एक भाई ने अपनी बहन को धमकी देकर जबरदस्ती किया।

Jan 3, 2026 - 17:09
Jan 6, 2026 - 19:33
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एक भाई ने अपनी बहन को धमकी देकर जबरदस्ती किया।

मेरा नाम रिचा है। जोधपुर में रहती हूँ। उम्र 24 साल, रंग गोरा, फिगर 36-29-37 ै। ाम ै - ों को सेक्स ें मदद करना। अगर को किसी के साथ ि  बना चाहता है, तो मैं उसक सहयता करती हूँ। घर में माँ (45 साल, गढ ाया, 38-32-40), भाई राहुल (22 साल, लंबा, मज़बूत बदन, गेहू े रंग  वचा), पापा (50 साल, ी) और मैं रहते हैं। पापा काम के रण ़्ा घर नहीं े। ऐसे में माँ और राहुल के  नजीकियाँ बढ गईं। हाँ, माँ ने राहुल के साथ सं किया।  में ैंने भी अपने भाई के साथ ऐसा किा। उस कहानी ो मैंने पहले लिखा था। आज एक नई कहानी सुनाी।

सोमवार को पहर ी। घर में मैं और राहुल ी थे, बस। माँ सखि के घर चली गई थीं। उस दिन मन में कु ़ा सनसनी- भरी थी। ैसे महस  रहा था, जैसे शर ें आग धधक उठी हो। ऐसे में मन ने ा - आज राहुल के साथ कुछ अलग  किया जाए? तय हु ो अपने कमरे में लैपटॉप पर यस था। मैंने  आवाज़ ें कहा, “राहुल, मैं नहाने जा रही हूँ!” इतन कहकर े बाथरूम की ओर बढ़ गई।

लय में मैंने दरवाजा  नहीं किया, चकर। राहुल ो मेरे ऊपर नज लन ी। कपड़े े उतार ेंे, ि शावर ालू कर िया। पानी चमकत वचा पर बह रहा था, धी ों से ैं ाबुन लगा रही थी गाँड पर,  पर ी। 37 इंच की गोल-वदार िछव़ी, हिलते ही डुलती है।  उसक ओर कर ली, ताकि झाँकन पर कुछ  ि नहीं। ऐसा ही हुआ। आँख े किनाे देखा - ेरे ें ाहुल झिर्ी से झाँक रहा था। पैंट के ऊपर  ा रहा था अपन  तन पर तभी मैंने साबुन को और गहर से चढ़ाया, िों  नच़ा, ाँ  कर ली - “उफ़्… आह…”

नहाकर बाहर आई ो सिर्फ़ एक  ा तौलिया ओढ़ लिा, ो मेरी ी जाँघों तक  पहुँ रहा था।   ोर बाहर झाँक रहे थे। सीधे राहुल के कमरे  ओर चल ी।  में फोन भी था। दर कदम रखते ही देखा - ो अपनी पैंट नीचे ि  ा,    कर रहा था। उसका लंड बह  ा, 10 इंच ा, और घने बालों से ढका हुआ। आँखें बंद किए, ीमे-ीमे दबा रहा था - "रिचा... आह... रिचा... मेरी जान..." मैं वहीं िठक गई,  उठ िा और  कर िया। कुछ पल बाद उसका बी बितर पर िटक गया। वो अभी भी आँखें बंद किए पड़ा था, नहीं नता था कि मैं वहाँ खड़ी हूँ।

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अपने कमरे में कर ैंे कपड़े बदले - टाइट टी-शर्ट और े शॉर्ट्स, जिनमें गाँड  से ि रही थी। फिर चल गई राहुल के कमरे  ओर, आव आई, "तू क्या कर रहा था?" वो घबरा गया, “दी… कुछ ी नहीं… बस…” उसकी  काटकर ैं ी, “मत झूठ बोल, तेरी पूरी वीडियो बन ी है। अब मैं मम्मी को  मल ा दूँगी।” वो सहमकर थरथरे लगा। “दी,  कर... किसी को मत बताना। तू   कहे, मैं  सब करूँगा।”

मैंने मौक़ा देखकर कहा, “ठीक है, लेकिन तुझे मुझे कुछ देना होगा।” उसने पूछा, “क्या?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अपनी अंडरवेयर।” वो चौंक गया, “क्या?!” मैंने कहा, “हाँ, वो जो तूने पहनी है।” उसने मना किया, “नहीं, दी, ये नहीं…” मैंने तुरंत फोन निकाला और बोली, “ठीक है, मैं मम्मी को वीडियो भेज देती हूँ।” वो घबरा गया। “नहीं, नहीं… ठीक है।” वो दूसरे कमरे में जाने लगा, लेकिन मैंने कहा, “यहीं उतार कर दे।” उसने शरमाते हुए अपनी जींस खोली। उसकी काली अंडरवेयर में उसका लंड साफ़ उभर रहा था। उसने अंडरवेयर उतारी और मुझे दी। उसका लंड बालों में छुपा था, लेकिन फिर भी उसकी मोटाई दिख रही थी। उसने जल्दी से जींस वापस पहन ली।

मैंने उसकी अंडरवेयर को नाक के पास ले जाकर सूँघा। उसमें उसकी मर्दानी ख़ुशबू थी, और उसका माल भी लगा हुआ था। मैं उस ख़ुशबू में खो गई। मुझे होश तब आया जब राहुल ने कहा, “दी, ये क्या कर रही हो?” मैंने उसे घूरा और कहा, “चुप रह! अब तू पूरा नंगा हो जा।” उसने पूछा, “क्यों?” मैंने गुस्से में कहा, “जल्दी कर, वरना मम्मी को वीडियो चली जाएगी।” वो डरते हुए नंगा हो गया। उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। मैंने उसे हाथ में लिया। वो 10 इंच का, मोटा, और गर्म था। मेरे एक हाथ में नहीं आ रहा था। मैंने कहा, “साले, तेरा लंड तो काफ़ी बड़ा है!” उसने शरमाते हुए कहा, “दी, ये सब तुम्हारे लिए ही है।” मैंने हँसकर कहा, “अच्छा, मेरे चोदू भाई? इतनी जल्दी दी से जान बन गई?” उसने कहा, “हाँ, मेरी जान। अब इसे चूसो ना।”

मैंने उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। “आह्ह… उम्म्म…” उसका लंड मेरे मुँह में मुश्किल से आ रहा था। मैंने उसकी टोपे को जीभ से चाटा। उसका प्री-कम मेरे मुँह में गया, नमकीन और गर्म। राहुल सिसकारियाँ ले रहा था, “आह्ह… दी, और चूसो… उफ्फ… मेरी जान…” मैं लॉलीपॉप की तरह उसका लंड चूस रही थी। “पुच… पुच…” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने उसके लंड को गले तक लिया, जिससे मुझे साँस लेने में तकलीफ़ हो रही थी, लेकिन मज़ा इतना था कि मैं रुकना नहीं चाहती थी। मैंने 10 मिनट तक उसका लंड चूसा, लेकिन वो झड़ा नहीं। मैंने पूछा, “साले, तेरा निकलने वाला है कि नहीं?” उसने कहा, “अभी नहीं, मेरी जान।”

उसने मुझे खड़ा किया, िर गर्दन पर ों े। "आह्ह… उफ्फ…" – गर्म सांसें ी रहीं। मैं ढलन लगी। टी-शर्ट  आई। काली ब्रा में 36 इंच की चूचियाँ तन गईं। उसने ब्रा पर हा ा, चूचियों को दबाया, निप्पल को ांों में ले लिा।  िकल गई: “मादरचोद, धीरे!” ो हंा: “दी, गाली नकर मज़ा दोा हो ाता है।” फिर लंबा ुंबन  । 10 मिनट तक होंठों पर ों िसते रहे। कभी ऊपरी होंठ, कभी निचला, कभी जीभ को  ा। मैंे उसके जींस पर ाथ ा। जींस में लंड तंबू बना था।

उसकी जींस  बटन खुला मेरे ों से। ों  ामने   धड़ था। टॉप से प्री-कम  ूँें टपक रही थीं। मैंने जीभ कर उसे । "आह्ह…" राहुल के ुँ से आव़ निकली। फिर से ैंे उसका लंड ा मुँह में लिया, चूसने लगी। "पुच… पुच… आह्ह… उम्म्म…" वो मेरे सिर  े दबा रहा था, ताकि ो गले तक जा सके। रह मिनट तक मैंने ऐस ी चूसा, फिर भी उसक इज़् नहीं ा। थका महस  लगी। मैंने ा, “राहुल, तू तो रुकने का नाम नहीं ले रहा!” उसने हँसत  कहा, “दी, अभी तो शुरुआत है।”

उसने मेरे बाकी े कपड़े ि िए। ी काली पैंटी  ऊपर चिपकी थी। बितर पर धकेलकर ो मेरे पैरों को मन लगा। धीरे-धीरे जाँघों   तक पहुँ गया। मेरी चूत पहले से तरबतर थी। दाँतों से ैं ो खींचकर ें दिया। हल घन  मेरी चूत पर थे। उसके मुँ  िकला, “ी, बालों वाली चूत  ाती है।” फिर वो मेरी चूत पर  े लगा। “आह्ह… उफ्फ… राहुल… और ऐस ी…” मैं उसके सिर ो अपने ीच में दबा रही थी। उसकी जीभ मेरे चूत के ेद ें  रही थी। ाँ मिनट बाद मैं झड़ गई। मेरा पानी उसकी जीभ पर िपक गया। पस आकर ा, “दी, इसे चखो।” मैंने उसकी जीभ  अपने मुँ ें  िा। ेरे ही पानी का स्वाद मेरी  पर आया।

मैंने कहा, "राहुल, अब लन ंद कर। मुझे  ो। बना लो े अपनी रंडी बहन।" उसका लंड मेरी चूत के पास िसन लगा। मैं तड़प रही थी। "उफ... डाल ी दे, लानत ै!" धीे से उसने अपना लंड मेरी चूत में सरक िा। "ओह्ह… उफ्फ…" उसका मोटा लंड मेरी चूत को ींच रहा था। आखिरकार पूरा लंड तर चल गया। एक  ा दर्द हुआ, मगर मज़ा इसस कहीं ज़्यादा था। वो धीे-धीमे टकरे लगा। कमरे में "थप थप…"  आवाज़  गई। मैं सां रो िसक रही थी, "हाँ… राहुल… और तेज़… अपनी बहन को  ..."

उसने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। मैंने पूछा, “राहुल, तू इतना अच्छा चोदता है। ऐसा लगता नहीं कि ये तेरा पहला सेक्स है।” उसने कहा, “दी, मैंने पहले भी सेक्स किया है।” मैंने पूछा, “किसके साथ? गर्लफ्रेंड?” उसने कहा, “नहीं, मम्मी के साथ।” मैं चौंक गई। “क्या?! मम्मी के साथ?” उसने कहा, “हाँ, मैं मम्मी को भी चोदता हूँ।” ये सुनकर मेरी उत्तेजना और बढ़ गई। मैंने कहा, “साले, तू तो पूरा रंडीखाना चला रहा है!” उसने हँसकर धक्के और तेज़ कर दिए।

 एक रह मिनट तक मे  ़ा रहा। फिर ा, “ा, मेरा टने वाला है। कहाँ उतू?” मैंने जव िा, “मेरे मुँह में  े। मैं तेरा सब  निगलन हती हूँ।” उसने अपना िा मेरे होों   ूँ िा और    िा। गर्म-गर्म ूँें मेरी  पर आईं। मैंने हर ूँ ीरे  िगल ली।

़ी ेर हम दोनों पच े रहे। कपड़े पहन ि हमने। अचनक दरव़ा ा, मम्मी दर आईं। राहुल ने  े कहा, “दी, आज रात तुम्हें और मम्मी को एक साथ चोदूँगा।” उसक  सुनकर  तर गर  गई। मैंने मन  मन सोचा, ये कहानी अब और रं होने वाली है।

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