एक स्थानीय महिला ने मालिश करने के बहाने संबंध बनाए
शिवा बोलता हूँ, उम्र तेईस के करीब। फर्रुखाबाद में पला-बढ़ा हूँ मैं। ऊंचाई मेरी पांच फुट से थोड़ी ज्यादा। देखने में मजबूत, चेहरा गोरा है। इधर रहता हूँ लंबे समय से।.
बात उस वक्त की है, जब मैं बारहवीं में पढ़ रहा था। गाँव में एक भाभी रहती थीं, जिनका नाम साधना था। उम्र तो उनकी बत्तीस-तेतीस के आसपास होगी, मगर शरीर की तराजु ऐसी है कि देखने वाला कोई भी उन्हें चौबीस के पास ठहराए। घर वालों से उनके रिश्ते अच्छे हैं, इसी बहाने मैं अक्सर उनके घर जाता रहता। शादी के कई साल बीत चुके, फिर भी आज तक कोई बच्चा नहीं हुआ।.
अचानक भाभी मेरे घर पहुँच गईं। बोलीं, "शिवा, कल मुझे मंदिर जाना है।" फिर ठहर गईं। सोचती रहीं। फिर बोलीं, "तुम्हारे भैया तो अभी घर पर नहीं हैं।" थोड़ी देर खामोशी छाई रही। आखिर में पूछा, "क्या तुम मुझे वहाँ ले जा सकते हो?"?
हां कहते हुए मैं सहमत हो गया।.
दूर था मंदिर शहर से काफी।.
अगले दिन सुबह फोन की घंटी बजी। भाभी की आवाज़ थी - शिवा, हर हाल में 8 बजे पहुँचना।.
आठ बजे के ठीक समय पर मैं उनके घर पहुँचा, बाइक के साथ। दरवाजे पर धीमी आवाज हुई, तो भाभी अंदर से निकल आईं।.
अचानक मेरी नज़र पड़ी तो वह देसी भाभी सामने थी। लाल साड़ी में ऐसी जान छलक रही थी कि साँस रुक गई। घूरते-घूरते आँखें थक गईं, पर फिर भी झपकी न लगी।.
फिर बोल पड़े – क्या बात है, शिवा?
बस इतना हुआ कि मैंने पूछ लिया - कोई हरकत तो नहीं?
भाभी बोलीं - चलिए, हां।
अचानक वो मेरे पीछे बाइक पर आकर बैठ गईं, फिर हम दोनों चल पड़े। धीरे-धीरे मेरे अंदर उनके प्रति तीव्र इच्छाएँ जाग उठीं। मन में घूमने लगी कल्पनाएँ - कैसे करूँ भाभी के साथ संभोग। उनका शरीर मेरे स्पर्श में था, छूता हुआ महसूस हो रहा था। ऐसे में विचार घेरने लगे, और मेरा लिंग खड़ा हो गया।.
फिर भाभी बोलीं - इतनी सुस्ती से बाइक क्यों चला रहे हो... मन में क्या चल रहा है?
सुबह के समय मैंने धीरे से कहा - भाभी, आपके बारे में सोच रहा था। लगता है आपको लाल रंग सचमुच सूट करता है।.
वो मुस्कुराए और बोले - ठीक है… तुम ऐसा सोच रहे हो।.
मैं हंस दिया
अगले पल हम आधे-अधूरी बातों में मंदिर के सीढ़ियों पर खड़े थे। फिर प्रणाम करके धीमे-धीमे लौटने लगे।.
बीच रास्ते में मैंने बात छेड़ी - भाभी, कहीं रुककर थोड़ा खाना खा लेते हैं।
दोपहर के खाने के लिए हम लोग एक जगह गए। वहीं पहुंचकर कुछ समय बिताया। फिर चार बजे से पहले घर लौट आए।.
पर दोस्त, भाभी के बारे में सोच-सोचकर मेरा लंड ऊपर उठने लगा। अंत में मैंने उनके नाम पर हाथ चलाया, फिर शांति मिली। रातभर आँखों पर नींद नहीं टिकी। नजरों के आगे उनका लचर शरीर बार-बार तैर गया। ऐसे में चढ़ाई करने के विचार से बेचैनी बढ़ गई।.
अगले दिन मैं उनके घर पहुँचा। तभी नज़र पड़ी कि भाभी नहाने के लिए जा रही थीं। उसी पल मैंने उन्हें देख लिया, सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में। पहली बार ऐसे अवतार में उन्हें देखा मैंने। दृश्य ने मेरे लंड को ऊपर उठा दिया। मन में ख्याल आया - अब तो छूकर उन्हें चोद डालूँ। उनके 34 साइज़ के स्रोतों की उभरी आकृति देख मैं हल्की सी ध्वनि बना बैठा - वाऊ… क्या शानदार बदन है।.
फिर भाभी ने मम्मों पर तौलिया डालते हुए पूछा - इधर क्यों घूर रहे हो?
बोला मैंने - क्षमा करें भाभी…अब जाना होगा।.
बहन ने कहा – तुम वहीं रुको। मैं जल्दी लौट आऊँगी, सिर्फ थोड़ी देर के लिए।
फिर भी मैं वहीं से निकल पड़ा, जब भाभी बाथरूम में गई। घर पहुँचकर तुरंत उसी के नाम का ध्यान लगाया… फिर एक छोटी सी शांति मिली। पर अब बेचैनी पहले से ज्यादा हो गई। ठीक तब भाभी का फोन आया - अचानक चले गए क्यों?
बस कुछ खास नहीं… इतना ही। आपके पास काम चल रहा था। लिहाजा मैंने सोच लिया - थोड़ी देर बाद आ जाऊंगा।.
बहन ने सवाल किया - अच्छा, मैं कहीं उलझी हुई नहीं थी, सिर्फ़ नहाने के लिए जा रही थी। क्या तुम्हें कुछ चाहिए था?
बोला था मैंने – नहीं भाभी, मैं तो बस इधर-उधर घूमता हुआ आ गया। मन खिन्न था कहीं काम में लग नहीं पा रहा था, ऐसे में लगा कि आपके पास चलकर कुछ बातें कर लूँ, समय गुज़र जाएगा।.
अच्छा, तुम ठहर ही क्यों नहीं गए? - भाभी बोली।!
कभी-कभी फोन पर बातें होने लगीं। वो अपनी तरह से ज्यादा बोलती रहती थीं।.
वो बोली, "पूरा दिन मैं भी उबाऊ महसूस करती हूँ। तुम्हारे साथ बातचीत करने से मेरा वक्त अचानक गुजर जाता है।".
खालीपन में एक रास्ता मिल ही गया था उनसे बोलने का। धूप छूटती, और मैं भाभी से बातें शुरू कर देता।.
एक सुबह भाभी बोलीं - शिवा भईया... कभी उस लड़की को तो ले आओ जिसके साथ हो?
बस इतना कहा - नहीं ताई, अभी मौका नहीं है।.
खुशी से मुस्कराते हुए भाभी ने कहा - चक्करों में फंसने की जरूरत नहीं पड़ती, अपने आप घूमना शुरू हो जाता है।.
उसके कहने पर मुझे हंसी आ गई।
एक दिन ऐसा लगने लगा कि भाभी के मन में भी कुछ बातें थीं। फिर वो धीरे-धीरे मुझसे लड़कियों और शारीरिक संबंधों पर बात करने लगीं। अभी तक हम खुलकर इस बारे में नहीं बोले थे। फिर भी मैं उस पल के आने की सोचता रहता, जब वो खुद कहेंगी कि मेरे पास आओ।.
उसके बाद कुछ ऐसे ही दिन गुज़र चुके थे। एक दिन भाभी ने मम्मी को फोन किया। उन्होंने कहा, आज मैं घर पर अकेली हूँ। महसूस भी अच्छा नहीं कर रही हूँ। शिवा को आज मेरे यहाँ सोने भेज देना।.
आवाज़ आई मम्मी की। घर से बाहर जाना पड़ेगा, कहा था उन्होंने। भाभी के पास रुकना होगा आज। अकेले नहीं छोड़ सकते उन्हें किसी भी हालत में। बीमार हैं वो, ऐसे नहीं जाना गलत नहीं लगेगा।.
खुशी इतनी छा गई कि सम्हाल नहीं पाया। फिर मैं सीधे भाभी के घर की ओर बढ़ दिया। अभी-अभी गेट को हाथ लगाया था कि वे दरवाज़े पर आ गईं। जब उन्होंने गेट खोला, तो नज़र पड़ी काली नाईटी पर जो उस दिन उन पर थी।.
वो लड़की कितनी अच्छी लग रही थी। उसे देखते ही मन में बस इतना आया, मानो कुछ चमत्कार हो गया हो। इधर भाभी ने धीमे स्वर में कह दिया - इतना क्यों घूर रहे हो… आओ अंदर।.
अंदर के रास्ते में हम दोनों पहुँच चुके थे।.
एक सवाल मैंने किया - भाभी, अचानक बीमार क्यों पड़ गई हो?
चाय बनाकर लाऊंगी, तुम बस आराम से बैठ जाओ। दर्द हो रहा है पूरे शरीर में, कुछ खास नहीं बस इतना ही।.
चाय के बाद मेरी नजरें उनके मम्मों पर टिक गई। भाभी आगे झुकीं, धीरे से मम्मों की ओर इशारा किया, और बोलीं - तुम एक काम कर लोगे?
बोला मैंने - जी हां, क्या चाहिए सुनाओ।?
ट्यूब उसके हाथ में रखते हुए भाभी बोली, मालिश कर देना अपने पूरे बदन पर।.
मैंने बस इतना कहा - हां, बिल्कुल, आप आराम से लेट जाइए। मालिश का वक्त अब है।.
मैंने तुरंत ट्यूब उठा लिया। भाभी झट से लेट गईं, कमर जमीन पर चिपकी।.
उसने कहा - भाभी, इस तरह से तो आपकी रात की पोशाक ख़राब हो जाएगी।.
उठकर उन्होंने अपनी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे आगे थीं - लाल ब्रा और पैंटी में, केबल वाली। मैं तो बस देखता ही रह गया, आँखें चौड़ी हो गईं। मन लगा जैसे कोई आकाशवाणी यहाँ झुक आई हो। फिर एक ऐसी मुस्कान छोड़ी, जिसमें छुपा था तीखापन। और धीमे से कमर उठाकर लेट गईं।.
मैं बिस्तर पर बैठ गया, फिर धीरे से भाभी की पीठ पर हाथ चलाना शुरू कर दिया। छूते ही उनकी त्वचा, मेरी गोद में लंबाई लेने लगी। आज वो खुश लग रही थीं, ऐसा लग रहा था कि मन खुलकर झूम रहा है। मैंने हथेली से दबाव डाला, साथ में उनके शरीर के हल्के झुकाव को महसूस किया। कंधे पर दबाव देते हुए मैं बोला - भाभी, ये दबाव ठीक लग रहा है या और ज़्यादा हो?
सच कहूँ तो मुझे ये बात किसी तरह अजीब लगी। पर फिर भी, उनके मुंह से ऐसा सुनकर कुछ हद तक खुशी भी हुई। हालांकि, इसमें जोश कम था। वैसे भी, घर के माहौल ने सब कुछ बयां कर दिया।.
फिर मैंने पूछ ही लिया - ठीक से करूँगा तो?
उनकी भाभी ने कहा - ठीक है, तुम्हें जैसे लगे वैसे कर लेना। सिर्फ़ मेरे पास थोड़ी शांति रह जाए।.
थोड़ा बहुत मतलब समझ में आया, तभी बोल पड़ा - अगर बिलकुल शांति चाहिए, तो मेरे लिए आपके कंधे पर कदम रखना होगा।.
भाभी ने कहा - मेरी तरफ से तुम्हें कोई रोक-टोक नहीं… मेरे ऊपर जैसा चाहो वैसे आ जाना। उनकी बात सुनते ही मैं उन पर झपटा, और मेरा लंड उनकी गांड को छूने लगा।.
फिर वह बोले - अरे वाकई बहुत अच्छा लग रहा है… थोड़ा ऊपर कंधे से लेकर पीठ के नीचे तक हाथ चलाओ।.
फिर मैंने कहा - अब तो तुम्हारी ब्रा उतारनी ही पड़ेगी।.
पीछे ब्रा का हुक होता है, इसलिए उन्होंने कहा - खोल दो
एक पल में ही मैंने उसकी ब्रा ढीली कर दी, फिर सीधे हाथ नंगी पीठ पर चलाया।.
उसके बाद भाभी बोल पड़ीं - दबो, अच्छी तरह से दबाओ।.
बस इतना मैंने पूछ लिया - अभी तो सब ठीक चल रहा है।.
हां, मज़ा आ रहा था। सिर्फ़ तुम्हारा लोअर छू रहा था मुझे। वो कपड़ा उतारकर मेरे ऊपर आ गए। ऐसा लगने लगा कि भाभी भी कुछ अलग चाहती हैं। मैंने झट से अपना लोवर नीचे किया। ऊपर बैठ गया। मेरा लंड अब उनकी गर्म जांघों के बीच टिक गया। वो भी महसूस कर रही थीं। धीमी आवाज़ आई उनके होंठों से। .
तभी भाभी बोलीं - शिवा, अब जांघों पर भी हाथ चला दे। इस वक्त मैं सोच रहा था कि कितनी खूबसूरत औरत मेरे हाथों से अपना शरीर छुड़वा रही है। फिर मैंने उनकी जांघों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मेरा लंड सीधा होकर उठ गया, पर डर था कि कहीं भाभी नाराज न हो जाएं। तो खुद को रोके रखने की कोशिश कर रहा था। पर ऐसा कितनी देर तक हो सकता था। .
मेरा हाथ धीरे-धीरे मालिश के बीच नीचे की तरफ बढ़ गया। एक तरफ उनकी पीठ पर दबाव, दूसरी ओर गुदा के आसपास का स्पर्श। छेड़छाड़ का अहसास चूत तक जा पहुंचा। भाभी के शरीर में गर्मी फैलने लगी। नमी बढ़ रही थी। घटना के बीच एक तीव्र गंध उभर आई। मेरे दिमाग पर उसका असर सीधा था।.
फिर अचानक मेरी एक उंगली भाभी की चूत पर जा लगी। वो छटपटा गईं, झट से बोलीं - ये क्या कर रहे हो?
डर के मारे मेरी हिम्मत टूट गई। मुझसे निकला - क्षमा करें।.
फिर भाभी ने सवाल किया - क्या तुमने कभी सेक्स अनुभव किया है?
मैंने कहा- नहीं.
फिर बोल पड़े - क्या आज तुम मेरे साथ होगे?
खुशी इतनी छा गई कि संभल पाना मुश्किल हो गया, शरीर में जैसे आग दौड़ गई।.
उसकी तरफ से आवाज़ आई - तुम्हें क्या लगा?
कहा मैंने - ये तुम किस बात पर बोल रही हो, भाभी?
लेटते हुए उसने छाती दिखाई, मेरे लिंग को पकड़ लिया। वह सख्त लोहे की छड़ की तरह ऊपर उठा था। फिर उसने देखा मेरी नई अंडरवियर में क्या है। बोली - कितना बड़ा है, इसे बाहर निकालो।.
मैंने उसकी चड्ड़ी नीचे की, फिर वो मेरे लंड पर हाथ फेरने लगा।
उसी पल मैंने बोल दिया - भाभी, मुझे तुम्हारी चूत देखने का मन है।.
फिर उसके मुँह से निकला - तुम घूरना पसंद करोगे या लड़ाई झगड़ा चाहोगे?
बस मैंने पूछा था - दोनों, क्या आप चाहेंगे?
वह बोली - मेरी पेंटी उतार दो।.
उसकी पेंटी मैंने बिना समय गंवाए खींच ली।.
यार, वो नंगे शरीर मेरे सामने था। पूरा ध्यान उस मोटी चूत पर गया, जिसे मैंने हाथ से छुआ। फिर वो अपनी जांघें अलग करने लगी। सांस तेज़ हो गई, आवाज़ बदली, झटके देने लगी।.
अचानक मेरी जीभ उनकी चूत पर पहुँची, और छूते ही ऐसे लगा जैसे किसी ने 44 हजार वोल्ट का झटका दे दिया हो। फौरन कंपकंपी के साथ वो खुद में ढल गईं।.
अचानक भाभी बोलीं - तुम्हारे कपड़े हटा दो।.
टी-शर्ट को मैंने बाहर निकाला।
हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे। फिर आपस में किस करते रहे। भाभी के स्तनों पर मेरा हाथ घूमने लगा। कभी एक को चूस लिया, तो कभी दूसरे को दबोच दिया। धीरे-धीरे दोनों पर अपना असर छोड़ दिया। .
एक दिन भाभी ने मेरे लंड से छेड़छाड़ शुरू कर दी। फिर धीमे स्वर में पूछा - क्या मैं थोड़ा सा कुछ कर सकती हूँ?
मैंने कहा- क्या?
वो बोले - मुझे लंड चूसना है।.
उसने कहा तभी मुझे धक्का दिया, पीठ के बल गिरा दिया। फिर मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया।.
दोस्तों… भाभी लंड को मुँह में लिए मगन हो चुकी थीं। मैं तो ऐसे महसूस कर रहा था जैसे हवा में तैर रहा हूँ। धीरे-धीरे तेवर बढ़े, अब खेल गहरा हो गया था, इसलिए हमने 69 का ढंग अपना लिया। मैंने उनकी चूत पर जीभ घुमानी शुरू कर दी, वहीं वो मेरे लंड को चूस रही थीं। उनकी चूत साफ़ थी, नम थी, ऊपर से फूली हुई भी। जीभ से झटके दे रहा था, तभी उन्होंने मेरे मुँह को अचानक अपनी चूत पर दबा दिया, पीछे हटकर एक झटके में उनके शरीर से पानी छूट गया। वो झड़ चुकी थीं, मैं भी बस कुछ ही पल दूर था। अब मैंने उनके मुँह में लंड डालकर तेजी से आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। फिर बोला - मैं भी अब छोड़ने वाला हूँ। .
वह अपना लंड निकालकर बोला - मेरे मुँह में अपना माल डालो, मुझे तुम्हारा स्पर्म पीना है।.
उसने दोबारा मेरी नंगी त्वचा को मुँह में ले लिया। तेजी से आगे पीछे हिलते हुए, कुछ ही क्षणों में मैंने उनके अंदर छोड़ दिया। उसने सब कुछ निगल लिया, फिर जीभ से साफ कर दिया। हम दोनों वैसे ही बिस्तर पर रहे। थोड़ी देर के बाद मैंने उनके निचले हिस्से को चाटना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनका तापमान बढ़ गया। अब वह घुट रही थी, चाह बढ़ गई थी। वह बार बार बोल रही थी - शिवा, मुझे चोदो… जल्दी करो… मैं और नहीं झेल पा रही… मेरे अंदर अपना पूरा हिस्सा डाल दो।.
मैं भाभी के बीच में घुस गया, अपना लंड उनकी चूत पर रखकर आगे-पीछे करने लगा। उन्होंने पिछवाड़ा ऊपर उठाया, मानो कह रही हों - अंदर घुसा दो। एक झटके में मैंने धक्का दिया। आधा लंड चूत में जा घुसा, और भाभी के मुंह से आवाज़ निकली - ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मैंने उनके मुंह पर हाथ रख दिया, फिर एक और खींचा। इस बार पूरा लंड अंदर चला गया। शायद मोटे लंड से उन्हें तकलीफ़ हुई, पर मैंने ध्यान नहीं दिया। तेजी से धक्के लगाने लगा।.
थोड़ी देर में भाभी भी पीछे हटकर मेरे साथ जुड़ गईं। उनके मुंह से निकला - आह शिवा… और ज्यादा जोर से धकेलो मुझमें… मेरी गांड तोड़ दो… आह… बस ऐसे ही रखो…
फिर मैंने तेजी से धक्के देने शुरू किए। लगातार चलते रहने पर मुझे लगा कि अब बस हो गया, बस इतना ही बचा है। उधर भाभी पहले ही दो बार हांप चुकी थीं। मैंने आवाज में कराहते हुए कहा - अब मैं भी नहीं रोक पा रहा… क्या करना चाहोगी तुम?
फिर वो बोला कि मेरे होंठों पर अपना सामान उतार दे। इसके बाद मेरी चूची से लंड खींचकर उसने मुँह में डाल लिया।
मैंने तेजी से धक्के देते हुए चार-पाँच बार में सारा स्खलन भाभी के मुँह में डाल दिया, वो शांति से निगल गई। उसके बाद उसने मेरा लिंग साफ करने के लिए अपनी जीभ से चाट लिया। उस रात हम चार बार सेक्स में लगे रहे, इनमें एक बार मैंने उसकी पिछवाड़ में भी प्रवेश किया। क्योंकि हम दोनों आपस में ढीले हो चुके थे और सेक्स का अनुभव तीव्र रहा था, हर संभव मौके पर हम ऐसा करने लगे।.
फिर मैंने भाभी से पूछ लिया - तुम्हें बच्चा क्यों नहीं हुआ?
थोड़ी देर ठहरने का सुझाव उन्होंने मुझे दिया। जब मैंने वजह पूछी, तो बताया - पति को यकीन दिलाना होगा कि मैंने शिवा से संतान प्राप्त की है। ऐसा इसलिए, क्योंकि डॉक्टर ने जांच के बाद कहा था कि वे कभी पिता नहीं बन सकते।.
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