शादीशुदा भाभी को लेकर सपने में होने वाला पल
antarvasnastory
सुनो दोस्त, ये कहानी है मेरी भाभी से जुड़ी। इन शादीशुदा औरतों के साथ संबंध बनाने का मुझे बहुत शौक है। पिछले दिन पड़ोस की भाभी के बारे में सोचते-सोचते मेरा लंड खड़ा हो गया, फिर मजबूरी में हाथ चलाना पड़ा। मुझे भाभियों की चूत में घुसना बहुत पसंद है। एक शादीशुदा भाभी को चोदने की इच्छा मेरे अंदर हमेशा रहती है। फिर एक दिन वो मौका आया, जब पहली बार ये ख्वाहिश पूरी हुई। उसी घटना को आज मैं तुम्हारे सामने रखने वाला हूँ। .
सोनल कहलाती थी वो। पड़ोस में ही घर था उसका। लगभग आठचालीस साल की उम्र होगी। मेरी नज़रें अक्सर उसके शरीर पर टिक जातीं, चुपचाप घूरता रहता। आंखों से ही उसके बदन का हिसाब लगाता। लगता था, आकृति 34-30-34 के आसपास होगी। ऐसी तस्वीर बनाए बिना कोई बूढ़ा भी जवानी के झटके महसूस कर ले। .
इस कहानी को आगे ले जाने से पहले, मुझे खुद के बारे में कुछ कहना ज़रूरी लग रहा है। ताकि आगे चलकर कोई उलझन पैदा न हो।.
रोमी मैं। राजकोट में घर है मेरा। कद से कोई खास फर्क नहीं, आम सा लड़का। पाँच फीट छह इंच ऊँचाई मेरी। लंबाई लंड की भी छह इं है। तन गया तो मोटाई ढाई इंच तक पहुँच जाती है। मेरे हिसाब से, किसी तरसी हुई चूत को संतुष्ट करने के लिए बिल्कुल सही आकार है मेरा।.
एक साल पहले की बात है। सुबह-सुबह मैं अपने घर के आसपास घूमने निकल जाता था। सर्दियों का मौसम तब चल रहा था।.
सुबह के वक्त धूप फैल रही थी। मेरी नज़र पड़ोस के घर पर पड़ी, जहाँ भाभी बरामदे में खड़ी थी। उन्होंने एक लम्बा गाउन पहना हुआ था। दरवाज़ा खुला था, हवा अंदर आ रही थी। चलते-चलते मैंने उन्हें देख लिया। सोनल भाभी को मैंने ऐसे कभी नहीं देखा था।.
उस दिन जब उसे देखा, तो कुछ पलों तक समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है। एक सांस के साथ छाती में डूब गई धड़कन। गाउन में वो ऐसे लग रही थी, मानो कहीं से भीख मांगकर आई हो। खड़ा रह गया मैं, जैसे जमीन से चिपक गए पैर।.
अचानक भाभी की नजर मेरे ऊपर पड़ी, जब मैं उन्हें डाँट रहा था। इसके बाद वो सीधे मुख्य दरवाजा बंद करके चली गई।.
उस दिन के बाद मेरी सैर का सार बस एक ही चीज़ हो गयी – भाभी को देख पाना। सुबह अब स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि आँखों को किसी छवि से ठंढा करने के लिए निकलना शुरू हो गया। रोज़ उनके घर की ओर पैर बढ़ते, झांकते हुए गुज़रता, आशा लिए कि शायद आज वो मिल जायें। पर कई तारीखों तक वो आमने-सामने नहीं आई।.
एक सुबह अचानक उसका चेहरा पगडंडी पर आ गया।.
उस दिन वो जॉगिंग के कपड़े में थी। ट्रैक सूट में उसके सामने का हिस्सा तना हुआ था। जब मेरी नजर भाभी पर गई, मैं चुपचाप चल पड़ा उनके पीछे। उसकी चलती हुई छोर अच्छी लग रही थी। गोल-मटोल थी सोनल की पिछवाड़ी। उस दिन उसकी तरफ ध्यान देने के बाद मेरा लंड इतना खड़ा हुआ कि घर पहुंचकर हाथ चलाना पड़ा।.
अब तो हर रोज़ सोनल मेरी राह देखकर पार्क में आने लगी। मैं उसके आसपास घूमता रहता। कुछ दिनों बाद मैंने उसे मुस्कुराकर देखना शुरू किया। शुरूआत में उसने कुछ नहीं कहा, पर धीरे-धीरे वो भी जवाब देने लगी।.
मुस्कान छूट जाती मेरी, और धीरे-धीरे उसके होंठ भी मुड़ने लगे। अचानक सुबह की शुभकामनाएँ आने लगीं, बिना किसी ठोस वजह के। हर सुबह मेरे मुँह से पहले शब्द यही निकलते। उसकी आवाज़ में जवाब आता, बिल्कुल वैसे ही, रोज़ की तरह।.
थोड़े दिन बाद, एक सुबह वो अपनी पास वाली गली की लड़की के संग दिखाई देने लगी।.
उसकी पड़ोसन मुझे थोड़ी हवा भरी दिखी। फिर भी, जहाँ तक नजर गई, सोनल के स्तन ही छा गए।.
एक दिन उसकी सहेली को पता चल गया कि मैं सोनल के स्तनों को घूरता रहता हूँ। वो लड़की शायद कुछ आगे की बात सोच रही थी, पर मेरा ध्यान सोनल भाभी की जांघों के बीच छिपी जगह पर टिका था।.
एक दिन उसकी सहेली ने मुझे अपना नंबर थमा दियa। फिर वो भी मेरी बात सुनने लगी। क्यों न सोनल तक पहुँचने का रास्ता उसी के जरिए बनाया जाए, ऐसा मन में आया।.
उसकी दोस्त की ओर मेरा रुख बढ़ने लगा।.
एक दिन फिर मैंने बात छेड़ी। उसने सोनल का नंबर देने को कहा गया। शुरू में झिझक थी। फिर धीरे से आवाज़ बदली। कहा – सोनल को खुद ही बता दूंगी। वो तुम्हें (रोमी) नंबर दे देगी। मैंने तुरंत पूछ लिया। ऐसा कैसे होगा?
फिर उसने कहा - ये सब मैं करती हूँ।.
पर स्वीकार करना पड़ेगा, उसकी दोस्त ने जो कहा था, वो अपने आप में सच साबित कर दिया। अब तक समझ नहीं आया कि उसने सोनल से क्या कहा होगा, फिर भी एक शाम पार्क में सोनल ने खुद ही किसी बहाने मेरा नंबर ले लिया। खुशी चेहरे पर छा गई, और मैंने उसकी दोस्त की ओर देखकर मुस्कुरा दिया।.
इसके बाद, सोनल का फ़ोन आएगा या नहीं, इसी पर मेरा ध्यान टिक गया।.
तीन बजे के लगभग फोन बजा। जवाब में सुना - सोनल बोल रही हूँ।.
ख़ुशी का अहसास हुआ, जब उसकी आवाज़ आई। बातचीत शुरू हुई, धीरे-धीरे। थोड़े दिनों में वो मेरे सामने खुलने लगी। एक दिन अचानक बोली - रोमी, तुम्हारे पास कई लड़कियाँ होंगी?
वो तो बिलकुल अलग ही रास्ता है, भाभी - मेरी कोई प्रेमिका नहीं है।.
भाभी- क्यों?
एक बार किसी को देखा, तो सोने का मन ही नहीं किया।.
रोमी जी, तभी तो तुम हमेशा मेरी तरफ झुकते दिखते हो।.
मैं सिर्फ इतना कह रहा हूँ, वो भाभी जी नहीं। दिल के हाल पर ध्यान देकर सुन लीजिएगा।.
तू सोचता क्या है, मैं कोई आसमान से उतरी हुई हूँ जिस पर तड़क-भड़क बातें करके दिल जीत लेगा? भाभी बोली।?
भाभी को देखकर सोने का मन नहीं करता। वो इतनी अच्छी लगती हैं कि रातें जाग कर बीत जाती हैं। उनका अंदाज़ कुछ ऐसा है कि पलकें झपकना भूल जाती हैं। हर ओर उन्हीं का ध्यान रहता है, चाहे दिन हो या फिर शाम।.
भाभी- सच रोमी?
भाभीजी, सच कहूँ तो मन में आपके लिए अब प्यार सा हो गया है। हर घड़ी आपके ख़्याल से दिमाग़ भरा रहता है।.
रोमी… यानि भाभी, सच बताऊँ तो तू भी मुझे पसंद है।.
क्या बात है… इतने लंबे समय से आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो? मैं खुद सोचता हूँ।?
बस इतना जानना था कि तुम्हारी नज़र मेरे ऊपर रहती थी या फिर मेरी दोस्त पर।.
भाभी, सिर्फ़ आपके लिए मेरा दिल कूदता है।.
अब सुनहरी शुरुआत हुई, सोनल के साथ गपशप में मेरा जी लगने लगा।.
उस दिन बहन ने सवाल किया - तुम्हें वो सब कुछ मिलता है जिसकी तुम्हें उम्मीद है?
प्यास लगी रहती है मुझे, भाभी ने धीमे स्वर में कहा - जैसे ही वो डालते हैं, हाथ से फिसल जाता है।.
तभी तो सोचा, भाभी, थोड़ा हौसला दे दो। प्यास बुझाने में अगर कमी रह गई, तो मेरा नाम ही न रखना।.
एक दिन जब घर में सिर्फ़ मैं होऊंगी, तब तुम्हें बुला लूंगी।.
हवा में कुछ अलग सा महसूस होने लगा।.
एक शाम भाभी का मैसेज पड़ा। उनके पति बाहर मीटिंग के लिए निकल गए थे, अगले दिन देर से वापस आने वाले थे। ऐसे में उन्होंने कहा कि मैं रात 9 बजे के बाद तैयार रहूं।.
जब उनका मैसेज पहुँचे, तभी तुम वहाँ पहुँच जाना।.
उस दिन रात होने का इंतज़ार मेरे लिए बेचैनी भरा था। 9:15 पर, भाभी का मैसेज आया - सब साफ है। वो चाहती थीं कि मैं तुरंत पहुँच जाऊँ।.
बाहर निकलते ही मैंने चारों ओर झांका। कहीं कोई नज़र न आए, इसका अंदाज़ा लगाया। फिर भाभी के घर के पास पहुंचा, गेट थोड़ा सा उघड़ा पड़ा था।.
अचानक वहाँ घुसा मैं, तभी पीछे से गेट बंद हो गया। धीरे-धीरे कमरे की ओर बढ़े हम दोनों। चारों तरफ से झिलमिलाहट गायब थी, पर्दे खिड़कियों पर ठीक से लटके हुए। उस दिन उनके ऊपर ऐसा लबादा था, जिसमें से हर रेखा साफ झलक रही थी। पलक झपकते ही उन्हें अपने करीब खींच लिया, मुंह के पास जाकर आहट रुक गई।.
मेरी पहल का इंतज़ार सिर्फ भाभी ही कर रही थी। मेरे होंठ छूते ही, वो तुरंत मेरे मुँह पर झपट पड़ीं। लगा जैसे कई दिनों से किसी आदमी के होंठों की तलाश थी उन्हें। मैंने भी बिना रुके, सोनल भाभी के होंठों को चूसते हुए, धीरे-धीरे दांतों से दबोच लिया। .
उनकी पीठ पर मेरे हाथ धीमे-धीमे फिर रहे थे। लगातार क़रीब पंद्रह मिनट तक सिर्फ चुंबन ही चलता रहा। इसके बाद मैंने उन्हें उठाया, और उनके कमरे तक ले गया। बिस्तर पर उन्हें लिटाया, फिर मैं उनके होंठों पर वापस झुक पड़ा। मेरा शरीर बेकाबू होता जा रहा था।.
एकाएक भाभी के साथ पहली बार के झटके में गर्मजोशी छा गई। मेरा हाथ उनके सीने पर जा पहुँचा, तभी वो और भड़क उठीं। अब वो मेरे होंठों को जोर से चबाने लगीं, मानो कुछ खो जाऊँ। खून निकल पड़ेगा कहीं, ऐसा लग रहा था। धीरे-धीरे उनकी तलब और भी तेज होती गई।.
हवा में सन्नाटा छा गया जैसे ही मैंने उनके होंठ छोड़े। धीरे-धीरे नीचे आते हुए, उनकी गर्दन पर होंठ फेरने लगा। उनके मोटे स्तनों को हथेलियों में दबाए, दबाव बढ़ाता चला गया। गाउन के बटन खुले, और कपड़ा एक तरफ डाल दिया।.
बिस्तर पर लेटी सोनल भाभी का शरीर एक साँप की तरह मोड़ रहा था। वह ब्रा और पैंटी में थी, आंखें बंद, सांस तेज। उसके ब्रा से झांकती छाती की लकीर ने मेरे भीतर आग लगा दी। मैंने धीमे से उसकी पैंटी के ऊपर हाथ फेर दिया। ठीक तभी वह उछलकर उठी, मेरे कंधे पकड़े, और मुझे अपने ऊपर खींच लिया।.
मेरा हाथ भाभी की जांघों पर फिसलता रहा, वो मेरा लड़का मुंह में लिये धीरे-धीरे चूस रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने अपने मुंह को उसके मुंह से हटाया, नाक उसके छाती के बीच में दबा दी। नीचे हाथ बढ़ाकर ब्रा का फिटा खोल दिया, कप एक तरफ हो गया। उसके स्तन हवा में झूल उठे। मैंने एक को पूरा मुंह में ले लिया। बारी करके नखरे दिखाते निप्पल को दांतों से दबाया, चूसा, छेड़ा।.
थोड़ी देर में उसका दिमाग धुंधला गया। हाथ आगे बढ़ाकर उसने मेरे लिंग के नीचे हिस्से को छू लिया। इसके बाद मैंने पैंट और अंडरवियर एक साथ खींचकर नीचे कर दिए, और अपना लिंग उसकी मुट्ठी में डाल दिया। उसकी उंगलियों ने सरगर्मी से काम शुरू कर दिया। तब तक मेरा लिंग उसकी नरम चुपड़ती त्वचा के स्पर्श से बेकाबू हो चुका था।.
मुझे उसके चूचों से हटना पड़ा, फिर पैंटी को पकड़कर झट से नीचे खींच दिया। चूत बाहर आ गई, बिल्कुल नंगी। शायद तभी साफ की थी, कहीं कोई बाल नहीं दिखा। सांवली, चिकनी जगह पर मैंने मुंह रख दिया, धीरे-धीरे चूसने लगा।.
हाथ कांप रहे थे, चादर तनी हुई थी। मुंह से छटपटाहट भरी आवाज आई। एक सिसकी फूट पड़ी… रोमी… ये गीलापन झेल नहीं पा रहा। खोल दे इसे, घिसट रहा है सब कुछ। कितने दिनों की प्यास, बस छू ले। धीमे से कंपकंपी बढ़ गई।.
उसने मुझे अपने मुंह को नीचे खींचा। आवाजें आने लगीं - उम्म, अर्र, हां, हाय, ममम... धीरे-धीरे बढ़ती गईं। मैंने उसके होंठों के छोटे टुकड़े को दांतों से दबा लिया। तेजी से चूसने लगा। थोड़ी देर में वो कांप उठी। फिर सांस भारी हो गई। शरीर ढीला पड़ गया।.
फिर मैं नंगी भाभी पर लेट गया, धीमे-धीमे उसके होठों को छुआ।.
उसने मेरे लंड को हथेली पर रखा, फिर धीमे-धीमे मुट्ठ चलाने लगी।.
उसके होंठों तक पहुँचते-पहुँचते मैंने सिर्फ इतना कहा।.
फिर वो उठते हुए मेरे ऊपर आ गई। मैं नीचे लेट गया। उसने मेरे खड़े लंड को मुंह में डाल लिया। चूसने लगी। आह्ह… स्सस्… मेरे होंठों से छटपटाहट निकल पड़ी। तेजी से उसने चूसना जारी रखा।.
लगने लगा था कि अब बहुत देर नहीं डट पाऊँगा, तभी मैंने भाभी को धक्का देकर रोक लिया। फिर से उसे नंगा करके नीचे लिटाया, इस बार उसके स्तनों पर दांत चला दिए।.
फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया। धीमेपन से अंदर घुसाते हुए वजन डाला। आह्ह… गहराई तक जा पहुँचा।.
उसकी चूत में पूरा लंड डालकर मैंने तेजी से हिलाना शुरू कर दिया। अब वो मेरे लंड के आगे-पीछे होने लगी। हल्की सी ऊँची सांस… और बढ़ता आनंद।.
थोड़ी देर बाद वह खुद भी आगे बढ़ी, उसकी चूत मेरे लंड से टकरा गई। फिर वो धीमे-धीमे ऊपर-नीचे होने लगी।.
मेरा लौड़ा भाभी की चूत में तेजी से आ रहा था, बाहर निकल रहा था।.
ओह… हाँ… धीरे-धीरे… ऐसे ही जारी रखो मेरे पास। तुम्हारा शरीर इतना गर्म लग रहा है।.
हाँ भाभी, तुम्हारी चूत सच में बहुत तेज है। आज दोनों को मिलकर पसीना छूटेगा। कई दिनों से मौका ढूंढ रहा था तुम्हारी चूत पर झपटने का। अब आखिरकार मेरे लंड को सही जगह मिल गयी। तुम्हारे स्तनों को याद कर कर बहुत बार हाथ चलाया है मैंने। आज खुलकर चोदूंगा तुम्हारी चूत… सोनल।
भाभी ने कहा, हां, मुझे छेड़ दो रोमी। आज मेरी ये जगह तुम्हारे लिए बहुत तरस रही है... उफ्फ... बस ऐसे ही आगे बढ़ो।
पंद्रह मिनट तक मैंने सोनल भाभी की चूत में धीमे-धीमे गति बढ़ाई। वो एक बार नहीं, दो बार झड़ी। जब मेरे लंड से पानी निकलने लगा, तभी मैंने उससे पूछ लिया कि कहां छोड़ूं। उसने कहा, अंदर ही डाल दे सब कुछ। मैं तेरे माल को अपने भीतर महसूस करना चाहती हूं, रोमी।.
थोड़ी ही देर में कई झटके लगे, फिर मेरा लंड उसकी चूत में गर्मी छोड़ने लगा। कई बार ऐसा हुआ, फिर सब कुछ अंदर खत्म हो गया।.
थकावट से छलछला कर मैं भाभी के ऊपर ढह गया। इस दौरान मेरा लड़का धीमे-धीमे सिकुड़कर उनकी जगह से अपने आप बाहर आ गया। फिर मैंने करीब दो मिनट तक उनके मुंह पर ध्यान दिया।.
भाभी ने कहा – धन्यवाद रोमी, इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया। अब ये तेरा है। जब मन करे, आकर इसे छेड़ लेना।.
मैंने कहा - जी भाभी, जिस पल इच्छा हो मेरा लंड चखने की, उस समय बुला लेना। मैं तभी से टांगें फैलाए बैठा रहता हूँ। .
उठ खड़ा हुआ मैं, बाद उस बात के। कपड़ों को शरीर पर डाल लिया नीचे से ऊपर की ओर।.
उस वक्त घड़ी पर दस बजकर तीस मिनट हो चुके थे। धीमे-धीमे मैं भाभी के आवास से बाहर कदम रख चुका था, वह पीछे से फाटक बंद कर देती है।.
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