तीन रात लगातार भाई ने किया मुझसे संबंध, परिवार की छुट्टी के दौरा

Jan 3, 2026 - 15:05
Jan 6, 2026 - 19:50
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तीन रात लगातार भाई ने किया मुझसे संबंध, परिवार की छुट्टी के दौरा

कई बार जिंदगी में ऐसा होता है कि सही और गलत की लकीर इतनी धुंधली हो जाती है कि समझ ही नहीं आता क्या हो रहा है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब हमारा पूरा परिवार शिमला के फेमिली टूर पर गया था। मेरा नाम रूबी है, उम्र उन्नीस साल, और मैं कॉलेज में पढ़ती हूँ। मेरी फिगर 34-28-36 है, और लोग कहते हैं कि मेरी स्माइल और भरी-भरी चूचियां किसी का भी ध्यान खींच लेती हैं। मेरा भाई अमर, इक्कीस साल का, जिम जाता है और उसका बदन कसा हुआ है, चेहरा ऐसा कि लड़कियां उस पर फिदा हो जाती हैं। मम्मी-पापा भी अभी जवान लगते हैं, खासकर मम्मी, जो 38 साल की उम्र में भी 25 की मॉडल जैसी दिखती हैं। उनकी फिगर 36-30-38 है, और वो हमेशा टाइट साड़ी या डीप-कट ब्लाउज में रहती हैं, जिससे पापा की नजरें उन पर से हटती ही नहीं। पापा, 42 साल के, बिजनेसमैन हैं और मम्मी को खुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

हर साल हम घरवालों   ुट्िां मने जाते हैं। इस बार पापा  ि शिमला पर  ठहरा, ताकि वो और मम्मी अपने ुरा  ी यादों ें  ँ। िल्ली से SUV में ठकर हम उत्तराखंड की तरफ चल पड़े, और शिमला ें एक  सिारा होटल में ठहर गए। पापा ने दो कमरे िए - अपने लिए एक, और सरा मेरे  अमर के लिए। शायद उन्हें लगा ा कि भाई-बहन क्या करेंगे एक  कमर ें। पर जो  हु, वो उनक कलपन   थी। मैं और अमर, तीन रात तक इतन ा मचाया कि बेड की आव़ दीवारों से टकराकर गूंजती रही।

शाम के वक हमने होटल के ीतर े खाने  कमर ें खा िया। मम्मी ने ऐसी काी ड्रेस पहनी थी जो उनके शर से िपक रह ी, उसमें  साफ झलक रहे थे। पापा बार-बार उनकी कमर पर हाथ लगा रहे थे, आँखों में वही चमक थी जो कु और ोने   इश करती है। खाना खाते  अमर और मैं एक-दूसरे की तरफ देखकर हंसते रहे, हमें ा था कि आज  मम्मी-पापा बितर पर जमकर  करने वाले हैं। खाना खत्म होते वहीं वो दोनों अपने कमरे की ओर चल ि, और हमें कहा गया कि अपने कमरे में जाकर आराम कर ो।

थोड़ी देर हम  पर बैठे रहे, हवा के पर ें  ढल गई कर रात के दस बजे पस कमरे में आए। तर दो े बितर थे, मने टीवी, और एक   सोफा। मैंने जींस और ऊपर  कपड़े बदले, ी नाइटी पहनी - पतली, हल्की, ऐसी कि दर  कपड़ों  परा साफ झलक रही थी। अमर ने अपनी टी-शर्ट ेंी, जींस उतार ी, अब सिर्फ बॉक्सर में खड़ा था। उसके तने हु शरीर   मन में को उथल-थल सी मच गई, मगर मैंने पक  धक कर उसे धक दिया।

हमने टीवी ऑन किया और नेटफ्लिक्स पर एक सीरीज लगाई। सीरीज में एक सौतेले भाई-बहन की कहानी थी, जिसमें कुछ हॉट सीन थे। सीन देखते वक्त अमर ने अचानक कहा, “रूबी, ये सही है ना? मतलब, भाई-बहन में ऐसा हो सकता है?” मैंने हँसते हुए कहा, “पागल हो गया है क्या? ये तो सीरीज है, रियल लाइफ में ऐसा थोड़ी होता है!” लेकिन उसकी आँखों में कुछ अलग-सी चमक थी। उसने कहा, “मेरा एक दोस्त है, राजीव, वो अपनी बहन गुन्नू के साथ ऐसा कर चुका है।” मैं चौंक गई। “क्या बकवास कर रहा है, अमर! ऐसा नहीं हो सकता।” उसने अपना फोन निकाला और एक वीडियो चलाया। वीडियो में राजीव और गुन्नू साफ-साफ चुदाई करते दिख रहे थे। मैं हैरान थी, लेकिन कहीं न कहीं मेरे अंदर भी कुछ हलचल होने लगी।

अमर ने धीरे से कहा, “रूबी, देख, मौका भी है। मम्मी-पापा अपने कमरे में बिजी हैं। हम भी तो कुछ मजा कर सकते हैं। तुझे भी तो मन करता होगा ना? बाहर किसी के साथ करने में रिस्क है, लोग ब्लैकमेल कर सकते हैं। लेकिन हमारा तो घर का मामला है, कोई डर नहीं।” उसकी बातें सुनकर मेरे शरीर में सिहरन-सी दौड़ गई। मैंने हल्के से हाँ में सिर हिलाया, और बस, यहीं से सब शुरू हो गया।

अमर ने अपना बितर मेरे बिस्तर   बगल ें कर रख दिया। "कई, तू किसी को ाएगी नहीं?" उसन ा, "और वीडियो ी नहीं बनाऊँगा ैं, घबर मत।" मैंने ि हिलाा - “ीक ै, पर ये सब यहीं रुेगा।” वो  े मेरे  िसक आया,  मेरी नाइटी के ऊपर से कमर पर िर गया। े का ़ ऐसा कि शरीर ें रझुरी-  गई। मैंने उसकी ओर ा, आँखों में ँखें ीं, और वो धीमे े मेरे होंठों की तरफ बढ़ा। पहले एक हल्का स्पर, फिर गहरा ुंबन। उसकी जीभ मेरी जीभ से टकरा, और लग  िजल  झटका शरीर में  गया।

  े मेरी नाइटी को ऊपर ींा, िर कंधों तक नीचे सरका दिया। अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी मैं। ेरे 34C इज के तन ब्रा में इट थे, निप्पल सख्त होकर ऊपर  उभर आए थे। अमर ने े के हुक ूंे, ा खोली, मेरे तन बाहर  गए रत  ोला, “रूबी, तेरी ातीां मम्मी से भी  अची हैं।” मैं हँसी, पर मेरी चुतड़ में  गीलापन  गया। एक तन को अपने मुँह में लिया, चूा, दूसरे पर हथी से दब ा। “आह्ह… अमर… धीरे… उफ्फ…” मेरी आव लडखड़ा गई। उसकी गली मेरी पैंटी के ऊपर से चुतड पर िरने लगी। कपड़ा पहले ही तर हो चुका था।

ो मेरी पैंटी नीचे करत गया, ि मेरी चूत देखकर बोला - “अर ार, रूबी, इतन ी तो ैं कभ नहीं ी, सचमुच ाफ़-सा ूल ी।” उसकी एक उंगली मेरे तर ुस गई, ैं ि उठी। “ँ… अमर… हाँ…” मे तर जोश छलक रहा था। धीरे-धीरे ो उंगली चल लगा, मेरी चूत नम ोने लगी।  ें ककर वो मेरी चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ मेरे दर के ि ू रही थी, मैं ू हो रही थी। “हाँ… ऐस ी… ँ… कितना अचा लग रहा,” मैंे उसके सिर ो अपने जघन पर दबा िा।

़ी देर ें उसने अपने बॉक्सर  ींे, मन आय एक ा 7 इंच का लंड। वो सख्त खड़ा था, ि पर गुलाबी छतर  ढककन। मैंने हाथ बढ़ाया, े- चलाना  िा। "अमर, ये तो बहुत बड़ा है!" मैं िझकते हुए ी। वो ठह रकर हँसा, ि बोला, "इसे ुँ ें  े, रूबी, ी मिलेी।" मैं   ुँह में ाला, चूसना ुरू कर िा।  आगे- ूम रहा था, मेरी  पर उसक गलियां दब रही थीं। "उफ्फ... रूबी... तू ऐसे चूस रही है,  कम कर िा... आह्ह..." उसकी सांें   गईं।

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़ी देर में  ुझे बितर पर ले गया, ैर अलग ि उसका लं मेरी चूत के ऊपर आया, िर आव आई - “ूबी, अब ुरू करता हूँ, तू ।” मैंने बस ें  कर लीं। धीमे  उसने घुसाया। चूत पहले  तर थी, पर लंड के आक से जल्दी ें झनझनहट हु। “उफ… अमर वधान…” ैं ी। ो धीे धक्के लगाने लगा, तर गर्मी लन लगी। िप-ि की आवाजें ों  टकरा रही थीं।

उसके होंठ  ऊपर थे, जब मैंे उसकी कमर को कसकर पकड़ लिा। "अमर... ेजी से... मुझे ाहे ितन ी..." मे आव लडखड़ा रही थी। वह और तेज  गया, उसकी छड़ मेरे दर के सभी कोों ो छू रही थी। "रूबी, तू इतनी िंी हु है... ओह..." उसक ांें ेज थीं। ़ी देर बाद उसने कहा ि मैं घुटनों पर  ं। ैं झुक गई, और उसने पीछे से ीरे  सप ी। "ओह... अमर... िा रुे... ऐस ी..." मेरी आवाज ां रही थी। उसने मेरी कमर पकड़ी, िर एक-एक धक्का मारा। "थप... थप... थप..." उसके  मेरे े टकरा रहे थे।

आधे घंटे तक वो मुझे हर तरह े चोदता रहा। कभी मैं ऊपर, कभी वो मेरे ऊपर  ा। मेरी   बल उछ ा रहे थे, वो उन्हें दबा रहा था। िर एक पल उसने कहा, “रूबी, मैं झड़ूंा!” मैंने जव िा, “अंदर नहीं, बाहर निकाल े।” उसने अपना लंड ींा, मेरी ी पर अपना ाग  दिया। मैं ां भरकर हांफ रही थी, वो मेरे  लेट गया। दोनों पसीने से लथपथ, कमरे में शर की गरहट    हुई थी।

अगली सुबह जब हम बारह बजे  आसप उठे, मम्मी-पापा भी अपने कमरे से निकल रह े। उनकी आँखों पर झलक रहा था कि रात भर उनक  चुदाई में  रहा। नाश्ते के ाद हम शिमला घूमन िकल पड़े, ि भर  ऐस  ा। लेकिन े ही ात हु, हम दोनों फिर अपने कमरे में थे। अगली दो रातें भी इस तरह ीं। हर बा अमर ने मुझे अलग  से चोदा - एक  दीवार  िककर, ो कभी बाथरूम में शावर के नीचे खड़े-खड़े। एक बार उसने मेरी गांड मारने की कोशिश की, मैंने  मना कर दिया। "अमर, चूत ही काफी है, गांड ़ो अभी," मैं हँसते हुए ी।

उन तीन दिनों ें हम दोनों ने    किा। मम्मी-पापा को एक पल  शक नहीं हुआ, क्योंकि उनक  अपनी बातों ें ा। आजकल घर में ी,   ो बाहर िकलते हैं, हम दोनों  े मौके  इस कर लेते हैं। ि ी, शिमला ें िता गई  ीन रातें, कभ नहीं ेंगे।

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