एक दिन मेरी जवान भाभी पर डॉक्टर ने हाथ डाल दिया।
एक बार मैं भाभी के साथ डॉक्टर के पास गई। जाँच के नाम पर उसने भाभी का लहंगा ऊपर कर दिया। इसके बाद वो आगे बढ़ा, अंतर्वास्त्र हटाए। फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद नहीं थी।.
अमीर होने का एहसास हमें बचपन से है।
कुछ महीनों पहले, मेरे भाई की शादी हुई थी।
रेखा नाम की महिला परिवार में भाभी के रूप में जानी जाती थी।
उसके चेहरे पर निखार था, मानो कोई तस्वीर ज़िंदा हो गई हो।जब रेखा भाभी को जांघ में दर्द शुरू हुआ, तभी भैया ने सोचा कि घर पर ही किसी डॉक्टर को बुला लेना चाहिए।
फिर भी, मैंने वो सुझाव ठुकरा दिया। भाभी के साथ मिलकर बोली, अपने पैरों पर चलकर हम डॉक्टर के पास पहुँचेंगे।
शाम ढलते-ढलते क्लिनिक पहुँचे, मरीजों का आना जैसे रुक चुका था।
उस डॉक्टर ने मुझे वहीं पटक दिया, फिर भाभी रेखा को अन्दर की तरफ ले चला।
फिर मैं दरवाज़े के पीछे छुपकर भीतर देखने लगी।.
डॉक्टर ने अंदर ले जाकर रेखा को स्ट्रेचर पर बिछा दिया, फिर पर्दा नीचे कर दिया।
बीच का पर्दा हटा था, इसलिए नज़र आ रहा था बहुत कुछ।.
पैर के ऊपरी हिस्से में दर्द की तरफ उसने इशारा किया, रेखा ने समझाया।
उसने मुझसे कहा, पेट के बल झुककर सो जाओ।
पेट के बल लेटते ही रेखा के पीछे से दिखने वाला अंदाज़ डॉक्टर के लंड को सीधा कर गया।
रेखा आधी साड़ी में ऐसे नजर आई, मानो लहंगे की हर झलक उसे चुनौती दे रही हो। उसकी त्वचा पीठ पर इतनी चमकदार थी कि डॉक्टर की सांसें तेज हो गईं।
फिर भी उसने हौसला बरकरार रखा, दर्द के स्थान पर धीमे से हाथ चलाया।
तभी उसने तगड़ा दबाव डाला, और रेखा की चीख निकल पड़ी - ‘उईई ईईई’।
दर्द बहुत था, इलाज में मालिश की जरूरत पड़ी। डॉक्टर ने कहा, और रेखा भाभी का लहंगा ऊपर तक खींच लिया।
फिर वह कुछ पलों के लिए रेखा की हल्की रंगत वाली, सूड़ी टांगों में खोया रहा।
एक बार फिर डॉक्टर ने हाथ में क्रीम की छोटी सी ट्यूब ली। उसने अपनी उंगली पर थोड़ी सी क्रीम निकाली। धीरे से वह जांघ पर फैलाने लगा।
फिर वह रेखा के पैर अलग-अलग करता गया, घुटनों के बल जगह बनाकर बैठ गया, धीरे से मालिश शुरू कर दी। उसे आराम मिल रहा था, दबाव कम होने लगा, तभी तक वह बिना हिले ऐसे ही पड़ी रही।
उस डॉक्टर की उंगलियाँ बार-बार रेखा के चूतड़ों पर जा टकराईं, मालिश के बहाने।
पैंटी उसके पास तभी से नहीं थी, जबसे रेखा को जांघ में दर्द होने लगा।
जब मौका मिला, तो डॉक्टर ने रेखा के लहंगे को कमर तक ऊपर उठा दिया।
अब डॉक्टर के सामने उसकी पीठ का निचला हिस्सा खुला पड़ा था।
ऊपर से ही नज़र डालने पर चूत का कुछ हिस्सा दिख रहा था।
नीचे पेट के पास तकिया रखते ही रेखा का शरीर ऊपर को सरक गया। डॉक्टर के हाथों ने महज इशारा किया, तो चुटकी भर बदन ढल गया। अब घने बालों वाली जगह साफ दिखने लगी। जैसे कोई छिपी हुई चीज़ धीरे-धीरे सामने आ रही हो।
अब डॉक्टर के धैर्य का पुल टूट चुका था। पैन्ट और अंडरवियर जमीन पर आ गए। हाथ में लंड लिए, वो उसे हिलाने लगा। फिर रेखा की चूत पर लंड रख दिया। घिसटाने लगा।
पीछे मुड़कर रेखा ने देखा। उसने पूछा, डॉक्टर साहब, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?
बस इतना कहूँ… आपकी दाढ़ी पर कई बाल निकल आए हैं। मगर मेरा खयाल था, धनी महिलाएँ ऐसा नहीं होने देतीं।
डॉक्टर, बेकार की हरकतें छोड़ो। मेरा इलाज सही से करना शुरू करो।
मैंने सिर्फ यही बताया कि पप्पू को ऐसी चीज़ें अच्छी लगती हैं, तो दिखा दिया। डॉक्टर ने पूछा तो मुझे लगा बता दूं। कोई गलत बात नहीं की मैंने।
डॉक्टर की ओर देखकर रेखा चिल्लाई - अपनी जगह पर रहकर बोलो, तुम जैसे लोग मेरे घर में काम करते हैं।
डॉक्टर को बात सुनकर गुस्सा आ गया, फिर वह रेखा पर जा गिरा।
लंड धीरे से भाभी की चूत के पास पहुँच गया।
मज़े आने लगे थे रेखा को, पर धीमे स्वर में उसके होंठ खुले - आप ऐसा क्यों कर रहे हैं डॉक्टर?
शरीर को दबोचते हुए डॉक्टर रेखा के मुँह पर होठ रख दिए वो, साथ में बुदबुदाया - अमीरी का अभिमान दिखाती रहती हो तुम। आज तो तुम्हारी इज्जत की पोल खोल दूंगा। लो… लो बदचलन, मेरा लंड तुम्हारी चुत में धंस गया!
अच्छा लग रहा है तेरा स्पर्श… ऊँऊँ, कितना मुलायम है ये… हाँ हाँ, इधर भी गर्माहट है… वाह, छूने में बहुत साफ़-साफ़ लग रहा है।
डॉक्टर का लिंग रेखा के योनि में था, वह उत्साह से भरकर ऊपर-नीचे हो रहा था।
मस्ती में रेखा के चेहरे पर धीरे-धीरे मुस्कान फैलने लगी।
वो डॉक्टर लगातार रेखा के शरीर पर हथेलियों से घिसटता जा रहा था, मानो कोई भूखा कुत्ता हो। उसकी उँगलियाँ छाती पर दबाव डाल रही थीं, धीमे-धीमे आगे बढ़ रही थीं।
अब रेखा के होठों से सिसकन फूट पड़ी, बीच-बीच में उसकी चूत कस गई।
डॉक्टर बोला - आह्ह आह्ह, तू तो बहुत ही ज़्यादा चस्पा है। साली… तेरी चूत ऐसे भींच रही है कि मेरे पप्पू का दूध निकालने को मजबूर कर दे। हाहाहा… निगोड़ी! पर मैं इतनी जल्दी छुटकारा नहीं दूंगा, चाहे तू कितनी भी जोर लगा ले। आह्ह आह्ह… एकदम तभी रेखा को एक तेज़ झटका सा लगा, और वो खुद को संभाल नहीं पायी।
पानी में गर्मी थी, चिपचिपाहट भी थी, पप्पू वहीं डूबा। उठा धीरे-धीरे, हथेलियों पर शरीर संभाला, फिर तेजी से आगे बढ़ा।
तभी डॉक्टर को खुद पर भी खतरा महसूस हुआ, ऐसे में उसने रेखा की कमर को एक हाथ से संभाल लिया। दूसरा हाथ उसकी छाती के नीचे घुमाकर कसकर पकड़ लिया। फिर पीछे की ओर मुड़कर उसके मुंह को चूमते हुए जोर-जोर से लंड अंदर-बाहर करने लगा। दो मिनट तक इसी अंदाज में धुनने के बाद वह भरपूर उत्तेजना में आकर भैंस की तरह गरज उठा। और रेखा की चूत में ही अपना सारा शीघ्र उड़ेल दिया।
थोड़ी देर के लिए उसने पलकें नीचे रखीं, ऊपर से कोई ध्यान नहीं जैसे।
थोड़ी देर बाद डॉक्टर ने रेखा के ऊपर से हटकर उसके बगल में लेटना शुरू किया।
उठकर रेखा ने अपने कपड़ों को समेटा। इसी बीच, डॉक्टर के मन में तीव्र भाव पलट कर आए।
पल भर में उसने रेखा का लहंगा ऊपर किया। पीछे से सटकर वो अंदर हो गया। फिर बिना कुछ कहे भाभी की चूत और गांड पर जीभ घुमाने लगा।
एकाएक डॉक्टर का गुस्सा फूट पड़ा।
उसकी नाक लाइन के पिछले हिस्से में थी, वो सांस ले रहा था उस गंध को। फिर जीभ आगे बढ़ी, धीमे-धीमे चखते हुए।
गर्मी ने फिर से रेखा में जान डाल दी थी।
खड़े-खड़े डॉक्टर ने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया, फिर जोर-जोर से धक्के लगाए। 10 से 15 मिनट तक ऐसे ही वह मेरी भाभी को चोदता रहा।
अचानक वह झड़ने लगा। तभी उसने अपना लंड बाहर निकाला। पीछे से रेखा की पीठ और चूतड़ों पर छींटे भर दिए। इसके बाद डॉक्टर ने रेखा को घसीटकर बाथरूम में धकेल दिया। फिर उसने उसकी गांड में एक बाल्टी भर पानी उंडेल दिया। खुद भी पानी से नहल गया।
वह बाहर आया, रेखा को छोड़कर। चल पड़े थे दोनों, तभी डॉक्टर ने रेखा की गांड पर जोर लगाया। साथ में कान में धीमे स्वर में बोला - कल फिर आना। अगर नहीं आई तो घर पर मिलूंगा, तेरी भोसड़ी मारूंगा।!
पैर चलाते हुए मैंने भाभी को छेड़ा - अरे भाभी, उस गरीब डॉक्टर को पागल ही बना दिया तुमने। कौन सी बात दे दी थी उन्हें जो वापस लेने आने की बात कर रहे हैं?
मैंने बोला, और हंसी छूट गई।
थोड़ा सख्त लहजे में भाभी बोलीं - चुप रह पिशाचिन, ये बात किसी के सामने न उगलना। मैं जो चाहती… वो घटिया आदमी छोड़ने लायक ही नहीं था।
हँसने लगी मैं, थोड़ा ऊँचे स्वर में, फिर बोल पड़ी - भाभी, डॉक्टर के पास कौन सी गलती है? आपका बिना कपड़ों वाला शरीर देखकर तो कोई भी घबरा जाएगा।
थोड़ी देर बाद, भाभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
मैंने पूछा - कल तुम उसके पास जाने का मन बना रही हो, भाभी?
भाभी ने कहा - जाना ही होगा, वरना वो खुद यहाँ पहुँच जाएगा।
बोली मैं - कौन रोक सकता है उसे… आपने तो उस मुरझाए दिल को प्रेम की चपेट में ले लिया है।
बातें करते-करते वहीं से चल पड़ीं हम दोनों, ननद और मैं।
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