एक स्थानीय महिला ने मालिश करने के बहाने संबंध बनाए

Jan 10, 2026 - 11:25
Jan 13, 2026 - 19:50
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एक स्थानीय महिला ने मालिश करने के बहाने संबंध बनाए

शिवा लता हूँ, उम ईस  कर। फर्रुखाबाद में पला-बढ़ा हूँ मैं।  मेरी ां फुट  ़ी ा। खने में मजब, हरा गोरा है। इधर रहत ूँ  समय े।.

बात उस वक की है, जब मैं रहवीं ें पढ़ रहा था। गाँव में एक भाभी रहती ीं, िनका नाम साधना था। उम्र  उनक बत- के आसप होगी, मगर शरीर की तरु ऐसी है कि खन ा कोई भी उन्हें ीस के  ठहर। घर वालों से उनक िे अच्छे हैं, इस बहे मैं अक्सर उनके घर जाता रहता। शादी के कई साल  े, ि  आज तक कोई बच्चा नहीं हु।.


अचनक भाभी मेरे घर पहुँ गईं। ीं, "शिवा, कल मुझे मंदिर जाना है।" ि ठहर गईं। चत रहीं। ि ीं, "तुम्हारे भैया  अभी घर पर नहीं हैं।" ़ी    रही। आखि ें ा, "क्या तुम मुझे वहाँ ले  सकत ो?"?

ां कहत  मैं सहमत हो गया।.

दूर  ि शहर से काफी।.

अगले दिन सुबह फोन   बजी। भाभी की आव ी - शिवा, हर  ें 8 बजे पहुँचना।.

आठ बज े ठीक समय पर ैं उनके घर पहुँचा, इक  । दरवाजे पर  आव , तो भाभी दर  िकल आईं।.

अचनक मे नज पड़ी तो वह देसी भाभी मन ी। लाल सा़ी में ऐस  छलक रही थी ि ाँ  गई रते-रत ें थक गईं, पर ि  झपक  लगी।.

ि  पड़े – क्या  है, शिवा?

बस इतन  ि मैंने ूछ िा -  हरकत ो नहीं?

भाभी ीं - चलि, ां।

अचनक वो मेरे े बाइक पर आकर बैठ गईं, ि हम ों चल पड़े। ीरे-ीरे मे दर उनके रति ्र इच  उठीं। मन में मने लगी कलपनँ - कै करूँ भाभी के सा ंभो उनक शर े स्पर्श में था,   महसूस  रह ा। ऐस ें ि रन लगे, और मेरा लिं खड़ा हो गया।.

ि भाभी ीं - इतन   इक क्यों चला रहे हो... मन ें क्या चल रहा है?

बह  समय मैंने  े कहा - भाभी, आपक े में सोच रहा था। लगता है आपको लाल  सचम सू करता है।.

 ाए और े -  ै… तु ऐसा सोच रहे हो।.

मैं हंस दिया

अगल पल हम आधे-अधी बातों में ंदिर के ़िों पर खड़े े। ि रण करक े-े लौटन लगे।.

 रास्ते में मैंने  ़ी - भाभी, कहीं ककर ़ा खाना खा लेते हैं।

पहर    ि हम लोग एक जगह गए। वहीं पहुंचकर कु समय िाया। ि  बजे  पहल घर  आए।.

पर दोस्त, भाभी के बारे में सोच-चकर मेरा लंड ऊपर उठन लगा।  में मैंने उनके नाम पर  चलाया, िर ांति मिी। रातभर आँखों पर ीं नहीं िी। नजरों  आग उनक लचर शर बार-बार  गया। ऐसे में चढ़ा करने के िचा े बेैनी बढ गई।.

अगले दिन मैं उनके घर पहुँा। तभ नज पड़ी कि भाभी नहाने  ि जा रही थीं। उस पल मैंने उन्हें देख िा, ि पेटीकोट और ब्लाउज में। पहली बार ऐस अवत ें उन्हें देा मैंे।   ेरे लंड को ऊपर उठ िा। मन ें  आया - अब  ूकर उनें चोद ूँ। उनके 34 साइज़ के ्रोों  उभर आकि दे मैं हली सी वनि बन ा - वाऊ… क्या नद बदन है।.

ि भाभी ने ममों पर तौलिया लते हुए ा - इधर क्यों  रहे हो?

ा मैंने - षम करें भाभी…अब ा होा।.

बहन  कहा – तुम वहीं ो। मैं जल  आऊी, ि ़ी   ि

िर भी ैं वहीं  िकल पड़ा, जब भाी बाथरूम में गई। घर पहुँचकर  उस े नाम का  लगा… िर एक छो  ांि मिली। पर अब बेचैनी पहल    गई  तब भाभी का फोन आया - अचानक चले गए क्यों?

बस कुछ  नहीं… इतना ही। आपक   चल रहा था। िा मैंने सोच िा - ़ी  बाद आ जाऊंगा।.

बहन ने सव िा - अच्छा, मैं कहीं उलझ  नहीं थी, ि़ नहाने  ि जा रही थी। क् ुम्ें कु ि ा?

 ा मैंने – नहीं भाभी, मैं तो बस इधर-उधर मता हु  गया। मन ि था कहीं ाम ें लग नहीं ा रहा था, ऐस ें लगा कि आपके पास चलकर कुछ बातें कर ूँ, समय  एगा।.

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अचा, तुम ठहर  ों नहीं गए? -  ी।!

कभी-कभी फोन पर बातें  लगीं।  अपन तरह  ादा बोलत रहती थीं।.

 ी, " िन मैं भी उब महसूस करती हूँ। तु्हा  बातचीत करन े मेरा वक अचनक जर जाता है।".

पन में एक ्ता मिल ी गया था उनस लन ा।  टती, और मैं भाभी से बातें  कर ा।.

एक बह भाभी ीं - शिवा भईया... कभ उस लड ो तो  आओ िसक  ो?

बस इतना कहा - नहीं , अभी मौा नहीं है।.

ी से ्करा    कहा - चक्करों में सन  जररत नहीं पड़ती, अपन आप मन  ो जाता है।.

उसक कहने पर े हंसी  गई

एक ि ऐस लगने लगा कि भाभी  मन ें भी कुछ बाें ीं। िर ो धीरे-धीरे झस लड़किों और िक ंबंों पर  करन लगीं। अभी तक हम खुलकर इस बा ें नहीं े थे। ि भी मैं उस पल के आन  चत रहता, जब ो खुद कहेंगी ि   आओ।.

उसक  कुछ ऐस ी दिन  ुके े। एक दिन भाभी ने मम्मी ो फोन िा। उनोंे कहा, आज मैं घर पर अकेली हूँ। महस भी अचा नहीं कर रही हूँ। शिवा को आज मेरे यहाँ सोने भेज देा।.

आव आई मम्मी ी। घर े बाहर  पड़ेा, कहा  उनोंे। भाभी के ास कन  आज। अकेले नहीं  सकत उन्हें कि ी हालत ें।  ैं ो, ऐस नहीं  गलत नहीं लगा।.

खुशी इतन  गई कि सम्हा नहीं ा। िर ैं े भाभी के घर की ओर बढ िा। अभी-अभी गेट   लगाया  ि े दरवाज़े पर  गईं। जब उनोंने गेट खोला, तो नज पड़ी काली नाईटी पर  उस ि उन पर थी।.

 लड़की कितन अची लग रही थी। उसे देखत  मन में बस इतन आया, ो कु चमतार  गय ो। इधर भाभी ने ीमे वर ें कह िा - इतना क्यों  रहे हो… आओ ंदर।.

दर   ें हम दोनों पहुँ  े।.

एक सव मैंने िा - भाभी, अचनक  क्यों पड गई हो?

ाय बनकर ी, ुम बस आर   । दर्द हो रहा है  शर में,   नहीं बस इतना ही।.

चाय   मेरी नजरें उनके मम्मों पर िक गई। भाभी आगे झुकीं,  े मम्मों की ओर इश िा, और ीं - तुम एक काम कर ोगे?

ा मैंने - ी हां, क्या ाहि ाओ।?

ट्यूब उसक  में रखत   ी, मालिश कर दे अपन  बदन पर।.

मैंने बस इतना कहा - हां, ि्कु, आप आर े लेट जाइए। मालिश  वक अब ै।.

ैंे तुरंत ट्यूब उठा लिया। भाभी झट े लेट गईं, कमर जम पर िपकी।.

उसने कहा - भाभी, इस तरह े तो आपकी    ाब हो जाएगी।.

उठकर उन्होंने अपनी नाइट  े उतार दी। अब वो मेरे आगे थीं -  ब्रा और पैंटी में, केबल ी। ैं  बस खत ी रह गया, ें ़ी  गईं। मन लगा जैसे कोई आकशव यहाँ  आई हो। ि एक ऐसी मुस्कान ़ी, िसमें   ीखापन। और   कमर उठकर लेट गईं।.

मैं बितर पर बैठ गया, ि  े भाभी की पीठ पर हाथ चला शु कर िा। े ही उनक वचा, मेरी  ें लं लेने लगी। आज ो खु लग रही थीं, ऐस लग रह  ि मन लकर ूम रहा है। ैं हथी से दब ा,  में उनक शर के हल   महसूस किा। कंधे पर दबा ेते हुए ैं ा - भाभी, े दबा ीक लग रहा है  और ़् ो?

सच कहूँ ो मुझे  ात ि तरह अज लगी। पर ि ी, उनक ुंह  ऐस नकर  हद तक    ांि, इसमें  कम ा।  ी, घर    सब  बयां कर िा।.

ि मैंने पूछ  िा -  से करूँ ो?

उनकी भाभी  कहा -  है, ें जैसे लगे वैसे कर ेना। ि़ मे  ़ी ांि रह ाए।.

थो़ा बहुत मतलब समझ ें आया, तभ  पड़ा - अगर िलक ांति चाहिए, तो मे ि आपके  पर कदम रखन ोगा।.

भाभी  कहा - मेरी तरफ से तुम्हें  रो-टो नहीं… मेरे ऊपर ा चाहो ैसे  जाा। उनक  सुनते ही मैं उन पर झपटा, और ेरा लंड उनकी गांड  ूने लगा।.

ि वह े - अर कई बह अच लग रहा है… थो़ा ऊपर कंधे से कर पीठ  े तक हाथ चल।.

ि मैंने कहा - अब तो ुम्ी ब्रा उतरन  पड़ेगी।.

े ब्रा का हुक होता है, इसलि उनों कहा - खोल दो

एक पल में  ैंने उसकी ब्रा ीली कर दी, ि   नंगी पीठ पर चला।.

उसक  भाभी  पड़ीं - दबो, अच तरह े दबा।.

बस इतना मैंने ूछ िा - अभ  सब  चल रहा है।.

हां, मज़ा आ रहा ा। ि़ तुम्हारा लोअर ू रहा ा मुे।  कपड़ा उतारकर मेरे ऊपर आ गए ऐस लगने लगा कि भाभी भी  अलग चाहती हैं। मैंने झट े अपना लोवर  िा। ऊपर  गया। मेरा लंड अब उनकी गर्म ांों के  ि गया।  ी महसूस कर रही थीं। ीमी आवाज़ आई उनक ोंों े। .

तभी भाभी ीं - शिवा, अब जांघों पर भी  चला दे। इस वक्त ैं  रहा था कि ितन बसरत औरत मे ों े अपना शर ा रही है। ि मैं उनकी जांघों पर  रना शु कर िा। मेरा लंड  ोकर उठ गया, पर डर था कि कहीं भाभी नाराज न हो जाएं।   को रोके रखन  ि कर रहा था। पर ऐसा कितन  तक  सकत ा। .

मे  े-े मालिश के    तरफ बढ गया। एक तरफ उनकी  पर दब, सर ओर गु  आसप  पर ेड़़ का अहस चूत तक  पहुंा। भाभी  शर ें गर लने लगी। नम बढ रही थी। घटन  ीच एक ती गं उभर आई। मे ि पर उसक असर ा था।.

ि अचनक मेी एक उंगली भाभी की चूत पर जा लगी।  छटपट गईं, झट से बोलीं - े क्या कर रहे हो?

डर े मारे  िमत  गई झस िकला - षम करें।.

ि भाभी ने सव िा - ा तुमने कभी सेक्स अनभव किया है?

मैंने कहा- नहीं.

ि  पड़े - ा आज ुम ेरे साथ े?

खुशी इतन  गई कि संभल ा मुि हो गया, शर ें  आग  गई।.

उसक तरफ  आव आई - ्हें क्या लगा?

कहा मैंने - ये  ि  पर  रही हो, ी?

टते हुए उसन ी दिखा, मेरे लिं ो पकड़ लिया। वह सख लोहे की छड़ की तरह ऊपर उठा था। िर उसने देखा  नई डरवियर ें ा है। ी - कितना बड़ा है, इसे बाहर निकालो।.

मैं उसकी चड्ड़ी नीचे ी, ि ो मेरे लंड पर  रने लगा।

उस पल मैंने  िा - भाभी, मु ी चूत देखने  मन है।.

ि उसक ुँह े निकला -  रन पसंद करे या लड़ा झगड़ा चाहोे?

बस मैंने  ा - दोनों,  आप ाहेंे?

वह ी - मेरी पेंटी उत दो।.

उसकी पेंटी ैंने ि समय  ीं ली।.

या,  ंगे शर मेरे सामने था।   उस ी चूत पर गया, िे मैंने  से  िर  अपन ांें अलग करने लगी। ां   गई, आव बदली, झटक  लगी।.

अचनक मेी जीभ उनकी चूत पर पहुँी, और   ऐस लगा जैसे िसी ने 44 हजार ोल्ट का झटक  िा हो। रन पक े सा   ें ढल गईं।.

अचनक भाभी ोलीं -  कपड़े हटा दो।.

टी-शर्ट  ैंने हर िकाला।

हम दोनों बिल् ंगे  ुके े। ि आपस ें किस करते रहे। भाभी के स्तनों पर  ाथ मने लगा। कभी एक को चू िा, तो कभी दूसरे को दब िा। ीरे-ीरे दोनों पर अपन असर  िया। .

एक ि भाभी े मेरे लंड से   कर ी। ि ीमे वर ें ा - क् ैं ़ा  ुछ कर सकत ूँ?

मैंने कहा- क्या?

 े - मुझे लंड चूसना है।.

उसन कह तभी मुझे धक्का दिा,   बल िा दिया। ि मेरे लंड को अपने मुँह में ाल लिया।.

दोस्तों… भाभी लंड  ुँ ें ि मगन ो चुी थीं। मैं तो ऐस महसूस कर रहा था ैसे हव ें  रह ूँ। े- वर बढ़े, अब खेल गहरा हो गय ा, इसलि हमने 69 का  अपन िा। मैं उनकी चूत पर    कर ी, वहीं वो मेरे लंड ो चूस रही थीं। उनकी चूत ़ थी, नम ी, ऊपर े फूली हुई भी। जीभ से झटक े रहा था, तभी उनोंने मेरे मुँह  अचनक अपनी चूत पर दबा िया,  हटकर एक झटक ें उनके शरीर  ी छू गया। वो झड़ चुकी थीं, मैं भी बस   पल  था। अब मैं उनके मुँह ें  लकर ेजी  आगे- करन ुरू कर िा। िर ा - मैं  अब ़ने वाला हूँ। .

वह अपना लंड निकालकर ोला - मेरे मुँह में अपना माल ालो, मुझे तुम्हारा पर्म पीना है।.

उसन ारा मे  वच  ुँ ें  िा। ी से आगे पीे हिलत ुए, कु ही षणों में मैं उनक दर  िा। उसन सब  िगल लिा, िर  से ाफ कर दिया। हम दोनों े ही ितर पर रहे। ़ी देर े बाद मैं उनक िचल िस्े को चाटना ुरू कर िा। धीरे ीरे उनक पम बढ गया। अब वह  रही थी,  बढ गई ी। वह बार बार बोल रही थी - शिवा, मुझे ोदो… जल करो… मैं और नहीं ेल  रही… मेरे दर अपन  िा डाल ो।.

मैं भाभी के बीच में  गया, अपना लंड उनकी चूत पर रखकर आगे-पी करन लगा। उनोंने िछवाड़ा ऊपर उठाया, मानो कह रह ों - दर  ो। एक झटक ें ैंे धक्का दिा। आधा लंड चूत में  ा, और भाभी के ुं  आव़ निकली - ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ैंने उनके ुंह पर हा रख दिा, िर एक और ींा। इस बार पूरा लंड ंदर चल गया। शायद मोटे लंड  उन्हें तकल , पर मैंने ध्यान नहीं दिा। ते े धक्के लग लगा।.

़ी देर ें भाभी भी  हटकर मेरे साथ  गईं। उनक ुं े निकला - आह शिवा… और ज्ादा   धको मुझमें… मेरी ां तो़ दो… आह बस ऐस  रखो…

फिर मैंने ी से धक्के दे ुरू कि लग चलत रहन पर मु लग ि अब बस  गया, बस इतन  बच ै। उधर भाभी पहल ी दो बार ां चुकी थीं। मैंने आव में करहते हु कहा - अब ैं  नहीं ोक  रहा… ्या करन  ?

ि  ा कि मेरे होंों पर अपना ामान उत े। इसक  मेरी चूी से लं ींचकर उसने मुँह में ाल लिया।

मैंने ी से धक ेते हुए -ाँ  में सारा खलन भाभी के मुँह में डाल दिया, वो ांि से निगल गई उसक  उसने मेरा लिं साफ करन े लि अपन    िा। उस रात हम चार बार ेक् में लग रहे, इनमें एक  ैंने उसक िछवाड़ में  रव किा। ोंि हम दोनों आपस ें ीले  े थे और   अनभव ्र रहा था, हर भव मौके पर हम ऐस करन लगे।.

ि मैंने भाभी से पूछ िा - ें बच्चा क्यों नहीं हुआ?

़ी  ठहरन  ाव उन्होंने मुझे िा। जब ैं वजह पूी, ो बताया - पति को यक दिलाना ोगा कि मैंने शिवा से  प् ी है। ऐस इसलि, क्योंकि डॉक्टर ने जांच   कह  ि े कभी पिता नहीं बन सकते।.

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