एक सगा भाई ने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए, हालांकि मैं विधवा थी।

Jan 20, 2026 - 11:40
Feb 5, 2026 - 17:10
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एक सगा भाई ने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए, हालांकि मैं विधवा थी।

सजजनों, रूही सिंह ोल रही हूँ। आपक आन पर मन   गया। इतने सालों से कहानियाँ पढ़ती आई हूँ, िसमें  ाल ी हूँ।  ाते ही पन्ने उलटन  कर ेती हूँ, शर लस उठता है तब आज ेरी ी है  कहन ी, ऐस घटित हु ा जो िमा रष कर दे। ऐस लग ानो तुम्हारी ांों  ीच  िल रह ो, े-े।

मैं कोलकाता की हूँ, 26 साल की जवान, गोरी, मस्त माल। मेरे पति टैक्सी ड्राइवर थे, पांच साल पहले हार्ट अटैक से मर गए। वो मुझे रात-दिन चोदते थे, उनकी चुदाई से मेरी चूत की आग बुझती थी। उनके जाने के बाद मैं विधवा हो गई। माता-पिता पहले ही गुजर चुके थे, इस दुनिया में मेरा बस एक भाई सुधीर था। मैं उसके पास आ गई। सुधीर कुंवारा था, 28 साल का, मस्त जवान, लंबा-चौड़ा, और एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर। महीने का एक लाख कमाता था। कोई लड़की उसे पसंद नहीं आई, इसलिए शादी नहीं की थी।
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गर ाँें ों पर महस हुं, सुधीर ने कंधे पर हाथ ा। "ुम्ें िसी   िं नहीं करनी,"  े से ा, " जगह अब ुम्ारी ै।"

मुझे उसकी बात सुनकर सुकून मिला। वरना ज्यादातर भाई अपनी गर्लफ्रेंड की चूत के पीछे पड़े रहते हैं। सुधीर ऐसा नहीं था। मैं उसके साथ रहने लगी। एक रात, करीब दो बजे, मैं बाथरूम जाने उठी। देखा, सुधीर नंगा खड़ा है, उसका 7 इंच का मोटा लंड पकड़कर तेजी से मुठ मार रहा था। उसका लौड़ा इतना मस्त था कि मेरी चूत में खुजली होने लगी। वो मुठ मारकर कमरे में चला गया। मुझे लगा, इसे तो एक टाइट चूत चाहिए, और वो मेरे पास थी। मेरे पति ने मुझे तीन साल तक चोदा था, लेकिन अब मेरी चूत प्यासी थी। मैं अभी जवान थी, मेरे 36 इंच के मम्मे, गोरी जाँघें, और मलाई जैसी चूत किसी को भी पागल कर सकती थी।

सुधीर के कमरे में ैं  गई। सर रात, शर पर कंपकंपी  गई। भाई को अपनी चूत देने   ि ें था। उसका लंड मेरे तर , इस  ने बेचैन कर रखा था। बितर पर चढ़ी, रजाई   सरकी, उसके  लेट गई। वो गहरी नींद में ा था। धीरे े रजाई ें ी स्वेटर उता, ि लोअर, ब्रा, पैंटी सभी नि ी। अब तनका था िर् वचा, मम्मे सरी में सि गए उसक ास िसटकर चिपक गई, नंगे शर ो उसकी गर्माहट  ू लिा। ंड मेरी जाँघों को छू रहा था, चूत  नम टपकने लगी।

़ी ेर ें सुधीर   बढ़ने लगा। नींद में   ी उसकी लं छड ि रही थी। मैंने अपना बायाँ 36 इंच का तन  े उसके होंों   ूं दिया, उसकी गलियों   ि ी पर ा दिया। "ँ... स्स..." वह िना  ी चूसने लगा। उसकी पकड़ मेरे दूसरे तन पर गहर  गई ीचे मेरी ांों  ीच ता  रहा था। एकदम े उसकी आव थमी। खुली ों े मुझे नंगा देखकर वह िझक उठा - “इसे... ऐसा क्यों कर रही हो, रूही?”

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“शांत हो जा, सुधीर… तूने मुझे घर दिया, क्या मैं तुझे अपनी चूत नहीं दे सकती? ये राज़ हमारे बीच रहेगा,” मैंने उसकी आँखों में देखकर फुसफुसाया।

थोड़ा  िझक ो, मगर मेरी गोरी ाती और नरम दर ो देखकर उसका डंा फिर ऊपर उठ आया। "तुे... कई इसक इचा है?" उसकी आवाज़ ांप रह  जब ा।

“हाँ, भाई… मेरी चूत तेरे लंड की प्यासी है,” मैंने बेशर्मी से कहा।

उसने मु पर झपट िा, मेरे तनों ो चूसने लगा। "आह ईई… ओह… अअ… माँ…" मेरी ांें िनने लगीं। सुधीर की जीभ मेरे बतिों पर  रही थी, उसके दांत हल्के-हल्के कुतर रहे थे। ", और  े चूस… मेरी ी को ांों   ले," मैंने उसके सिर ो अपने  े चिपक िया। वो एक   की तरह लग गया, जैसे किसी   ऊपर टूट पड़ा हो। मेरी ि  रस बह रहा था। "्ह्ह… ां…  ऐसे… मेरे तन िगल जा," मैं ची उठी।

उसने मेरे बाएँ तन को  मिनट तक चूसा, इसक ाद दािे को “चूं… चूं…” करत  चूसने लगा। मेरे दर जलन   गई। "भैा, मेरी ा चाटो... मुझे  तरह ेद डालो," मैं ांफत  ी। सुधीर ने रजाई एक तरफ कर दी, मेरे नरम पेट पर ों रने लगा। उसकी जीभ ीमे- ेरी नाभि में घूम रही थी, मेरे शर में रझी दौड़ गई। "आआह्ह… स्स्स… और ऐस ी… नाभि को  चाो," मैं सिसकत  ोली। वह मेरी पैर की उंगलियों ो चूसने लगा, हर उंगली को अपने मुँह में ले रहा था। मेरी ि से तरल ूँ-ूँ ि रहा था।

मैं बहुत गोरी थी, मेरी जाँघें  चूत ऐस ीं े मलाई से सज ों। ुधीर मेरे  पर ोहि हो गया था। उसकी आँखों में  इचा साफ झलक रही थी,   हत ो। “रूही, तू किसी शहन से कम नहीं, तेरी चूत लंड  ि अधी है,” उसने  वर ें कहा।

“हाँ, भाई… मेरी चूत तेरे लंड की गुलाम है… फाड़ दे इसे,” मैंने बेशर्मी से जवाब दिया।

सुधीर मेरे पैर, टखने, और घुटनों को चूसने लगा। फिर मेरी गोरी जाँघों पर दाँत गड़ाने लगा, निशान छोड़ रहा था। “आआह्ह… भाई, मेरी जाँघें काट… मुझे और गर्म कर,” मैं चिल्लाई। उसने मेरे पैर फैलाए, मेरी क्लीन शेव्ड चूत साफ़ दिख रही थी। वो मेरी चूत पर टूट पड़ा, उसकी जीभ मेरे चूत के दाने को चूस रही थी। “स्स्स… हाँ… मेरी बुर चाट… इसे रगड़ दे,” मैंने उसके सिर को अपनी चूत पर दबाया। मेरी चूत बिल्कुल सनी लियोन की तरह लाल और रसीली थी। सुधीर की जीभ मेरी चूत के हर कोने को चाट रही थी। “…मम्मी… मम्मी… सी सी सी… हा हा हा… ऊऊऊ… ऊँ… ऊँ… उनहूँ उनहूँ…” मैं कसमसाती रही। मेरी टाँगें पूरी खुली थीं, सुधीर को मेरी बुर पीने में कोई दिक्कत नहीं थी।

“रूही, तेरी चूत तो शहद जैसी है… इसे चाटकर मेरा लंड फटने को है,” उसने कहा।

“तो चाट ना, भाई… मेरी चूत को खा जा,” मैंने चिल्लाकर कहा।

उसकी मोटी उंगलियां मेरे दर  गईं, धम  तरह। चिल्ाते  मैं कहा - “मम्मी… सी… सी… हा… हा… ऊऊऊ…” बालों को मैं झटका, ूरी ताकत े। "जोर से," मैं ोली, "और ़, ाई…" तर  रह ीं ो उंगलियां, मा कई  हाथ चला रहे ों। शरीर ुका, दर और आन के बीच ा। "...उई… माँ… ओह्ह… अहह…" बडबड़ा रही थी ैं। सुधीर ने एक झटक ें  िा, दांतों से कर लग  सब कु टू रहा ो।

फिर वो मेरी चूत को उँगलियों से चोदते हुए चाटने लगा। मैं अपनी गांड और कमर उठा-उठाकर तड़प रही थी। “भाई, और चाट… मेरी बुर को सूखा दे,” मैं चीखी। आधे घंटे तक उसने मेरी चूत को चाटा, मेरा रस पीया। फिर उसने अपना स्वेटर और लोअर उतारा, उसका 7 इंच का मोटा लंड मेरी चूत पर रखा। “पुच्छ” की आवाज़ के साथ उसने धक्का मारा। “आआह्ह… भाई, तेरा लौड़ा कितना मोटा है… मेरी चूत फट जाएगी,” मैं चिल्लाई। वो मेरे ऊपर लेट गया, मैं उसके चेहरे, गाल, माथे को चूमने लगी। “चोद मुझे, भाई… मेरी बुर को रगड़ दे,” मैंने कहा।

वो गचा-गच मुझे चोदने लगा। “…ही ही ही… अहह्ह्ह… उहह्ह… उ उ उ…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। सर्दी में भी हमारे बदन पसीने से तर थे। “रूही, तेरी चूत तो टाइट है… मेरा लंड इसे फाड़ देगा,” उसने गंदी बात की। “हाँ, भाई… फाड़ दे… मेरी चूत तेरे लंड की रंडी है,” मैंने जवाब दिया। उसकी कमर मशीन की तरह मेरी चूत में लंड पेल रही थी। मेरी कमर अपने आप नाचने लगी। “उ उ उ… ऊऊऊ… ऊँ… ऊँ… अहह्ह्ह… सी सी सी… हा हा हा… ओ हो हो…” मैं चुदवाते हुए चीख रही थी। आधे घंटे तक वो मेरी चूत को रगड़ता रहा। “आ आह आह…” वो हाँफने लगा। मैंने उसे कसकर बाहों में जकड़ लिया। “भाई, मेरी चूत में झड़ जा… अपना माल मेरे अंदर डाल,” मैंने चिल्लाया। तेज़ धक्कों के साथ वो मेरी चूत में झड़ गया। उसका गर्म माल मेरी चूत में भर गया। हम दोनों हसबैंड-वाइफ की तरह चिपककर प्यार करने लगे।

“रूही, ये चुदाई का राज़ हमारे बीच रहेगा,” सुधीर ने कहा।

“हाँ, भाई… ये हमारा गंदा राज़ है,” मैंने हँसकर कहा।

बह  शनी में हम एक-सर े लिपटकर सो गए। पहली बा जब वह  दर ुसा, तभ ुधी  डर खत्म ो गया। मेी शर्म  ीरे-ीरे उड लगी। हर ात हम ितर पर उलझ े। पड़ोस ें हमें भाई-बहन समझ ा, िर  हम िपकर ऐस ुड़ े कोई ़ा ो। उस दिन हव गर्म ी। सूरज की   पर  रही थीं। मेरे मन ें आय ि सुधीर का लंड ुं ें  ूं।

“सुधीर, तेरा मोटा लौड़ा चूसने का मन है,” मैंने बेशर्मी से कहा।

वो हँस पड़ा, “चल, रंडी… चूस मेरे लंड को।”

खिड़की के पास  ें हम लेट गए। कपड़े अलग कर दिए। नंगी थी मैं, मे तन े लटक रहे थे। सुधीर ने ाती को दबा। मैंने उसकी ांों    डाा। "अरे...   बह बड़ा है," मेे मुँह  िकला।  ऊभर आया। मैं आग ककर उसे लिया। "...ँह... ँह... हाँ... हाँ... उममम..." ो सांस रोे रहा। एक हाथ   िा, दूसरे   ारी रखा। "तू ऐसे चूस रही है,  पहल  नती हो," उसक ात आई। "ाँ, ेरा शरीर मेा है," मैंने कहा। इतनी दे तक वह चलता रहा, वो दब रहा, मैं आग बढी रही।

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मुझे चुदवाने की तड़प हो रही थी। “सुधीर, रोज़ तू मुझे लेटकर चोदता है, आज कुतिया बनाकर पेल,” मैंने कहा।

“जैसी तेरी मर्ज़ी, रंडी,” उसने हँसकर कहा।

उसने मुझे कुतिया बनाया। मैं घुटनों और हाथों पर थी, मेरे चूतड़ हवा में थे। सुधीर मेरी चूत चाटने लगा, उसकी जीभ मेरे चूतड़ों को चूम रही थी। “आआह्ह… भाई, मेरे पुट्ठे चाट… मेरी गांड चूस,” मैं चिल्लाई। मेरे चूतड़ लाल खरबूजे की तरह थे। उसने मेरे चूतड़ों को चूमा, फिर चूत चाटने लगा। उसने अपना 7 इंच का लौड़ा मेरी चूत में पेल दिया और कुत्ते की तरह चोदने लगा। “पच… पच… पच…” की आवाज़ गूँज रही थी। मैं “…उंह उंह उंह… हूँ… हूँ… हममम अहह्ह्ह… अई… अई…” चीख रही थी। मेरी चूत में आग लग रही थी। “भाई, और ज़ोर से… मेरी चूत फाड़ दे,” मैं चिल्लाई। एक घंटे तक उसने मुझे रगड़-रगड़कर चोदा। “प्लीज़… प्लीज़… भाई… मेरे मम्मों को चूस… उ उ उ… अअअ…” मैं रंडी की तरह चीख रही थी। फिर वो मेरी चूत में झड़ गया। उसका सफ़ेद रस मेरी चूत से शहद की तरह टपक रहा था।

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