भाभी ने लंड चूस-चूसकर एकदम लाल कर दया
हैलो दोस्तों, मेरा नाम देव है। दल्ली का रहने वाला हू ँ, उम्र 27 साल, हाइट 5 फुट 6 इंच और लंड पूरा 6 इंच का
मोटा-तगड़ा।
ये सच्ची घटना करीब 2 साल पुरानी है। मैं भोपाल अपने चाचा के घर एग्जाम देने गया था। चाचा के दो बेटे –
राम भैया (30) और श्याम भैया। राम भैया की शादी को 8 महीने हुए थे। उनकी वाइफ नताशा भाभी – 25
साल, 5 फुट की मांसल बॉडी, भरी-भरी गांड और बड़े-बड़े रसीले चुचे। देखते ही लंड खड़ा करने वाली।
शुरू में मेरे मन में कोई गलत ख्याल नहीं था। मुझे भैया-भाभी वाले कमरे के बगल में रूम दया गया। दीवार
पतली थी, कान लगाओ तो सब सुनाई देता था।
तीसरे दन रात को सोने गया तो भाभी की आवाज आई – “तुमसे कभी कुछ होता ही नहीं... मैं प्यासी की
प्यासी रह जाती हू ँ!” भैया चुप करा रहे थे, भाभी रोने लगीं। ये सुनकर मेरा लंड सुबह तक टाइट हो गया।
नक्कर में सोता हू ँ, इसलए पूरा उभार दख रहा था।
सुबह नाश्ता लेकर भाभी आईं। मैं सोने का नाटक कर रहा था। भाभी ने मेरे फूले हुए लंड को गौर से देखा, पास
आईं, झुककर नहारा। एक हाथ उनकी चूत पर चला गया, ऊपर से सहलाने लगीं। फर मुझे जगाया और चली
गईं।
मैं तौलया लपेटकर बाथरूम गया तो दरवाजा खुला था। अंदर भाभी नंगी बैठी चूत की झांटें शेव कर रही थीं।
गोरी-चट्टी गुलाबी चूत साफ दख रही थी। मैं दो मनट खड़ा देखता रहा, लंड ने तौलया में टेंट बना दया।
भाभी ने मुझे देखा तो घबरा गईं, चुचे-चूत छुपाने की कोशश की। मैं सॉरी बोलते आगे बढ़ा तो तौलया गर
गया। मेरा नंगा खड़ा लंड देखकर भाभी की आँखें फटी की फटी रह गईं।
भाभी – “ये क्या देव... इतना मोटा-तगड़ा!”
मैंने तौलया उठाया, सॉरी बोला। भाभी बोलीं – “गलती तुम्हारी ही है। सुबह तुम्हारा लंड नक्कर में देखकर
मन कर रहा था पकड़कर खा जाऊँ । सोच रही थी बना कपड़ों का कैसा होगा... इसी चक्कर में दरवाजा लॉक
करना भूल गई।”
मैं – “भैया का इतना बड़ा नहीं?”
भाभी हँसकर – “आधा भी नहीं। तुम्हारा तो िजसकी चूत में जाएगा, फाड़कर रख देगा।”
फर बोलीं – “एक शत पर कसी को नहीं बताऊँगी... इसे मेरी चूत में डालना होगा।”
कहते हुए भाभी ने तौलया खींची और घुटनों पर बैठकर मेरा लंड मु ँह में ठू ँस लया। ग्ग्ग्ग... गी गी... गों गों...
गोग... जैसे पूरा नगल रही हों। एक्सपट की तरह चूस रही थीं। लंड चूस-चूसकर लाल और कड़क कर दया। मैं
जल्दी झड़ गया। भाभी ने मु ँह नकाला, सारा माल उनके बड़े-बड़े मम्मों पर गरा। उन्होंने माल मलते हुए लंड
साफ कर दया।
बोलीं – “भैया का लंड मु ँह में लेते ही झड़ जाते हैं। मेरी चूत प्यासी रह जाती है। आज ये प्यास बुझेगी।”
तभी भैया ने पुकारा। भाभी ने सबको ड्यूटी भेजा, चाची पड़ोस चली गईं।
फर भाभी मैक्सी में मेरे कमरे आईं। झीनी मैक्सी, ब्रा नहीं – चुचे साफ दख रहे थे। मैं पास गया तो भाभी
भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ीं। मैक्सी उतारी, चुचे आजाद कए। मैंने मसलते हुए चूमने लगा। भाभी ने नक्कर
उतारकर लंड दबाया।
हम बस्तर पर लपट गए। 69 में आ गए। भाभी ने फर लंड चूसना शुरू कया – ग्ग्ग्ग... गों गोग... मैंने
उनकी चकनी गुलाबी चूत चाटी। भाभी की ससकारयाँ – आह्ह... ह्ह्हीईई... ऊउइईई... चूत से पानी नकल
गया।
भाभी – “देव, अब नहीं सहा जाता... जल्दी पेलो!”
मैंने भाभी को लटाया, लंड चूत पर रखा और गांड पकड़कर धक्का मारा। थोड़ा सा अंदर गया तो भाभी चीखीं।
मु ँह बंद करके जोरदार झटका दया, आधा लंड अंदर। भाभी तड़पीं – “हाय राम... मार डाला... मोटा लंड चूत
फाड़ देगा... धीरे देव!”
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई, पूरा लंड अंदर। भाभी अब मजा लेने लगीं – “आह्ह... और जोर से... चोदो मुझे... भोसड़ा
बना दो!”
5 मनट में भाभी दो बार झड़ीं। फर भाभी लंड पर बैठीं, उछल-उछलकर कूदने लगीं। चूत का रस मेरी जांघें
गीली कर दया।
फर पैर कंधों पर रखकर और गहराई से पेला। आखर भाभी की चूत अपने रस से भर दी।
दो दन तक खूब चुदाई की, भाभी की टाइट चूत का भोसड़ा बना दया। एग्जाम खत्म कर दल्ली लौटा। भाभी
मस करती रहीं। 6 महीने बाद भैया-भाभी दल्ली आए।
अगली स्टोरी में बताऊँगा – कैसे भाभी ने ना-ना करते हुए गांड मरवाई और अपनी शादीशुदा सहेली को भी
मुझसे चुदवाया।
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