शादीशुदा भाभी को लेकर सपने में होने वाला पल

antarvasnastory

Jan 9, 2026 - 11:45
Jan 9, 2026 - 17:47
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शादीशुदा भाभी को लेकर सपने में होने वाला पल

ो दोस्त, े कहानी है मेरी भाभी  ़ी। इन  औरतों के साथ  बने का  बह ौक है। िछल ि पड़ो ी भाभी के बारे में चते-चते मेरा लंड खड़ा ो गया, ि मजबी में  चला पड़ा। मुे भाभियों की चूत ें सना बहुत पसंद है। एक शादीशुदा भाभी को चोदने की इच्छा  दर हमेशा रहती है। ि एक दिन ो मौ आया, जब पहली बार  ि पूरी हुई। उस घटन ो आज मैं ्हा मन रखन  ूँ। .

सोनल कहली थी वो। पड़ोस में ही घर था उसका। लगभग आठच  ी उम्र ी। मे नजें अकसर उसक शर पर िक ातीं, पच रता रहता। ों से ही उसके बदन का ि लगाता। लगता था, आकि 34-30-34 के आसपास होगी। ऐस तस बन िा को बूढ़ा भी जवानी के झटक महस कर े। .

इस कहानी को आगे  ाने से पहले, मु  े बारे में  कहन  लग रहा है। ताकि आग चलकर कोई उलझन ा न ो।.

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रोमी मैं। राजकोट में घर ै मेा। कद े को  फर्क नहीं, आम ा लड़का। पाँच फीट छह इंच  ी। लं लंड की  छह इं है। तन गय ो मोटाई  इंच तक पहुँ जाती है। मेरे िसा से, ि तरस  चूत को सं करने के लिए ि सह आक है ा।.

एक साल पहले की  है। सुबह-बह ैं अपने घर के आसपास मन िकल जा ा। सरियों  सम तब चल रहा था।.

सुबह के वक   रह ी। मेरी नज पड़ो  घर पर पड़ी, जहाँ भाभी बरामदे में खड़ी थी। उनोंने एक लमा गाउन पहन  ा। दरव़ा खुला ा, हव दर  रही थी। चलते-चलते मैं उनें  िा। सोनल भाभी को मैंने ऐस कभ नहीं देखा था।.

उस दिन जब उसे देखा, तो  पलों तक समझ नहीं आय ि ा हो रहा है। एक सां   ाती में  गई धडकन। गाउन में  ऐस लग रही थी,  कहीं से  ांगकर आई हो। खड़ा रह गय ैं,  जम  िपक गए ।.

अचनक भाभी  नजर मेरे ऊपर पड़ी, जब मैं उनें ाँट रह ा। इसके बाद   ्य दरव  करक चल गई।.

उस दिन के बाद मेरी सैर का  बस एक ही ़ हो गयी –    ाना। बह अब   ि नहीं, बल्कि आँखों को िसी छवि से  करन  ि निकलन ुरू  गया। ोज़ उनके घर  ओर  बढे, झांकते हुए ुज़रता, आश ि कि शायद आज  ि जायें। पर कई ों तक वो आमने-मने नहीं आई।.

एक बह अचनक उसक ेहरा पगड पर  गया।.

उस दिन ो जॉगिंग  कपड़े ें थी। ट्रैक सूट में उसक मन  ि तन  ा। जब मेरी नजर भाभी पर गई, मैं पचाप चल पड़ा उनके पीछे। उसकी चलती हुई  अची लग रही थी। गोल-मट थी सोनल की िछव़ी। उस दिन उसकी तरफ  देे के बाद मेरा लंड इतना खड़ा हु कि घर पहुंचकर  चला पड़ा।.

अब  हर रोज़ सोनल मे  खकर पार्क में आन लगी। मैं उसके आसप मत रहता।  दिों ाद मैंने उसे मुकर देखना शुरू किया। शुरूआत में उसने कुछ नहीं कहा, पर धीरे-धीरे वो  जव े लगी।.

मुस्  ाती मेरी, और ीरे-ीरे उसके हों ी मु लगे। अचनक सुबह  भकामना आन लगीं, ि िसी  वजह े। हर बह मेरे मुँ  पहल शब यह िकलते। उसक आव़ में जव आता, ि वै ी,   तरह।.

़े दिन बाद, एक बह वो अपनी ास ाली गली की लड े सं ि े लगी।.

उसकी पड़ोसन मुझे थो़ी हव भर िी। िर ी, जहाँ तक नजर गई, सोनल के तन   गए।.

एक ि उसकी सहेली को पता चल गया कि मैं सोनल के स्तनों  रता रहता हूँ।  लडी शायद  आग  ात ोच रही थी, पर मे  सोनल भाभी की ांों  ीच ि जगह पर िा था।.

एक ि उसकी सहेली ने मुझे अपना ंबर थमा दियa। फिर  ी मे  सुनन लगी। क्यों न सोनल तक पहुँचने का ास् उस  जरि बनाया जा, ऐस मन ें आया।.

उसकी दो  ओर ेरा  बढ लगा।.

एक दिन ि ैं  ़ी। उसने सोनल का ंबर देने  कह गया। ुरू में िझक ी। ि   आव बदली। कहा – सोनल को  ही बता दूंगी। वो ुम्ें (रोमी) बर दे देी। मैंने  पूछ िया। ऐसा कैसे होगा?

िर उसन कहा -  सब मैं करती हूँ।.

पर  करना पड़ेगा, उसकी  ने ो कहा ा, वो अपन आप ें सच ि कर दिया। अब तक समझ नहीं आया कि उसने सोनल से क्या कह ा, ि ी एक  पार्क में सोनल ने खुद ही िी बहाने मेरा ंबर ले िया। खुशी हर पर  गई, और ैंे उसकी  की ओर देखकर मुस्ा दिया।.

इसक , सोनल का फ़ोन आएग  नहीं, इस पर ेरा  ि गया।.

तीन बजे के लगभग  बजा। जव में ुना - सोनल बोल रही हूँ।.

़ु  अहस , जब उसकी आवाज़ आई तच शुरू , धीरे-धीरे। ़े दिनों में वो मे मने खुलने लगी। एक दिन अचनक ी - ी, तुम्हारे ास कई लडिाँ होंगी?

  िलक अलग   ै, भाभी - मेरी कोई ्रेिा नहीं है।.

भाभी- क्यों?

एक  किसी ो देखा, तो ोने  मन ही नहीं िया।.

रोमी जी, तभी तो ुम हमा मे तरफ झुकत िखते हो।.

मैं ि इतन कह रह ूँ, ो भाभी जी नहीं। दिल के हा पर  कर  िएगा।.

 चत  ै, मैं कोई आसम  उतरी हु हूँ जि पर तड़क-भड़क ें करक ि  ा?  ी।?

भाभी को खकर सो  मन नहीं करता।  इतन अच लगती हैं ि ें  कर   ैं। उनक ंदा  ऐसा है ि पलकें झपकन   ैं। हर ओर उनीं  ान रहता है, ाहे ि   ि ।.

भाभी- सच रोमी?

भाभीजी, सच कहूँ  मन में आपके ि अब  ा हो गय ै। हर घड़ी आपके ़् से ि भरा रहता है।.

रोमी… ि ी, सच बतँ तो तू भी मुझे पस है।.

 ात ै… इतने  समय से आप मे  ऐसा क्यों कर रहे हो? ैं  चता हूँ।?

बस इतन नना था कि तुम् नज मे ऊपर रहती थी या ि मेरी  पर।.

भाभी, ि़ आपके ि ा दि दता है।.

अब सुनहर आत , सोनल के  गपशप ें ेरा  लगने लगा।.

उस दिन बहन ने सव किया - तु्हें  सब  िलत  िसक ें उम ै?

 लग रहत  े, भाभी  े स्वर ें कहा - े ही ो डालते हैं, हा से िसल जाता है।.

तभी तो ा, भाभी, ़ा सल  ो। प्यास ाने ें अगर कम रह गई, तो मेरा नाम ी न रखना।.

एक दिन जब घर ें ि ैं ंगी, तब तुम्हें बुला लूंगी।.

हवा में  अलग सा महस ोने लगा।.

एक  भाभी का मैसेज पड़ा। उनके पति बाहर मीटिंग  ि िकल गए े, अगले दिन देर से पस आन ाले े। ऐस ें उन्होंने कह ि मैं रात 9 बजे के बाद तैयार रहूं।.

जब उनका मैसेज पहुँे, तभी तुम वहाँ पहुँ जाना।.

उस दिन रात े का इंतज़ार मेरे ि बे भर ा। 9:15 पर, भाभी का मैसेज आया - सब सा ै।  हत ीं कि ैं  पहुँ ँ।.

बाहर िकलत  ैं ारों ओर ांका। कहीं कोई नज  आए, इसक ंदा़ा लगा। फिर भाभी के घर के पास पहुंा, गेट ़ा सा उघड़ा पड़ा था।.

अचनक वहाँ घुसा ैं, तभ  े गेट बंद हो गया। े- कमरे की ओर बढ़े हम ोनों। ारों तरफ  िलमिहट यब ी, परे खिड़कियों पर   लटक । उस दिन उनक ऊपर ऐस लबा था, जिसमें से हर ेखा  झलक रही थी। पलक झपकत  उनें अपने करीब ीं लिया, ुंह के  ाकर आहट  गई।.

मेरी पहल का इंतज़ार सिर् भाभी ही कर रह ी।  ोंठ ूते ही,   मेरे ुँ पर झपट पड़ीं। लगा  कई दिनों से कि आदम े होंठों की तल  उन्हें। मैंे भी िा रुे, सोनल भाभी के होंठों को चूसते हुए, े- ांों  दब िा। .

उनक  पर मेरे हाथ ीमे- ि रहे थे। लग  पंद्रह मिनट तक सि चुंबन ही चलता रहा। इसक ाद मैं उनें उठाा, और उनके कमर तक ले गया। बितर पर उनें लिटाया, फिर ैं उनके होंठों पर पस ुक पड़ा। मेरा शर ू होा जा रहा था।.

एकएक भाभी के साथ पहल   झटके में गरमज  गई। मेा हाथ उनके सीने पर जा पहुँा, तभी वो और भड उठीं। अब ो मेरे होंठों को जोर से चबे लगीं, माो कु खो ँ। ून निकल पड़ेगा कहीं, ऐस लग रह ा। े- उनक तलब और भी तेज होती गई।.

हव ें सन  गया जैसे ी मैंने उनक ों ़े। े- ीचे आत , उनकी गर्दन पर ों रने लगा। उनके मोटे तनों को हथिों ें दबाए, दब बढ़ाता चल गया। गाउन  बटन खुले, और कपड़ा एक तरफ  दिया।.

िस्तर पर  ोनल भाभी  शरीर एक ाँप  तरह मो रहा था। वह ा और पैं ें थी, ें बं, सां । उसके ब्रा से ांकत ी की लकीर े मेरे तर आग लग ी। मैंने  े उसकी पैंटी के ऊपर हा  दिया।  तभ वह उछलकर उठी, मेरे  पकड़े, और े अपने ऊपर खींच लिया।.

मे  भाभी की ांों पर फिसलता रहा, वो मे लड ुं ें ि े-े चू रही ी। ़ी ेर  मैंने अपन ुं ो उसके ुंह से हटाया, नाक उसक    ें दबा दी। नीचे हाथ बढ़ाकर ब्रा का िा खोल दिया, कप एक तरफ  गया। उसके तन हव ें ूल उठे। मैंने एक को ा मुंह में ले िया। बारी करक नखर िे निप्पल को दांतों से दबा, चूा, ़ा।.

़ी  ें उसक ि ुंधल गया। हा आग बढ़ाकर उसने मेरे लिं के े हिस्   िया। इसक  मैंने ैं और अंडरवियर एक साथ ींचकर नीचे कर दि, और अपना लिं उसक  ें डा िा। उसक गलिों  सरगर े काम  कर दिया। तब तक मेरा लिं उसकी नरम पड वच  पर  ू हो ा था।.

मुे उसके चूचों से हटन पड़ा, ि पैंटी को पकड़कर झट  े खींच दिया। चूत हर  गई, ि नंगी। यद तभी साफ की थी, कहीं  बाल नहीं िा। सांवली, चिकनी जगह पर मैंने ुंह रख दिया, े-े चूसने लगा।.

हाथ कां रह े, चादर तन  ी। मुंह से छटपटहट भर आव आई एक सिसकी  पड़ी… रोमी… ये पन झे नहीं  रहा।  दे इसे, िसट रह  सब  ितने दिनों की प्यास, बस  े। ीमे से पक बढ गई।.

उसने मु अपने मुंह   ींा। आवें आन लगीं - उम्म, अर्र, हां, , ममम... े- बढ़ती गईं। मैंने उसके ोंों के  कड़े को दांतों  दबा लिया। ेजी से चूसने लगा। ़ी दे ें  ां उठी। फिर ां ी हो गई। शर  पड गया।.

िर ैं नंगी भाभी पर लेट गया, े-े उसके ों को ।.

उसने मेरे लंड को हथेली पर रखा, ि ीमे- ुट्ठ चले लगी।.

उसक ोंों तक पहुँचते-पहुँचते मैंने िर् इतन कहा।.

ि वो उठते हु मेरे ऊपर आ गई। मैं नीचे लेट गया। उसने मेरे खड़े लंड को मुंह में ाल िा। चूसने लगी। आह्ह… स्सस्… मेरे होंों से छटपटहट निकल पड़ी। तेजी से उसने चूसन  रखा।.

लगने लगा ा कि अब बह दे नहीं डट ाऊँगा, तभी मैंने भाभी को धक्का देकर  िया। िर से उसे नंगा करके नीचे लिटाया, इस  उसके तनों पर ां चल ि।.

फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रख िया। धीमेपन  दर े हुए वजन ाला। आह्ह… गहर तक  पहुँचा।.

उसक  ें पूरा लंड लकर मैंने ते  िाना शुरू कर दिया। अब ो मेरे लंड के आगे- े लगी। हल्की  ँची ां और बढ़ता आनंद।.

़ी  बाद वह  भी आग बढ़ी, उसकी चूत मेरे लंड  टकर गई। फि  े- ऊपर-ीचे ोने लगी।.

मेा लौड़ा भाभी की चूत में    रह ा, बाहर िकल रहा था।.

ओह… हाँ… ीरे-े… ऐस ी जारी रखो मेरे पा। तुम्हारा शर इतना गर्म लग रहा है।.

हाँ भाभी, ी चूत सच ें बहुत  है। आज दोनों को मिलकर पस ा। कई दिनों से  ूं रह ा तुी चू पर झपटने का। अब आखिरक मेरे लंड को सह जगह ि गयी। तुम्ारे तनों को  कर कर बह बार  चल ै मैंे। आज लकर चोूं ुम्हाी चूत… सोनल।

भाभी  कहा, हां,  ़ दो रोमी। आज ी ये जगह तुारे लि बह तरस रह ै... उफ... बस ऐस  आग बढ़ो।

पंद्रह मिनट तक मैंने सोनल भाभी की चूत ें े- गति बढ़ा। वो एक  नहीं, दो बार झड़ी। जब मेरे लंड े पानी निकलने लगा, तभी मैंने उससे पूछ लिा कि कहां ़ूं। उसन कहा, अंदर ही ाल  सब । मैं तेरे माल को अपने तर महसूस करना चाहती हूं, रोमी।.

थो़ी   ें कई झटके लगे, ि मेरा लंड उसकी चूत में गर्मी  लगा। कई ार ऐस , िर सब कु दर खत्म  गया।.

थकवट  छलछल कर मैं भाभी के ऊपर ढह गया। इस  मे लड़का ीमे-े सिकुड़कर उनक जगह से अपन आप बाहर आ गया। ि ैं कर दो मिनट तक उनके मुंह पर  िा।.

भाभी  कहा – धनयव रोमी, इतना मज़ा पहल कभी नहीं आया। अब े तेा है। जब मन करे, आकर इसे  ा।.

मैंने कहा - ी भाभी, ि पल इच ो मेरा लंड चखने की, उस समय बुला लेना। मैं तभ  ांगें   रहत ूँ। .

उठ खड़ा  मैं,  उस  े। कपड़ों  शर पर ाल िया   ऊपर  ओर।.

उस वक्त घड़ी पर दस बजकर  िनट ो चुके थे। ीमे- ैं भाभी के आवास े बाहर कदम रख  ा, वह   टक बंद कर  ै।.

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