चुपके चुपके सगे भाई के साथ चुदाई की

Jan 13, 2026 - 11:39
Jan 13, 2026 - 19:48
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चुपके चुपके सगे भाई के साथ चुदाई की

मैं, रानी, आज आपको अपनी ज़िंदगी का वो हसीन और गुप्त पल सुनाने जा रही हूँ, जिसने मेरी दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। जब मैं अठारह साल की हुई, तब मेरे जिस्म में एक अजीब सी बेचैनी शुरू हुई। मेरी चूचियाँ अब इतनी बड़ी और रसीली हो गई थीं कि उन्हें दबाने का मन करता था। गाँव में रहने वाली मैं थोड़ी भोली थी, नादान थी। सेक्स के बारे में कुछ-कुछ सुना था, लेकिन सिर्फ इतना समझती थी कि ये मम्मी-पापा के बीच की चीज़ है। मेरे दिमाग में ये बात बिल्कुल साफ थी कि सेक्स का मतलब बस यही है। लेकिन फिर मेरी एक सहेली, जो कई बार अपने बॉयफ्रेंड्स और यहाँ तक कि अपने चचेरे भाई के साथ चुदाई कर चुकी थी, उसने मुझे सेक्स की दुनिया से रूबरू करवाया। उसने बताया कि वो रोज़ रात को हॉट कहानियाँ पढ़ती है, और मुझे भी ऑनलाइन ऐसी कहानियाँ पढ़ने की सलाह दीउसके बाद मैंने रात को चोरी-छिपे ऐसी कहानियाँ पढ़ना शुरू किया। हर रात, जब सब सो जाते, मैं अपने कमरे में लैपटॉप खोलती और कामुक कहानियों में खो जाती। पहली बार जब मैंने ऐसी कहानी पढ़ी, मेरी चूचियाँ सख्त हो गईं, और मेरी चूत में एक अजीब सी गीलापन और गर्मी महसूस हुई। मैंने धीरे-धीरे अपनी चूचियों को सहलाना शुरू किया, फिर अपनी चूत को छुआ। वो एहसास ऐसा था, जैसे मेरे बदन में आग लग गई हो। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उस रात मुझे पहली बार सेक्स का असली मज़ा समझ आया। मैं सोचने लगी, अगर चूचियाँ सहलाने और चूत छूने से इतना मज़ा आता है, तो अगर कोई सचमुच चोदे, तो कैसा लगेगा? ये ख्याल मेरे दिमाग में बार-बार आने लगा। मैं हर वक्त कामुक हो जाती, और चुदने की इच्छा मेरे दिल में घर करने लगी। लेकिन आप तो जानते हैं, गाँव की लड़की के लिए ये कितना मुश्किल होता है। फ्रीडम तो दूर, सोचने की भी आज़ादी नहीं थी।मेरा भाई रवि, जो मुझसे सिर्फ एक साल बड़ा था, मेरे लिए अब सिर्फ भाई नहीं रहा। मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगी। दिन-रात उसके बारे में सोचती। उसका लौड़ा कैसा होगा? कितना बड़ा होगा? क्या मैं अपने भाई के साथ सम्बन्ध बना सकती हूँ? ये सवाल मेरे दिमाग में घूमते रहते। कभी लगता कि ये गलत है, समाज क्या कहेगा? लेकिन फिर मन कहता, अगर रवि मान जाए, तो इससे अच्छा क्या हो सकता है? घर का माल घर में ही रहे, इससे बेहतर क्या होगा? पर हर बार ये सोचकर डर लगता कि कहीं उसे बुरा न लग जाए। कहीं वो मुझे गलत न समझ लेएक रात की बात है। रात का खाना खाकर मम्मी-पापा नीचे फ्लोर पर सोने चले गए। मैं और रवि, जैसा कि हमेशा होता था, ऊपर पहले माले पर अपने कमरे में आ गए। हम दोनों का बेड एक ही कमरे में था, लेकिन अलग-अलग। रवि अपने मोबाइल पर कुछ पढ़ रहा था, और मैं लैपटॉप पर टाइम पास कर रही थी। कभी अमेज़न खोलती, कभी फ्लिपकार्ट, ड्रेस देखती, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था। मैंने ठान लिया था कि आज रवि से बात करूँगी। जो होगा, देखा जाएगा। रात के बारह बज चुके थे। मैंने फिर से कामुक कहानियाँ पढ़ना शुरू किया। एक कहानी इतनी हॉट थी कि मेरी चूचियाँ सख्त हो गईं, और मेरी चूत से पानी टपकने लगा। मैंने अपनी चूचियाँ मसलनी शुरू कीं, चूत को सहलाया। मेरे होंठ सूखने लगे, साँसें गर्म और तेज़ हो गईं। मैं अपने आप को रोक नहीं पाई।

BMasters - 203 Brother, Sister, Siblings, Cousins

े में बितर पर लेट गई, पर नींद नहीं रहा था। ी में धड़कनें इतनी जो रही थीं, माो दिल बाहर एगा। रवि की ओर ांा, वो कमबल ओढ़े आर से था। उठ बैठी, पानी पिया, फिर हौसलबटरकर उसके पास चली आई। सांसें और तेज हो गईं। अगर ारा , तो कह दूंगी - में तुारे बितर पर आ गई थी। धीरे से उसके बितर पर लेट गई, कमबल में सिमट गई। सांसें अब और तेज, रही ों। वो सीधा पड़ा था। मैंने उसकी ओर मुकर धीरे से हाथ उसके पेट पर रख िा। हल्के-हल्के । फिर थोड़ी और करीब सरक गई।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कनलगा। मैंने हाथ उठा, उसके होंठों को छुआ, इसक गाल पर हथिराशरीर ें ैसे आग भर गई। एक पैर ीरे से उसकेऊपर िा। पेट पर ुमाा। अचनक ऐसा लगा, वो जाग ा है। साँसें तेज़ हो गईं, गहरपडलगीं, और लगार ार निगलने की आवाज़ आई। मैंने ि होंठ छु, उसकी साँसें गर्म लगीं। पका यकीन हो गया – जाग गया है, मगर कुछ नहीं बोल रहा। मेरे दर खुशी रनलगी।

हाथ डाला ो खड़ा था - मोटा, तना हुआ। सच यहो मैं सो रही। डक महस जब पजामा नीचे िसका, फिर कपड़ा हटा। हथेली में आया वो गर्म टुकड़ा, लसा सा गए ऊपर नीे। टी-शर्ट फर पर गई। बिना हर ांी, हवा ने उसकऊपर नहीं था। मैंने कपड़े घुटनों तक ढक दि। पैर िे, और सब कु फर पर ि गया।

मैंने भी अपना पजामा और पैंटी उतार दी। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मैं उसके बदन से सट गई, उसका लौड़ा पकड़कर हिलाने लगी। तभी रवि मेरी तरफ घूमा और मेरे होंठों को चूसने लगा। “रानी, ये क्या कर रही हो?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा, लेकिन उसकी आँखों में वासना साफ दिख रही थी। “भैया, मुझे मज़ा चाहिए… तुम भी तो चाहते हो ना?” मैंने शरमाते हुए कहा। वो मुस्कुराया और मेरी चूचियों को दबाने लगा। “आह्ह… भैया, और ज़ोर से…” मैं सिसकारी। उसने मेरे निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। “उम्म… आह्ह…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगीं। मेरी चूत गीली होकर पानी छोड़ रही थ

मैं ादा नहीं सह पाई। ऊपर चढ़कर ैंे उसके होंठ चू ि। मेरे तन उसकी छाती पर िस रहे थे। "तू इतनगरम कैे है..." ा, मेरे तनों को ूते हुए। सात इंच की छड़ मेरी जांघों के बीच रगड़ खा रही थी। थोड़ा हटकर ैंे जगह ी, ो अपनी छड़ मेरी ि के ुं पर गया। "धीरे... ा," मैं कांपते वर में ी। उसने हल्का धक्का िा, और छडदर घुसने लगी। "आह्ह... उह्ह..." मैं िसक उठी, दर्द और आन में। चार-पांच धकों में पूरी छडदर चलगई

अब खेल शुरू हुआ। वो नीचे से धक्का े रहा, मैं ऊपर से झटकलगरही। कमरें आव़ें ीं - “सट-सट... फच-फच…” मैं ि, “आह्ह… भैया… और ेज़… मुझे े…” मेरी ाँ रही थी, उसकें थी। “तेरी चूत इतनकसी हुओउह…” उसकुँ े निकला। जैबह रहों। एकदम उठा ो, दरवाज़ा ा, ि़की ी, बल जलाा, ि मेरे नंगे शरीर पर नज ि गई। “तू तो असलखज़ाा है,” ा, और मेरी चूत पर रने लगा।

“ओह्ह… भैया… आह्ह… क्या कर रहे हो…” मैं पागल हो रही थी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी, और मैं सिसकारियाँ ले रही थी। “उम्म… आह्ह… और चाटो…” मैंने कहा। उसने मेरी चूचियों को दबाया, मेरे होंठों को चूसा, और फिर मेरे पैर फैलाकर अपना लौड़ा मेरी चूत पर रखा। “अबकी बार तुझे जमकर चोदूँगा,” उसने कहा और ज़ोरदार धक्का मारा। “आह्ह… उह्ह… भैया… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं चिल्लाई। वो दे दना दन चोदने लगा। मेरी चौड़ी गाण्ड हिल रही थी, और कमरे में “फच-फच… सट-सट…” की आवाज़ गूंज रही थी।करीब आधे घंटे तक हमने एक-दूसरे को खुश किया। मैं दो बार झड़ चुकी थी, और आखिरकार रवि भी झड़ गया। हम दोनों हाँफते हुए लेट गए। “रानी, ये बात हमारे बीच रहेगी, ठीक है?” उसने कहा। “हाँ, भैया… और हम रोज़ मज़े करेंगे,” मैंने शरारत से कहा। उस रात हमने दो बार और चुदाई की। सुबह तक मेरा बदन थक गया था, लेकिन मन तृप्त था।

आध बड़ी तमन्ना ि े बाद मैं पति घर पहुँ गई। हर ार अपनघर आकर, ि उसपल में रवि े सा बन जाे हैं। कभी-कभ

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