उसके भाई ने संभाली बहन की बेचैन जवानी।
मेरा नाम विनय है। मैं 28 साल का हूँ, जाट हूँ, और दिल्ली में रहता हूँ, हालाँकि मेरा गाँव रोहतक में है। मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, कद 5 फीट 10 इंच, रंग गोरा, और बदन गठीला क्योंकि मैं नियमित जिम जाता हूँ। मेरी चचेरी बहन पूनम, जो इस कहानी की दूसरी किरदार है, 22 साल की है। वो पढ़ाई में तेज है, दिखने में बेहद खूबसूरत, गोरी, लंबे काले बाल, और फिगर ऐसा कि किसी का भी दिल धड़क जाए - 34-28-36। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक है, जो मासूमियत और शरारत का मिश्रण है। ये कहानी मेरी और पूनम की है, जो लॉकडाउन से ठीक पहले की है। ये मेरी सच्ची कहानी है, और मैं इसे पूरी ईमानदारी और विस्तार से बयान करूँगाये बात उस समय की है जब पूनम को दिल्ली में एक प्रतियोगी परीक्षा देनी थी। चाचा को किसी काम से बंगलोर जाना पड़ा था, और चाची ने मुझसे कहा, “विनय, तू ही पूनम को दिल्ली ले जा। उसके पापा नहीं हैं, और तू उसका बड़ा भाई है।” मैंने सोचा, अकेले कैसे मैनेज करूँगा? लेकिन चाची ने समझाया, “क्या बात है, भाई-बहन कहीं भी जा सकते हैं। बस एक रात की तो बात है। 14 तारीख को चले जाओ, 15 को उसका पेपर है।” चाची ने सुझाव दिया कि होटल में कमरा बुक कर लूँ। मैं मान गया14 तारीख की सुबह हम दोनों तैयार हुए। पूनम ने टाइट जींस और कुर्ती पहनी थी, जो उसके बदन की हर वक्र को उभार रही थी। मैंने भी कैजुअल शर्ट और जींस पहनी। हम सुबह 10 बजे रोहतक से निकले और करीब ढाई घंटे में दिल्ली पहुँच गए। होटल में एक डबल-बेड रूम बुक किया। कमरा साफ-सुथरा था, दो बेड, एक छोटा सा सोफा, और बाथरूम के साथ। हम दोनों थक गए थे, तो सामान रखकर तुरंत बेड पर लेट गए।
अचानक पूनम ने बैग से नाईटी निकाली, फिर वो बाथरूम की ओर चल दी। वापस आते ही मेरी नज़र उस पर टिक गई। नाईटी उसके शरीर से सटी हुई थी, पतली, ऐसी कि हवा से भी झलक जाए। छोटे-छोटे गोल स्तन, भारी कमर - सब कुछ स्पष्ट था। ऊपर से नाईटी इतनी पतली थी कि अंडरवियर के धागे तक गिने जा सकते थे। पहली बार इतना करीब से देखा था मैंने उसे। दिमाग में उथल-पुथल मच गई। शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, पर मन को रोक लिया। याद आया - वो तो बहन है, हर ख़्याल गलत नहीं होना चाहिए।
शाम को खाना हमने होटल के अंदर के रेस्तरां में खाया। घर वापस आकर मैं सोफे पर बैठ गया, टीवी चालू करते हुए। इधर पूनम बिस्तर पर लेट गई, फिर धीमे से बोली - “भैया, आप भी आराम कर लो।” उसके बाद मैंने ऊपर की लाइट बंद की, छोटा लैंप जलाया, और बिस्तर पर आकर लेट गया। पर नींद दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। अंधेरे में उसकी वो नाईटी वाली तस्वीर आँखों के सामने घूम रही थी। मन में ठान लिया - जब वो गहरी नींद में जाएगी, तब मौका देखकर काम कर लूँगा।
आधे घंटे बाद भी पूनम सोई नहीं। वो चादर ओढ़े मोबाइल चला रही थी। चादर के नीचे से हल्की सी रोशनी आ रही थी। अचानक मुझे लगा कि वो हिल रही है। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज। उसकी साँसें भारी होने लगीं। “आआ… उफ़… आह…” ऐसी आवाजें आने लगीं। मुझे लगा शायद उसे कोई तकलीफ हो रही है। मैं घबरा गया। मैंने फट से उसकी चादर हटाईजो मैंने देखा, उसने मेरे होश उड़ा दिए। पूनम की ब्रा खुली पड़ी थी, पजामा और पैंटी घुटनों तक सरकी हुई थी। उसकी चूचियाँ खुली थीं, गोरी, गोल, और निप्पल सख्त। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, और वो अपनी उँगलियों से चूत रगड़ रही थी। उसका मोबाइल पास में पड़ा था, जिसमें एक भाई-बहन की चुदाई वाली कहानी खुली थी। वो शर्म से अपना मुँह हाथों से ढक रही थी, लेकिन उसकी आँखें मुझे देख रही थमेरा लंड पैंट में तन गया। मैंने देखा कि वो भी मेरे तने हुए लंड को घूर रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, “पूनम, तू तो बिल्कुल हॉट लग रही है। आज तूने मुझे भी गरम कर दिया।” वो शर्म से और सिकुड़ गई, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी। मैंने आगे कहा, “देख, ये मौका बार-बार नहीं मिलेगा। मैं तेरी जवानी की आग समझ सकता हूँ।वो धीरे से बोली, “लेकिन भैया, अगर किसी को पता चल गया तो?” मैंने उसे भरोसा दिलाया, “कोई नहीं जानेगा। मैं माँ की कसम खाता हूँ, ये बात मेरे और तेरे बीच रहेगी।” वो थोड़ा हिचकिचाई, फिर बोली, “ठीक है, भैया। लेकिन पक्का, किसी को नहीं बताओगे।”मैं तुरंत उसके बेड पर बैठ गया। उसकी चूचियों को हाथों से सहलाने लगा। वो इतनी मुलायम थीं कि मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने उसकी एक चूची मुँह में ली और चूसने लगा। निप्पल को जीभ से चाटा, तो वो सिहर उठी। “आह… भैया…” उसकी साँसें तेज हो गईं। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी। वो भी अब खुलने लगी थी।
उसकी नाईटी मैंने पूरी तरह नीचे खींच दी। सिर्फ पैंटी घुटनों तक रह गई थी। धीरे से उसे भी उतार फेंका। उसकी चूत चमक रही थी, गीलापन साफ झलक रहा था। कपड़े उतारते हुए मेरी शर्ट और पैंट भी फर्श पर आ गए। लंड खड़ा था, मोटा, 7 इंच का, पूरी तरह तना हुआ। पूनम ने एक झलक ली, आवाज में झिझक, "भैया, ये तो बहुत बड़ा है।" टाँगें अलग की, उँगलियाँ चूत पर फिराईं। इतनी गीली कि हाथ से छिटक रही थी। क्लिट पर दबाव डाला, वो झुक उठी। "आह… उफ़… भैया, ये क्या…" मुँह लगाकर जीभ चलाई। स्वाद नमकीन था, तेज। बाल पकड़कर खींचने लगी। "आआ… ओह… भैया, और…"
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर तक डाली। वो पागल सी हो रही थी। उसकी चूत से रस टपक रहा था। मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। वो बोली, “भैया, धीरे करना… मुझे डर लग रहा है।” मैंने कहा, “डर मत, मैं हल्के से करूँगा।”मैंने लंड का सुपारा उसकी चूत पर सेट किया और धीरे से दबाया। वो थोड़ा सिकुड़ी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर सरकाया। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड फँस सा रहा था। “आह… भैया… दर्द हो रहा है…” वो चीखी। मैं रुक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा। जब वो थोड़ा शांत हुई, मैंने फिर से धक्का मारा। इस बार मेरा लंड आधा अंदर चला गया।
“उफ़… भैया… रुको…” वो कराह रही थी। मैंने उसकी चूत को उँगलियों से सहलाया और फिर एक जोरदार धक्का मारा। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। वो चीख पड़ी, “आआ… मर गई…” लेकिन मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। “फच… फच… फच…” कमरे में चुदाई की आवाज गूँजने लगी। पूनम की चूत अब गीली हो चुकी थी, और उसे भी मजा आने लगावो बोली, “भैया, और जोर से… चोदो मुझे… आह…” मैंने रफ्तार बढ़ा दी। मेरा लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने उन्हें मुँह में लिया और चूसते हुए पेलाई जारी रखी। “आह… ओह… भैया… उफ़… कितना मजा आ रहा है…” वो चिल्ला रही थी। उसकी चूत से सफ़ेद क्रीम निकलने लगी, जो मेरे लंड पर चिपक रही थमैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी गोल गाँड मेरे सामने थी। मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ मारा, तो वो सिहर उठी। “भैया, ये क्या कर रहे हो… आह…” मैंने उसकी गाँड के छेद पर उंगली फिराई और फिर लंड उसकी चूत में डाल दिया। “फच… फच… फच…” मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था। वो चादर को मुँह में दबाकर कराह रही थी। “आआ… ओह… भैया… मेरी चूत फट जाएगी…करीब 20 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “पूनम, कहाँ निकालूँ?” वो बोली, “भैया, बाहर निकालो… पेट पर…” मैंने लंड बाहर निकाला और उसके गोरे पेट पर अपना माल छोड़ दिया। वो हाँफ रही थी, उसका चेहरा लाल था। मैंने उसे बाँहों में लिया और चूमने लगा। वो बोली, “भैया, ये गलत तो नहीं था ना?” मैंने कहा, “नहीं, ये हमारी जवानी की जरूरत थी।रात में हमने दो बार और चुदाई की। सुबह पेपर के बाद भी एक बार चोदा, फिर घर लौट आए। अब लॉकडाउन खत्म होने वाला है, और पूनम का एक और पेपर बाकी है। मैं उसे फिर दिल्ली ले जाऊँगा, और फिर से उसकी चूत की आग बुझाऊँगा। तब तक के लिए, आप बताइए, क्या आपको मेरी कहानी पसंद आई?
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