सीमा को भाभी के घर में नंगी करके खूब चोदा

Jan 6, 2026 - 12:26
Jan 6, 2026 - 13:20
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सीमा को भाभी के घर में नंगी करके खूब चोदा

भाभी की सहेली को देखकर लंड खड़ा हुआ, मौका मिलते ही चूत फाड़ी

सुदामा मेरा नाम है। उम्र चब्बीस साल है। परिवार में पांच जन हैं - माँ, पिता, एक बड़ा भाई, उसकी पत्नी। भाई काम के कारण शहर के बाहर रहता है। इसलिए घर आने का वक्त साल में चार-पांच बार ही बनता है। मेरा और भाभी का समय ज्यादातर एक साथ गुजरता है। हम जैसे दोस्त हों, ऐसी नजदीकी है। हर बात उस तक पहुंच जाती है मेरी।

बहनोई के न होने पर घर के सारे काम मुझ पर छोड़ देती हैं वो, कभी अपना अंडरगारमेंट भी बुला लेती हैं। मैं चुपचाप लाकर दे देता हूं, तो फिर उन कपड़ों को छुपकर सूंघ लेता हूं। ऐसा करते हुए खुद को शांत कर लेता हूं। पर उनके साथ कुछ करने की हिम्मत कभी जुटा नहीं पाया, डर लगता था।

एक दिन भाभी की सहेली सीमा हमारे घर पहुँची। उसके आते ही कमरे का माहौल बदल गया। गोरी त्वचा, तंग छाती, गोल नितंब - देखने में बहुत अलग लग रही थी। मेरी नजर उस पर ठहर गई, ऐसे जैसे कोई चुंबक खींच रहा हो। लंड ऊपर उठ गया, बस यही हाल था। वो जानती थी कि मैं ताक रहा हूँ, फिर भी मुस्कुराती रही। थोड़ी देर बाद वो चली गई। अब दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल आ रहा था - उसे छूना। इच्छा धीरे-धीरे आग बन गई।

जब सीमा वापस चली गई, तो मैंने धीरे से भाभी से बात शुरू की। उन्होंने कहा, बोलो देवर जी, क्या बात है। मैंने कहा, सीमा के साथ मेरी एक छोटी सी जोड़ी बना दो। भाभी मुस्कुराईं, फिर बोलीं, ठीक है, मैं पता लगा लेती हूं। थोड़ी देर बाद, उन्होंने फोन उठाया। सीधे सवाल किया - तुझे मेरा देवर पसंद है? सीमा झिझकी, लेकिन भाभी ने साफ-साफ बता दिया कि वह तुम्हारे साथ जुड़ना चाहता है। फिर वह हामी में सिर हिला दिया।

पढ़ना चाहेंगे आप। मेरी ओर से एक कहानी है।

भाभी के पास से सीमा का नंबर लिया, फिर बातचीत शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में चैट और फोन पर बात के बाद, मैंने सीधे कह दिया – सीमा, मुझे तुमसे सेक्स करना है। अंदाज़ा नहीं था कि वो इतनी आसान होगी। वो तुरंत तैयार हो गई, बस पूछा – कब और कहाँ? मैं हैरान था, पर खुशी से बेकाबू भी।

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तुम ये कहानी पढ़ रहे हो, जो हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर मिलती है। एक दिन घर में कोई नहीं था, माँ-बाप रिश्तेदारों के घर चले गए थे, भाभी को भी कहीं जाना पड़ा था, मैं अकेला था। मैंने सीमा को फोन किया, पर कुछ खास नहीं लग रहा था। फिर ऐसा हुआ कि कुछ देर बाद वो खुद हमारे घर आ गई। उसने पूछा, तुम्हारी भाभी कहाँ है? मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया, बस उसे झट से बाहों में उठा लिया।

वो बोली, छोड़ दो मुझे। क्या हो गया तुम्हें? कहीं कोई नजर आ जाएगा। मैंने कहा, घर में तो कोई नहीं है। इतना सुनकर वो शांत हो गई, फिर मुस्कान फैल गई। कमरे की ओर बढ़ गए हम। बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया मैंने। खुद ऊपर झपट गया। उसके गुलाबी होंठों को चूमा। अरे वाह, क्या लग रहा था वो। वो भी बेकाबू हो उठी। मेरे मुंह में उसकी जीभ घुस गई।

मैंने उसकी कमीज फाड़ दी, ब्रा के साथ। बूब्स हवा में झूल गए। दबाव डाला मैंने, हथेलियों से घेरकर। निप्पल पर मुँह चिपका दिया। सीमा की सिसकी छूट रही थी। "आह... सुदामा, और दबाओ," वो बोली। "ओह… चूस लो," कहते हुए उसके होंठ काँप रहे थे। उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर उठाई। बालों में उंगलियाँ फंसाई। फिर कमर से नीचे का कपड़ा खींच लिया। पूरा शरीर बाहर आ गया। लंड पर उसकी मुट्ठी ने घेराव कर लिया। तेजी से चल रही थी एक तरफा चाल।

उसकी लेगिंग नीचे आई, अब सिर्फ पैंटी थी। उसे भी खींचकर दूर फेंक दिया गया। काली चूत साफ नजर आ रही थी, गीली हो चुकी थी। वो मेरा लंड पकड़े हाथ से छेड़ रही थी। मैंने अपना लंड हाथ में लिया, चूत पर रगड़ने लगा। फिर मुंह से थूक निकाला, चूत पर फैला दिया। टांगों को कंधे पर उठा लिया। एक तेज धक्का दिया। पूरा लंड एक साथ अंदर चला गया।

सीमा के मुँह से एक छोटी सी चीख निकल पड़ी। आआह्ह्ह… ओह्ह्ह… मां मर गई। इतना मोटा? मैंने पूछा, साली, कितने लोगों के साथ ये कर चुकी है? वो बोली, जानू, सिर्फ तुम्हारे साथ ही। मैं हँस पड़ा। फिर उसके दोनों स्तन पकड़े। जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। पट-पट-पट की आवाज आने लगी। कमरे में अब सिर्फ हमारी सांसें थीं। और चुदाई के झटके। आह्ह… इह्ह… ओह्ह… सीमा चिल्ला रही थी। जोर से पेलो, सुदामा।

 

थोड़ी देर तक सब ठीक चला, फिर मैं थक गया। लंड बाहर निकाला, बिस्तर पर लेट गया। इधर सीमा मेरे ऊपर आ बैठी। हाथ से लंड पकड़ा, अपनी चूत पर रखा, धीरे से नीचे बैठने लगी। पूरा घुस गया भीतर। अब वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके बूब्स मेरे सामने झूल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ लिया। दबाव डाला। वो और तेज छलांग लगाने लगी। आवाजें निकलने लगी - ओह्ह, आह्ह, ऊऊ, ओइइइ। बस कहती रही, "आज तोड़ दो मेरी चूत।" ये कहानी तुम फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे हो।

थोड़ी देर में मेरा उतार आने वाला था। सीमा की चूची में ही सब कुछ खाली कर दिया। उसके भी घटिया फूट पड़ गए। मेरे ऊपर ढह गई वो। आंखें बंद कर ली हम दोनों ने, थकावट में। इच्छा के अंधेरे में डूबे थे। पता नहीं चला कि भाभी कब कमरे में आ गई। तभी जोर से बोली - “सुदामा, ये क्या बकवास कर रहा है?”

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