घर के मालिक की पत्नी से संबंध बना

Jan 2, 2026 - 12:57
Jan 2, 2026 - 13:17
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घर के मालिक की पत्नी से संबंध बना

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम राहुल है, और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। 21 साल का गबरू जवान, लंबा-चौड़ा कद, चौड़ी छाती और मजबूत बाजुओं वाला हूँ। रोज़ाना एक्सरसाइज और योग मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं, जिससे मेरा शरीर फिट और चेहरा चमकदार रहता है। बारहवीं अच्छे नंबरों से पास करने के बाद मैं मेडिकल की तैयारी के लिए कोटा आ गया। यहाँ मैंने एक नामी कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया और जवाहर नगर में एक पीजी में कमरा ले लिया। कमरा साफ-सुथरा था, और माहौल पढ़ाई के लिए एकदम सही। मैं रोज़ समय पर क्लास अटेंड करता, नोट्स बनाता और अपने सपनों को पूरा करने की जिद में जुटा रहता।

मेरा पीजी एक दो मंजिला मकान में था, और मकान मालिक की बीवी, जिन्हें मैं भाभी बुलाता था, एकदम परी जैसी थीं। उनका गोरा रंग, करीना कपूर जैसी काया, 34बी की भरी हुई चुचियाँ, 26 इंच की पतली कमर और 35 इंच की उभरी हुई गाँड - उनकी एक झलक ही मेरे दिल में आग लगा देती थी। उनकी स्माइल में एक अजीब सी कशिश थी, जो मुझे बेकाबू कर देती। मैं रात को छत पर योग करता, और अक्सर भाभी को याद करके मुठ मारता। उनकी चूचियों को पानी की बूंदों से भीगते हुए, उनकी चूत की फलकों को चमकते हुए सोचकर मेरा लंड तन जाता। मैं कल्पना करता कि भैया, जो मेडिकल रिप्रजेंटेटिव थे और दिनभर बाहर रहते, रात को भाभी की चूत को चूस रहे होंगे, उसकी फलकों को सहला रहे होंगे। भाभी की सिसकारियाँ, उनकी उंगलियाँ भैया के बालों में, ये सब सोचकर मैं खुद को शांत करता। लेकिन मेरे पास मुठ मारने के सिवा और कोई चारा नहीं था।







जिंदगी तब ऐसे ही बह रही थी। सुबह उठकर योग करना, ि क्लास  ि िकल पडा, और  को भाभी के िों में ो जाा। बातचीत  बह कम होती, पर कभी-कभी ो मु ेतीं - उसी े मे ि बन ाता। आँखों में ि ी मुझे अधि ा देती। चुपक े देखता रहता - कै चलत ीं, कैसे कू लते, और छा  हवा में मती। हर  ़ दिमाग में ठहर जाती।

सुबह  वक मैं छत पर योग कर रहा था। सूरज की  में सूर्य नमस्कार करत  भाभी कपड़े कर आईं। उनकी साड़ी का पल्लू ़ा-सा िसल ा था, कमर का सफेद ि िख रहा था। मैंने जल्दी ें इधर-उधर कर ीं और जाने लगा। अचनक उनकी आवाज़ आई - “अरे राहुल, कहाँ ा रहे हो? ा तुम्हें खा जाऊँ?” हंसी  वर े मेरे दर ूँ छो ी। मैं िठक गया, शर े झुककर बोला - “ ि भाभी, बस े ही…”

“अरे, ऐसे क्यों शरमाते हो? आओ, थोड़ा बात करते हैं,” भाभी ने कहा और कपड़े सुखाते हुए मेरे पास आ गईं। उनकी साड़ी का आँचल हवा में लहरा रहा था, और उनकी चुचियाँ साड़ी के नीचे हल्का सा उभर रही थीं। हमारी बात शुरू हुई। भाभी ने मेरी पढ़ाई, मेरे गाँव, मेरी आदतों के बारे में पूछा। मैंने भी हिम्मत करके उनसे उनके बारे में पूछा। पता चला कि भाभी का नाम रीना है, और वो 28 साल की हैं। उनकी शादी को चार साल हो चुके थे, लेकिन बच्चे नहीं थे। उनकी आवाज़ में एक हल्की सी उदासी थी, जो मुझे महसूस हुई।

ें धीरे-धीरे ंबी ोने लगीं। सुबह- छत पर मुलाकात हो ाती। कभी वो मेरे योग की तारीफ करतीं, कभी मैं उनकी साड़िों की  कर ठता। एक दिन वो े हुए बोलीं, “राहुल, ऐसे योग करे तो कोई भी लड़की पलट जाएगी!” मैं ठहाका लगा िा, पर दर तप गया। उनकी शरारत, उनकी हली-हली हँसी, सब मुझे खींच रहा था। डर ी था। भैया को अगर पता चल गया? फिर भी, एक झलक के लिए मैं  रहता।

शनिवार का दिन ा। कल ी रविवार को परीक्ा थी, इसलि कोचिंग  थी। ा दि पढ़ाई ें लग िा था, दोपहर ें कमरे में झपक े रहा था। दरअसल, मेरा दरव़ा हमेशा खुला रहता, बंद जगह  तकल़ होती थी। तभ कहीं  िसकने जैसी आव आई। आँखें उठीं तो भाभी कमरे में खड़ी थीं। सांसें तेज़ चल रही थीं, ब्लाउज़ में ी ऊपर-नीचे हो रही थी। लाल साड़ी में थीं, चेहरा ुलाी था,  कहीं से जलदब़ी ें आई हों। समझता भी नहीं, तभ उनोंने दरवाज़ा बंद किया और पास आ गईं।

“राहुल…” उनकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी। मैं बिस्तर पर उठकर बैठ गया, लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, भाभी ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर टकराईं, और मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। मैं स्तब्ध था, लेकिन भाभी की जीभ मेरे होंठों को चूस रही थी। मैंने भी हिम्मत करके उनके होंठों को चूमा। हमारी जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं। उनका मुँह गर्म था, और हमारी लार एक-दूसरे में मिल रही थी। मैंने उनकी कमर को पकड़ा, और उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया। उनकी चुचियाँ ब्लाउज़ में कैद थीं, लेकिन उनके उभार मेरे सीने से टकरा रहे थे।

“भाभी… ये… ये क्या…” मैंने हाँफते हुए कहा, लेकिन भाभी ने मेरी बात काट दी। “चुप रहो, राहुल… बस… मुझे चाहिए तुम…” उनकी आवाज़ में एक भूख थी, जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी। हम फिर से चूमने लगे। मैंने उनकी साड़ी को धीरे-धीरे खींचा, और वो फर्श पर गिर गई। भाभी सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थीं। उनकी गोरी कमर, उनके गहरे नाभि के गड्ढे ने मुझे पागल कर दिया। मैंने उनका ब्लाउज़ खोला, और उनकी चुचियाँ ब्रा से आज़ाद हो गईं। उनकी गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुकी थीं। मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह… राहुल… और ज़ोर से…” भाभी सिसकारीं। उनकी आवाज़ में एक मस्ती थी, जो मेरे लंड को और सख्त कर रही थी।

मैंने उनकी ब्रा और पेटीकोट भी उतार दिया। भाभी पूरी नंगी मेरे सामने थीं। उनकी चूत बिना बालों की थी, और उसकी फलकें हल्की सी गुलाबी थीं। मैंने उनकी चूत को छुआ, तो वो मछली की तरह उछल पड़ीं। “राहुल… आह… छू ले… इसे चाट…” भाभी की आवाज़ में एक मादकता थी। मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और उनकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। उनकी चूत से एक हल्की सी खट्टी-मीठी खुशबू आ रही थी। मैंने उनकी फलकों को चाटना शुरू किया। “उउउ… आह्ह… राहुल… हाय…” भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैंने उनकी क्लिट को जीभ से सहलाया, और वो पागल सी हो गईं। “हाय… चूस ले… मेरी चूत को… आह्ह…” भाभी की चूत से रस टपकने लगा। मैंने हर बूँद को चाट लिया। उनकी चूत का स्वाद मुझे दीवाना बना रहा था।

लगभग रह मिनट तक मैं उसकी चूत ो चाा। इसक , भाभी ने मुझे बितर पर िकर जींस उतार दी। मेरा छह इंच का लंड सख कर ऊपर उठ गया। उनोंने उसे हाथों में पकड़ा, ीरे- ़ा। "ाहुल... े कितना मोटा है..." ऐस कहकर वो मुं, ि मेरे लंड को मुँह में ले लिया। उनकी गर्म जीभ े मेरे  के सिर को  िा। "उफ... भाभी... ओह…" मैं हले से ाँा। उनोंने ूरे लंड को दर ीं लिया, चूसना  कर िा। उनकी जीभ नसों पर  रही थी, मैं ि -सा  गया।

“भाभी… अब… अब डाल दूँ?” मैंने हाँफते हुए पूछा। भाभी ने अपनी टाँगें और फैलाईं और बोलीं, “हाँ राहुल… चोद दे मुझे… मेरी चूत को फाड़ दे…” मैंने अपनी लार से उनके चूत को और गीला किया और अपने लंड को उनकी चूत के मुहाने पर रखा। एक धक्का मारा, और मेरा लंड उनकी चूत की गहराइयों में समा गया। “आह्ह… हाय… राहुल… कितना गहरा गया…” भाभी की सिसकारी ने मुझे और जोश दिलाया। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। “पच… पच…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। भाभी की चुचियाँ मेरे हर धक्के के साथ उछल रही थीं। मैंने उनकी एक चूची को मुँह में लिया और चूसने लगा। “आह्ह… राहुल… चूस ले… मेरी चूचियों को… हाय…” भाभी की सिसकारियाँ मुझे और उत्तेजित कर रही थीं।

करीब 10 मिनट तक मैंने उन्हें मिशनरी पोज़ में चोदा। फिर भाभी ने मुझे नीचे लिटाया और मेरे लंड पर बैठ गईं। “अब देख… तेरे लंड की सवारी…” भाभी ने शरारती अंदाज़ में कहा और मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी। “आह्ह… भाभी… कितनी टाइट है…” मैं सिसकारी। भाभी की चूत से हल्का सा खून निकलने लगा, शायद उनकी चूत की दीवारें मेरे मोटे लंड से रगड़ खा रही थीं। “राहुल… चोद… और ज़ोर से…” भाभी चिल्लाईं। मैंने उनकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के मारने शुरू किए। “पच… पच… पच…” की आवाज़ तेज़ हो गई।

एक  फिर हमन अपनी मु बदल ी। भाभी को ैंे घुटनों  बल  िया। उनकी गोल-मट िछवाड़ी े मेरे सामने  गई। पीछे से  े लंड  में ा, ि   आगे-े हो लगा। "उफ... राहुल... मेरी िछवाड़ी पर हा ..." उनकी आवाज़ में ी थी। मैंने एक  थप्पड़ उनक ि पर मारा, वो और ू हो उठीं। "ओह...  े चोदो... मेरी चूी को फाड़ दो..." मैंने गति और ते कर दी। उनकी चूत का ा रस मेरे लंड पर िपट रहा था।

बी मिनट तक चल झट के बाद मैंने भाभी के दर ही सब कुछ उड़े दिा। "उफ... राहुल... इतना गर्म..." भाभी े सां   कहा। हम दोनों  ांें  थीं। मैंने उन्हें  ीं लिया,  उनके तनों पर मने लगे। तभी लंड में ठन  आई नजर ी तो अंडरवियर तरबतर था। चमड़ी फटी , खून   ीं लगे थे। जल्दी से डेटॉल से धोया, िर  से दर्द ां करन ाली   आया।

ि े मैं और भाभी एक-सरे के बह  ो गए। हर मौके पर, मैं उनकी ी दबा ेता, वो मेरे लंड को े से  ेतीं। उनकी शरारत भरी मु मेे दि ें  ाती। लेकिन एक  भैया ने हमें ऐसे देख लिया। उनक हर पर गुस्सा था। े, “राहुल, कहीं और ठहर । मैं रीना से बहुत प्यार करता हूँ।” मैंे समझ िा - मैं गलत  पर था। कुछ  लकर जवाहर नगर में, दो गलिां आगे, नई जगह ले ली।

मेरी ज़िंदगी की पहली  चुदाई का सब  यहीं खत्म हु यद ्हें  कह अच लग ो। अगर मन ी ऐसा कु महस िया है,  पत करन ूंा। इस ारे ें लन  लना।

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