भाई ने बहन को धमकी देकर जबरदस्ती की।

Jan 17, 2026 - 11:51
Feb 5, 2026 - 17:11
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भाई ने बहन को धमकी देकर जबरदस्ती की।

मेरा नाम रिचा है। मैं जोधपुर में रहती हूँ। उम्र 24 साल, रंग गोरा, और फिगर 36-29-37। मैं एक सेक्स एक्सपर्ट हूँ। मतलब, अगर किसी को किसी के साथ चुदाई करनी हो, तो मैं उनकी मदद करती हूँ। मेरे घर में मेरी माँ (45 साल, गदराया बदन, 38-32-40), मेरा भाई राहुल (22 साल, लंबा, मज़बूत कद-काठी, गेहुंआ रंग), मेरे पापा (50 साल, बिज़नेसमैन), और मैं रहते हैं। पापा ज़्यादातर काम की वजह से बाहर रहते हैं। इस वजह से घर में माँ और राहुल का रिश्ता कुछ ज़्यादा ही करीब हो गया। जी हाँ, माँ ने राहुल के साथ सेक्स किया, और फिर मैंने भी अपने भाई के साथ चुदाई की। उसकी कहानी मैंने पहले लिखी थी, लेकिन आज मैं आपको एक नई कहानी सुनाने जा रही हूँ।
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उस ि सोमवार ा। घर में बस हम ों, मैं ो। माँ दो्त के यहाँ चल गई थीं। मन में लहर-सी  रही थी,   गरम ो रहा हो। मैंने ान लिा - आज कुछ अलग ा। एक तय कदम उठाने  वक  गय ा। ो अपने कमरे में लैपटॉप पर  े थे। मैंने  आवाज़ ी, “नहाने जा रही हूँ,” ि े बाथरूम की ओर बढ़ गई।

बाथरूम में मैंने जानबूझकर दरवाज़ा लॉक नहीं किया। मैं चाहती थी कि राहुल मुझे देखे। मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और शॉवर चला लिया। पानी मेरे गोरे बदन पर गिर रहा था, और मैं धीरे-धीरे अपनी गाँड और चूचियों पर साबुन मल रही थी। मेरी गाँड 37 इंच की है, गोल और भारी, जो हिलते ही ठुमके लगाती है। मैंने अपनी गाँड को राहुल की तरफ़ किया, ताकि अगर वो झाँके तो उसे सब कुछ साफ़ दिखे। और वैसा ही हुआ। मैंने आँखों के कोने से देखा कि राहुल दरवाज़े की झिरी से मुझे ताक रहा था। वो अपने लंड को पैंट के ऊपर से सहला रहा था। मैंने और ज़ोर-ज़ोर से साबुन मला, अपनी चूचियों को दबाया, और हल्के-हल्के सिसकारियाँ लीं, “आह्ह… उफ्फ…”

नहाने के बाद मैंने जानबूझकर सिर्फ़ तौलिया लपेटा, जो मुश्किल से मेरी जाँघों तक आ रहा था। मेरी चूचियाँ आधी बाहर झाँक रही थीं। मैं सीधे राहुल के कमरे में चली गई। मेरा फोन भी साथ था। कमरे में घुसते ही मैंने देखा कि राहुल अपनी पैंट नीचे करके मुठ मार रहा था। उसका लंड 10 इंच का, मोटा, और बालों से भरा हुआ था। वो आँखें बंद किए मेरे ही नाम की माला जप रहा था, “रिचा… आह्ह… रिचा… मेरी जान…” मैं चुपके से खड़ी हो गई और उसकी वीडियो बनाने लगी। कुछ देर बाद वो झड़ गया। उसका माल बेड पर बिखर गया। वो अभी भी आँखें बंद किए पड़ा था, उसे नहीं पता था कि मैं वहाँ हूँ।

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अपने कमरे में कर ैंे एक  टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने, जिसमें िछवाड़ा साफ़ नज  रहा था। फिर राहुल के कमरे  ओर लौी, “तू कर क्या रहा था?” वो घबरा गया, “दी… कुछ  नहीं…”  में ही कट गय उसका झूठा जवाब। “अब े, बच नहीं एग ू,” मैंने धमक भर वर ें कहा, “तेरी हर एक छवि ेरे ़ो में ै। मम्मी को  दूँगी,  ू क् करत ै।” उसक  काँपने लगे। “दी, गलत  गई… किसी को मत बताना। तू  े, मैं ो करूँगा।”

मैंने मौक़ा देखकर कहा, “ठीक है, लेकिन तुझे मुझे कुछ देना होगा।” उसने पूछा, “क्या?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अपनी अंडरवेयर।” वो चौंक गया, “क्या?!” मैंने कहा, “हाँ, वो जो तूने पहनी है।” उसने मना किया, “नहीं, दी, ये नहीं…” मैंने तुरंत फोन निकाला और बोली, “ठीक है, मैं मम्मी को वीडियो भेज देती हूँ।” वो घबरा गया। “नहीं, नहीं… ठीक है।” वो दूसरे कमरे में जाने लगा, लेकिन मैंने कहा, “यहीं उतार कर दे।” उसने शरमाते हुए अपनी जींस खोली। उसकी काली अंडरवेयर में उसका लंड साफ़ उभर रहा था। उसने अंडरवेयर उतारी और मुझे दी। उसका लंड बालों में छुपा था, लेकिन फिर भी उसकी मोटाई दिख रही थी। उसने जल्दी से जींस वापस पहन ली।

मैंने उसकी अंडरवेयर को नाक के पास ले जाकर सूँघा। उसमें उसकी मर्दानी ख़ुशबू थी, और उसका माल भी लगा हुआ था। मैं उस ख़ुशबू में खो गई। मुझे होश तब आया जब राहुल ने कहा, “दी, ये क्या कर रही हो?” मैंने उसे घूरा और कहा, “चुप रह! अब तू पूरा नंगा हो जा।” उसने पूछा, “क्यों?” मैंने गुस्से में कहा, “जल्दी कर, वरना मम्मी को वीडियो चली जाएगी।” वो डरते हुए नंगा हो गया। उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। मैंने उसे हाथ में लिया। वो 10 इंच का, मोटा, और गर्म था। मेरे एक हाथ में नहीं आ रहा था। मैंने कहा, “साले, तेरा लंड तो काफ़ी बड़ा है!” उसने शरमाते हुए कहा, “दी, ये सब तुम्हारे लिए ही है।” मैंने हँसकर कहा, “अच्छा, मेरे चोदू भाई? इतनी जल्दी दी से जान बन गई?” उसने कहा, “हाँ, मेरी जान। अब इसे चूसो ना।”

उसका लंड मेे होों तक पहुँा, ि े-े मैं दर ीं लिया। "आह्ह... उम्म्म..." ऐस लग रह ा, मा  ेरे मुँह में ुस नहीं ा रहा।  े मैंने उसकी टोपी को ़ा। गर और ारी तरल मेरे मुँह में  गया। राहुल सिसक रहा था, “आह्ह… दी, और चूसो… उफ्फ… मेरी जान…” े मी ोली ो, ैंे उसका लंड चूसन  कर िा। कमर ें ‘पुच… पुच… की आवाज़ बज उठी। गले तक ीं लिया, साँस थमन लगी, फिर ी मु लग ीक ै। इतन समय  गया, वो अब तक नहीं झड़ा। मैंने सव िा, “साले, तेरा अब ी नहीं आएगा?” उसक जव ें आया, “अभी नहीं, मेरी जान।”

उसने मुझे खड़ा किया, िर गर्दन पर ों रख ि। "आह्ह… उफ्फ…" – गर्म साँसों  ाथ मैं ढलन लगी। टी-शर्ट उतर गई। काली ब्रा में 36 इंच की चूचियाँ तन गईं। हाथ े ऊपर से दबोा, निप्पल पर ाँ पड़े। ची िकली: “मादरचोद, धीरे!”  ठहा मारकर ोला: “दी,  ें तडा है।” फिर लंबा ुंबन  । 10 मिनट तक होंठों पर ों िसते रहे। कभी ऊपरी, कभी नीे का, कभी जीभ दर ी। मैंे उसके जींस पर ाथ ा। कपड़े  े लंड  जम खड़ा था।

मैंने उसकी जींस खोली। उसका लंड फिर से मेरे सामने था। उसकी टोपे से प्री-कम टपक रहा था। मैंने जीभ से उसे चाटा। “आह्ह…” राहुल की सिसकारी निकली। मैंने फिर से उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। “पुच… पुच… आह्ह… उम्म्म…” वो मेरा सिर दबा रहा था, ताकि उसका पूरा लंड मेरे गले तक जाए। 15 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा, लेकिन वो फिर भी नहीं झड़ा। मैं थक गई थी। मैंने कहा, “राहुल, तू तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा!” उसने हँसकर कहा, “दी, अभी तो शुरुआत है।”

फिर उसने मेरे बाकी कपड़े उतार दिए। मेरी काली पैंटी गीली हो चुकी थी। उसने मुझे बेड पर धकेल दिया और मेरे पैरों से किस करना शुरू किया। वो धीरे-धीरे मेरी जाँघों तक आया। मेरी चूत पहले से गीली थी। उसने मेरी पैंटी को दाँतों से खींचकर उतार दिया। मेरी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। उसने कहा, “दी, मुझे बालों वाली चूत बहुत पसंद है।” फिर वो मेरी चूत चाटने लगा। “आह्ह… उफ्फ… राहुल… और चाट…” मैं उसका सिर अपनी चूत में दबा रही थी। उसकी जीभ मेरी चूत के दाने को चाट रही थी। 5 मिनट बाद मैं झड़ गई। मेरा पानी उसकी जीभ पर लगा। उसने मेरी तरफ़ बढ़कर कहा, “दी, इसे चूसो।” मैंने उसकी जीभ चूसी। मेरे ही पानी का स्वाद मेरे मुँह में आया।

मैंने कहा, “राहुल, बस कर। मुझे   कर। बना ले े अपनी रंडी बहन।” उसका लंड मेरी चूत के पास िसट रह ा। मैं तड़प रही थी। “उफ... अब कर ना, लानत ै!” धीरे से उसने अपना लंड मेरे तर  िा। “ओह्ह… …” उसका मोटा लंड मेरी चूत को ा रहा था। धीरे-धीरे उसने पूरा लंड अंदर धकेल िा। ़ा दर्द हुआ, पर ी ज़्यादा थी। वह धीे धक्के लगा लगा। कमरे में “थप थप…”  आवाज़  रही थी। मैं सां रो िसक रही थी, “उफ… राहुल… तेज़ कर… अपनी बहन को ़ो  …”

उसने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। मैंने पूछा, “राहुल, तू इतना अच्छा चोदता है। ऐसा लगता नहीं कि ये तेरा पहला सेक्स है।” उसने कहा, “दी, मैंने पहले भी सेक्स किया है।” मैंने पूछा, “किसके साथ? गर्लफ्रेंड?” उसने कहा, “नहीं, मम्मी के साथ।” मैं चौंक गई। “क्या?! मम्मी के साथ?” उसने कहा, “हाँ, मैं मम्मी को भी चोदता हूँ।” ये सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। मैंने कहा, “साले, तू तो पूरा रंडीखाना चला रहा है!” उसने हँसकर धक्के और तेज़ कर दिए।

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 रह-रह मिनट तक मे  ऐस   रखा। फिर ीमे वर ें ा, "ा, अब टने वाला हूँ। कहाँ ़ूँ?" मैंने आग ककर कहा, "ओठों पर... मुझे  चखना है।" उसने अपनी छड़ मेरे होंों    ी। एक झटक   उसका ा गर्म तरल मेरे दर  गया। मैंने ें  कर लीं - एक  ूँ हर नहीं  ी।

़ी ेर हम दोनों कुछ नहीं े। कपड़े पहनते-पहनत अचनक मम्मी आ गईं। राहुल ने  े कहा, “दी, आज रात मैं तुम्हें और मम्मी को एक साथ चोदूँगा।” उसक  सुनकर  तर गर  गई। मन में खय आया, ये कहानी अब और रं होने वाली है।

मज़ा आया अगर कहानी में,  लकर लना। चते हो क्ा - मम्मी के  राहुल के साथ ऐसा करना सह रहा? आपकी  मेरे लिए वजन उठाती है। अगर कोई माँ, बहन  औरत े भाई, बेटे या पिता के साथ सेक्स, तो संपर करे। बूब्स और लंड बढ़ाने के तरे भी बताऊँगी, अगर े।

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