मायके से ससुराल लौटते ही पति ने मुझे नंगा करके खुब चोदा

Jan 15, 2026 - 11:29
Jan 15, 2026 - 17:34
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मायके से ससुराल लौटते ही पति ने मुझे नंगा करके खुब चोदा

अरे भइयो, सबका ढेर सारा अभिवादन। नाम है मेरा शबनम। कई सालों से मुझे तीखी लड़की कहानियाँ पढ़ने का शौक है, और कोई रात ऐसी नहीं बीतती जब मैं कुछ गरम-गरम पढ़ाई न कर लूँ। आज मैं एक कहानी सुनाऊंगी - उम्मीद है, सबको अच्छी लगेगी। दो महीने के लिए मैं मायके आई थी। साल के दस महीने ससुराल में रहती हूँ, पर गर्मियों में छुट्टी मिल जाती है, तो घर आ जाती हूँ। इधर बीस दिन बीत चुके थे कि पति का फोन आ गया।

“शबनम ान… जल्दी घर  जा ीस दिन से मुझे चू रने को नहीं मिी!” पति ने उतवलपन  कहा।

ुनि जी! ैं कम से कम दो महीने ाँ  ास रहूँी। तब तक आप अपन  े मु मारकर काम चला लीि!” ैंने सत  जव िा।

अर ान,  ो जानत  ि मु रन ें  मज़ा कहाँ   रन ें आत ै।  जल  !” पति  मन ी, ि ैं उनक ें  ीं और यक ें   गई  अपन घर  बह  आत  और सस ें जर  अच नहीं लगत ा। ोस्ों,  पति बह   और जव मर्द े।  िन में   और  ें     रत े। उनें ेक्स करन बह पस  और ैं  ऐस  औरत ी, ि  ा-   बह अच लगत ा। यक आए अब एक मह    और ैं    ि तरस रही ी। ैं अपनी  ें ि लकर  गलिों  मज़ा   ी। उधर  पति अपने हाथ से ाम चल रह े, ि उनें   मज़ा नहीं मि  रह ा। े-  मह  गए और  बचों का  ि    गया। मायक े लौटन  मन  नहीं ा, ि हर  लड  एक ि अपन सस  टन  पड ै। इसलिए मैं न हते हु  अपन पति   बचों  कर ैं  पकड़ी और सस पहुँ गई े ही ैं घर ें ी,  , ननद, वर और सस झस ें करन लगे। उनों  ि   सफर ें  िकत  नहीं      िए   बन ैं   और सबक  बैठकर ें करन लगी।  बच अपने दा   लन चल गए ैं अभ कपड़े  नहीं बदल  ि पति  आव लगा“शबनम इधर आना!” पति    ा। ैं  और ननद    उठकर उनक कमर ें चल गई   ैं दर पहुँी, उनों  ों ें भर िया Gottes

शबनम! अभी चूत दे, मैंने दो महीने बिना तेरी गदर चू के कैसे ़ारे, तू नहीं नती!” पति ने उतवलपन से कहा और मुे किस करने लगे।“अरे, अभी मैं सास और ननद से  कर रही हूँ।   में आती हूँ!” मैंे हिचकि  कहा।

ि पति   एक  ी। “दे शबनम, टक मत कर। मैंने  दिन बिना ूत ारे ़ा ैं। अब झस रह नहीं ा। पहले चूत े, ि सबस  कर ा!”   ें े।“अर , ि ें ऐस नहीं अच लगता। घर ें सब क्ा सोेंगे?” ैं ुंझलाते  कहा, ि पति ने ी सा उत ी और मुझे िस्तर पर ि िा। उनोंे मेा ब्उज़,  और ैं उत दी। अब ैं ूरी तरह  ी। पति मे ऊपर  गए और मे  सन लगे।   बह पस ी, िन बह  रह बजे, जब घर ें सब  तज़ कर रह े,  सब अज लग रह ा। ि  पति ी चूत रन  तलब इतन  ि   नहीं।

“सुनि जी, सब लोग मेरा तज़ा कर रहे हैं। ्ली़ मुझे ़ दीि!” मैंने िर कहबस दो मिनट, ान! मैं ेरी चूत मार ूँ, बस  िनट!” पति  कहा।

सुबह  समय जब   ूने लगे,  मन में एक अज   घर कर गई अभ  यक े लौ ी, दस मिनट  नहीं ुए े, फिर  उनक  पहल   कपड़ों पर े। मेरा पति ा, इसलि   कहना मुिल ा। पच मैंने अपन  अलग कर ि, शर ितर पर  गया।

 ै, चोद ि, ि जल ि सब   तज़ा कर रहे ैं!” मैं कहा।पति  मस-मस   लगे। ोस्ों, मैं बह बसरत औरत हूँ।    ै, हर कर कप  ै और मे िगर 38-36-34 ै।  भर  ि हर ि ो चोदने का मन करत ै। ार ें लो  खत रहत ैं और कहत ैं, “कितन मस मा ै,  इसक  रन  िे!” नदार   बसरत पर ि कर ि   ैं। े पति मे बसरत पर मरते हैं।   38  के ्स  रहे थे,  बड़े,  और रस े। े-े मु  मज़ आन लगा। पति   सत    पर आए और अपन 8       ें  दिा।     दन लगे।  शरिंदग  - मज़  आन लगा। कमर  दरव  ोने  सब समझ गए ोंगे ि हम  कर रह ैं।  ि  पति  घपघप  रह े।

ैं  तरह   और पति का    ें   दर-हर हो रह ा। ैं “आआआह ईईई ओह अई अई ममी…”  िसकिाँ भरन लगी। ैं पति  कसकर पकड िा।  े चिकने,  बदन पर ले े,    रह  और ेजी  ोक रह े।  ें ुदा के नश ें   रह ीं। पति ा लं मेरी  ें ्रे  तरह चल रहा ा। ैं “ममी… ममी…   ी… हा  ा…   ँ… उनहूँ…”  ामु आव़ें नि रह ी। पति  8    मेरी  ूत   रह ा।  बहुत मज़ा  रह पति ने ते-ते झटके मारे और ैं अपन िकन ाँगें उनक कमर ें लप ीं। ैं उन्हें ीने से िपक िा। ो मेरी   अपन   े फा रह े। मैं जननत ें ी। ीस मिनट तक   लत रहे।  ाहर से ुकारन लगीं, “अर बहू, कहाँ गई? ी चा ी हो रह ै!” ैं घबर गई।“ि ी, बी मिनट  आप ेल रहे हैं। माँ  ुला रही हैं,   ि!” मैं कहा, ेकि पति नहीं माे। उनक ाल नहीं झड़ रह ा।  दि की भूख  यद उन्हों अपन ंड िका और मेरे बूब्स िर  े लगे। मेरी िपल्स े चारों ओर काले ेरे बहुत  लगत े। पति मेरी चूिों को ऐस  रहे थे ैसे पहली बा िी हों। ो निपल्स को हल्के-हल टते, ैं “उई उई ाँ… ओह्ह् ाँ…” बोलकर कमर उठा देी।  -  रह ीं, ि पति मुझे बजा रहे थे।

पति मे रस िों   रह े।   पि ें मज़ा  रह ा। िर उनोंने  ाँगें ोलीं और  गलिाँ मेरी चूत में  ीं।   सड़े ो तेजी से टन लगे। ैं गल हो रही थी। “आआह … मम्मी… रुि ा!” मैंने कहा, लेि वो नहीं े। उनक गलिाँ मेरी चू की गहर ें थीं। मैं ार- अपन ाँ उठा रही थी। आध   मेरी चू  सफ़ेद मकखन िकला, िे पति   लिा। ि उनों  ोड़ी बना। मैं टन ़े और अपन 34 ंच  िछव़ा मांट एवर की तरह उठ िा। पति मे , िकन ों  सहल और मन लगे। मैं “    ँ… अहह… सी सी सी… हा हा हा…” की िसकिाँ ले रही थी।  ि    ेक् का मज़ा मिल शबनम, , बा ॉड! तुमस हस औरत ैं कभ नहीं ी!” पति ने तारी ी। मैं   गई ो मेे मुयम ों  मत और टत रहे। ि उन्होंने    े से चाटन  िया। उनक  मेरी चूत की हर कल   रह ी। ैं िसक रह ी, “आआह ओह ममी…” पति े अपना मोटा लंड मे  में  ि और   तरह दन लगे। मैं अपन रस ों  रह ी। मे शर जल रहा ा। पति को  ़ी बनकर दना बहुत पस ा।  ेरे ्ठों  कसकर पकड़े हुए  और े से पेल रहे े। मैं “    ँ… अहह   ी…   ा…” िल्ा रही ी। पैं मिनट तक   दत रहे, लेकिन उनका माल नहीं झड़ा। ि  िस्तर पर ले गए और मु अपन कमर पर बिान, अब मेरे लौ़े की सव कर!” पति  कहा। मैं उनक कमर पर ठकर उनक 8 ंच के   सवारी करन लगी। े-े मे कमर  हु। वो ी नीे से धक्के मारन लगे। आध े बाद   ूत ें झड गए ैं कपड़े पहन और सास के  गई, लेकिन   ी थीं और ननद  चल गई ी।

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घर वापस आते ही पति ने मुझे कमरे में ले जाकर जबरदस्ती की।

अर , सबक अचे से गत ै। ेरा  शबनम ै। कई ालों     ाली कहिाँ पढ   है,    ऐस कहानिाँ पढ़े िा मे ि  नहीं ा। आज ैं अपन   एक कह ी। उम ै, आप सभ  यह कह अच लगी। ैं  मह े लि घर पस आई ी।  ें दस मह ैं सस ें रहत ूँ, गर  िों ें  िलत ै, तब ैं यक   ूँ। ैं यहाँ आई  ी, बी दि   े। इस   पति   िा।

“शबनम ान… जल्दी घर  जा ीस दिन से मुझे चू रने को नहीं मिी!” पति ने उतवलपन  कहा।

ुनि जी! ैं कम से कम दो महीने ाँ  ास रहूँी। तब तक आप अपन  े मु मारकर काम चला लीि!” ैंने सत  जव िा।

अर ान,  ो जानत  ि मु रन ें  मज़ा कहाँ   रन ें आत ै।  जल  !” पति  मन ी, ि ैं उनक ें  ीं और यक ें   गई  अपन घर  बह  आत  और सस ें जर  अच नहीं लगत ा। ोस्ों,  पति बह   और जव मर्द े।  िन में   और  ें     रत े। उनें ेक्स करन बह पस  और ैं  ऐस  औरत ी, ि  ा-   बह अच लगत ा। यक आए अब एक मह    और ैं    ि तरस रही ी। ैं अपनी  ें ि लकर  गलिों  मज़ा   ी। उधर  पति अपने हाथ से ाम चल रह े, ि उनें   मज़ा नहीं मि  रह ा। े-  मह  गए और  बचों का  ि    गया। मायक े लौटन  मन  नहीं ा, ि हर  लड  एक ि अपन सस  टन  पड ै। इसलिए मैं न हते हु  अपन पति   बचों  कर ैं  पकड़ी और सस पहुँ गई े ही ैं घर ें ी,  , ननद, वर और सस झस ें करन लगे। उनों  ि   सफर ें  िकत  नहीं      िए   बन ैं   और सबक  बैठकर ें करन लगी।  बच अपने दा   लन चल गए ैं अभ कपड़े  नहीं बदल  ि पति  आव लगा“शबनम इधर आना!” पति    ा। ैं  और ननद    उठकर उनक कमर ें चल गई   ैं दर पहुँी, उनों  ों ें भर िया Gottes

शबनम! अभी चूत दे, मैंने दो महीने बिना तेरी गदर चू के कैसे ़ारे, तू नहीं नती!” पति ने उतवलपन से कहा और मुे किस करने लगे।“अरे, अभी मैं सास और ननद से  कर रही हूँ।   में आती हूँ!” मैंे हिचकि  कहा।

ि पति   एक  ी। “दे शबनम, टक मत कर। मैंने  दिन बिना ूत ारे ़ा ैं। अब झस रह नहीं ा। पहले चूत े, ि सबस  कर ा!”   ें े।“अर , ि ें ऐस नहीं अच लगता। घर ें सब क्ा सोेंगे?” ैं ुंझलाते  कहा, ि पति ने ी सा उत ी और मुझे िस्तर पर ि िा। उनोंे मेा ब्उज़,  और ैं उत दी। अब ैं ूरी तरह  ी। पति मे ऊपर  गए और मे  सन लगे।   बह पस ी, िन बह  रह बजे, जब घर ें सब  तज़ कर रह े,  सब अज लग रह ा। ि  पति ी चूत रन  तलब इतन  ि   नहीं।

“सुनि जी, सब लोग मेरा तज़ा कर रहे हैं। ्ली़ मुझे ़ दीि!” मैंने िर कहबस दो मिनट, ान! मैं ेरी चूत मार ूँ, बस  िनट!” पति  कहा।

सुबह  समय जब ो मुझे छूने लगे, तब ऐस लगा जै  अज  रह ो। मायक  घर आए अभ इतन वक्त  नहीं  ा, िर   ेचै े। मेरा पति  ो, इसलि ैं  कह सकत  ि नहीं? ैं ़ा कर पल पर ले गई, दोनों    अलग कर ि

 ै, चोद ि, ि जल ि सब   तज़ा कर रहे ैं!” मैं कहा।पति  मस-मस   लगे। ोस्ों, मैं बह बसरत औरत हूँ।    ै, हर कर कप  ै और मे िगर 38-36-34 ै।  भर  ि हर ि ो चोदने का मन करत ै। ार ें लो  खत रहत ैं और कहत ैं, “कितन मस मा ै,  इसक  रन  िे!” नदार   बसरत पर ि कर ि   ैं। े पति मे बसरत पर मरते हैं।   38  के ्स  रहे थे,  बड़े,  और रस े। े-े मु  मज़ आन लगा। पति   सत    पर आए और अपन 8       ें  दिा।     दन लगे।  शरिंदग  - मज़  आन लगा। कमर  दरव  ोने  सब समझ गए ोंगे ि हम  कर रह ैं।  ि  पति  घपघप  रह े।

ैं  तरह   और पति का    ें   दर-हर हो रह ा। ैं “आआआह ईईई ओह अई अई ममी…”  िसकिाँ भरन लगी। ैं पति  कसकर पकड िा।  े चिकने,  बदन पर ले े,    रह  और ेजी  ोक रह े।  ें ुदा के नश ें   रह ीं। पति ा लं मेरी  ें ्रे  तरह चल रहा ा। ैं “ममी… ममी…   ी… हा  ा…   ँ… उनहूँ…”  ामु आव़ें नि रह ी। पति  8    मेरी  ूत   रह ा।  बहुत मज़ा  रह पति ने ते-ते झटके मारे और ैं अपन िकन ाँगें उनक कमर ें लप ीं। ैं उन्हें ीने से िपक िा। ो मेरी   अपन   े फा रह े। मैं जननत ें ी। ीस मिनट तक   लत रहे।  ाहर से ुकारन लगीं, “अर बहू, कहाँ गई? ी चा ी हो रह ै!” ैं घबर गई।“ि ी, बी मिनट  आप ेल रहे हैं। माँ  ुला रही हैं,   ि!” मैं कहा, ेकि पति नहीं माे। उनक ाल नहीं झड़ रह ा।  दि की भूख  यद उन्हों अपन ंड िका और मेरे बूब्स िर  े लगे। मेरी िपल्स े चारों ओर काले ेरे बहुत  लगत े। पति मेरी चूिों को ऐस  रहे थे ैसे पहली बा िी हों। ो निपल्स को हल्के-हल टते, ैं “उई उई ाँ… ओह्ह् ाँ…” बोलकर कमर उठा देी।  -  रह ीं, ि पति मुझे बजा रहे थे।

पति मे रस िों   रह े।   पि ें मज़ा  रह ा। िर उनोंने  ाँगें ोलीं और  गलिाँ मेरी चूत में  ीं।   सड़े ो तेजी से टन लगे। ैं गल हो रही थी। “आआह … मम्मी… रुि ा!” मैंने कहा, लेि वो नहीं े। उनक गलिाँ मेरी चू की गहर ें थीं। मैं ार- अपन ाँ उठा रही थी। आध   मेरी चू  सफ़ेद मकखन िकला, िे पति   लिा। ि उनों  ोड़ी बना। मैं टन ़े और अपन 34 ंच  िछव़ा मांट एवर की तरह उठ िा। पति मे , िकन ों  सहल और मन लगे। मैं “    ँ… अहह… सी सी सी… हा हा हा…” की िसकिाँ ले रही थी।  ि    ेक् का मज़ा मिल शबनम, , बा ॉड! तुमस हस औरत ैं कभ नहीं ी!” पति ने तारी ी। मैं   गई ो मेे मुयम ों  मत और टत रहे। ि उन्होंने    े से चाटन  िया। उनक  मेरी चूत की हर कल   रह ी। ैं िसक रह ी, “आआह ओह ममी…” पति े अपना मोटा लंड मे  में  ि और   तरह दन लगे। मैं अपन रस ों  रह ी। मे शर जल रहा ा। पति को  ़ी बनकर दना बहुत पस ा।  ेरे ्ठों  कसकर पकड़े हुए  और े से पेल रहे े। मैं “    ँ… अहह   ी…   ा…” िल्ा रही ी। पैं मिनट तक   दत रहे, लेकिन उनका माल नहीं झड़ा। ि  िस्तर पर ले गए और मु अपन कमर पर बिान, अब मेरे लौ़े की सव कर!” पति  कहा। मैं उनक कमर पर ठकर उनक 8 ंच के   सवारी करन लगी। े-े मे कमर  हु। वो ी नीे से धक्के मारन लगे। आध े बाद   ूत ें झड गए ैं कपड़े पहन और सास के  गई, लेकिन   ी थीं और ननद  चल गई ी।

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