किसी बहन से होना अजीब नहीं।
मेरे पास एक भाई है, चंदन। वो बाइस साल का है। उसकी छोटी बहन उससे दो साल तले की है। जब आप उसे देखेंगे, कुछ पल के लिए सांस रुक सी जाएगी। उसके स्तन ऐसे हैं कि किसी का ध्यान भी डगमगा जाए। वो हमेशा तने रहते हैं, गोल और मजबूत। शरीर उसका ऐसा कि लगे घिसा हुआ संगमरमर। इतने में मैं खुद को रोक नहीं पाता। लंबे समय से मन में यही ख्याल आ रहा था। कहना था, पर रास्ता समझ नहीं आ रहा था। एक ठान ली – पहले पढ़ाई खत्म होने दूंगा। अब सहन करना मुश्किल हो गया है। !
एक तरफ सोचा था कि आने वाले हफ्ते पिताजी और माँ मामा के घर जाएंगे। बहन साथ नहीं जाएगी, उसके एग्ज़ॅम चल रहे हैं। घर में कोई नहीं रहेगा, इसलिए फिर वही होगा जो पहले होता आया है।.
पिता जी और माँ मामा के घर चले गए। लगभग चार दिन तक वहीं ठहर गए। उसी समय मेरी बहन का परीक्षा परिणाम आ गया। वो प्रथम आई। फिर वो मेरे पास आई, उपहार माँगा। बोली, "मैं पहले स्थान पर आई हूँ, मुझे कुछ दो।" मैंने कहा, थोड़ी देर में दूँगा। वो बोली, ठीक है, और रसोई में काम करने चली गई। .
फिर मैंने सोचा कि क्या हो अगर मेरी बहन मेरे साथ सोए। मैं कमरे में गया, लैपटॉप खोला और एक ऐसी फिल्म शुरू कर दी। फिल्म देखकर मन घबरा गया। मैं रसोई की तरफ चल दिया, वहाँ वो काम में लगी थी। मैं पीछे आकर खड़ा हो गया। बोला - तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो। फिर उसकी कमर पर हाथ रख दिया। उसने झटके से हाथ छुड़ाया। पूछा - ये सब क्या बकवास है? मैं ठिठक गया। फिर भी बोला… आज तुम
उसने कहा, बहुत सेक्सी लग रही हो। मैंने उसे फिर पकड़ लिया, हाथ कमर पर चलाए। उस दिन वो सलवार सूट में थी। आमतौर पर जीन्स-टॉप या वन पीस पहनती है वो। तभी भी, सूट में वो अजीब तरह से खूबसूरत दिख रही थी।.
हाथ कमर पर चल रहा था, इधर उसने मुँह नहीं खोला। कुछ देर तक ऐसे ही चलता रहा, वह अपने काम में लगी रही। फिर बोला मैं - उपहार नहीं लोगी? हाँ दे दो, बोली वह। अभी देता हूँ, कहा मैं। धीरे से हाथ ऊपर बढ़ाए, लेकिन उसने पकड़ लिया मेरा हाथ, चेहरा झट से पीछे हट गया। आँखें मिली रहीं, एक-दूसरे में डूबे। थोड़ा करीब जाकर मैंने गाल पर छुआ, हल्का सा। उसने कुछ शब्द नहीं निकाले।
उसके दूसरे गाल पर किस किया। जैसे ही मुँह की तरफ बढ़ा, वो आगे झुक गई, काम में जुट गई। पूछा - क्या बात है? बोली - कुछ नहीं। कहा - तोहफा नहीं लेना? बोली - ये सब ठीक नहीं। कहा - कुछ गलत नहीं है। तू लड़की है, मैं लड़का। चाहे भाई-बहन हों। फिर कुछ शब्द नहीं निकले। पीछे से घेर लिया। हाथ छाती तक पहुँचे। धीरे-धीरे दबाव डाला। बहुत हल्के हाथ थे।.
वो अब कुछ नही कह रही थी. फिर मैने उसके बाल एक साइड करे ओर उसकी नेक पर किस करी, फिर मैं थोड़ी देर तक उसके बूब्स दबाता रहा ओर उसकी नेक पर किस करता रहा, वो मुझे कुछ नही कह रही थी. फिर मैने उसे घुमाया ओर उसका फेस अपनी तरफ करा ओर एक हाथ उसकी कमर पर रखा ओर एक हाथ से उसकी नेक को पकड़ा ओर धीरे-2 उसे अपनी तरफ खीचने लगा किस करने के लिए. जब उसके ओर मेरे लिप्स काफ़ी पास आगाए थे तो मैं रुक गया ओर उसे देखने लगा तो उसने अपनी आइज़ क्लोज़ करी हुई थी, फिर मैने हल्का सा किस करा उसकी लिप्स पर ओर फिर उसे स्मूच करने लगा
देखा तो ये था कि वो कुछ जवाब नहीं दे रही थी, मुझसे जुड़ाव भी खत्म सा लग रहा था। पूछा तो बोली, "कुछ नहीं हुआ," पर लग ही नहीं रहा था। धीरे से कहा, "ये सब अजीब लग रहा है।" मैंने कहा, "घबरा मत, सब ठीक है।" फिर बोला, "मैं आज तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ।" उसने मना कर दिया, "ऐसा नहीं, इसे गलत मत समझो।" बोला, "पर तुम आज बहुत हॉट लग रही हो।" थोड़ी देर बाद वो हाँ करने लगी। तभी याद आया, "अरे, मेरे पास एक फिल्म पड़ी है।"
दोनों ने सोचा कि अगर तुम्हें सेक्स करने में मन नहीं है, तो हम नहीं करेंगे। इसके बजाय, मूवी देखते हुए कुछ और कर लें, जैसे ओरल। उसने कह दिया – चलो, ठीक है। मैं उसे अपने कमरे में ले आया। फिल्म शुरू हुई। थोड़ी देर हम दोनों फिल्म देखते रहे। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। हाथ पर धीरे से चुम्मा दिया। उसे पास खींच लिया। होंठों पर चुम्मा देने लगा। कुछ समय बाद महसूस हुआ कि वो भी जवाब दे रही है। मेरे चुम्मे का वापस जवाब दे रही थी। .
अचानक वो मेरी असली बहन के साथ ऐसे चुम्मा करने लगा। मैंने उसके स्तन दबाए, और धीरे-धीरे गहरा कर दिया। जैसे ही मैंने छूआ, वो और ज़ोर से चुम्मा लेने लगी, मेरे होठों पर बार-बार। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई, मैंने चूस लिया। मैंने कहा, अपना सूट उतार दे। वो झिझक रही थी। तब मैंने याद दिलाया - तूने खुद कहा था, ओरल सेक्स करेंगे। फिर उसने कपड़े उतारे। अब सफेद ब्रा में खड़ी थी। मैंने अपनी टी-शर्ट फेंकी, और उसकी ब्रा खोलने लगा।
उसके बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। ऊपर चढ़ गया। छाती को चूसने लगा। वो बहुत अच्छी थी। आँखें बंद किए। खुशी में सांस रोके। छटपटाहट से आवाज़ निकल रही थी। धीमे-धीमे कपड़े उतारे। पहले सलवार। फिर पन्हुचे। सामने पूरी तरह खुली थी। मैंने भी सब कुछ उतार दिया। हाथ घुमाया नीचे। उसने पकड़ लिया मेरा। झटके से खींचा और रगड़ने लगी।
अचानक मैंने उसकी छाती छुआ। वो तुरंत सिसकने लगी - अहाहाहा ह्म, अहाहाहा, ओहोहो ह्म। ध्यान से देखा तो पता चला, मैं जब उसे छू रहा था, तब वो अपने होठ काट रही थी। कुछ पल बाद मैंने उसकी छाती चाटी। फिर मैंने कहा, "मेरा लिंग चूसो।" शुरू में इनकार कर दिया। मैंने गुज़ारिश की - "प्लीज, जान, प्लीज।" बाद में वो मान गई। मैं आवाज़ें निकालने लगा - आहाहा ह्म, एसस्स्स्सस्स, जान, और तेज़ अहहाहा। थोड़ी देर ऐसे चूसने के बाद वो बोली, "अब बस, बहुत हो गया।" मैंने कहा, "जान, प्लीज... मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ, तुम्हें..."
परीक्षा के बाद मैंने उपहार देने की बात की, तो वो बोली ऐसा नहीं होना चाहिए। मैंने ज़ोर दिया, लेकिन उसने मना कर दियa। फिर मैंने कहा ठीक है, और धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने कहा, अगर तुझे गलत लगे तो कुछ नहीं करेंगे। उसने फिर भी कहा कि नहीं, ऐसा मत करो। मैं उसके पैरों के बीच घुस गया। वो बोली, ये क्या कर रहे हो? मैंने कहा, कुछ खास नहीं। इसके बाद मैं ऊपर आ गया और उसके स्तन चूसने लगा। धीरे-धीरे वो उत्तेजित होने लगी। मेरा लिंग उसकी योनि से छू रहा था।.
उसने अपनी आँखे बंद करी हुई थी फिर मैने अपना लंड पकड़ा ओर उसकी चूत पर रगड़ने लगा, वो कहने लगी प्लीज़ मत कतो ये ग़लत है तो मैने कहा कुछ ग़लत नही है ओर तेज़-2 अपना लंड उक्की छूट पर रगड़ने लगा, फिर मैने उसे कहा अंदर दल डू तो वो माना करने लगी फिर मैं उसके बूब्स चूसने लगा और ओर तेज़-2 अपना लंड उक्की छूट पर रगड़ने लगा फिर मैने पूछा अंदर दल डू तो वो कुछ नही बोली, मैं समझ गया अब बस ये चूड़ने क लिए टायर है. फिर मैने अपना लंड उसकी छूट क होल पर रकहा ओर अपनी लिप्स उसके लिप्स पर रखे ओर उसे स्मूच करते हुए अपना लंड अंदर डालने लगा, मैने एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरे लंड तोड़ा अंदर गया, जैसे ही मेरा लंड अंदर गया वो मेरे लिप्स पर बीते करने लगी ओर मुझे टाइट हग कर लिया.
अचानक मैंने तेज़ी से धक्का दिया, पूरा लंड भीतर चला गया। कुछ देर मैं ऊपर रहा, आगे-पीछे हिलता रहा। बाद में छोटे-छोटे झटके लगाने लगा।.
उसकी आँखें बंद थीं, सांसें भारी। फिर वो रुकी, धीमे-धीमे रोने लगी - आह… ह्म… अहाहम्म… श। मैंने पूछा, "तुझे मज़ा आ रहा?" कोई जवाब नहीं। मैं ठहर गया। उसने आँखें खोलीं। फिर पूछा, "जान, मज़ा आ रहा?" उसके होठों से निकला, "हां, स्वीटहार्ट, चलते रहो।" ये सुनकर दिमाग घुम गया। फिर मैंने अपनी बहन को ज़ोर से छुआ। कुछ पल बाद, उसकी एक टांग कंधे पर डाल ली। मध्यम गति से आगे बढ़ा। वो आँखें बंद किए, आवाज़ें निकाल रही थी - ओह… एआ… ह्म… अहहहहहा।.
उसके बाद मैंने उसे किनारे लिटा दिया, मैं पीछे से चिपक गया। धीरे से अपना लंड उसकी गर्म छूत में घुसा दिया, कुछ देर तक आगे-पीछे हिलता रहा। इसके बाद डॉगी स्टाइल में ले आया, जब मैं ऐसे छोड़ रहा था, तो उसकी गांड के हिलने का अंदाज़ काफी मज़ेदार लग रहा था। फिर वो बोली, अब मैं तुम पर लेटती हूँ। मैंने हाँ कह दी। वो मेरे ऊपर आकर लेट गई, मैंने फिर से अपना लंड उसकी छूत में डाल दिया। वो ऊपर-नीचे होने लगी, उछलते हुए उसके बूब्स बहुत सेक्सी दिख रहे थे।.
उसके बाद मैंने उसे कमरे के कोने में ले जाकर गोद में उठा लिया। वह खुशी से ऊपर-नीचे हो रही थी, पूरे शरीर से हंस रही थी। इधर मैंने धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। ऊपर आकर अपना घुटना उसके बीच में डाला। फिर धीमे-धीमे अपना हिस्सा उसके अंदर ले गया। एक झटके के साथ वह चीख पड़ी - "आह... हाँ... ओह..."। उसकी आवाज़ सुनकर मेरा दिमाग और भड़क गया। मैंने तेजी से आगे-पीछे होना शुरू कर दिया। बीच में वह मेरी गर्दन को चूमने लगी। उसके हाथ मेरी पीठ पर फिसल रहे थे।.
मेरा जल्दी ही छूटने वाला था। कंडोम नहीं था मेरे पास। एक पल तो यही सोचा कि बाहर निकल जाऊँ। फिर ख्याल आया - इतनी सेक्सी बहन, आज और भी खूबसूरत लग रही है, क्यों न अंदर ही डाल दूँ? मैंने तेजी से झटके दिए, लगभग दो मिनट तक। सारा शुक्र उसकी चूत में गया। कुछ देर ऐसे ही रहा, उसके ऊपर झुका। जब उठा, तो बोली - उसे बहुत मजा आया।.
मैं तुमसे पहले भी ऐसा कर चुकी हूँ। आज तुमने मेरा दिल बहला दिया, भाई। जब भी समय मिले, बस इशारा कर देना। झिझकने की कोई बात नहीं, ये तो अपनों के बीच की बात है।.
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