गर्मी के छुट्टियों के दौरान कजिन घर आए। उनके साथ संबंध बना।

Jan 3, 2026 - 13:01
Jan 8, 2026 - 17:00
 0  1
गर्मी के छुट्टियों के दौरान कजिन घर आए। उनके साथ संबंध बना।

मैं हिरेन, 22 साल का, नीमराना का रहने वाला। मेरा रंग गेहुंआ है, कद 5 फीट 10 इंच, और जिम की वजह से बॉडी टोन्ड है। मेरा लंड 6 इंच का, मोटा और गुलाबी सुपारा वाला, जो तनने पर एकदम कड़क हो जाता है। हमारे घर में मम्मी-पापा, दादी और मैं रहते हैं। घर छोटा सा है, दो बेडरूम और एक हॉल। मम्मी-पापा एक बेडरूम में सोते हैं, मेरा दूसरा बेडरूम है, और दादी हॉल में सोती हैं। नीमराना की गर्मी ऐसी कि पंखा भी बस हवा फेंकता है, ठंडक नहीं देता। इस कहानी की दूसरी किरदार है मेरी कजिन वैशाली, जिसे हम सब प्यार से विशु बुलाते हैं। विशु 25 साल की है, गोरी-चिट्टी, चेहरा ऐसा जैसे चाँद का टुकड़ा, और फिगर 32-30-34। उसकी आँखें काली, लंबे घने बाल, और होंठ गुलाबी, जो मुस्कुराते ही दिल में आग लगा देते हैं। उसकी चाल में एक अदा है, जैसे कोई अप्सरा चल रही हो। मैं उसे बचपन से प्यार करता हूँ, भाई-बहन वाला प्यार, पर उसकी खूबसूरती हमेशा मेरे दिल को छूती थी। एक बार मजाक में मैंने कहा था, “विशु, अगर तू मेरी बहन न होती, तो तुझसे शादी कर लेता।” वो हँसकर मेरे गाल पर हल्का सा थप्पड़ मारती और कहती, “पागल है तू, हिरेन।”

बात गर्मी की छुट्टियों की है। मई का महीना, नीमराना की सड़कें धूल और गर्मी से तप रही थीं। मेरी बुआ यूपी से हमारे घर आईं, और उनके साथ थी विशु। बुआ और मम्मी की तबीयत अक्सर खराब रहती थी, तो घर का सारा काम विशु ने संभाल लिया। सुबह वो नीली कुरती और सफेद लेगिंग्स में चाय बनाती, खाना पकाती, और कपड़े धोती। उसकी नीली कुरती में से उसका गोरा पेट हल्का सा दिखता, और जब वो झुकती, तो उसकी ब्रा की आउटलाइन साफ दिखती। मैं उसे चुपके-चुपके देखता रहता। वो मेरी नजरों को भाँप लेती, लेकिन बस मुस्कुराकर टाल देती। मैं अक्सर उसके पास जाता, उसके गालों को हल्के से छूता, और वो प्यार से कहती, “हिरेन, काम करने दे ना।” उसकी आवाज़ में एक मासूमियत थी, जो मुझे और करीब खींचती थी।

घर में जगह की कमी थी। बुआ   विशु के आने से  और खराब  गए ुआ ी, “हिरेन, तू दादी के साथ  ें सो जा, मैं और विशु तेरे कमरे में सो लेंे।” पर हॉल में इतनी तपि थी कि पंखा चल   भी पसीना  रहा था। मैंने इनक कर दिया, “नहीं, मैं अपने कमरे में ही सोऊँगा।” विशु ने भी कह िा, “हॉल गर्म लगता है, मैं दर रहूँी।” मम्मी ने कह ि हॉल में सो ले, पर बुआ हँसकर बोी, “ फर पड़ता ै? दोनों भाई-बहन हैं, एक साथ रह लेंगे।” इतन नत ी मेरे दर खुशी का झरन  गया। विशु के साथ एक बितर पर सोने  ्या, सि यह  में मन बेचैन हो उठा। मन में कोई गलत  नहीं थी, बस उसके पास रहना ही मेरे लिए सबस बड़ी  थी।

रात को हम दोनों मेरे बेडरूम में गए। विशु ने हल्के गुलाबी रंग का टॉप और काली लेगिंग्स पहनी थी। मैंने ग्रे टी-शर्ट और नीला लोअर। लाइट्स ऑफ कीं, और हम बेड पर लेट गए। बेड छोटा था, तो हमारा शरीर एक-दूसरे से हल्का सा छू रहा था। मैंने चादर ओढ़ ली, और जल्दी ही हमें नींद आ गई। आधी रात को मेरी नींद खुली। मैंने महसूस किया कि मेरा हाथ कहीं नरम-नरम सी जगह पर है। अंधेरे में मैंने चादर हटाई, और जो देखा, उससे मेरे होश उड़ गए। मेरा हाथ विशु के पेट पर था। उसका गुलाबी टॉप थोड़ा ऊपर खिसका हुआ था, और उसकी गोरी त्वचा चाँदनी में चमक रही थी। उसका पेट इतना मुलायम था कि मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैं अकेले सोता हूँ तो तकिए को गले लगाता हूँ, शायद इसलिए नींद में मेरा हाथ वहाँ चला गया। मैंने सोचा कि उसे जगाए बिना हाथ हटा लूँ, लेकिन मेरे दिल में कुछ और ही चल रहा था।

विशु गहरी नींद में थी। उसकी साँसें इतनी शांत थीं कि मैं उन्हें गिन सकता था। मैंने हल्के से अपना हाथ उसके पेट पर फेरा। उसकी त्वचा इतनी नरम थी, जैसे मखमल। मेरे शरीर में गर्मी सी दौड़ने लगी। मेरा लंड तनने लगा, और मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने धीरे-धीरे उसका टॉप और ऊपर किया। उसने काली ब्रा पहनी थी, जो उसके 32 साइज़ के स्तनों को टाइट पकड़े थी। मैंने ब्रा को हल्के से ऊपर खिसकाया, और मेरा हाथ उसके नंगे स्तनों पर चला गया। यार, क्या बताऊँ, वो मुलायम, गोल स्तन, जिनके गुलाबी निप्पल हल्के से सख्त हो रहे थे। मेरे लंड का सुपारा अब पूरी तरह तन गया, और मेरे शरीर में जैसे करंट दौड़ रहा था। मैंने धीरे-धीरे उसके एक स्तन को सहलाना शुरू किया, उंगलियों से उसके निप्पल को गोल-गोल घुमाते हुए। तभी विशु की नींद टूटी।

वो अचानक उठ बैठी और धीमी आवाज़ में चिल्लाई, “हिरेन, ये क्या कर रहा है? तुझे शर्म नहीं आती? मैं तेरी बहन हूँ!” उसकी आवाज़ में गुस्सा था, लेकिन वो धीरे बोल रही थी ताकि बाहर कोई न सुने। मैं घबरा गया। मेरे मुँह से निकला, “विशु, मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूँ, तुझे तो पता है ना।” उसने कहा, “हाँ, पता है, लेकिन ये क्या तरीका है प्यार दिखाने का? ये गलत है, हिरेन!” वो नाराज़ थी, और उसकी आँखें गुस्से से चमक रही थीं। मैंने उससे माफी माँगी, “विशु, प्लीज़, माफ कर दे। मैं तुझसे इतना प्यार करता हूँ कि खुद को रोक नहीं पाया। अगर तू मुझे मना करेगी, तो मैं अपनी इच्छा पूरी करने कहीं बाहर जाऊँगा। तुझे वो अच्छा लगेगा?” मैंने उसे बहुत समझाया, अपने प्यार का वास्ता दिया। आखिरकार वो पिघल गई। उसने कहा, “ठीक है, लेकिन तू प्रॉमिस कर कि ये बात किसी को नहीं बताएगा, और कहीं बाहर अपनी इच्छा पूरी नहीं करेगा।” मैंने तुरंत प्रॉमिस किया, और मेरे दिल में खुशी की लहर दौड़ गई।

Passion Porn Gifs and Pics - MyTeenWebcam

मैंे विशु  गले से लगा लिा, ि उसके गाल पर चु  िया। “धनयव, तू बहुत अची है,” मैं बार-बार लता रहा। वो ेंपते हुए बोली, “अब बस कर, मैं ोना हती हूँ।” उसे बितर पर लिटाकर ैं ऊपर आ गया। माथे से शुरू करके धीरे-धीरे उसके होंठों तक पहुँ गया। उसके ी होंठ इतने े थे कि खुद को रोक नहीं पाया। गहरे चु  लगा, और वो भी मेरे साथ लने लगी। जीभें आपस में टकरं, ऐस लगा जैसे  अनज दुनिया में ो गए ों। गले पर चुम् लगा, गर्दन को हल्का सा ाँ लग िया।  ोली, “उफ… हिरेन… धीरे े…” उसकी आवाज़ में गर्माहट थी,   आग   जल रह ो।

मैंने उससे कहा, “विशु, अपनी ब्रा खोल दे।” वो शरमाते हुए बोली, “तू ही खोल ना।” मैंने उसके पीछे हाथ डाला और उसकी काली ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा को साइड में रखा, और अब उसके नंगे स्तन मेरे सामने थे। उसके स्तन गोरे, गोल, और बीच में गुलाबी निप्पल, जो हल्के से सख्त हो रहे थे। मैंने एक स्तन को हाथ में लिया और धीरे-धीरे दबाया। वो इतने मुलायम थे, जैसे रूई के गोले। मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। वो सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… हिरेन… ओह्ह… क्या कर रहा है…” मैंने उसके दूसरे स्तन को दबाते हुए उसकी नाभि तक चूमना शुरू किया। उसकी गोरी नाभि में एक छोटा सा तिल था, जो उसे और सेक्सी बना रहा था। मैंने उसकी काली लेगिंग्स को धीरे-धीरे नीचे खींचा। अब वो सिर्फ़ काली पैंटी में थी, जो उसकी चूत को हल्का सा ढक रही थी।

ऊपर  ी पैंटी के ऊपर ैंे उसकी चूत ो चूम िा। ि उठी ो, "हिरेन... ये क्या... आह्ह..." सांसें गन लगीं। धीरे-धीरे ैंे उसकी ैं ीचे ीं ी। ूत सफ, तलवरदार, गुलाबी थी, बीच में छोटी क्लिट िलमिा रही थी। टांगें फैलाकर ैंे चाटना शुरू कर िया। स्वाद था मानो  दर तक  जा ीभ से क्लिट को ा, और वो खने लगी, "आह्ह... हिरेन... ओह्ह... बस कर... मर जाऊंगी..." सिर को चूत पर दबा रही थी ो। मैंने एक उंगली उसके मुंह में डाल दी, वो चूसने लगी। चाटता रहा ैं, वो कुल्हे उठाी रही, "आह्ह... ओह्ह... हिरेन... चाट ले मेरी चूत को..." पानी  गया, और मैंने सारा रस चाट लिया।

अब विशु की बारी थी। उसने मेरी ग्रे टी-शर्ट उतारी और मेरे सीने को चूमना शुरू किया। वो धीरे-धीरे नीचे आई और मेरे नीले लोअर को नीचे खींच दिया। मेरा लंड काले अंडरवेयर में तनकर बाहर आने को बेताब था। उसने अंडरवेयर के ऊपर से ही मेरे लंड को चाटा, और मैं सिहर उठा। फिर उसने मेरा अंडरवेयर उतारा, और मेरा 6 इंच का लंड बाहर आ गया। उसका गुलाबी सुपारा चमक रहा था। वो उसे देखकर मुस्कुराई और बोली, “हाय, कितना प्यारा लॉलीपॉप है तेरा।” उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और रगड़ना शुरू किया। फिर उसने उसे अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। यार, क्या मज़ा आ रहा था। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी, जैसे कोई बच्चा अपनी फेवरेट कैंडी चूसता हो। उसने मेरे लंड के सुपारे को जीभ से चाटा, और मैं सिसकारियाँ लेने लगा, “आह्ह… विशु… चूस ले इसे… ओह्ह…” वो 5 मिनट तक चूसती रही, और जब मुझे लगा कि मेरा निकलने वाला है, मैंने कहा, “विशु, बस कर।” उसने लंड छोड़ा और मेरे ऊपर आ गई।

मैंने उसे ारा नीचे िाया, ि अपना लंड उसक  के ऊपर रख िया। वो बोली, “हिरेन, ुम पय आहि करो, ुझे घबरहट ो रही है।” मैंने कहा, “तन  े, मैं तु ीरे से चोदूँगा।” मैंने आर से अपना लंड उसकी चूत में सरका। उसकी चूत इतनी कस  थी कि मेरा लंड ा अंदर नहीं गया। दर्द महस होे ही वो िल् लगी, पर मैंने  अपने होंठों से उसक ुँ  ढक िया। मैंने देखा कि उसकी चूत से खून  रहा था। वो पहल  ी जा रही थी। मैंने उसे गल लगा, कहा, “विशु, अब तू कभ  कना नहीं।” उसकी आँखों में आँसू थे, ि ी वो मुस्कुराई, ि बोली, “ैं मस ्या करती हूँ, िरेन।”

मेरा लंड ि उसकी चूत में  गया। इस बार धीे-धीमे झटक लगे। तर गर्मी थी, नम ी, लंड आर से िसक रहा था। वो सां रोककर ोली - “आह्ह… हिरेन… धीरे… ओह्ह… चोद दे मेरी चूत…” मेरी  कमर पर ि गई, अब ेजी से धक्के लगे। उसकी ी से िकल आव़ कमरे में भर गई - “आह्ह… ओह्ह… हिरेन… फक मी… चोद दे मेरी बुर को…” उसे पलट िा, अब वो मेरे ऊपर ी। उसने  लंड को चूत में ींचा, ि ऊपर- े लगी। उसके स्तन मेरे सामने ि रहे थे, मैंने हथ े दबो िया। वो चीी - “हिरेन… आह्ह… तेरा लंड कितना मस्त है… चोद दे मुझे…”

हमने कई पोजीशन बदलीं। मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा करके चोदा, उसकी एक टाँग उठाकर। उसकी चूत में मेरा लंड गहराई तक जा रहा था, और वो चिल्ला रही थी, “आह्ह… हिरेन… और ज़ोर से… फाड़ दे मेरी चूत…” फिर मैंने उसे बेड के किनारे लिटाया और उसकी चूत में उंगलियाँ डालकर उसे और गर्म किया। वो बार-बार झड़ रही थी, और उसका पानी बेडशीट पर गिर रहा था। आखिरकार जब मेरा निकलने वाला था, मैंने अपना लंड बाहर निकाला और विशु ने उसे अपने हाथों से रगड़ा। मेरा सारा माल ज़मीन पर गिर गया। विशु भी झड़ चुकी थी। हम दोनों ने अपने कपड़े पहने, ज़मीन को साफ किया, और फिर एक-दूसरे को गले लगाकर सो गए। सुबह जब पापा पानी भरने की आवाज़ से उठे, तो विशु जल्दी से मुझसे अलग हो गई ताकि कोई शक न करे। सब कुछ नॉर्मल था। शुक्र है, रात में कोई नहीं जागा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0