चचेरी बहन के साथ हुई चुदाई की कहानी
हेलो दोस्तों! मैं आज आपके सामने एक मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी पेश करने जा रहा हु.. यह कहानी है मेरी और मेरी चचेरी बहन की जिसका नाम रीना है। हम लोग बचपन से ही साथ साथ रहे। वो मुझसे सात साल छोटी है पर हम लोगों की खूब बनती थी। बाद में मैं अपनी पढ़ाई और फिर जॉब के कारण वो शहर छोड़ के दूसरी जगह आ गया पर जब भी अपने घर जाता मैं और रीना बहुत बातें करते। बात तब की है जब रीना जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी। जैसा कि आप लोगों को पता है कि मैं कितना बड़ा चोदू हूँ तो मेरी नज़र से रीना के शरीर में होने वाले बदलाव मेरी नज़र से कैसे बचते। मुझको पता चल रहा था कि कब उसके चपटे सीने में से तीखे उभार निकलने लगे थे, उसके चूतड़ उभर रहे थे। और वैसे भी चूंकि मैं बाहर रहता था तो उसके जिस्म में होने वाले बदलाव मुझको और आसानी से पता चल रहे थे। उसके जिस्म से एक अलग से खुशबू आने लगी थी जो उसकी जवानी को और मादक बना रही थी। जब भी वो मेरे पास आती थी तो उसके जिस्म की खुशबू मुझको पागल कर देती थी। आप ये कहानी दी इंडियन सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है…हमेशा की तरह हम लोग पास बैठ कर बहुत बातें करते थे। वो मेरे बहुत करीब चिपक कर बैठती थी, वो अपनी बातो में मस्त रहती थी और मैं उसके जिस्म की खुशबू के मज़े लेता रहता था। बातें करते वक़्त वो कई बार मेरे गले लग जाती थी और उस वक़्त उसके मम्मे मेरे बदन से चिपक जाते थे जो मुझको मस्त कर देते थे।
अब सिर्फ इंतज़ार था, और वो भी उसके मेरे बिस्तर पर आए बिना नहीं टूटता। जिस दिन उसने यौवन के दरवाज़े पर कदम रखा, तभी से मेरे ख़यालों में सिर्फ एक ही छवि - उसका नंगे शरीर के साथ मेरे बिस्तर पर लेटना। कब आएगी? कब मेरी लंड उसकी चूची के अंदर घुसेगी? कई रातों मैंने सपने में उसके स्तन दबाए, उसकी चूत चाटी, थक गया। अब बाक़ी था सिर्फ असली घड़ी का आना - जब वो ख़ुद आकर बिस्तर पर फैले।
अचानक सुबह के समय चाचा-चाची के साथ रीना भी पहुँच गई हमारे घर। लोग इधर-उधर की बातों में खोए हुए थे, मैं व रीना फिर से अपनी छोटी सी दुनिया में डूबे रहे।
वो मेरे साथ छोटे बच्चे की तरह घूम रही थी। उसने मेरा पेट छुआ, फिर मैंने भी हाथ आगे बढ़ाया, तो वो तेजी से पीछे हटने लगी। एक पल में मैंने उसकी कलाई पकड़ ली, खींचा, और वो सीधे मेरी ओर झुक गई। मैं पलंग पर बैठा था, पैरों में सूती पजामा। ऊपर तक खिसक चुका था मेरा मन। अचानक हुए धक्के से वो मेरी जांघ पर बैठ गई, जहां कुछ सख्त था, छिपा नहीं था कुछ।
मेरा लंड उसकी गांड की फांद में कहीं अटक गया। ये कहानी आप पढ़ रहे हैं, इंडियन सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर...थोड़ी देर वो बस ऐसे ही पड़ी रही, फिर एकदम से उठने लगी, मगर मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए पेट पर थे, तो उठ नहीं पाई। वो उठने की कोशिश कर रही थी, मैं उसे रोके हुए था, और इस झंझलाहट में मेरा लंड उसकी गांड पर घिस रहा था। धीरे-धीरे वो और भी खड़ा हो गया, मोटा हो गया, जबकि अभी भी उसकी गांड की तह में दबा था।
थोड़ा सा और दबाव डालते ही मेरा लंड उसकी चूत में पूरी तरह घुल गया। नीचे कूदकर मैंने अपने चूतड़ को झटका दिया, और धीमे-धीमे आगे-पीछे हिलने लगा।
थोड़ी-थोड़ी हिलते हुए वो खड़ी होने की कोशिश कर रही थी, पर मैंने उसे जगह से हिलने नहीं दिया। कुछ समय बाद उसने हल्के से सांस छोड़ते हुए कोशिश त्याग दी।
मैंने कमर हिलानी शुरू कर दी। एहसास हुआ कि रीना मेरे लंड पर अपनी गांड घिस रही है। सभी लोग वहीं थे, इसलिए मैं वो नहीं कर सका जो करना चाहता था। फिर मैंने उसके कान में कहा – ऊपर वाले कमरे में आ जा। बस इतना कहकर मैं उसे छोड़कर ऊपर चढ़ गया। कुछ देर बाद रीना भी वहाँ पहुँच गई।
ऊपर के कमरे में कोई आ जाएगा, इसका खयाल भी नहीं चला मेरे दिमाग में। रीना झिझकते हुए अंदर आई। उसके ऊपर टॉप था, साथ में पजामा। मैंने छेड़ा उसे फौरन, फिर पलंग की ओर खींच लिया। बैठ गया मैं पलंग पर, अपने पजामे में लंड को सीधा कर लिया। रीना को बैठा दिया मैंने ऊपर। धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी गांड की दरार में समा गया।
मेरा लंड आगे-पीछे होने लगा, साथ में चूतड़ को भी हिलाया। उसकी कमर पकड़ी तब भी वो झिझक रही थी।
उसके कंधे पर मेरा हाथ पड़ा, तो वो बोली - अंकल, ये ठीक नहीं लग रहा! आप ये कहानी indiansexstory dot com पर पढ़ रहे हैं... मैंने धीरे से कहा - गलत कब होगा, जब किसी को पता चलेगा। ना मैं बताऊंगा, ना तू। हम सिर्फ खुश रह रहे हैं। घबरा मत, कुछ नहीं होगा, बस इसमें छुपे अहसासों पर ध्यान दे। मेरा लंड उसकी चिड़ में तेजी से घिस रहा था, वो भी कमर झुकाकर मेरे साथ ढल रही थी। उत्तेजना में मेरा लंड सख्त होकर मोटा हो गया।
थोड़ी देर के बाद मैंने उस से पूछ लिया - अब भी मस्ती चल रही है?
फिर भी उसने कोई शब्द नहीं कहा।
कह दिया मैंने – सुनो पगली, भाई के सामने झिझक क्यों, आओ कुछ हटके करें?
फिर उसने कहा - कोई न कोई पहुँच ही जाएगा।
मैंने कहा, घबराओ मत, कुछ भी वैसा नहीं होगा जिससे कोई पकड़ ले।
वो सिर हिला चुकी थी, मैंने उसे उठाया। पैरों तक पजामा खींच लिया अपना, फिर उसका भी वही किया। झेंपकर आँखें बंद कर ली उसने। काली पेंटी पहनी थी उसने, जो मेरे लंड के घिसने से गांड में धंस गई थी। उसका गोरा-गोरा चूतड़ सामने था, गोल-मटोल।
उसके चूतड़ों पर मेरी उंगलियां फिरीं, तभी वो कांप उठी। हो सकता है, किसी आदमी के स्पर्श को ऐसे पहली बार महसूस कर रही थी। धीरे से दबाव डाला, फिर उसे खींचकर अपने ऊपर बैठा लिया। इस बार वो भी छाती झुका रही थी। मेरे हाथ नंगी जांघों पर आ ठहरे, गति के साथ घिसटते हुए। आप यह कहानी पढ़ रहे हैं इंडियन सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर…जांघें इतनी साफ कि मानो मक्खन का टुकड़ा था वो।
उसकी जाँघों पर मेरे हाथ का सफर जारी था। फिर वो धीरे-धीरे पेंटी के किनारों के पास पहुँच गए। अब उंगलियाँ जांघों के अंदरूनी हिस्से में घूम रही थीं, जहाँ कपड़ा तना रहता है। छूने का एहसास आया, पर चूत तक अभी कोई रुख नहीं किया गया। इश्तिहार नहीं, बस धीमा दबाव था।
आँखें बंद किए, वह सिर्फ कमर हिला रही थी। कुछ पल बाद मेरा हाथ उसकी चूत पर से गुजर गया। छूते ही वह झट से खड़ी हो गई, आंखें खोलकर। उसकी नजरों में थी शर्म, जैसे किसी ने गुप्त जगह छू ली हो।
अब मैंने आगे बढ़ना तय किया, फिर चड्डी नीचे की।
उसकी पीठ मेरी ओर थी। हाथ अचानक कपड़ों पर गया। फिर वो नीचे तक खिसक गए। बदन बिल्कुल खुला था।
उसे ये हरकत देखकर बिलकुल भी तैयार नहीं पाया। हाथों से कुछ ढकने लगी, तभी मैंने उसके हाथ हटा दिए, फिर उसे अपनी ओर खींच लिया। एक हाथ से अपना लंड सही किया, दूसरे से उसे झट से गोद में बैठा लिया। पहली बार लंड का स्पर्श उसकी नंगी गांड से हुआ। ऐसा लगा जैसे कुछ अजीब सा हो रहा है। उसके चूतड़ों को हाथों से चोड़ा, लंड को ठीक से पकड़ा। धीरे से हाथ आगे बढ़ाए, नंगी चूत पर हथेली फेर दी।
उसके मुंह से सी की आवाज़ निकल रही थी।
उसकी चूत के होंठों पर मेरी उंगलियाँ फिसल रही थीं। अब जाँघों से लेकर नीचे तक, हथेलियाँ तेज़ी से आ-जा रही थीं। पीछे से लंड धीमे धीमे भीतर घुस रहा था।
एक पल बाद मेरा हाथ धीरे से उसकी छाती की तरफ बढ़ गया। टॉप के ऊपर से ही मैंने उसकी छातियों को पकड़ लिया, फिर नरमी से दबोच दिया। दबाव बढ़ता गया, मेरे होंठ अब उसके कंधे पर थे, फिर पीठ पर घूम गए।
मैंने धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर मोड़ लिया, फिर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। उसके निचले होंठ को चूसने लगा, कभी-कभी ऊपर वाले पर भी ज़ोर डालता। वो जैसे मेरे साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थी, हालाँकि उसे ये सब अभी बहुत अच्छे से नहीं आता था। घड़ी की ओर झाँककर मैंने सोचा कि अभी ज़्यादा आगे नहीं बढ़ना चाहिए, इसलिए उसे पजामा ठीक करने और मेरे कपड़े संभालने के लिए कह दिया।
उसने खड़ होकर पजामा ऊपर करना शुरू किया। मैंने रोक दिया, फिर उसके चूतड़ों पर मुँह लगा दिया। पजामा वहीं छोड़ दिया गया। मैंने अपने कपड़े सम्भाले।
उसने मुझे देखा, फिर बोला - अजीब सा लगा।?
फिर वह हल्के से मुस्कुरा पड़ी।
एक बार फिर मैंने उसके साथ चुम्मा शेयर किया, फिर हम दोनों धीरे से नीचे लेट गए। अब मेरे भीतर बस इतना ख्याल था कि कब कोई ऐसा पल आएगा जब मैं अपनी प्रियतमा को अपने बिस्तर की स्वामिनी बना पाऊँ।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0