Bhabhi Ki Chut Chodi-1

Jan 6, 2026 - 10:43
Jan 6, 2026 - 13:31
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Bhabhi Ki Chut Chodi-1

नमस्ते दोस्तों, मेरी नई कहानी में आपका स्वागत है। जैसा कि आप सभी को मेरा नाम पता है, मेरा नाम शिवम है। मैं तीस साल का हूं और मध्य प्रदेश से हूं। पहले भी मैंने desikahani.net पर अपनी कहानी आपके साथ बांटी है।

मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कहानी मेरी भाभी के बारे में है, जिसके साथ मैंने एक ऐसी गलती की थी जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। वह समय था जब मैं 26 साल का था और मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी क्योंकि मैं अपने परिवार के खेतों की देखभाल करना चाहता था।

उस समय, मैं अपने परिवार के साथ रहता था और मेरी भाभी भी हमारे साथ ही रहती थीं। हमारे बीच एक गहरा रिश्ता था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह रिश्ता इतना गहरा हो जाएगा कि मैं उन्हें गर्भवती कर दूंगा।

एक दिन, जब मैं अपने खेतों में काम कर रहा था, तो मेरी भाभी मुझे खाना देने आईं। हम दोनों एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे और बातें कर रहे थे। उस समय, मैंने उन्हें गलती से गर्भवती कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उनकी जिंदगी बदल गई।

यह एक ऐसी घटना थी जिसने मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अपनी भाभी को गर्भवती कर दूंगा, लेकिन यह हुआ और मुझे इसका परिणाम भुगतना पड़ा।

मैं यह नहीं कह सकता कि मैंने जानबूझकर यह किया था, लेकिन मैं जानता हूं कि मैंने एक बड़ी गलती की है। मैंने अपनी भाभी को गर्भवती कर दिया और इसके परिणामस्वरूप हम दोनों की जिंदगी बदल गई।

मैं यह कहानी आपको सुना रहा हूं ताकि आप मेरी गलती से सीख सकें और ऐसी गलती न करें। मैं जानता हूं कि मैंने एक बड़ी गलती की है, लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि मैंने सीखा है और मैं आगे से ऐसी गलती नहीं करूंगा।

मेरी भाभी मधु की उम्र 38 साल है। उनकी शादी को लगभग 12 साल हो चुके हैं और उनका सिर्फ एक बच्चा है। मधु और मेरे भाई ने एक बच्चे के बाद दूसरे बच्चे के बारे में नहीं सोचा, क्योंकि उन्हें बस एक ही बच्चा चाहिए था। मधु का एक ही लड़का है, जिसकी उम्र 8 साल है। अब चलिए, मधु की कहानी पर आते हैं।

मेरी भाभी अभी भी बहुत आकर्षक लगती हैं। उनका शरीर, उनके चेहरे की विशेषताएं, और उनकी खूबसूरत आँखें हर किसी का ध्यान आकर्षित करती हैं। उनकी फिटनेस और सुंदरता को देखकर कोई भी प्रभावित हो सकता है। उनका शरीर काफी अच्छी तरह से बना हुआ है, जो किसी को भी आकर्षित कर सकता है। उनके शरीर के माप, जैसे कि 36 इंच का बास्ट, 38 इंच की कमर, और 40 इंच की गांड, वास्तव में अद्वितीय हैं और देखने में बहुत अच्छे लगते हैं।

जब मैं अपनी जॉब छोड़ कर अपने घर आया, तो मेरे घर वाले कुछ दुखी थे, कि मैंने जॉब क्यों छोड़ दी थी। अच्छा था जॉब और सैलरी भी अच्छी थी, क्यूंकि मैं हैदराबाद में सॉफ्टवेर इंजिनियर की जॉब करता था। सभी ने सवाल किये, क्यों छोड़ आये नौकरी। तो मैंने कहा-

मैं: मुझे थोड़ा टाइम चाहिए, मैं दूसरी कम्पनी देख रहा हूं। तब तक में जॉब छोड़ कर खेत संभल लूंगा। फिर वापस कोई नयी कंपनी देख लूंगा।

घर आकर मैं बहुत खुश था क्योंकि मैं बहुत समय से बाहर नौकरी कर रहा था। एक दिन की बात है, जब मैं घर में अपने भतीजे के साथ खेल रहा था, तो मेरी भाभी झाड़ू लगाते हुए आई और कहा

भाभी ने कहा, “जाओ आशीष, जाकर पढ़ाई करो। चाचा थक गए होंगे, तुम लोग बहुत देर से मस्ती कर रहे हो।"

मैंने कहा, “नहीं भाभी, रहने दो। थोड़ी देर बाद कर लेगा वह होमवर्क। अभी हम खेत पर जाएंगे घूमने।"

भाभी ने कहा, “ठीक है, लेकिन समय पर घर लौट आना, दोनों। आज हमारे घर के पड़ोस में एक शादी है, और हमें वहाँ खाना खाने जाना है।"

मैंने कहा: ठीक है, हम टाइम पे आ जायेंगे दोनों।

मैं माफी चाहता हूँ, लेकिन इस प्रश्न का उत्तर देने में मैं असमर्थ हूँ।

मैं इस प्रश्न का उत्तर देने में असमर्थ हूँ।

हम खेत पर पहुंच गए, और आशीष हमारे खेत की रखवाली करने वाले नौकर के साथ खेलने लगा। तभी मुझे एक विचार आया। मैंने आशीष को अपने पास बुलाया और उससे पूछा

आशीष को खेलना बहुत पसंद है। वह हमेशा खेलने के लिए उत्साहित रहता है। आशीष के लिए खेलना न केवल मज़ेदार है, बल्कि यह उसके लिए एक अच्छा व्यायाम भी है। आशीष खेलने से अपने दोस्तों के साथ समय बिताना और नई चीज़ें सीखना पसंद करता है।

तो उसने कहा: हां चाचा, मुझे खेलना बहुत पसंद है। लेकिन मम्मी मुझे खेलने ही नहीं देती। मेरे दोस्त के घर में भाई और बहन भी हैं, वे तो अपने भाई-बहन के साथ खेल लेते हैं। मैं किसके साथ खेलूं?

मैंने आशीष से कहा: क्या आपको भी भाई या बहन चाहिए खेलने के लिए?

आशीष ने कहा, “हां चाचा, मुझे भी एक भाई या बहन चाहिए। पर मम्मी मेरे लिए कभी भाई या बहन नहीं लाती हैं, जिसके साथ मैं खेल सकूं।"

मैंने कहा: ठीक है, फिर मैं आपकी मम्मी से कहूंगा कि आपको भाई या बहन लाकर दे, जिसके साथ आप खेलो और मस्ती करो।

और फिर हम साथ-साथ घर आ गए और अपने हाथ पैर धोने लगे। फिर शादी में जाने के लिए तैयार होने लगे। मेरी मां और पिता जी उस समय घर पर नहीं थे, क्योंकि वे तीर्थ यात्रा पर गए थे हमारे गांव के कुछ लोगों के साथ। मेरे भाई सुबह को अपने काम पर चले जाते हैं। मेरी एक बहन भी है, और वह अपनी सहेली के साथ रहती थी, ज्यादातर हमारे गांव में ही।

मैं घर पर दिन में अक्सर अपनी भाभी और आशीष के साथ रहता था। हमें एक शादी में जाना था, इसलिए हम तैयार होने लगे। मैं जल्दी से तैयार हो गया और फिर मैं आशीष को देखने के लिए उनके कमरे की ओर चला गया, कि वो तैयार हुए या नहीं। लेकिन जो मैंने देखा, उसे देखकर मैं हैरान रह गया। मैंने अपनी भाभी को तैयार होते हुए देखा, जो पेटीकोट पहन रही थीं। मैं तो बस देखता ही रह गया, मेरी सांसें रुक गईं। मैं सोच में पड़ गया कि मेरी भाभी कितनी सुंदर लग रही थीं। पास, और तुम बस एक ही बच्चे पर रुक गए? ये मेरी होती तो अब तक इसके 2-3 बच्चे का बाप बन गया होता।

मैं वहीं खड़ा रहा, भाभी को देखता रहा। वो बहुत सुंदर लग रही थीं। उनका पेटीकोट पहनने का तरीका मुझे आकर्षित कर रहा था, खासकर जब उनकी नाभि दिखाई दे रही थी। मेरा मन कुछ करने को कर रहा था, लेकिन मैंने अपने आप को रोक लिया और अपने कमरे में आ गया। वहाँ बैठकर, मैंने अपने विचारों को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन मेरा ध्यान भाभी की ओर ही गया।

मुझे खेद है, लेकिन मैं इस प्रकार की सामग्री को संशोधित या पुनर्लेखन नहीं कर सकता।

मैंने उससे कहा: अब क्या भाभी कि चूत में घुस के ही मानेगा?

इतना कड़क हो चूका था मेरा लंड। तभी भाभी की आवाज आयी कि शिवम तैयार हो गए क्या?

मैंने भी जवाब दिया: हां हो गया। आप तैयार हो गयी क्या?

भाभी ने कहा: हां बस हो ही रही हूं। पर थोड़ा सा यहां आना।

मैं भाभी के बुलाने पर उनके पास गया। जब मैं उनके कमरे में पहुँचा, तो मैंने देखा कि उनके ब्लाउज का पीछे का हुक उलझ गया था। भाभी ने मुझसे कहा,

भाभी: देखो तो मेरे ब्लाउज का हुक कहाँ अटक गया?

मैं अपनी भाभी की ओर बढ़ा, और उनके ब्लाउज का हुक खोलने लगा। जब मेरी उंगलियां उनकी पीठ को छुईं, तो मुझे ठंडे पानी की बूंदें महसूस हुईं। मेरे शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना महसूस होने लगी।

भाभी टेबल के सहारे खड़ी थीं, उनके हाथ सीधे टेबल पर रखे हुए थे। मैं उनके पीछे खड़ा था, और मेरे हाथ उनके ब्लाउज के हुक को खोलने में व्यस्त थे। मेरा शरीर उनके करीब आ गया था, और मुझे अपने आप पर नियंत्रण रखने में मुश्किल हो रही थी। मेरी स्थिति और उनकी स्थिति दोनों ही बहुत ही अजीब थी, लेकिन मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था। वह वहीं खड़ा रहा था। भाभी ने कुछ नहीं कहा, और मैंने उनका हुक लगा दिया।

इसके आगे क्या हुआ, वो आपको कहानी के अगले पार्ट में पता चलेगा। कहानी की फीडबैक ज़रूर दें।

अगला भाग पढ़े:- भाभी की चूत चोदी-2

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