एक लड़के ने अपनी दो बहनों के साथ यौन संबंध बनाए।
इस कहानी में मैं और गौरी हैं। हमारे असली नाम यहाँ बदल दिए गए हैं। असल में, गौरी मेरी मौसी की बेटी है। मतलब, मेरी माँ की मौसी की बेटी की बेटी। वो मुझसे दो साल की बड़ी थी - वो बीस की हो चुकी थी, मैं अठारह का। हमारे परिवार और उनके बीच अच्छे रिश्ते थे। मैं गौरी को अपनी बहन समझता था। मगर मेरा ख्याल बदल दिया रानी ने और उसके भाई ने। रानी गौरी से तीन साल बड़ी थी - उसके फैले हुए बाल, गोरा रंग, हमेशा मुस्कुराती रहती थी। उसका भाई मजबूत बनावट का था, आयु में मुझसे चार साल ऊपर।
गौरी की नानी मेरी नानी के घर से तुरंत पहले वाली गली में रहती थी। शादी के कुछ ही साल बाद उनके पति का निधन हो गया था। इसलिए उनके पास सिर्फ दो बेटियाँ रह गई थीं। ऐसे में मेरे नाना ने उन्हें अपने परिवार के पास ही जगह दे दी। एक छोटा सा घर भी उन्होंने बनवा दिया था। समय बीतने के साथ वो वहां अकेली रहने लगी थीं। तब गौरी की मम्मी ने फैसला किया कि रानी को नानी के पास छोड़ दिया जाए। रानी उनके साथ रहकर घर संभालती। धीरे-धीरे वो खेतों की खुली हवा में पलने लगी।
हुआ यूं कि एक बार मैं अपनी मम्मी के साथ नानी के घर गया। शाम को मैं नानी के घर से गौरी की नानी के घर चला गया। वहां पर मुझे गौरी की बड़ी बहन रानी मिली। रानी ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुला लिया। मैं अंदर पहुंचा और एक खाट पर बैठ गया। वहीं पर रानी भी मेरे पास बैठ गई। कुछ देर तो उसने मुझसे बात की, घर-परिवार की, स्कूल की। फिर थोड़ी देर बाद वो लेट गई और अपनी सलवार में हाथ डालकर हिलाने लगी। कुछ देर तो मैं भी यूं ही देखता रहा और फिर मैंने पूछा कि ये क्या कर रही हो। उसने कहा कि मेरी चूत में खुजली हो रही है। मैं इसको खुजा रही हूं। मैंने कहा ये चूत क्या होती है तो वो बोली अभी तू बच्चा है बड़ा हो कर जब चूत मारेगा तो सब समझ जाएगा।
बोला था मैंने - मारते कैसे हैं? जवाब दिया उसने, हां, तभी तो बच्चे होते हैं। पूछा मैंने फिर, कैसे मारते हैं इसे? कहने लगी वो, किसी को बताएगा तू? मैंने कहा, नहीं बताऊंगा। तब बोली, वादा कर। मैंने कहा, वादा किया। अचानक उठी और सलवार उतार दी। चिपक गई मेरे सरीर से। कुछ समझ नहीं आया मुझे। घबराहट थी। सोच नहीं आ रहा था कि अब क्या होगा। फिर बोला मैं, ऐसा क्यों कर रही हो? बोली वो, सीखना है या नहीं चूत मारना? ख़ामोश रहा मैं।
फिर वो बोल पड़ी - आज तू मुझे खुश कर दे, तो मैं तुझे गौरी की चूत भी दिला दूंगी। मैंने पूछा, "गौरी की?" उसने कहा, हाँ। थोड़े दिनों में गौरी को लंड की जरूरत पड़ेगी, तू भी चूत ढूंढ रहा है। तो फिर तुम दोनों मिलकर समझदारी कर लेना। मैंने कहा, अभी क्यों नहीं? तो बोली, अभी गौरी छोटी है। मैंने पूछा, कितना और इंतजार करना होगा? बोली, जब तक वो बड़ी नहीं हो जाती, जब तक मैं तेरे हाथों से उसकी सील न तोड़ दूं। अब तू शांत हो जा, मुझे मजा आने लगा है।
मौन हो गया मैं, आगे कुछ नहीं बोला। वो मेरी पैंट की जिप नीचे उतार चुकी थी। लंड बाहर आया, उसने उसे अपनी चूत पर घिसना शुरू कर दिया। बीच में बोली - उठा इसे, तुरंत। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे करूँ। एक झटके में उसने छोटे लंड को चूत के ऊपर ठूंस दिया। थोड़ा सा ही अंदर गया। फिर बोली - अभी डाल इसे। मैंने कोशिश की, पर उसी ने हाथ से पकड़कर भीतर धकेल दिया। हिलना शुरू किया वो धीमे-धीमे। अब उसके योनि से पानी टपकने लगा।
उसने कहा, मुझे अच्छा लग रहा है, थोड़ी देर और ऐसे ही धक्के लगा। मैंने वैसा ही किया। कुछ पल बाद वो बोली, अब उठ जा, तूने मुझे पूरा आनंद दे दिया। फिर उसने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया। इसके बाद वो मेरे लिंग को हाथ में लिया और बोली, ये अभी छोटा है, इसे बढ़ाना होगा। क्योंकि जितना बड़ा और मोटा लिंग होता है, लड़की या औरत उतना ही आनंद लेती है। अगर लिंग सही ढंग से घुसता है तो बार-बार चढ़ाई की जरूरत नहीं पड़ती। तुझे भी अच्छा लगेगा। तेरा लिंग भी तंग जगह में सही तरीके से घूमेगा। जब लिंग चुतड़ या गध में तंग और सही जाता है, तो दोनों को खूब आनंद आता है।
उसने मेरे गीले लंड को मुंह में ले लिया, धीमे से चाटने लगी। ऊपर से नीचे तक जीभ घुमाई, बीच में खींचकर चूसा, ठीक जैसे कोई मिठाई हो। ऐसा लगा जैसे कुछ अजीब हो रहा है, पर मजा भी आ रहा था। इतने में दरवाजे पर आवाज आई। तुरंत मुंह से निकालकर उसे पैंट में छिपा दिया, फिर बोली - पैंट बंद कर ले। वो उठी, सलवार का नाड़ा बांधते हुए दरवाजे की ओर बढ़ गई। बाहर पड़ोस का एक आदमी खड़ा था। दोनों बात करते रहे, कुछ पल बाद वो चला गया। रानी वापस कमरे में आ गई।
मैंने पूछा, अब गौरी की सील कब तोड़ोगी? उसने जवाब दिया, अभी तेरा बहुत छोटा है, इसे बढ़ना होगा। फिर मैंने पूछा, ऐसा कैसे होगा? उसने कहा, इसे किसी के मुंह में डालकर चुसवाना पड़ेगा। मैंने कहा, फिर तुम्हीं बढ़ा दो। उसने कहा, ठीक है, लेकिन जब तू मुझसे मिले, तब मैं तेरा बड़ा करूंगी, और तू मुझे खुश भी करना। मैंने कहा, सही बात है। इसके बाद मैं नानी के घर आ गया, रात को खाना खाया और सो गया। अगली सुबह जल्दी उठे, घर वापस आ गए।
अब रानी से मेरा कोई लेना-देना नहीं था। दो साल के बाद एक दिन मैं गौरी के घर पहुंचा, तो वहां उसका बड़ा भाई मिल गया। वो दिन राखी का त्योहार था। गौरी की गली से एक लड़की आई हुई थी, जो उसकी पुरानी सहेली थी। उसका नाम अंजू था। अंजू बहुत गोरी थी, बिलौरी रंग, चूची आंखें, छोटे-छोटे बाल, और ऊपर से लंबे। उसने महरून रंग का फ्रॉक पहन रखा था। कुछ देर बाद हम गौरी के घर में छुपा-छुपी खेलने लगे।
गौरी, मैं, उसका बड़ा भाई, अंजू और पुरानी गली के कुछ बच्चे। स्टोर रूम में हम तीनों छिप गए – मैं, अंजू और गौरी का भैया। भीतर, उसके हाथ में उसका लंबा लंड था। आकार बहुत ज्यादा था। धीरे-धीरे वो अंजू को करीब खींच रहा था। अंजू झटके से पीछे हटी। डरते हुए कहा – "गैप को पता चल जाएगा"। तभी उसने मेरी तरफ देखा। पूछा – "तू किसी को बताएगा?" मैंने सिर्फ इतना कहा – "अगर तू मुझे भी दिखा दे, तो नहीं बताऊंगा"। वो रुका थोड़ी देर। फिर बोला – "ठीक है, रात में सब कुछ बता दूंगा"।
उसने अंजू की फ्रॉक ऊपर ठेला, कच्छी नीचे गिरा दी। बैठ गया संदूक पर, अपने ऊपर खींचा अंजू को, हिलाना शुरू किया धीरे-धीरे। थोड़ी देर में याद आया - रानी की लंड बढ़ानी थी। मुझे भी चाहत थी अंजू के मुंह में डालने की, तभी दरवाजे पर आवाज आई। झट से उठी अंजू, कच्छी ऊपर खींची, बाहर निकले हम तीनों।
गौरी के बड़े भाई को ढूंढने की बारी आई। इस बार हम दोनों वहीं दुकान में छिप गए। मैंने धीरे से अंजू का हाथ पकड़ लिया। वो हाथ छुड़ाने लगी। मैंने पूछा, तुम क्या कर रही थी? उसने कहा, तेरा भाई मेरी चूत मार रहा था। मैं बोला, ऐसा है तो। फिर उसने कहा, तू भी मेरी चूत मारेगा क्या? मैंने कहा, नहीं, मुझे अपने लंड को बड़ा करवाना है। वो बोली, अच्छा, तो लंड चूसवाना चाहता है। चलो, ठीक है, बोली, निकाल अपना लंड, देखते हैं कितना बड़ा है। मैंने कहा, खुद ही निकाल ले
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उसने मेरी पैंट की जिप नीचे की, धीरे से मेरा लंड बाहर निकाल लिया। छूते ही वो सख्त हो गया, खड़ा रहने लगा जैसे लोहे की छड़ हो। मजा आने लगा, तभी वो बोली - इतना बड़ा हो गया है। मैंने कहा, और बढ़ा। उसने टोका, किसी को मारने का मन है? फिर उसने चूसना शुरू कर दिया। पांच मिनट बाद वो पूछी, क्या ये तेरी पहली बार है? मैंने रानी के बारे में बता दिया। वो बोली, रानी तो अपने भाई के साथ ही कर चुकी है। मैंने कहा, तू भी तो भाई को राखी बांधती है। उसने जवाब दिया, हम तो असली भाई-बहन नहीं हैं। मैंने कहा, हम भी नहीं हैं। फिर वो बोली, चल बाहर चल, वरना किसी को पता चल जाएगा।
बाहर निकलते ही अंजू ने अपने घर का रुख कर लिया। उसने कहा, "गैप, तुम भी आ जाओ," मैंने जवाब दिया, "हाँ, ठीक है।" शाम को मैं और गौरी का बड़ा भाई उसके घर पहुँच गए। घर में सिर्फ अंजू और उसकी छोटी बहन मौजूद थी। मैंने भाई से कहा, "ये चीज़ मुझे भी आनी चाहिए।" वो बोला, "अभी इंतज़ार कर, छोटी बहन को नींद आ जाने दो।" आधी रात के करीब अंजू हमारे पास आकर खड़ी हो गई।
फिर भाई ने पूछा, क्या तूने कभी चूत देखी है? मैंने कहा, नहीं। अंजू तुरंत हंस पड़ी। उस हंसी का मतलब मैं समझ चुका था। शाम को मैंने उसे रानी के बारे में कुछ बताया था। इसलिए जवाब आया था बिना देर किए। भाई ने धीरे से उसकी फ्रॉक ऊपर उठाई। नीचे कुछ नहीं था। सब कुछ खुला पड़ा था। उसे लेटा दिया गया। एक टांग को ऊपर उठाकर फैला दिया गया। तब आवाज़ आई - इसे कहते हैं चूत।
देखा तो अंजू की चूची पूरी तरह गुलाबी थी, ऊपर लटें लिपटी हुई थीं। भाई बोला - सुन, बहन की गांड! मैंने पहले ही कहा था, बाल हटा लेना।
उसने कहा - ओए भाई, तूने मुझे पल भर का वक्त नहीं दिया।
भाई ने कहा, अगर आज तुझे नहीं तोड़ पाया तो समझ लेना मैं हरामी हूँ।
अचानक अंजू ने मेरा हाथ पकड़कर खींच लिया। फिर सीधे कहा - मैं तेरा लंड बड़ा कर दूंगी। इतने में उसने पैंट नीचे कर दी। धीरे से अंडरवियर के भीतर हाथ घुसाया। लंड बाहर आ गया।
उसने भाई से कहा – अरे बहनचोद, जल्दी कर। मुझे वापस अपनी बहन के पास जाना है। तब उसने जवाब दिया, ठीक है।
भाई ने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे चूत मारने का तरीका बताने लगा। भाई ने अंजू की चूत की दोनों तरफ की खाल अलग कर दी। अब उसकी चूत साफ दिख रही थी। भाई ने अपना लंड उसकी गुलाबी चूत के लाल दाने पर रखा और एक जोर से झटका दिया। अंजू को बहुत दर्द हुआ। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपना सर इधर उधर हिलाने लगी। और उसकी चूत से खून भी निकल रहा था। फिर भाई थोड़ी देर रुका। अंजू भी मुझे देख रही थी और मुझे भी मजा देना चाहती थी पर दर्द के कारण कुछ कर नहीं पा रही थी। फिर कुछ देर बाद उसका दर्द बंद हुआ। फिर वो बोली कर ना! जल्दी मुझे जाना है। और वो मेरा लंड पीने लगी अब मुझे और भी अच्छा लग रहा था। फिर भाई उसे चोदने लगा। कुछ देर बाद अंजू के मुंह से निकला कि जोर से चोद मेरी चूत फाड़ और वो मेरे लंड को जोर से और पागल की तरह चूस रही थी। फिर वो भाई से बोली लंड निकाल मैं झड़ने वाली हूं। भाई ने अपना लंड निकाला तो भाई के लंड से सफेद पानी निकला।
एक बार मैंने पूछा कि ये क्या चीज़ है, तो भाई ने जवाब दिया - बच्चे बनने का यही सबसे पहला कदम होता है। उसकी गुफ्तार से ऐसा पानी टपक रहा था। फिर मैंने कहा कि मुझे देखना है, तो उसने अंजू की जांघ ऊपर उठा दी और धीरे से फैलाकर दिखाया। अंजू के निचले हिस्से से लाल-धब्बे और सफेद तरल बाहर आ रहा था। वह बोला, आज पहली बार उसकी बाधा टूटी है। इसी वजह से उसके शरीर से खून निकल रहा है।
मैं अंजू के पास जा पहुँचा। वो खुद ही मेरा लंड पकड़कर चूसने लगी। कुछ देर बाद एक अच्छा सा एहसास आया। सब कुछ उसके मुंह में आ गया। उसने कहा, "इतना गंदा क्यों?" मैंने जवाब दिया, "पता भी नहीं चला।" फिर वो उठ खड़ी हुई। थोड़ी देर में सफाई करके, कपड़े ठीक करके चली गई।
अब मुझे गौरी के बारे में ख्याल आने लगा कि मैं भी उसकी सील तोड़ूंगा। क्योंकि मुझे गौरी की बड़ी बहन ने वादा किया था। फिर उस रात मैंने भाई से सारा गुप्त ज्ञान ले लिया। और उसके बाद उसकी बहन गौरी को और रानी को, अपनी बुआ को, पड़ोस की तीनों बहुओं को, अपनी सगी चाची को, अपने मामा की लड़की को, अपनी दो मैडम को, अंजू को, अपने गुरु की तीसरे नंबर की लड़की को चोदा और इनके अलावा भी कईयों को चोदा है। जब मैंने गौरी की बड़ी बहन रानी और बड़े भाई से सब गुप्त ज्ञान ले लिया तो मुझे भी चूत और गांड मारने की इच्छा होने लगी। अब बस मैं गौरी के बारे में ही सोच रहा था कि किसी दिन वो मेरे पास सो जाए। क्योंकि गौरी की बड़ी बहन की बात मेरे मन में घर कर गई थी। अब तो गौरी मुझे और भी अच्छी लगने लगी थी। बस अब तो मैं गौरी की चूत को और गांड को मारना चाहता था। पर ऐसा हुआ नहीं। क्योंकि उसके मम्मी और पापा बहुत सख्त हैं।
कुछ साल बाद एक सुबह मैं गौरी के घर पहुँचा। वहाँ कोई नहीं था, सिर्फ वो थी। झटपट काम करती हुई, स्कूल की यूनिफॉर्म में - सफेद स्कर्ट और एक हल्की सफेद कमीज। कपड़ा इतना पतला था कि जैसे ही पानी लगता, सब कुछ साफ दिखने लगता। तभी अचानक मग्गा उसके हाथ से छूटा। पानी सीधे ऊपर आ गया। ऐसे में दिखा कि अब वो सफेद ब्रा पहनती है। ऊपर के दो बटन ढीले भी थे। उसने मुझे देख लिया। पर मेरे पैर जमे रह गए। मन चाहता था कि कोई तरह वो पास आए, तभी कुछ हो पाए।
गौरी जैसे ही मग्गा उठाने के लिए झुकी, उसकी कमीज गले से अलग हट गई। अंदर से सफेद ब्रा साफ दिख रही थी। मैं तो घंटों उसे देखता रह गया, ब्रा का आकार इतना छोटा था कि चूची बाहर झाँक रही थी। वो चूचीएँ बड़ी, गोरी, और नीचे की ओर ढलान पर टिकी हुई थीं। मन ऐसा कर रहा था कि दोनों को कसकर पकड़ लूँ और भरपूर दूध निचोड़कर पी लूँ। धीरे-धीरे, डरते हुए, लेकिन कुछ नहीं कर सका। वो शोर कर देगी, यही डर सता रहा था।
उस रात मैं गौरी के घर पर ठहर गया था। उसके बड़े भाई के साथ बिस्तर साझा कर रहा था, वो अभी भी कुछ छुपी बातें सुना रहा था। सुबह उठकर जब नहाने लगा, तो ध्यान गया - गौरी की ब्रा कपड़ों के ऊपर पड़ी थी। हाथ उठाकर उसे उठाया, सफेद थी, ऐसा लग रहा था। सूती कपड़े की बनी हुई थी। फिर मैंने उसे चूम लिया, अपने लंड पर घुमाया, साइज देखकर चौंक गया। 36 इंच का था वो। नहा लिया, बाहर आया, फिर अपने घर चला गया।
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कई बार, कई जगह गौरी मिली, पर उससे इस बारे में चर्चा नहीं हो पाई। सिर्फ़ मैं जानता हूँ कि वो दो साल मैंने कैसे गुज़ारे। एक दिन मैं गौरी के घर गया, फिर हम तीनों - मैं, गौरी और मौसी - ऊपर सोने चढ़ गए। वो शाम आज भी साफ़ याद आती है। गौरी और मेरे बीच में मौसी लेटी थीं। मैं तो बस इस उम्मीद में था कि कोई न कोई तरीका आए जब मौसी हट जाएँ, लेकिन वो तो बातें करती रहीं, और गौरी धीरे-धीरे नींद में डूब गई। मैंने भी कह दिया कि अब नींद आ रही है। ऐसा बहाना बनाकर लेट गया, हालाँकि नींद दूर थी।
एक बजे रात में मौसी उठीं और नीचे चली गईं। मैं भी उठ बैठा, धीरे से पीछे-पीछे देखने लगा। वो मौसा के पास जाकर उनकी खाट पर लेट गईं। मौसा ने उनके कपड़े उतारे, फिर शरीर को चूमना शुरू कर दिया। उनका ऐसा दृश्य देख मेरा लंड तुरंत ऊपर छलांग लगाने लगा। मैं गौरी के पास लौट आया, उसे घूरने लगा। आज भी वो स्कर्ट और कमीज में थी। मैं उसके बगल में डूब गया, धीरे से कमीज के बटन खोलने लगा। उसने दो बार हाथ झटका, पर इस अवसर को मैं तो हर हाल में नहीं गंवाना चाहता था।
तीन बटन खोले, डर था पर किया। ब्रा दिखी साफ, सूती कपड़े में वो अच्छी लग रही थी। गौरी के पास लेट आया, लुंगी जमीन पर आई। धीमे से अपना लंड उसके हाथ में रख दिया। कमीज के भीतर हाथ घुमाया। उसने मेरा हाथ झट से खींच लिया।
मैं कुछ देर सोचता रहा कि क्या करूं। फिर दोबारा से मैंने गौरी के ब्रा पर हाथ रखा अब की बार उसने कुछ भी नहीं कहा। मैं धीरे-धीरे उसकी चूची को दबाता रहा। फिर एक दम मुझे झटका सा लगा कि उसने मेरे लंड को पकड़ लिया मैं तो घबरा ही गया था। मैंने उसकी आंखों को देखा तो बंद थीं। फिर मैं उसकी चूची को दबाने लगा उसके बाद मैंने अपने हाथ से उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड को उसके हाथ में पकड़ा कर हिलने लगा और दूसरे हाथ से उसकी स्कर्ट को ऊपर कर के उसकी कच्छी में हाथ डाल दिया। मैंने देखा कि उसकी चूत पर कांटे से थे। मैंने उसकी चूत के ऊपर से हाथ फेरना शुरू कर दिया।
अबकी बार गौरी ने मेरे लंड को हिलाते हुए पकड़ लिया। मैंने फिर उसकी आंखों में देखा, उसने आंख खोली और बंद कर ली। जैसे उसने कुछ देखा ही नहीं। मैं समझ गया था कि वो जाग चुकी है। पर सोने का बहाना कर रही है। अब तो मेरी हिम्मत ज्यादा बढ़ गई। मैंने उसकी कच्छी से हाथ निकाला और उसके और अपने ऊपर चादर डाली और उसकी कमीज को स्कर्ट से बाहर निकाला और कमीज के बाकी बचे हुए बटन भी खोल दिए और उसे अपनी तरफ कर के उसकी ब्रा को चूसने लगा अब उसे भी मजा आने लगा। उसने भी अपनी एक टांग जांघ तक मेरी टांग के ऊपर इस तरह रख दी कि मेरा लंड उसकी कच्छी के बीचो बीच चूत पर रहे। और फिर मुझे भी जोश चढ़ा और मैं भी धीरे-धीरे झटके मारने लगा।
उसकी तप्त योनि और मेरा तना हुआ लिंग – बस कमर में बंधी कच्छी ही अब रोक थी। वह महसूस कर रही थी मेरे शिश्न को, मैं उसकी गर्मी को। पीठ के पीछे, कपड़ों के भीतर, मेरा हाथ सिर्फ एक पल में ब्रा के तार खोल चुका था। धातु का बंधन टूटा, कपड़ा ढीला पड़ गया। मैंने सिर्फ सिर हिलाकर ब्रा को नीचे खींचा। उसके स्तन खुल गए। ऐसा पहली बार देखा था मैंने किसी के। उजले, थोड़े उभरे, बिल्कुल खुले। मैंने मुंह लगाया। उसके होंठों से छनकर आई सिसकी।
अब वो मेरे लंड पर अपनी चूत से दबाव डालने लगी। मेरा लंड और भी ज्यादा मोटा व लंबा हो चुका था। मैंने उसे हथेली में घेरा, फिर धीरे से कच्छे के ऊपर से उसकी चूत के ठीक बीच में लगाया और झट से आगे बढ़ाया। सिर्फ थोड़ा सा आगे का हिस्सा अंदर गया, कच्छे के साथ, तो वो चीख उठी। शायद पहली बार के कारण उसकी चूत बहुत खिंची हुई थी। फिर एकदम उसने मेरे लंड को अपने नंगे हाथ से अपनी चूत से बाहर खींच लिया। अब वो अपनी चूत पर हाथ रखे बैठ गई।
फिर मैंने उसकी चूची पीना शुरू कर दिया। मैं तो बस अब उसकी चूत मारना चाहता था। वो फिर गर्म हो गई और सीधी हो कर लेट गई। मैंने उठकर देखा कि वो आंख खोले पड़ी है, वो बोली सोने दे ना। मैं फिर से लेट गया थोड़ी देर बाद मैंने देखा उसकी आंखों को देखा तो उसकी आंख थोड़ी थोड़ी खुल रही थी। फिर मैंने उसकी ब्रा पर धीरे से हाथ रखा। तो वो मेरी साइड करवट लेकर सोने लगी। मैं समझ गया कि वो दुबारा करना चाहती है। अबकी बार मैंने उसकी स्कर्ट ऊपर की और उसकी कच्छी उतारने लगा। पर उसने मेरा हाथ कच्छी से हटा दिया। मैंने फिर अपना एक हाथ उसके गोरे और मुलायम पेट पर फिराने लगा। मैं उसकी टुंडी के चारों तरफ अपने लंड को हल्के से रगड़ रहा था। फिर मैंने उसकी टुंडी में भी अपना लंड घुसाया और उसकी टुंडी को भी चोदा।
फिर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था। अब की बार गौरी ने अपने आप ही मेरे लंड को पकड़ लिया। शायद उसे दर्द हुआ था। तो वो मेरे लंड की मोटाई देख रही थी। फिर उसने मेरे लंड को छोड़ दिया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी कच्छी पर ले जा कर उसकी चूत को सहलाने लगा। फिर मैं धीरे से उसकी कच्छी को उतारने लगा। अबकी बार मैंने उसकी कच्छी हाथ से पकड़ रखी थी। उसने फिर से मेरे हाथ को हटाना चाहा पर अबकी बार मैं पूरा तैयार था और मैंने अपनी पकड़ बिल्कुल भी ढीली नहीं की। उसने मेरी दो उंगली मोड़ भी दी। पर मैंने भी उसका हाथ अपने दूसरे हाथ से मोड़ दिया। और उसने ऐसे आह की जैसे उसको बहुत दर्द हुआ हो।
आंखों में नमी दिखी, तब मैंने झपकी भर न ली। कच्छा उतारने की जिद जारी रखी, बावजूद इसके कि वो फट गया। आज सिर्फ एक ही चीज़ ज़हन में थी - उसकी चूत फाड़ देना। कान के पास फुसफुसाया, कोई रोक नहीं सकता आज मुझे, पर वो बस आंखें बंद किए पड़ी रही। शायद वो समझ गई थी कि आज मेरा मन किया हुआ है। फिर उसने खुद को छोड़ दिया, ढीला पड़ गया शरीर। एक हाथ मेरे लंड पर रख लिया। धीरे-धीरे अपनी टुंडी पर सरकाने लगी, ऐसे कि मज़ा खुद-ब-खुद घर कर जाए।
इसे भी पढ़ें भाई ने बहन को धमकी देकर जबरदस्ती की।
लेकिन मैंने अपना फैसला नहीं बदला, कच्छी को जांघ तक सरका दिया। उठकर मैंने पेट और चूत के बीच जीभ घुमाई। हाथ आगे-पीछे भी चलाया। ध्यान आया - जो कांटे लग रहे थे, वो नए बाल थे, अभी-अभी उगे। फिर कच्छी को और नीचे खींचा। उसने हल्के से रोकने की कोशिश की, पर मैंने उसका हाथ साइड कर दिया। कच्छी फेंक दी। अब वो पूरी तरह नंगी थी, मेरे सामने।
मैंने अपना लंड उसकी चूत के ऊपर सरका दिया। कुछ देर में उसकी चूत से एक पतला सा पानी निकलने लगा। मेरे दिमाग में आया कि शायद वो झड़ गई है। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर ठोंक दिया। मेरे लंड का आगे का हिस्सा अंदर घुस गया। मुझे तकलीफ महसूस हुई, साथ ही उसकी चूत के दोनों ओर की त्वचा मेरे लंड से चिपक गई। दर्द से वो खुद को छुटकारा दिलाने लगी। वो बार-बार अपनी चूत को ऊपर उठाती, कभी पीछे खींचती। मैं भी वैसे ही अपने लंड से हिलता रहा। जब वो ऊपर उठाती, मैं भी लंड को ऊपर उठा देता। पीछे खींचती तो मैं आगे की तरफ धकेल देता।
एकदम अचानक उसे ऐसा धक्का लगा कि मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया, फिर वो बिना कुछ बोले लेट गई। उसकी सील तोड़ चुकी थी इसलिए दर्द हो रहा था उसे। दर्द में वो खुद से कराहती रही। मैं बस अपना लंड उसकी चूत में डालने की कोशिश करता रहा। दोनों पहली बार में थे - वो चुद रही थी, मैं चोद रहा था। ना मुझे समझ आ रहा था कि दर्द कैसे खत्म होगा, ना उसे। थोड़ी थकान महसूस हुई तो मैं ठहर गया।
उसकी चूत से मैंने लंड निकाला, उस पर खून था। खून मेरे शरीर से भी टपक रहा था, उसके शरीर से भी। आंखें बंद करके उसने हाथ से खून साफ करने की कोशिश की, पर ठीक से साफ नहीं हुआ। तभी मैंने पास पड़ा अखबार उठाया, धीरे-धीरे उसकी चूत पोंछने लगा। चादर पर भी खून गिरा था थोड़ा, पर गहरे रंग की वजह से नजर नहीं आ रहा था। फिर मैंने जग से पानी लाकर चादर का खून भी साफ कर दिया।
चार बज चुके थे, मैंने घड़ी पर नज़र डाली। तभी देखा कि उसने हाथ अपनी चूत पर रख लिए हैं। मैंने आगे बढ़कर उसके हाथ हटाने शुरू किए। वो चुपके से दूसरी ओर मुड़ गई, मगर हाथ वहीं रखे। चैन नहीं मिल रहा था, इसलिए मैंने उसे जबरन खींच लिया। वो झटके से सीधी हो गई। मैं फिर हाथ हटाने लगा। तब उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपनी चूत के ऊपर रख दिया। धीमे से मैंने उंगली अंदर कर दी। वो झुक गई, टिक नहीं पाई। जैसे ही उसकी पकड़ ढीली पड़ी, मैंने हाथ हटा लिए। फिर मैं उसके ऊपर आ गया।
मेरा खड़ा लंड अब उसकी चूत के ऊपर था। हाथ से उसे पकड़कर मैंने आगे-पीछे किया, इस बार ज्यादा देर तक। उसके चुटके के पानी से मेरा लंड फिसलन भरा हो गया। धीरे से छेद पर लगाकर एकदम तेजी से अंदर घुसा दिया। एक ही झटके में पूरा लंड अंदर चला गया। नजर उठाकर देखा कि कहीं गौरी अभी भी आंखें बंद किए झूठ तो नहीं बोल रही। वो तो ऐसे ही पड़ी थी, आंखें बंद, बस कभी-कभी पलकें हिल रही थीं।
फिर मैंने धक्के लगाने शुरू किए। और गौरी को दर्द भी नहीं हुआ था। अब बीच-बीच में वो भी मेरा साथ दे रही थी। धीरे-धीरे मैं अपनी स्पीड बढ़ा रहा था। फिर मैं अपने लंड को पूरा अंदर बाहर करने लगा अब तो गौरी को भी मजा आ रहा था फिर गौरी के मुंह से सी सिस आ आह निकलने लगा मगर धीरे-धीरे लंड गौरी की चूत से निकले पानी के कारण इतना चिकना हो गया था कि बिना रुकावट के गौरी की बच्चेदानी के मुंह पर ही चोट करता था। गौरी झड़ चुकी थी। क्योंकि अब उसने मुझे कसकर पकड़ लिया था। जब वो पूरी झड़ चुकी थी तो उसने मुझे छोड़ दिया। और अब मुझे भी पता चल गया था कि वो झड़ चुकी थी। क्योंकि अब वो मुझको हटाना चाहती थी वो अपने हाथ से मुझे पीछे कर रही थी।
एकदम तभी मैंने सारी ताकत लगा दी, ऐसे कि लंड उसकी चूत में एक झटके में घुस गया। गौरी चाहकर भी मेरे ऊपर से हट नहीं पाई। धीरे-धीरे वो ढीली पड़ गई। अब मैं इतने जोर से टकरा रहा था कि लंड पूरा बाहर आए, फिर पूरा अंदर जाए, बार-बार उसकी चूत पर वार करता रहा। महसूस हो रहा था - गौरी की बच्चेदानी का मुंह मेरे लंड को छू रहा है। ठीक तब मेरे लंड से उसकी चूत में पानी की धार निकल पड़ी। उसी पल गौरी भी फिर झड़ रही थी।
एक तरफ हटकर मैं गौरी के पास लेट गया। उसकी ब्रा, कमीज व स्कर्ट का फास्टनिंग अब भी ढीला पड़ा था, वहीं कच्छी नीचे खिसकी हुई थी। गौरी यही सोच रही थी कि मैं उसे कपड़े सही ढंग से पहना दूं, मगर मैं आंखें बंद कर शांत पड़ा रहा, ठीक वैसे जैसे कुछ समय पहले वह स्वयं पड़ी थी। मैं चाहता था कि वह मुझे जगाए, और देखना था कि कुछ पूछती है या नहीं।
पांच बजने आए थे सुबह के। गौरी धीरे से उठी, पहले चारों ओर नजर दौड़ाई। इसके बाद मेरे ऊपर चादर डाली, फिर वापस लेट गई। लेटते ही उसने ब्रा का हुक लगा लिया। मैं आंखें बंद किए उसे देख रहा था। फिर उसने कमीज संभाली, बटन बंद कर दिए। उसके बाद स्कर्ट ठीक की, कच्छी पहन ली। अब वो चादर में लिपटकर मेरे लंड पर अपनी गांड रखकर लेट गई। जैसे ही गांड लंड से चिपकी, लंड खड़ा हो गया, छेद में घुस गया। अब मन में उसकी गांड मारने की चाहत जाग उठी। उस दिन तो बस ऊपर-ऊपर झटके देता रहा। लेकिन एक दिन मैंने उसकी गांड भी चढ़ा
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