भाभी के योनि पर किस किया फिर संभोग किया।

Jan 2, 2026 - 14:47
Jan 2, 2026 - 18:02
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भाभी के योनि पर किस किया फिर संभोग किया।

मेरा नाम अनामिका पाण्डेय है। मैं जोगिया कलां में रहती हूँ, जो बलरामपुर के पास एक छोटा सा गाँव है। मेरा रंग गोरा है, और मेरा बदन ऐसा है कि लोग देखते ही दीवाने हो जाते हैं। मेरा फिगर 36-32-38 है, और मेरी चूंचियाँ इतनी सॉलिड हैं कि हर कोई उन पर नजर गड़ाए रहता है। मेरी भूरी आँखें और सिल्की बाल मेरी खूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। मेरी चूत गोरी है, और उसके दोनों टुकड़े लाल-लाल, रसीले हैं। चूत के दाने पर एक बड़ा सा काला तिल है, जो ऐसा लगता है जैसे किसी ने मेरी चूत को नजर से बचाने के लिए टीका लगा दिया हो। मेरे पति अरविन्द पुलिस में हैं और ज्यादातर बाहर रहते हैं। घर में मेरे ससुर जी, जो अक्सर बीमार रहते हैं, और मेरा देवर निलेश है। मेरी सास तो कई साल पहले गुजर चुकी हैं। निलेश जवान, स्मार्ट, और लंबा है। उसका चेस्ट चौड़ा और मर्दाना है, और वो अपनी गर्लफ्रेंड को भी मुझसे मिला चुका है।

तीन साल हो गए  ी के, मगर अरविन्द के साथ  पूरे नहीं होते। वो  दिन घर रहते, बाकी समय मैं चूत में उंगली डालकर तड झेलती हूँ। इतनी खुजली रहती है  ें कि रात ो लंड के िना आर नहीं िलता। पर अरविन्द की करी की वजह से मेरी जवानी सूखत रहती है। निलेश को दे मन में ऐसे ख्याल आते ि पत नहीं कब   । उसका बदन, उसकी चाल - सब  मुझे बे कर देता था। मैंने कभी कुछ ा नहीं, बस तर  तर धधकत रही। फिर एक दिन ऐसा मौका  ही गया।




एक बार ससुर जी रिश्तेदार के यहाँ गए थे। घर में सिर्फ मैं और निलेश थे। दिन भर हम दोनों हंसी-मजाक करते रहे। निलेश ने मजाक में कहा, “भाभी, आप तो मेरी गर्लफ्रेंड से भी ज्यादा हॉट हो। अगर भैया न होते, तो मैं आपसे ही शादी कर लेता।” मैंने हंसकर जवाब दिया, “अरे, निलेश, अब क्या करूँ, तुम तो छोटे ठहरे। लेकिन तुम मुझे सचमुच अच्छे लगते हो।” निलेश ने मेरी आँखों में देखा और बोला, “भाभी, दिन तो मैं आपके साथ बिताता हूँ, बस रात का क्या करूँ?” उसकी बात सुनकर मेरी चूत में हल्की सी गुदगुदी हुई। मैंने हंसते हुए कहा, “तो रात भी बिता लिया करो।” निलेश जोर से हंसा, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

उस रात मैंने निलेश से कहा, “निलेश, आज मेरे पास ही सो जाओ। घर में कोई नहीं है, अकेले डर लगता है।” निलेश तुरंत मान गया। रात के 10 बजे हम दोनों एक ही बिस्तर पर लेटे थे। मैंने साड़ी और ब्लाउज पहना था, और निलेश ने लोअर और टी-शर्ट। रात के 11 बज गए, लेकिन नींद किसी को नहीं आ रही थी। मैंने सोने का नाटक किया, लेकिन मेरी आँखें हल्की खुली थीं। निलेश मुझे घूर रहा था। उसकी साँसें तेज थीं, और वो धीरे-धीरे मेरी तरफ खिसक रहा था। मैंने देखा कि उसका लंड खड़ा होकर हाफ कच्छे में तंबू बना रहा था। उसका लंड मेरे पति से कहीं बड़ा लग रहा था, शायद 7 इंच का, मोटा और सख्त। मेरी चूत में गीलापन होने लगा।

निलेश ने धीरे से मेरे सिल्की बालों को छुआ। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में फिरने लगीं, और मेरी चूत में खुजली बढ़ गई। मैंने करवट ली और उसकी तरफ मुँह करके लेट गई, जैसे सो रही हूँ। निलेश ने हिम्मत जुटाई और अपना हाथ मेरे चेहरे के पास लाया। उसकी उंगलियाँ मेरे होंठों को छूने लगीं। मेरे बदन में करंट दौड़ गया। फिर उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। उसका गर्म स्पर्श मेरे होंठों पर ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में आग लग गई हो। मैंने आँखें बंद रखीं, लेकिन मेरे बदन में सिहरन हो रही थी। निलेश ने हल्के-हल्के मेरे होंठ चूसने शुरू किए। उसकी जीभ मेरे होंठों पर फिसल रही थी, और मैं चुपके से उसका मजा ले रही थी।

़ी देर ें निलेश को ा हौसला मि गया। उसक ों मेरे होंठों पर ेजी से आन लगे। उसकी एक हथी मेरी ी पर पहुँ गई। ब्लाउज के ऊपर से  वह मेरी ियों ो दबाने लगा। मेरे 36 बर के तन अब कठोर े, निप्पल ब्लाउज के ऊपर  िंचकर हर  गए े। उसन उनें अपनी उंगलियों से ा शुरू कर िया। मैंने कु ी रोका नहीं। मेरी ि इतनी तरबतर हो चुकी थी कि मैंने पेटीकोट  तर हाथ डा िा। अपन दगी में एक उंगली दर  ी। "उह्ह... सी... सी... ओह..." मेरे होंों से ी सी आव निकल पड़ी।

निलेश ने मेरे ब्लाउज के हुक ़ दिए। ब्रा के ऊपर से उसने मेरी िों  दबोच िया, फिर पट्टियाँ खींचकर ्रा  िा दी। मेरी गोरी ियाँ हर  गईं। वह मेरे निप्पल पर झपटा। एक को मुँह में लेकर चूसने लगा, ो कोई िु दूध ू रहा हो। "आह्ह… निलेश… उफ्फ… सी…" मैं ाँ रही थी। उसने इतना दबाया कि  िाँ लाल हो गईं। मैंने साड़ी उतार दी, अब सिर्फ पेटीकोट में थी। उसने पेटीकोट का ा खींचा, और वह नीचे िसक गया। मेरी ि के  दिखने लगे।

निलेश ने मेरी चूत को ा, ि बोला - "इतन गहर ? ऐसे तो को जंगल समझे।" मैं ेंपकर ोली - "जब   नहीं, सफ  सवाल ही नहीं आता।" उसन े हु कहा - "अब तो ो भी बदल गया," और े से मेरे ों को हटा लगा। उसकी जीभ े मेरे दाने  े ही ैं िठक गई। "ओह... निलेश..." मैं हडबड़ा। वो ऊपर-नीचे चल रहा था, मैं  उसके मुँ ें  रही थी। पानी टपकने लगा, उसन एक  ूं नहीं ़ी। ैं ां रही थी, "और... यहीं... आह…"

़ी देर े बाद निलेश उठ खड़ा हुआ, ि  े अपने लोअर और डरवियर े उतार दि। उसका  इंच का लं घट आग  ओर खड़ा  गया, मेरे ास ी। मैंने उसे हाथ में पकड़ लिया, और ुँ ें लकर लॉलीपॉप की तरह चाटन लगी। ो गर्म था,    में तप छड ो। ैंने उसके ों को हल  ेड़ा, ि  को गले तक उत लिया। "उफ... भाभी... ऐसे तो तु हर औरतों े चूस रही हो," निलेश  ोंों से आव िसल रही थी। मैं लग चाटत रही, तब तक जब तक   तर   गया।

बिस्तर पर े लिटा  ि े मेरी ांें अलग ीं। ो अपना लंड मेरी चूत  ऊपर घस रह ा। "उफ... निलेश... डाल दे..." मैं   उठी।  े, उसने अपने लंड के ि ो मेरी चूत के ुं पर ोंका। "मम्मी... आह... सी... सी..." मेरी आव लडखड़ा गई। आधा  तर घुस ा था। एक और झटके के , पूरा लंड अंदर िसक गया। "आह... निलेश... उफ्फ... खत्म कर िा..." मैं ची पड़ी। अब ो ते े धक्के लग लगा। उसकी ांें मेरी ांों से टकरा रही थीं, और कमरे में “थप-थप-थप” की आवाज  गई

"भाभी, तुम्हारी चूत इतनी टाइट े है... भैया ें चोदते नहीं?" निलेश ने ां लते हुए पूछा। मैंने आव ाँपते हुए जव िा, "तेरे भैया का लंड तेरे जैा मोटा नहीं ै... आह्ह... और जोर से मार..." उसन ी एक टांग ऊपर उठाई, ि िे से सकर मेरी चूत में धकलने लगा। "थप-थप-थप... आह्ह... सी... सी..." मे ुं े चीखें िकल रही थीं। मेरी चूत बार-बार पानी छोड़ रही थी।  ा, मेरी चूत को चाटन लगा, सारा पानी ीभ   गया। "भाी," उसन कहा, "तुम्हारी चूत का पानी अमृत  लगता है।"

मे तरफ झुका,   ुतिया बनाकर पीछे से  गया। "आह्ह… निलेश… और ेज… मेरी चूत  े… उफ्फ…" मैं िलख उठी। उसका लंड मेरे तर के  तक जा रहा था। उसके े मेरी गांड पर ठनक रहे थे। कमर ें "चट-" की आवाज  गई। मैंने अपनी गांड आगे-पीछे िलाकर मजे लि उसने मेरी कमर जबड़े की तरह ाम ी, धके लगा लगा। "भाभी, तुम्हारी गांड भी बढ़िा है..." उसक ुं  िकला।

निलेश ने मुझे दीवार के  खड़ा कर िया। एक टांग ऊपर उठाकर ो मेरे तर ुस गया, धम धके लगाने लगा। "उफ... िलेश... ाँ... ाँ... ेज..." मेरे ुंह े आवाजें हर  रही थीं। नम बढ रह ी, चु-चु की आहट  लगी। उसने मेरे   दब िा, होंठों पर चाटन  कर िा। मैंने अपनी गलिों े नाखून उसकी  पर ़ दिए।

निलेश ने ऊपर उठकर मेरी ी को चूसना  कर िा। फिर वह पलट गया, मे  खड़ा  गया। उसक  मेरे िछवाड़े पर िी। "अरे, ऐसा क्यों कर रहे हो?" मे आव ांप रह ी। उसन  वर ें कहा - “भाभी, आपक िछवाड़े में सना चाहता हूँ…” अपने लं ंड पर थूक लगाकर वह छेद   ले आया। “उफ्फ... बह   रह ै…” मैं सिसक उठी। धीरे-ीरे  दर  लगी। “ओह… मम्मी…” मेरे मुं  आवाज़ िकली। एक झटके में वह पूरा तर घुस गया। “आह… बह दर हो रहा…” मैं ची उठी, ों ें   गए

गरदन    लत  निलेश ने तेजी से धक्का िा। कमर झटकत  आव आई - थप, थप, थप। दर्द था, ालाँकि एक अज तरह  ी भी महस ो रही थी। "ओह... निलेश... और ेज..." ेरे ोंों से छू गया। ़ी देर बाद वह ा, लंड हर निकाला और मुझसे सामने मु्ठी चले लगा। “भाभी,” उसक आव आई, “खोल ो मुँह।” िा सोे मैंने  अलग ि। उसके   चप ें गर्म ींे मे  पर आए। निगल गई, ि े।

बिस्तर पर गिरत  वह मे   गया। उसके ऊपर आकर लेट गई, कपड़े  नहीं उतारे े। रातें अब इस ंदा ें तन लगी हैं। वह मेरी चूत   गांड पर ी हा लत ै। मैं उसका लंड ुँ ें कर े-े चूसती रहती हूँ।

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