एक भाई ने अपनी बहन को धमकी देकर जबरदस्ती की।

Jan 13, 2026 - 18:28
Jan 14, 2026 - 02:48
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एक भाई ने अपनी बहन को धमकी देकर जबरदस्ती की।

मेरा नाम रिचा है। मैं जोधपुर में रहती हूँ। उम्र 24 साल, रंग गोरा, फिगर 36-29-37। मैं सेक्स के मामलों में लोगों की मदद करती हूँ। जब कोई किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता है, तो मैं उसके साथ होती हूँ। हमारे घर में माँ (45 साल, गढ़वाया बदन, 38-32-40), भाई राहुल (22 साल, लंबा, मजबूत कद, गेहूएं रंग), पापा (50 साल, बिजनेस से जुड़े) और मैं रहते हैं। पापा काम के चलते अक्सर बाहर रहते हैं। ऐसे में घर में माँ और राहुल के बीच नजदीकी बढ़ गई। हाँ, माँ ने राहुल के साथ संबंध बनाए। फिर मैंने भी अपने भाई के साथ ऐसा किया। उस कहानी को मैंने पहले लिखा था। आज मैं एक नई कहानी सुनाऊंगी।


सोमवार को ऐसा हुआ था। घर में बस मैं और राहुल थे, वहीं माँ सखि के पास चली गई थी। उस दिन मन में जैसे आग लगी थी, रोमांटिकता का एहसास तीखा था। खयाल आया - क्यों न राहुल के साथ कुछ अलग हो जाए? एक तरकीब सूझी। वह अपने कमरे में लैपटॉप पर व्यस्त था। मैंने ऊँची आवाज़ में कहा, “राहुल, मैं नहाने जा रही हूँ!” इधर-उधर झांकते हुए बाथरूम की ओर बढ़ गई।

बाथरूम में मैंने जानबूझकर दरवाज़ा लॉक नहीं किया। मैं चाहती थी कि राहुल मुझे देखे। मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और शॉवर चला लिया। पानी मेरे गोरे बदन पर गिर रहा था, और मैं धीरे-धीरे अपनी गाँड और चूचियों पर साबुन मल रही थी। मेरी गाँड 37 इंच की है, गोल और भारी, जो हिलते ही ठुमके लगाती है। मैंने अपनी गाँड को राहुल की तरफ़ किया, ताकि अगर वो झाँके तो उसे सब कुछ साफ़ दिखे। और वैसा ही हुआ। मैंने आँखों के कोने से देखा कि राहुल दरवाज़े की झिरी से मुझे ताक रहा था। वो अपने लंड को पैंट के ऊपर से सहला रहा था। मैंने और ज़ोर-ज़ोर से साबुन मला, अपनी चूचियों को दबाया, और हल्के-हल्के सिसकारियाँ लीं, “आह्ह… उफ्फ…”

नहाने के बाद मैंने सिर्फ तौलिया ओढ़ लिया, जो मेरी जाँघों तक ही पहुँच रहा था। आधे स्रोत बाहर झांक रहे थे। सीधे चली गई राहुल के कमरे में। फोन मेरे हाथ में था। अंदर जाकर देखा - वो अपनी पैंट नीचे किए मुठ मार रहा था। लंड 10 इंच का था, मोटा, बालों से ढका। आँखें बंद किए बड़बड़ा रहा था - "रिचा... आह... रिचा... मेरी जान..." मैं खड़ी रही, धीरे से वीडियो शुरू कर दी। कुछ देर में उसका छूट गया। बीज बेड पर गिर गया। वो अभी भी आँखें बंद किए पड़ा था। उसे एहसास नहीं था कि मैं वहाँ हूँ।

अपने कमरे में जाकर मैंने कपड़े बदले - एक टी-शर्ट और छोटे शॉर्ट्स, जिनमें मेरी पिछवाड़ी साफ़ दिख रही थी। फिर मैं राहुल के कमरे में आई, “तू क्या कर रहा था?” उसकी चाल ढीली पड़ गई, “दी... कुछ भी नहीं... मतलब...” मैंने झट से कहा, “इतनी बकवास मत कर, मैंने तेरी पूरी हरकत की रिकॉर्डिंग कर ली है। अब मम्मी के सामने सच सामने आ जाएगा।” वो घबरा गया, ठिठुरने लगा। “दी... माफ़ कर... कहीं मत बता। तू जो भी कहेगी, मैं मानूँगा।”

मैंने मौक़ा देखकर कहा, “ठीक है, लेकिन तुझे मुझे कुछ देना होगा।” उसने पूछा, “क्या?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अपनी अंडरवेयर।” वो चौंक गया, “क्या?!” मैंने कहा, “हाँ, वो जो तूने पहनी है।” उसने मना किया, “नहीं, दी, ये नहीं…” मैंने तुरंत फोन निकाला और बोली, “ठीक है, मैं मम्मी को वीडियो भेज देती हूँ।” वो घबरा गया। “नहीं, नहीं… ठीक है।” वो दूसरे कमरे में जाने लगा, लेकिन मैंने कहा, “यहीं उतार कर दे।” उसने शरमाते हुए अपनी जींस खोली। उसकी काली अंडरवेयर में उसका लंड साफ़ उभर रहा था। उसने अंडरवेयर उतारी और मुझे दी। उसका लंड बालों में छुपा था, लेकिन फिर भी उसकी मोटाई दिख रही थी। उसने जल्दी से जींस वापस पहन ली।

मैंने उसकी अंडरवेयर को नाक के पास ले जाकर सूँघा। उसमें उसकी मर्दानी ख़ुशबू थी, और उसका माल भी लगा हुआ था। मैं उस ख़ुशबू में खो गई। मुझे होश तब आया जब राहुल ने कहा, “दी, ये क्या कर रही हो?” मैंने उसे घूरा और कहा, “चुप रह! अब तू पूरा नंगा हो जा।” उसने पूछा, “क्यों?” मैंने गुस्से में कहा, “जल्दी कर, वरना मम्मी को वीडियो चली जाएगी।” वो डरते हुए नंगा हो गया। उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। मैंने उसे हाथ में लिया। वो 10 इंच का, मोटा, और गर्म था। मेरे एक हाथ में नहीं आ रहा था। मैंने कहा, “साले, तेरा लंड तो काफ़ी बड़ा है!” उसने शरमाते हुए कहा, “दी, ये सब तुम्हारे लिए ही है।” मैंने हँसकर कहा, “अच्छा, मेरे चोदू भाई? इतनी जल्दी दी से जान बन गई?” उसने कहा, “हाँ, मेरी जान। अब इसे चूसो ना।”

मैंने उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। “आह्ह… उम्म्म…” उसका लंड मेरे मुँह में मुश्किल से आ रहा था। मैंने उसकी टोपे को जीभ से चाटा। उसका प्री-कम मेरे मुँह में गया, नमकीन और गर्म। राहुल सिसकारियाँ ले रहा था, “आह्ह… दी, और चूसो… उफ्फ… मेरी जान…” मैं लॉलीपॉप की तरह उसका लंड चूस रही थी। “पुच… पुच…” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने उसके लंड को गले तक लिया, जिससे मुझे साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी, लेकिन मज़ा इतना था कि मैं रुकना नहीं चाहती थी। मैंने 10 मिनट तक उसका लंड चूसा, लेकिन वो झड़ा नहीं। मैंने पूछा, “साले, तेरा निकलने वाला है कि नहीं?” उसने कहा, “अभी नहीं, मेरी जान।”

उसने मुझे खड़ा किया, गर्दन पर होंठ फेरे। गर्म साँसें छूती रहीं - “आह्ह… उफ्फ…” मैं ढलती जा रही थी। टी-शर्ट नीचे आई। काली ब्रा में 36 इंच की चूचियाँ दबी हुई थीं। उसने ऊपर से दबाया, निप्पल को दाँत लगा दिए। चीख निकल गई - "मादरचोद, धीरे!" वो ठहाका मारकर बोला, “दी, गाली सुनकर मज़ा डबल हो जाता है।” फिर लंबा चुंबन हुआ। 10 मिनट तक होंठ घुले रहे। कभी ऊपरी, कभी निचले, कभी जीभ में उलझे। मेरा हाथ उसकी जींस पर था। अंदर लंड तंबू बनाए हुए था।

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उसकी जींस का बटन खुला मेरे हाथों से। सामने वापस आया वो लंबा धड़। टिप से बूंद-बूंद नमी टपक रही थी। जीभ घसीटी मैंने उस पर। "आह्ह…" छूट गई राहुल की सांस। मुँह में लिया फिर वो डंठल, चूसने लगी। "पुच… पुच… ओह्ह… उम्म्म…" दबाव डालता रहा सिर पर, ताकि अंदर तक जाए वो। पंद्रह मिनट चला ये सिलसिला, फिर भी नहीं छूटा वो। थकान छा गई मेरे शरीर में। बोली, “इतना और कैसे?” हँसा वो, “अभी तो बस इशारा हुआ है।”

फिर उसने मेरे बाकी कपड़े उतार दिए। मेरी काली पैंटी गीली हो चुकी थी। उसने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे पैरों से किस करना शुरू किया। वो धीरे-धीरे मेरी जाँघों तक आया। मेरी चूत पहले से गीली थी। उसने मेरी पैंटी को दाँतों से खींचकर उतार दिया। मेरी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। उसने कहा, “दी, मुझे बालों वाली चूत बहुत पसंद है।” फिर वो मेरी चूत चाटने लगा। “आह्ह… उफ्फ… राहुल… और चाट…” मैं उसका सिर अपनी चूत में दबा रही थी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी। 5 मिनट बाद मैं झड़ गई। मेरा पानी उसकी जीभ पर लगा। उसने मेरी तरफ़ बढ़कर कहा, “दी, इसे चूसो।” मैंने उसकी जीभ चूसी। मेरे ही पानी का स्वाद मेरे मुँह में आया।

मैंने कहा, "राहुल, अब न खींचो। मुझे छेड़ दो। बन जाऊँ तेरी प्रेमिका भैया।" उसका लंड मेरी चूत के पास घिसने लगा। मैं बेचैन हो रही थी। "उफ़… घुसा दे यार!" धीरे से उसने अपना लंड मेरे अंदर सरकाया। "ओह्ह… हाय…" उसका मोटा लंड मेरी चूत को फैला रहा था। धीरे-धीरे वो पूरा अंदर गए। थोड़ा सा दर्द हुआ, पर आनंद ज्यादा था। वो धीमे झटके देने लगा। कमरे में "थप… थप…" की आवाजें भर गईं। मैं हांफ रही थी, "उफ़… राहुल… और तेज… चढ़ा अपनी बहन पर…"

उसने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। मैंने पूछा, “राहुल, तू इतना अच्छा चोदता है। ऐसा लगता नहीं कि ये तेरा पहला सेक्स है।” उसने कहा, “दी, मैंने पहले भी सेक्स किया है।” मैंने पूछा, “किसके साथ? गर्लफ्रेंड?” उसने कहा, “नहीं, मम्मी के साथ।” मैं चौंक गई। “क्या?! मम्मी के साथ?” उसने कहा, “हाँ, मैं मम्मी को भी चोदता हूँ।” ये सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। मैंने कहा, “साले, तू तो पूरा रंडीखाना चला रहा है!” उसने हँसकर धक्के और तेज़ कर दिए।

वह पंद्रह मिनट तक मेरे साथ रहा। बोला, “भैया, मेरा आ जाएगा। कहाँ छोड़ूँ?” मैंने कह दिया, “जबान पर उड़ेल दे। मुझे चखना है तेरा।” फिर वो मेरे होठों में घुस गया। गर्मी से भर गई मेरी जीभ। खुद-ब-खुद निगल गई हर बूँद।

थोड़ी देर हम दोनों कुछ नहीं बोले। कपड़े पहनते-पहनते समय गुज़र गया। इसी बीच अचानक मम्मी दरवाज़े से अंदर आईं। राहुल ने धीमे स्वर में मुझे सुनाया, "आज रात तुम और मम्मी... दोनों मेरे कब्ज़े में होगी।" उसकी बात सुनकर मेरा शरीर गर्म हो उठा। दिमाग में ख्याल आया - अब तो मामला और भी रंगीन होने वाला है।

अगर कहानी अच्छी लगी हो, तो बात कर लेना। क्या सोचते हो - मैं और मम्मी राहुल के साथ संभोग करें? तुम्हारा ख्याल मेरे लिए अहम है। कोई औरत, माँ या बहन अगर भाई, बेटे या पिता के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती है, तो संदेश भेज सकती है। ब्रेस्ट और लिंग को बड़ा करने के उपाय भी बताऊँगी।

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