एक पुराने सहपाठी के साथ शारीरिक संबंध बने।

Jan 8, 2026 - 11:33
Jan 8, 2026 - 16:52
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एक पुराने सहपाठी के साथ शारीरिक संबंध बने।

एक पुरानी क्लासमेट के साथ ा सेक्स का अनभव हु  कही मैं िं ें िखकर सबके साथ ाँटना चाहता हूँ।.

दिवाली के दि   ै। मुझे उस ि एक ा सा उपह मिला। ऐसा हुआ कि स्कूल के  ी एक साी मुझे फेसबुक पर आकर मिल गई।.

इस बसाइट का सबसे अच्छा तरीका यद यह ै। पुराने ों को ूंढने के ि खा बन ा। ा फेसबुक अकाउंट बह पहले से है।.

एक दोस्त की बात चल रही है, िसकी शादी हो चुकी थी। ो अपने पति के साथ कुवैत में रह रही थी। इस बातचीत का महत ये ा कि डेढ़ दशक बाद हम ि से बात कर रहे थे। मायरा, उसका नाम (बदला हुआ), इस दिवाली पर परिवार से मिलने रत आई थी। दीवाली की भकमना देने मेरे घर चंडीगढ़ तक पहुं गई

मुलाात , ो पुराने पल जै पस  गए।.

बैठे-बै कई बातें हो गईं। ऐस  गपशप में पहली बार ा कि  अपने पति से  ाल ी है। ये नत ी क्यों नहीं पता, मेरी नज उसके शर पर ठहर गई। उसके आक 36-32-38 के थे,  एहस बाद में उस  करवाया।.

एक बच्चा होे के वज, यर ा कहना था कि पति उस  नहीं कर पाता। ि अचनक मैंने मजाक में कह दिया - मायरा, मेरे साथ अफेयर कर ले, तू खुश  एगी।.

उसकी बात नकर वो हं पड़ी। ि बोली, "हाँ, ऐसा ही ा।" एकदम अचनक उसन कह दिा - अब ैं तु्हा  एक और बच ी पैदा कर लेती हूँ। हम ो दोस्त हैं। इसलि  ये नहीं  एग ि बच्चा असल ें ्हारा  ा मेे पति ा।.

छह बज ुके े, गपशप ें वक्त ो निकल ी गया। मायरा  अब जाने की बात की। मन नहीं कर रहा था उस ़ने का, ि भी  नहीं सकता था। शादीशुदा थी ो, पहले दिन मेरे घर ठहरन उचि नहीं ा।.

दो दिन बाद  की  बजी। उधर  आव आई, घर चलो। हरियाणा के  शहर अम्बाला में रहती थी यरा। े पर मैंने  हाँ कह िा।.

हर िकलत  मैं ा उसके घर की ओर बढ़ गया। वहाँ पहुँचकर पहले उसकी माँ से मुलाका , इसक  े-  परि मेरे मन आया। परिचय खत्म  ी मायर े मु अपन कमर  तरफ  ा। वहाँ बैठकर ातें   गईं, एक   एक।.

एक दिन  चलते हुए उसने मुुरा  ा - अब बच्चे के पिा बनने को कर ा मं ै?

बस इतन कहा, पक िश्वास से - मैं तो पहले से ी तैयार हूँ। अब तुम्हारी ी, क्या  रखा है?

थोड़ी ेर  ि यर  हर  पड गया। वह ी - कई ्हा मतलब है यही?

ि हल   गया, हां कहते हु।.

उसक ुँ  िकला - अब तो मैं भी वही सच  रही हूँ। सच यह ै, मैं तुम्हारी  की माँ बनने को तैयार हूँ। अगर ो, तो मुझे  जगह दे ो।.

़ा अज लगा, जब उसने गंभीर कर ऐसा कह िा। पहले तो लगा, मजाक कर रही है वो, मगर ि समझ आया - ास्तविकत ें उसका रु सचम  था।.

़ा सं कर मैंने ोस् पर िार िा।  है, अगर तुम्हें कोई ऐतऱ नहीं है तो चलता है। अब बता ो, कहाँ और कब ू करना है।?

उसन कहा - मेरे माँ-ाप किसी सही के घर ीन-  े लि  रहे हैं। भाई तो पहले ही करी के लिए चल गया। िर बस हम दोनों यहाँ रहेंगे, और  नहीं।.

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उसके शब सुनत ी मेरे लंड में हलचल मच गई अब तक मैंने किसी शादीशुदा औरत को नहीं  था। इस  तो मेरी  ें ही मुझसे े को कह रही थी। उसके सा ऐस करते हु खकर मन में धडकन बढ गई।.

अगल पल वह रस े चाय लेकर ेरे   धमकी। इतन ें उसक ाँ  दर  आयी, महज दो मिनट बाद।.

माँ ने कहा, "बचा, हम ा रहे हैं। ़्या रखना ़ा ा।".

 खत ी उसकी माँ  हर पर मुस्का  गई  ीरे- वहाँ े चल ीं।.

अबे, मैं चाय पी ी रहा था। ि मायर उठ पड़ी, तौलिया उठा और ्ना करने चल ी। मैं तब उसके कमरे में  ि गया, बस इंतजार करने लगा।  दस मिनट बाद वो  करके बाहर आई।.

बाथरूम से हर आत  ि नाइटी ें थी। गीले बालों को ि से रगड़ते हुए वो मेरे  आकर जगह ले ली। े-े सूखत ों   उसने मे ओर झुकना शुरू िया। कभी पेट पर उंगली ा दी, कभी जांघ ो छूकर िंचव िा।.

उसकी चूचियों पर हाथ रखत ी मु एहस । नीचे  ब्रा नहीं थी, ि नाइटी ढक रही थी। े ही उनें, मेरा लंड खड़ा हो गया। शर  आग ें लस रह ा।.

ैंे उसके  आकर मुँह सट िा। ि ोला - तुम्हारे बूब्स दि।.

़ी  ें वह ंभीर हो गई। मेरी तरफ कत  वह ी गोद में  बैठी। उसका सां  पड  ा। ी अब मेरे ुँह के बह कर थी। एक हाथ े ले जाकर उसने रिबन ीला कर दियa।.

 ी नाइटी का पट्टा ा हु, सामने  गए उसके ी के बड़े-बड़े िस्े। रंग  ा, गहरा, े कि ुरा चमड़ी  

हवा में े- बढ ां   उसकी  पर अंगूर के दाने से  निप्पल दिखे।.

अचनक ो मेरे गाल पर उंगली फेरते हुए ी - बस देखने ़े नहीं, चूसने भी आवशयकता होती है।.

बस इतना कहते ही मैंने उसकी ी पर ुँह लग िा। ां  नहीं े, ैं एक-एक को ीरे चूमने लगा। हल्की हली सां आई,  थरथर गया। ऐस लग रह ा, मा  पर ओस  ूंद ि ो।.

मायरा के चूचियों पर मेा मुँ आया,    ेरे सिर को ऊपर-नीचे करन लगी। े से उसके हाथ े को बढ़े, गरखे के बटन एक-एक   गए।.

मे ुँ उसके बूब्स पर ा, एक के बा एक। हा  ाम कर रहे थे, े-े दबा लत । फिर हाथ ऊपर े हट गए, सी िछव़े की तरफ बढ गए। मु  उसक नरम, घनी गांड को जकड िया, ़ा सख े।.

मेरा लंड अचनक खड़ा ो गया। उसक ांों पर ाथ रत  मैंने उसकी चूत को ़ा। वो उठी, मेरी गोद से सीे सोफे  ओर बढ गई ि टांगें अलग कर ो लेट गई।.

 लड ी चूत हर  गई े स्कूल की सही की चूत मैंने एकदम पहली बार देखी थी। वहाँ  बाल नहीं थे, ि ी साफ ि था कि बाल  कट े।.

ी में गत ायरा को देखकर मे शर गर हो उठा।  े उसके पास  गया। टांगों को थोड़ा और अलग िा, िर चूत पर ों रख दि।.

उसके शर में झटका-सा लगा,    ा दौड़ गई ो। मेे होंठ  िसके, े उसकी चूत पर ि वहीं ठहर गए, चूसने लगे।.

उसक ांें मेे मुं ें ीं, ैं े-े दांत चलाए। हथिों से वो अपने स्तन दबा रह ी। शर ़ा कर लचक उठा, सां  तरह ़ गया।.

उसकी चूत को  ़ो से  िनट तक चूसने के बाद मैंने वहाँ दो उंगलिाँ दर ा दी। ि हर गति   ीमा  एहस आया, जब मैंने अंदर-बाहर  वमें शुरू कर दिया।.

इसक  मैंने तीसरी उँगली भी   दर कर लिा। अब ो तीनों उँगलियाँ आगे- ो रही थीं, िा रुे। एक हाथ -- उसके तनों पर ा पहुँचा।  ी मैं उन्हें , सर  े उसकी ि में उँगलिाँ  लगा।.

े फोरप्ले में ी मिलत ै,  ी मायरा को भी इसका सहज अनुभव चाहि था। े- सब  बढ़ता गया, ि एक पल ऐस आय जब वह  नहीं सकी। उसने आग बढकर मेरी पैंट के बटन  ा शुरू कर दिया। िर वह पैंट को नीचे ीं , मैं ि अंडरवियर में रह गया।.

उसक  मेरे ़े-मे़े लंड पर आए। मेरी गर्मी छलां लग गई   कपड़े नीचे खिसक गए सब कु हर  गया। .

उसने जैसे ही अंडरवियर सरका, मेरा लंड छलां लगाकर बाहर आ गया। ाँपत  था ो। उसक नज़र पड ी उसकी आँखों में चमक घर कर गई। मायरा ने मेरे ंबे-चौ़े लंड को हथी में सम लिया, ि उसके ि पर ोंक दिया एक ुंबन।.

ि  ो मेरे लंड को मुँह में लकर चूसने लगी।.

उस वक तक ैं छह लड़कियों के साथ सेक्स किा था। मायरा   मेरे लंड पर ऐसे चिपके थे, ानो को औरत इतन गहर   ।.

मायरा को देखकर लग रहा था,  उस ि लंड चूसने से  गहर तसली मिल रही हो। उसका मुँ ेरे लंड पर - ऊपर-े जा रहा था। मैं भी इस अहस को ीरे- महस कर रहा था, आखें खुद-ब-ुद झपकने लगी थीं।.

थक गई ी वो, लंड चूसन  । सोफे पर  गई, चूत फैली । ऊपर आने को कहा मुे। ैं लेट गया उसके ऊपर,  जमा। होंठ चूे मैंने। दब गईं उसकी चूचियां,   तले।.

यरा ने े से े हाथ बढ़ाा। उसक गलिों ने मेरे लंड को अपनी चूत  ऊपर सही जगह पकड िया। एकदम छेद  िारे  ी,  तर िसक गया। तब तक लंड अपन आप दर चला गया।.

लंड ूत में    ि शरीर ुद--ुद झटक  लगा।.

उसकी बाहें मेरे ऊपर  गईं। होंठ ि उसक े, ो चूसने लगी।.

उसने फिर सां भरी, कहा – अबे राज... इतन अच लग रहा है। बस एक , मेरे टने से पहले तुम न टना।.

उसके होों पर , िर ोला - अपन आप  तन में मत ो। िरने में मे घट से घट एक  मिनट लगता है।.

उसने  नत ी मेरे होंठों पर जबरदसी चु  िया, ि े- कमर ऊपर उठाकर  शर  टकरे लगी।.

मुंह से उभरती सिसकियाँ अब और गहरी हो गई थीं - आह्ह राज...ओह्ह...इधर धको...़ा और तेज...े फाड़ दे को  भरकर...आह्ह...अब बस झटकों ें आवाज  रह ी।

मैं भी ेजी े उसकी ां में हर  झटक े रहा था।.

आह… सिसकते हुए उसक ुँह  िकला – तुम कहाँ थे इतने साल? पढ़ा के िों से ही तुें ि  ी थी मैं। घरवालों ने एक ुर् आदमी से शादी करवा ी, और जिंदगी  हर रं उठा लिया।.

उसकी बातें सुनकर मेरा उत और  बढ गया। अब मैंने जोर-जोर से चूत ें धक्के े शुरू ि, तभ वहाँ से पच-पच की आवाज आने लगी।.

़ी देर में ी पसीने  तन-बदन   ा था।  े लंड को बाहर ीं लिया गया। ो अभी भी पूरा तन  था। मायरा े घोड़ी जैी मु ें कने को कहा गया।.

वह मेरे सामने   तरफ  गई। मैं अपन  उसकी चूत में डालन लगा था, तभी उसने  उठकर रोक दिया।.

उसन कहा – ठहरो राज, अब तक मेरे पति ने मेरी गांड में कभ ुसा नहीं।  ि्कु  है। मैं चाहती हूँ, तुम भी वहाँ अपना डाल ो।

तब मैं बाथरूम  तर िमटिमाते बल   खड़ा  गया। सामने  पर सरसों का तेल की ी शीशी पड़ी थी, ढककन ा। मैंने उस उठा,   ा, ि अपने लंड पर तेल लग लगा। ाली शीशी  ें लि, वापस दरव  ओर बढ़ गया।.

 लग  मैंने मायरा की गांड पर   हथेली ी। एक उंगली दर सरकी, तेल के  झटपट  बन ।.

उसक  नकर मैं ीरे से हँा। ि मैंने अपनी उंगली आग बढ़ा, और  झट  छलां लगा ी।  कम करन  ि मैंने  कहा, िसक ाद वह ोड़ा  ठहर गयी। इधर ैंे तेल हथ पर डाला, अब तैयारी खत ी।.

अब मायरा को डाइनिंग टेबल के  ेजा। वह पहुं ो मैंने ि झुकाकर खड़े रहने को कहा। ऐसे कि उसकी गांड मेरे लंड के बरबर आ जा।.

उसकी गांड में ा लंड सने लगा, ीमे-ीमे। पसे से तरबतर होकर  आग बढ़ा। अचनक वो ची उठी - आईए… उफ्फ… ऊई मां, ुक  ुत्ते, मैंने चोदने को कहा था, कड़े-कड़े करने को नहीं! इतन   नहीं, वरना मैं ढह जाऊंगी।.

ैंे उसकी बातों  अनसुना कर दिया, ि उसकी गांड में लंड  िा। वो चीखती रही, पर मैं हर धक्के के  आग बढ रहा। ़ी देर बाद उसके चेहर पर   िखने लगी।.

ि मैंने उसकी  के ीचे  ेरा,   झटक ेकर उस  िा दिया। टनों  बल ककर मैंने उसकी ांें अपने कंों पर ाल लीं। तब तक मे ांें   ी थीं, उसकी वचा पर ला ि पड गए एक झटके के  ैं  आग बढ गया, बस कु  पल  अब।.

मैंने उसकी चूत में लंड ा दिया, िर ेजी से आगे- ोने लगा।  मिनट तक ो बा-बा झटक  रही। उधर उसक शर  पड़ गया, मगर मैं अभ   े धक्के  रह ा। उसकी चूत ें अभ   ंड  रहा था।.

एक घड़ी बाद मैंने भी उसकी ांों  ीच अपन सब कु ़ दिा, िर उस पर ढह गया। उसक  मेरी पीठ पर चलने लगे। उसकी टांगें अभी भी हव ें थीं।.

उसक ुँ  िकला - ़ी देर इस तरह पड़े रहो। गर रण करने के लिए ्राु के अंदर तक पहुँचना ज़रूी है। मैं े नहीं चाूँी कि आज ी तुम्हारी मेहनत बे चली जा।.

़ी देर तक एक-दूसरे के ऊपर पड़े रहने के बाद, हम खड़े हो गए। कपड़े संभालत , दोों  आग बढ़कर एक-दूसरे को भर ाहों ें  िा। ि े-े, ोंठों पर ंबी-ंबी    गईं।.

उसन कहा - अब तुम मेरे दूसरे पति हो। हर  जब भारत आऊंगी, तुम्हारे साथ एक नई   ात गु़ाूंी।.

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