भाभी की चूत इंस्टाग्राम पर देखने को मिली।
हेल्लो दोस्तों, मैं हाल में एक कहानी पढ़ता रहता हूँ। मुझे ऐसा करने में ख़ुशी आती है। घर मैं मुंबई में है। सभी पल मुझे यहाँ अच्छे लगते हैं।
अनुज सिंह कहलाता हूँ मैं, उम्र के लिहाज से एकोहत्तर साल का। शरीर के एक हिस्से की लंबाई छह इंच है।
मेरी गर्लफ्रैंड के साथ मेरा रिश्ता आगे बढ़ा, ऐसा हुआ था। गोवा की यात्रा में, पिछले साल, एक विदेशी व्यक्ति के साथ भी यही हुआ था।.
एक बार मैंने इंस्टाग्राम पर बात की एक लड़की से, जिसका बॉयफ्रेंड पहले से था। फिर भी मैं उसे अपने घर ले आया। हमने सेक्स किया। उसके स्तन बड़े-बड़े थे, छूने में अच्छे लगते थे।.
एक उम्र में मज़े की तलब थी, वो मिल गई। कभी कभी बातचीत हो जाती है, फिर वीडियो कॉल पर सेक्स चैट से दोनों को तसल्ली मिलती है। इसके बारे में आगे बताऊँगा। महिलाओं में अलग अलग तरह की पसंद है - विधवा, नाखुश, 40 से 50 के बीच की, छोटी उम्र की लड़कियाँ, 18 से लेकर 50 तक की महिलाएँ सब अपील करती हैं।
मेरी बात यहीं खत्म होती है... अब कुछ और सच जानना है… किस तरह मैंने एक अजनबी भाभी को उनके पति के सामने ही धीमे-धीमे घुमाया।
एक दिन मैं काफी उत्तेजित हो चुका था, मन कर रहा था कि किसी शादीशुदा औरत या भाभी के साथ समय बिताऊँ। मन में ख्वाहिश उठी तो लगा कि क्यों न इंस्टाग्राम पर कोई झूठी पहचान बनाकर ऐसा कर लिया जाए। अब धीरे-धीरे एक आइडी बनाने का विचार आया, उसे "कॉल बॉय" के नाम से तैयार कर लिया गया।
थोड़े समय तक कई प्रोफाइल्स पर नज़र रखी, जहाँ लड़कियां और भाभी होती थीं। कुछ खास हाथ न लगा तो बस दूसरों को छोड़कर वापस अपने काम में जुट गया।
थोड़ी देर बाद मैंने प्रोफाइल खोली, तभी नजर पड़ी एक लड़के की फॉलो रिक्वेस्ट पर। स्वीकार कर लिया मैंने उसे। मेरी डीपी में मेरे लंड की तस्वीर थी। कुछ ही देर में मैसेज आया – क्या तस्वीर तुम्हारे लंड की है?
हाँ, ये मेरा है।
उसने कहा - थोड़ी सी तस्वीरें भेज दो।
मैं-क्यों?
उस भाभी को दिखा देना है। पसंद आ जाए तो फिर वो तुझे छोड़ भी सकती है।
क्या हो रहा था इसके दिमाग में, पता नहीं। उसने कहा - वो तस्वीर दिखाओ जो भाभी की है।?
उसने कहा - अरे यार, तुम्हारी भाभी पूरी तरह ठीक है। घबराओ नहीं… वो अब एक और लंड में दिलचस्पी ले रही है। उन्हें तुम्हारा लंड अच्छा लगा।
ठीक है, मैंने कहा। मुलाक़ात कब होगी, वो भी बताओ।?
वह बोला, "नंबर दे दो, मैं फोन करके सारी जानकारी दे दूँगा।"
तब मैंने उसको अपना नंबर सौंप दियa, बाद में आँख लग गई।
शाम को उठा, फ़ोन देखा। संदेश में लिखा था - मैं तुम्हारे पास वाले D मार्ट के पास आ गया हूँ, अगर चाहो तो मिल सकते हो।
उसे संदेश पहुँचाया - आ रहा हूँ।
पांच मिनट बाद, मैं वहीं था जहाँ उसने कहा था।
उसने कहा - मैं तुझसे इसलिए मिल रहा हूँ कि वहाँ जाने से तेरा डर खत्म हो। हाँ, भाभी बहुत तगड़ी है, मैं उसके साथ संबंध बनाता हूँ… पर अब उसे किसी नए आदमी की जरूरत है। तेरा लंबा शरीर उसे पसंद आया है।
कई बार मैंने उससे पूछा - शायद कोई दिक्कत तो नहीं होगी? फिर से मैंने पूछ लिया। एक और बार वापस जाकर बोला, कुछ गड़बड़ी तो नहीं है?
उसके मुँह से निकला - बात घटिया नहीं होगी।
मैं- ठीक है।
ठीक है, कल दोपहर बारह बजे घाटकोपर पहुँच जाना। फिर कॉल करना मुझे, वहीं से लेकर चलूँगा तुम्हें।
मैं- ठीक है।
उठते ही घड़ी पर नजर पड़ी - सात बज चुके थे। तैयारी पूरी कर, सीधा कॉलेज की ओर चल दिया। वहाँ से छूटने के बाद, दोपहर के आसपास, दोस्तों से बात कर ली - अब घाटकोपर जाना तय हो चुका था। रात को बिदा होते वक्त, एक धमाके की तरह ख्याल आया था।
मैंने बोला तो वहाँ से बस पकड़ी, स्टेशन पहुँचा। फिर ट्रेन मिलते ही घाटकोपर के लिए चल पड़ा। लगभग 45 मिनट में पहुँच गया, उसे फोन कर दिया।
उसने कहा - मैं पहुँच जाता हूँ।
उसके आने में पौने दो घंटे लग गए, मुझे बार-बार इंतज़ार करवाया।
माफ़ करना, काम पड़ गया था। इसीलिए लेट हो गए। अब निकलते हैं।
पीछे-पीछे मैं चलने लगा।
टैक्सी आई, हम अंदर बैठे, फिर वो चॉल के सामने रुकी।
वो बोला, "भाई, पहले तो हम थोड़ा पी लेंगे। उसके बाद ऊपर भाभी के पास चलेंगे। वो अभी वहीं हैं।"
अरे भई, सब कुछ तो फिट है, फिर भी मैं ज्यादा नहीं पिऊँगा – आदत ही नहीं है।
वो- ठीक है।
वो तुबोर्ग के साथ-साथ कारलसबुर्ग भी ले आया, फिर चना खरीद लिया।
थोड़ी देर में पानी की बोतल सिर्फ आधी रह गई।
उसने कहा - चल, सारा पी ल।!
बस कुछ तो छलक गया, पीने में जबरदस्ती हुई थी। एक-एक बार फिर दोहरा रहा था - भाभी के घर चलते हैं… वहीं सब हो जाएगा।.
उसकी हाँ नहीं में छुपी थी, सिर्फ इनकार कर रहा था वो।
खाली हो चुकी थी पूरी बोतल जब, उसने कहा - ठहर यहीं, मैं ऊपर झांक के आऊंगा।
थोड़ी देर में सीढ़ियाँ उतरा, हाथ में नमकीन का डब्बा था। बोला, "इसे खत्म कर लेते हैं… इसके बाद निकल पड़ेंगे।"
उसके बाद हमने सब कुछ समाप्त कर दिया, फिर मेरा ध्यान भाभी पर जाने लगा - अब कब वो मौका मिलेगा।
ऊपर पहुँचे तो भाभी के साथ मुलाकात हुई, बस इतना ही हुआ – नमस्ते-नमस्ते।
यार, मैंने उस भाभी को पूरा घूर लिया। ऊपर से नीचे तक एक-एक हिस्सा अलग था। बड़े-बड़े स्तन, मोटी गांड, चेहरा कहीं ज्यादा आकर्षक। वो लड़की देखने में बिल्कुल तेज थी।!
एक कुर्सी पास थी, मैं उस पर जाकर बैठ गया।
टीवी के साथ पंखा भी कोने में चल रहा था। कमरे के बीचोबीच हल्की आवाज़ गूंज रही थी।
अचानक उस लड़के ने कहा - तुम्हारा लंड भाभी को देखना है, पहले दिखाओ न।
मैं- ठीक है।
पोर्ण चल पड़ा मैंने। अपने लिंग को ऊपर उठाया। तभी भाभी के कदम आए पास। धीमे स्वर में बोलीं - कमजोर तो नहीं है? ठीक से चढ़ेगा अंदर?
मैंने कहा - तुम्हें ये प्रयोक्ता मत छोड़ना।
तब मैंने कहा - अरे तुम भी तो वही कर रहे हो।?
उसने कहा - आज तुम्हारी बारी है, मेरा वक्त कभी भी आ सकता है।
मैं- ठीक है।
उसने कहा - थोड़ा इंतजार करो, मुझे भाभी से अकेले में बातचीत करनी है।
फिर वो आदमी भाभी को पास ले गया, उसकी बातचीत का अंदाज़ देखकर ऐसा लगा मानो ये उसकी पत्नी हो।
उस सबके बाद भाभी वहाँ आईं, उन्होंने मुझे चूम लिया, मेरा लिंग पकड़कर हिलाने लगीं। मैंने कहा - भाभी, इसे मुँह में ले लो।
भाभी- ठीक है।
उसकी भाभी कुछ समय पहले बहुत शोर मचा रही थी। घटना के दौरान लगातार गप-गप की ध्वनि हो रही थी।.
मेरे मुँह से आवाज़ निकल रही थी - ओह, चूसो भाभी… हाँ, उसे चूसो! ये लंड कई बार परेशान कर चुका है।
ठीक है, भाभी बोली - घबराओ मत। आज ही सब सुधार दूँगी मैं।!
फिर उसने मुँह के अंदर लिया, धीमे-धीमे चूसने लगी।
फिसलते हुए मैंने भाभी की ब्रा फाड़ दी। कुछ नहीं बोली वो, सिर्फ चूस रही थी, मैं खोया हुआ उस अंदाज में। उनके होठों ने मेरा गोटा घेर लिया, थूक से तर कर धीमे-धीमे चूसा। मज़ा बढ़ गया इस तरह। फिर हम एक-दूसरे के ऊपर लेट गए, मैंने उनकी चूत पर जीभ फेरनी शुरू कर दी। वो बिलकुल साफ थी, बाल नहीं थे, इसलिए स्वाद और खुशबू दोनों तेज थे। मैंने जीभ के साथ दो उंगलियां भी अंदर ठूंस दीं… वो झटके से छटपटाई, बोली - अरे हरामी, इतना शैतान है तू? अपनी रांड को भी ऐसे परेशान करता होगा?
खुशी कहीं और नहीं, सिर्फ़ यहीं है मेरी जान।
इस तरह से मैं काम पकड़ने लगा।
लगभग पंद्रह मिनट तक मैं और भाभी ने साथ में समय बिताया। वो खुश होकर बोली – सच कहूँ, आज तूने मुझे एक अलग तरह का आनंद दिया है। इतना अब तक कभी नहीं हुआ था मेरे साथ। ऐसा करने से औरतें ज्यादा खुश रहती हैं। तेरी पत्नी तुझसे बहुत प्यार करेगी। तू बहुत भाग्यशाली है!
तुम्हारा शुक्रिया, प्यार।
भाभी के होंठों से आवाज़ आई - आह… ऐसे ही चलता रखना। पूरा लुत्फ उठा रही हूँ। इतना अच्छा लग रहा है कि छोड़ने का ख्याल भी नहीं आएगा। तुम बस जारी रखो। थोड़ी देर में वो मेरे मुँह पर टपक गयीं। दो मिनट बाद मैंने उनके अंदर डाल दिया।!
फिर वो लम्हा आया, मैंने उसका पानी पी लिया।
रुककर वो फिर मेरे प्राइवेट हिस्से को मुंह में ले आई। धीरे-धीरे उसने उत्तेजित कर दियa।
दो मिनट तक चूसने के बाद वह बोली - आ जा मेरे प्यार, मुझे अपने मोटे लंड से चोद दे।
लाल अंडरवियर धीरे से खींचकर मैंने बाहर निकाल लिया।
भाभी डॉगी स्टाइल में मुड़ी, मैंने कंडोम पहना। उसकी चूत पर थूक लगाया, लंड आधा अंदर किया। फिर एक झटके में गहरा घुसा दिया, वो चीख पड़ी।
भाभी बोली - उम्म्ह… अहह… हय… याह… धीरे चलना दोस्त, इतनी जल्दी किसके पीछे हूँ मैं?
मगर मैंने झटकों की गति बरकरार रखी।
भाभी बोली - ओह सुख मिला… ओह नए अंग के साथ! तेरे पास शक्ति है मेरे राजा। उफ़ उफ़ माँगे ये क्षण, उबासी आ गई!
अरे हाँ ले मेरी गधियन… यार तू खुद को हबशी लंड से चोदवा ले… मर जा अपनी चुत से… ओये प्यासी बेहनचोद। !
साली को ग्यारहवीं से ही मौका मिल जाता है, पर फिर भी सुकून नहीं मिलता। एक तरफ वो बहुत परेशान रहती है, दूसरी ओर लगातार कुछ न कुछ मांगती रहती है। उसके अंदर आग सी धधकती रहती है, ऐसे में थोड़ा और तमाशा हो जाए तो क्या बुरा है? बहुत लंबे समय से वो इसी तरह घटनाओं को आमंत्रण देती आई है। अब किसी ने ध्यान दिया तो वो खुशी से झूम उठी।
फिर वो बात सुनकर हम लोगों के मुँह खुले के रह गए।
फिर वह लड़का हम दोनों की ओर घूरते हुए अपनी गाँड हिला रहा था। मैंने उसकी तरफ आँख मिलाकर धन्यवाद कहा, क्योंकि उसने भाभी की गुदगुदी इतनी सटीक की थी।
उसने इशारे से थंब का निशान दिखाया, कहा – जारी रख। और झटके से कमर आगे बढ़ाकर बोला – इसकी चूची में घुसा दे पूरा। ऐसे मार कि कल चल न पाए। मैंने भाभी की टांग ऊपर उठाई, अंदर डाल दिया। कुछ देर वैसे ही चलाता रहा। फिर वो खुद बाहर निकालकर चूसने लगी। थोड़ी देर बाद जैसे ही ऊपर बैठी, एक झटका लगा, आवाज़ आई। बोली – कंडोम टूट गया।
तभी मेरी नज़र पड़ी - सच में कंडोम टूटा हुआ था।
एक लड़के ने हमारे लिए दूसरा कंडोम निकाल दिया। बदल लिया गया, नया डाला गया। इसके बाद भाभी मेरे ऊपर आ बैठीं। वह बोलीं - इस ढंग से तुझे जल्दी हो जाएगा, तो धक्के आराम से देना। लंबाई भर में अंदर तक जाने देना।
बस इतना कर दिया, जितना भाभी ने सुझाव दिया था।
इस स्थिति में कुछ पल मैंने भाभी के साथ यौन संबंध बनाया। फिर मैंने कहा - अब मेरा उत्सर्जन होने वाला है।.
फिर भाभी धीमे से नीचे बैठ गईं, मैंने अपना हिस्सा उनके मुँह की तरफ बढ़ा दिया, वो चुपचाप सब कुछ निगल गईं।
लड़की बोली – अरे, ये सामान तो बहुत अच्छा है, पीने के बाद ऐसा लगा जैसे मन उड़ रहा हो।
फिर वो हुआ कि हम एक साथ नहा लिया।
एक बार फिर मैंने भाभी के साथ संबंध बनाया। शैम्पू लगाकर मैंने उनकी गांड में भी घुसाया। इसके बाद चलते समय उन्हें दर्द हुआ, तो मैंने उनका हाथ पकड़कर बेड तक पहुंचाया। वहाँ दोनों ने कपड़े धारण किए।.
थोड़ी देर बाद, मैं तैयार हुआ और धीरे-धीरे वहाँ से अपने घर की ओर चल पड़ा।
मज़ेदार रहा यार… भाभी के साथ चला गया वो हर पल। घर पहुंचकर शाम को जब मैंने आईडी खोली, तो उससे बातें हुईं। फिर पूछ लिया – भाभी को कैसा लगा ये सब।.
फिर उसने कहा कि भाभी को काफी पसंद आया, तुमसे बहुत ख़ुश थी वो, और अब दो दिन में फिर बुला रही है।
मैं दो दिन के बाद वापस गया, भाभी के साथ संबंध बनाया, फिर अपने एक दोस्त को भी वहाँ ले आया।एक दिन मैंने उस आदमी से सीधा पूछ लियa - तुम उसके पति हो, है न?
उसने बताया- हाँ।
उसने कहा - मुझे खुशी होती है जब मेरी पत्नी किसी दूसरे के साथ सोती है। वो भी अलग-अलग लड़कों के साथ संबंध बनाना पसंद करती है।
फिर उसने हमें दोनों को अचानक ब्लॉक कर दिया। हर बार कुछ नए से जुड़ना उसे सही लगता है, इसलिए।
हो जाता है कभी-कभी, सब अचानक बदल जाए तो कुछ पल में भाग्य खिंचने लगता है।
खुशियां मिलीं कई, उम्र अभी कम है पर संतोष नहीं। फिर चल देता हूँ, लंड ऊपर किए, ढूंढते-ढूंढते कहीं भी जहां चूत मिले। जो मिल जाए, वही ठीक है, बस इतना चाहिए। लंड को कोई फर्क नहीं पड़ता कैसी है वो। और मैं आगे बढ़ता रहता हूँ, मज़े करता हुआ।
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