चुपके चुपके सगे भाई के साथ चुदाई की
मैं, रानी, आज आपको अपनी ज़िंदगी का वो हसीन और गुप्त पल सुनाने जा रही हूँ, जिसने मेरी दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। जब मैं अठारह साल की हुई, तब मेरे जिस्म में एक अजीब सी बेचैनी शुरू हुई। मेरी चूचियाँ अब इतनी बड़ी और रसीली हो गई थीं कि उन्हें दबाने का मन करता था। गाँव में रहने वाली मैं थोड़ी भोली थी, नादान थी। सेक्स के बारे में कुछ-कुछ सुना था, लेकिन सिर्फ इतना समझती थी कि ये मम्मी-पापा के बीच की चीज़ है। मेरे दिमाग में ये बात बिल्कुल साफ थी कि सेक्स का मतलब बस यही है। लेकिन फिर मेरी एक सहेली, जो कई बार अपने बॉयफ्रेंड्स और यहाँ तक कि अपने चचेरे भाई के साथ चुदाई कर चुकी थी, उसने मुझे सेक्स की दुनिया से रूबरू करवाया। उसने बताया कि वो रोज़ रात को हॉट कहानियाँ पढ़ती है, और मुझे भी ऑनलाइन ऐसी कहानियाँ पढ़ने की सलाह दीउसके बाद मैंने रात को चोरी-छिपे ऐसी कहानियाँ पढ़ना शुरू किया। हर रात, जब सब सो जाते, मैं अपने कमरे में लैपटॉप खोलती और कामुक कहानियों में खो जाती। पहली बार जब मैंने ऐसी कहानी पढ़ी, मेरी चूचियाँ सख्त हो गईं, और मेरी चूत में एक अजीब सी गीलापन और गर्मी महसूस हुई। मैंने धीरे-धीरे अपनी चूचियों को सहलाना शुरू किया, फिर अपनी चूत को छुआ। वो एहसास ऐसा था, जैसे मेरे बदन में आग लग गई हो। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उस रात मुझे पहली बार सेक्स का असली मज़ा समझ आया। मैं सोचने लगी, अगर चूचियाँ सहलाने और चूत छूने से इतना मज़ा आता है, तो अगर कोई सचमुच चोदे, तो कैसा लगेगा? ये ख्याल मेरे दिमाग में बार-बार आने लगा। मैं हर वक्त कामुक हो जाती, और चुदने की इच्छा मेरे दिल में घर करने लगी। लेकिन आप तो जानते हैं, गाँव की लड़की के लिए ये कितना मुश्किल होता है। फ्रीडम तो दूर, सोचने की भी आज़ादी नहीं थी।मेरा भाई रवि, जो मुझसे सिर्फ एक साल बड़ा था, मेरे लिए अब सिर्फ भाई नहीं रहा। मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगी। दिन-रात उसके बारे में सोचती। उसका लौड़ा कैसा होगा? कितना बड़ा होगा? क्या मैं अपने भाई के साथ सम्बन्ध बना सकती हूँ? ये सवाल मेरे दिमाग में घूमते रहते। कभी लगता कि ये गलत है, समाज क्या कहेगा? लेकिन फिर मन कहता, अगर रवि मान जाए, तो इससे अच्छा क्या हो सकता है? घर का माल घर में ही रहे, इससे बेहतर क्या होगा? पर हर बार ये सोचकर डर लगता कि कहीं उसे बुरा न लग जाए। कहीं वो मुझे गलत न समझ लेएक रात की बात है। रात का खाना खाकर मम्मी-पापा नीचे फ्लोर पर सोने चले गए। मैं और रवि, जैसा कि हमेशा होता था, ऊपर पहले माले पर अपने कमरे में आ गए। हम दोनों का बेड एक ही कमरे में था, लेकिन अलग-अलग। रवि अपने मोबाइल पर कुछ पढ़ रहा था, और मैं लैपटॉप पर टाइम पास कर रही थी। कभी अमेज़न खोलती, कभी फ्लिपकार्ट, ड्रेस देखती, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था। मैंने ठान लिया था कि आज रवि से बात करूँगी। जो होगा, देखा जाएगा। रात के बारह बज चुके थे। मैंने फिर से कामुक कहानियाँ पढ़ना शुरू किया। एक कहानी इतनी हॉट थी कि मेरी चूचियाँ सख्त हो गईं, और मेरी चूत से पानी टपकने लगा। मैंने अपनी चूचियाँ मसलनी शुरू कीं, चूत को सहलाया। मेरे होंठ सूखने लगे, साँसें गर्म और तेज़ हो गईं। मैं अपने आप को रोक नहीं पाई।
अंधेरे में बिस्तर पर लेट गई, पर नींद का नाम नहीं ले रहा था। छाती में धड़कनें इतनी जोर से भाग रही थीं, मानो दिल बाहर आ जाएगा। रवि की ओर झांका, वो कम्बल ओढ़े आराम से सोया हुआ था। उठ बैठी, पानी पिया, फिर हौसला बटोरकर उसके पास चली आई। सांसें और तेज हो गईं। अगर नाराज हुआ, तो कह दूंगी - ख्वाब में तुम्हारे बिस्तर पर आ गई थी। धीरे से उसके बिस्तर पर लेट गई, कम्बल में सिमट गई। सांसें अब और तेज, जैसे भाग रही हों। वो सीधा पड़ा था। मैंने उसकी ओर मुड़कर धीरे से हाथ उसके पेट पर रख दिया। हल्के-हल्के छुआ। फिर थोड़ी और करीब सरक गई।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। मैंने हाथ उठाया, उसके होंठों को छुआ, इसके बाद गाल पर हथेली फिराई। शरीर में जैसे आग भर गई। एक पैर धीरे से उसकेऊपर डाल दिया। पेट पर हाथ घुमाया। अचानक ऐसा लगा, वो जाग चुका है। साँसें तेज़ हो गईं, गहरी पड़ने लगीं, और लगातार लार निगलने की आवाज़ आई। मैंने फिर होंठ छुए, उसकी साँसें गर्म लगीं। पक्का यकीन हो गया – जाग गया है, मगर कुछ नहीं बोल रहा। मेरे अंदर खुशी तैरने लगी।
हाथ डाला तो वो खड़ा था - मोटा, तना हुआ। सच यही था जो मैं सोच रही थी। ठंडक महसूस हुई जब पजामा नीचे खिसका, फिर कपड़ा हटा। हथेली में आया वो गर्म टुकड़ा, झुलसा सा गए ऊपर नीचे। टी-शर्ट फर्श पर आ गई। बिना कुछ रोके छाती बाहर झांकी, हवा ने छुआ। उसके ऊपर कुछ नहीं था। मैंने नीचे के कपड़े घुटनों तक ढकेल दिए। पैर हिले, और सब कुछ फर्श पर गिर गया।
मैंने भी अपना पजामा और पैंटी उतार दी। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मैं उसके बदन से सट गई, उसका लौड़ा पकड़कर हिलाने लगी। तभी रवि मेरी तरफ घूमा और मेरे होंठों को चूसने लगा। “रानी, ये क्या कर रही हो?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा, लेकिन उसकी आँखों में वासना साफ दिख रही थी। “भैया, मुझे मज़ा चाहिए… तुम भी तो चाहते हो ना?” मैंने शरमाते हुए कहा। वो मुस्कुराया और मेरी चूचियों को दबाने लगा। “आह्ह… भैया, और ज़ोर से…” मैं सिसकारी। उसने मेरे निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। “उम्म… आह्ह…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। मेरी चूत गीली होकर पानी छोड़ रही थ
मैं ज्यादा नहीं सह पाई। ऊपर चढ़कर मैंने उसके होंठ चूस लिए। मेरे स्तन उसकी छाती पर घिस रहे थे। "तू इतनी गरम कैसे है..." वो बोला, मेरे स्तनों को छूते हुए। सात इंच की छड़ मेरी जांघों के बीच रगड़ खा रही थी। थोड़ा हटकर मैंने जगह दी, वो अपनी छड़ मेरी योनि के मुंह पर ले गया। "धीरे... भैया," मैं कांपते स्वर में बोली। उसने हल्का धक्का दिया, और छड़ अंदर घुसने लगी। "आह्ह... उह्ह..." मैं सिसक उठी, दर्द और आनंद में। चार-पांच धक्कों में पूरी छड़ अंदर चली गई।
अब खेल शुरू हुआ। वो नीचे से धक्का दे रहा, मैं ऊपर से झटके लगा रही। कमरे में आवाज़ें फैलीं - “सट-सट... फच-फच…” मैं चिल्लाई, “आह्ह… भैया… और तेज़… मुझे पूरा छेद दे…” मेरी छाती काँप रही थी, उसकी मुट्ठी में थी। “तेरी चूत इतनी कसी हुई… ओउह…” उसके मुँह से निकला। जैसे बह रहे थे दोनों। एकदम उठा वो, दरवाज़ा देखा, खिड़की घूरी, बल्ब जलाया, फिर मेरे नंगे शरीर पर नज़र टिक गई। “तू तो असली खज़ाना है,” बोला, और मेरी चूत पर जीभ फेरने लगा।
“ओह्ह… भैया… आह्ह… क्या कर रहे हो…” मैं पागल हो रही थी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी, और मैं सिसकारियाँ ले रही थी। “उम्म… आह्ह… और चाटो…” मैंने कहा। उसने मेरी चूचियों को दबाया, मेरे होंठों को चूसा, और फिर मेरे पैर फैलाकर अपना लौड़ा मेरी चूत पर रखा। “अबकी बार तुझे जमकर चोदूँगा,” उसने कहा और ज़ोरदार धक्का मारा। “आह्ह… उह्ह… भैया… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं चिल्लाई। वो दे दना दन चोदने लगा। मेरी चौड़ी गाण्ड हिल रही थी, और कमरे में “फच-फच… सट-सट…” की आवाज़ गूंज रही थी।करीब आधे घंटे तक हमने एक-दूसरे को खुश किया। मैं दो बार झड़ चुकी थी, और आखिरकार रवि भी झड़ गया। हम दोनों हाँफते हुए लेट गए। “रानी, ये बात हमारे बीच रहेगी, ठीक है?” उसने कहा। “हाँ, भैया… और हम रोज़ मज़े करेंगे,” मैंने शरारत से कहा। उस रात हमने दो बार और चुदाई की। सुबह तक मेरा बदन थक गया था, लेकिन मन तृप्त था।
आधे साल बाद बड़ी तमन्ना से हुए विवाह के बाद मैं पति के घर पहुँच गई। हर बार अपने घर आकर, फिर उसी पल में रवि के साथ संबंध बन जाते हैं। कभी-कभ
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