं रही, बस ों कर रही है।.

मैंने  े उनका हाथ अपने अंडरवियर ें  ाकर आठ इंच के ऊर िं   दियa ि िना ेर ि, भाभी की पेंटी े उतार दी गई।.

अँधेरे ें चाँद की िरणें पड रह ीं, िर भी वहाँ  छवि सफ लग रही थी। मैंने अपनी जीभ से उस जगह को े- ,  ें हाथों से स्तनों  नम बना दिया।.

अब  वह हले-हले स्वर में पकंपा आव ें कराहने लगी।.

मैं ीरे  े कपड़े उतार ि, ि भाभी के ोंठों पर ुं रख िा। गाउन  - ब्रा भी उतर गई। हम दोनों ि नंगे हो े थे।  ें  ि सोने का ों कर रही थीं। ैं ोंठों को े हुए उन्हें अपने ऊपर लिटा लिया, हाथ उनकी पीठ और कमर पर िरने लगे। गर्दन पर ैसे  ुं लगा, ्तनों पर भी चुंबन ा दौ   गया।.

अब तक निशा भाभी  दर   बढ ा था। उन्होंने मे ोंठों ो छु, ि ाती पर हल  ाँ े। इस ीच मेरे िं को   अपने मुँह में ले लिया।.

आखिरकार उसने आंखें खोलीं और कहा - अचा, तु हो? पल भर में  आया, ैंने सव कि  ि मुकेश जी इतने बड़े कैसे हो गए ओर वहीं , मुकेश अभी भी बेहो-सा झपक रहा था।.

मैंने कहा, ि भाभी, मैं आया हूँ। अब भी मुकेश से इजजत  पड़ेा क् ा सीा कर ें?

  भाभी  कहा - आपक मन ी बा मैं पहल  समझ ी थी, यह वजह  ि ैंे आपको उनके साथ बिस्तर पर ोने  कहा। ूँि ैं लड ूँ, लकर बुलाना आसान नहीं ा!

मैंने कहा, हाँ भाभी... ि अब ें लड़की से औरत बनने का समय  ा है। इतन कहकर ैं फिर से उनकी योनि चूसने लगा, धीरे-े अपना िं उनके दर सरकाने लगा।.

पेनिस े-े भाभी के अंदर सन लगा, तभ उसक हर पर दर्द झलकन लगा।  सच ें अब तक कभी किी के ाथ नहीं ी। फिर एकदम े मैंने झटके े सा गहर कर दिया, और भाभी के ुँ से आव़ निकल पड़ी - ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

खून उसक ोनि  हर  रहा था।.

उसक ाथ ांपन लग े।.

़ी देर  ि ऐस ी रु रहन  , आहिस्ा-आहिस् ि से ू कर दिया। अगले दस मिनट में मेरा वीर्य उनक ि ें भर गया। इधर भाभी नह  ि बाथरूम चल गईं, जबकि मैं वहीं पड़ा रहा।.

वो टकर मे  आई, ुझसे सटकर िस्तर पर ूब गई पच-पच िनट बीे, िर एक सा उठे, े- आओ ें  गए। इस बार उसकी सांें और ेज हुं, ठहर में झनझनहट ी। ऐस ी, थक , गहर ीं ें ढल गए।.

जब सुबह उठे, तो नज़ा ा मुकेश का, चाय लि खड़े। ो निशा की तरफ देखकर बोले - अब तु्हा मन ान गय ? लडियों के  एक पति होता है, तुम्हें ो दो मिल गए।.

ुशी से िशा  कहा - सच कहूँ? मेरे पति कितने बढ़िा हैं।.

उसन कह और ि हम दोनों से कर िपक गई

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0