एक तरफ जहाँ भाई ने पूरी ताकत झोंक दी, वहीं मैंने भी हार नहीं मानी।

Jan 3, 2026 - 16:13
Jan 6, 2026 - 19:47
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एक तरफ जहाँ भाई ने पूरी ताकत झोंक दी, वहीं मैंने भी हार नहीं मानी।

मेरा नाम नेहा है, उम्र 19 साल, गोरी-चिट्टी, कद 5 फीट 4 इंच, फिगर 34-28-36, लंबे काले बाल और चुलबुली सी हंसी। मैं एक कॉलेज स्टूडेंट हूँ, और मेरी जिंदगी में मस्ती और थोड़ा सा नखरा तो बनता है। मेरा भाई राहुल, 22 साल का, लंबा-चौड़ा, 5 फीट 10 इंच, गठीला बदन, और कॉलेज का सबसे स्मार्ट लड़का। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक है, जो हर बार मुझे थोड़ा सा बेचैन कर देती थी। हमारी मम्मी, शीला, 40 साल की, जॉब करती हैं, सख्त मिजाज लेकिन प्यार करने वाली। पापा, राजेश, 45 साल के, बैंक में काम करते हैं, और हाल ही में उनका ट्रांसफर कानपुर हो गया। अब घर में सिर्फ मैं, मम्मी और राहुल ही रहते थे।

हमारा घर दिल्ली के एक सम इलाके में है, दो मंजिला। ऊपर राहुल का कमरा ै, नीचे मेरा। मम्मी सुबह-सवे का पर चली जाती थीं। मैं कॉलेज अकसर स्कूटी से जाती, वहीं राहुल ी अपनी सवी से कॉलेज  िकल ा। दोपहर में मैं  1 बजे ऑटो से  आती। राहुल घर पहुँचता मम्मी से एक घंटा पहले, लगभग 4 बजे। पापा को कानपुर   15 दिन हो गए थे। मेरे शर में एक अजीब बेचैनी   थी। वह तड, जो पहले पापा के साथ ां  ी, अब ी में जला रही थी। मैं सोचती रहती - अब ये जलन किसस िाऊँ?  ा जो इस आग को  कर सके?


एक दिन मम्मी को तकल थी। राहुल ने उनसे कह िा, “आज चाय नहीं चाहिए मम्मी।” ममी ने ये बात मुझे नहीं बता, सी ो गईं। मैंने ि ी चाय बना ली, और कमरे की ओर चल पड़ी। ऊपर  कमरा था उसका, खिड़की थोड़ी खुली थी। जैसे ही मैं खिड़की के पास पहुँची, अंदर ां िा। राहुल वल कच्छे और बनियान में था, किताब पढ़ रहा था, उसका लंड कच्छे में साफ उभर रहा था, खड़ा था ूरा। ो धी ों े उसे ू रहा था। मैं वहीं जम गई। सांसें तेज, दिल की धड़कनें   गईं। कच ें लंड इतना तना था कि टेंट  ि रहा था। चाय का कप हा ें ा, पर  नहीं  रह ा कि मैं यहाँ क्यों हूँ।

राहुल को शायद यकीन था कि आज कोई चाय देने नहीं आएगा, इसलिए वो बेफिक्र था। लेकिन उसे क्या पता कि मैं उसे इस हाल में देख रही हूँ। मेरी चूत में खुजली होने लगी। मैंने एक कदम आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं की, बस वहीँ खड़ी रही। मेरे दिमाग में एक ही ख्याल था - काश मैं अंदर जाकर कह सकूं, “भाई, इसे ऐसे मत सहलाओ, मैं सहलाती हूँ। मैं तुम्हारे लंड को खुश कर दूँगी।” लेकिन मैं मजबूर थी। मैंने चाय का कप साइड में रखा और वहीं बैठकर अपनी चूत को सहलाने लगी। राहुल का खड़ा लंड मेरे लिए किसी जादू से कम नहीं था। मेरी चूत में खलबली मच गई थी।

फिर राहुल ने कच्छे से अपन  बाहर निकाल िया।  भगव, क्या  ा लंड था! लगभग 6.5 इंच लंबा, 3 इंच ़ा, टां  तरह सख्त, गरम। मैं तो रत ी रह गई। काश मैं वहीं होती, तो उसका कच्छा चबा जाती। ीरे- ाहुल ने लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर िया। मेरी चूत ऐसे चिल्ला उठी, “ओये, ये क्या कर रहा है? ेरे , ैं तो तैयार हूँ, और तू हा  ेल रह ै!” पर क्या करती, जजों को दिल में दबा िा। मैंने भी एक उंगली दर डालकर फिंगरिंग शुरू कर दी। ओर ो, राहुल के लंड े पानी टपकन लगा, वहीं मेरी चूत े भी पानी निकल पड़ा। मैं उठी, चाय लेकर वापस आ गई।

अपने कमरे में आई ो बेचैनी   गई। राहुल का लंड मेरी आँखों में तैर रह ा। अब ना  हती उसे, ना िल। पहल उसे अपनी चिकनी चूत दिखानी ी, तभी तो उसका लंड खड़ा होगा। पर कैसे? समझ नहीं आ रहा था   ो सुबह 6 बजे ऊपर े बाथरूम में नहाकर कॉलेज चला जाता। मैं और मम्मी 8 बजे से पहले उठते ी नहीं। नींद कहाँ थी ी? हर पल राहुल का फनफनाता लंड घूम रहा था ों  आगे। जब भी आँखें बंद करती, ो मेरी चूत के लिए तड़पता दिखता। िल धडकता, "इतना तड़पने मत दो उसे, नेहा।"

ो बजे थे रात े, पर नींद कहाँ?  जग रख  थी। बार बार  ा - "चाहिए , बस चाहिए!" मैं  रह ी उसकी ़ि में। फिर अचनक ्या आया। छत पर चढ़ी, राहुल के बाथरूम की टंकी का नल बंद कर दिया - पानी , नह  पड़े। कमरे में पस आई  गई। इंतजार ू।

सुबह   छह बजे मैं बाथरूम में खड़ी थी। कपड़े ीरे  फर पर  गए, दरवाजा थोड़ा-सा अटक रखा। राहुल ो पानी के लिए उतरन ा, इसलि ैं  ी। घड़ी े करीब छह बजे उसक कदम सुना ि। शावर का नल  िया, और ऐस बना जै नह रह ूँ। कुंडी नहीं लगाई थी मैंे। मे हरा दरवाजे की ओर था। एक हाथ  ी को िोरा, दूसरा नी चल गया। टांगें अलग कर लीं, अपन ऊपर हा िा।  तब दरवाजा खुला, ाहुल  सब  देख लिया। मैंने डर का  बनाया, जैसे कुछ हु ही नहीं। असल में मैं चाहती थी कि वह मेरी ांों और ी को देख ले।

दरव़े    ी राहुल ने तुरंत कुं  ी। मैंने नहाने का ों करत  अपनी पैंटी बाथरूम में ी छोड़ दी। ि नहा-ोकर कपड़े पहने, बाहर आई तो  दरव़े   खड़ा था। शर्मिं  बनकर ैं  अपने कमरे  ओर भाग गई। उसके बाद  नह गय और अपने कमरे में चला गया।    मैं चाय लेकर उसके  पहुंी। ि  बोली, "भाई, मुझे नहीं पता था तुम आ जाओगे।" उसन जव िा, "असल में मुझे ़ी ांगनी चाहिए, पानी ऊपर नहीं आ रहा था।" मैंने ीरे से देखा - उसक नजें मेरी  पर िकी थीं, जो टी-शर्ट में सा ि रही थीं। तब मु एहस , सब कु ीक चल रहा है।

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नीचे आकर ैं ीरे- समझन लगी। ाहुल ो ट्यूशन  ा, ो चला गया। कॉलेज  बज घर पर रह ि ैंे। मम्मी े बोली, तबीयत सह नहीं है। दिन भर  करन  े में सोचती रही। शाम को ों े - मम्मी और राहुल। मैंने कहा, स्कूटी चला सीखना है। मम्मी बोलीं, अभी ठीक नहीं हूँ, पापा आएंगे तो उनसे सीख लेना। मैं डट रही, अभी सीूंी। तब मम्मी ने राहुल  ओर ा, “इसे सिखा दे।” राहुल े पहले मना किा, फिर ख्याल आया कि पीछे बैठने का मौका मिलेगा। ाँ कर िा। मैं तो यही चा रही थी। मेरा इरा था कि जब उसका लंड मेरी गांड को , तो उसकी नींद उड़ जा

राहुल कुर्ता-पायजामा ें आया ा। मैंने स्कर्ट और टॉप पहना, इसलि उसक नज मेरी चूचियों और जांघों पर ठहर गई। हम ग्राउंड  ओर चल पड़े। स्कूटी पर ैंे दोनों टांगें अलग करके बैठन ुरू िा। ाहुल पीछे खड़ा था। वो जानबूझकर ब्रेक ेता, ि कता, और मैं अपनी ी को उसकी पीठ से    ेती। मेरी चूत में ेचै   रही थी। ि ें ाल आया - अगर उसक ंड मेरी गांड को ू ले, तो ितन अच ो जा। घंटे भर तक स्कूटी सीखने के बहाने हम एक-दूसरे को छूते रहे। मेरी चूत नम हो चुकी थी, राहुल का लंड पायजामे में ऊपर  उठ  ा, लार टपक रही थी।

अगले दिन शुक्रवार था। मम्मी ने कहा, “मैं शाम को कानपुर जा रही हूँ, तुम्हारे पापा के पास।” मैंने कहा, “मैं भी चलूँगी।” मम्मी बोलीं, “नहीं, तुम राहुल के साथ रुको।” ये सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैंने सोचा, “ये मौका है। तीन दिन हैं, राहुल को पटा लूँगी।” राहुल को जब ये बात पता चली, तो उसकी मुस्कान में एक शरारत थी, जो मैंने पकड़ ली। रात को मम्मी अपनी पैकिंग कर रही थीं। मैं उनके पास बैठी थी। राहुल आया और मेरी चूचियों को घूरते हुए बोला, “मम्मी, मुझे आज दूध पीना है, वो भी फ्रेश।” मम्मी हंस पड़ीं, “तुझे क्या हो गया? तू तो दूध पीता नहीं।” मैं समझ गई कि वो मेरी चूचियों की बात कर रहा है। मैंने कहा, “कोई बात नहीं, भाई, मैं कल तुम्हें फ्रेश दूध पिलाऊँगी।” मैंने मुँह नीचे करके हंस दिया। राहुल ने मम्मी के पीछे से मुझे आँख मारी। मैंने शरमाने का नाटक किया, लेकिन मन में ठान लिया कि कल तो चुदवाकर ही रहूँगी।

रात को मम्मी राहुल को चाय देकर आईं। मैं 15 मिनट बाद ऊपर गई। खिड़की खुली थी। राहुल बेड पर लेटा था, मेरी एक फोटो हाथ में थी, जिसे वो पागलों की तरह चूम रहा था। उसका एक हाथ अपने लंड को सहला रहा था। मैं ये देखकर मुस्कुरा उठी। वो मेरी फोटो देखकर मूठ मारने लगा। मैं भी अपनी चूत में उंगली डालकर फिंगरिंग करने लगी। राहुल ने मेरी फोटो पर अपना माल गिरा दिया और बुदबुदाया, “कल तुझे ऐसा ही माल खिलाऊँगा।” मैं पागल सी हो गई। मन कर रहा था कि अभी जाकर कहूँ, “भाई, मुझे चोद डालो!” लेकिन मम्मी के डर से नीचे आ गई। सारी रात मुझे नींद नहीं आई। राहुल की भी यही हालत थी।

सुबह मम्मी  पर िकल गई ी। मैं कॉलेज  ओर चल पड़ी। पहर एक बजे पढ़ा खत हुई, ि मैं ऑटो े लि बाहर  गई। राहुल स्कूटी लि मेरी रा  रहा था। ऐस लगा, वो अब और ठहर नहीं सकता। मैं उसके पीछे बैठ गई। रास्ते में वो बार-बार ीमा करता, ैं अपनी ी को उसकी पीठ से  ेती। स्कूटी पर े-े मेरी योि नम हो लगी। ैं उसके लिं के लि िल्कुल    ी।

घर आकर मैंने कहा, "तुम कपड़े बदल लो, मैं भी बदल लेती हूँ, फिर खाना बनाे।" मैंने टी-शर्ट और स्कर्ट पहनी। राहुल नीचे आया। मैं किचन में  कर खाना बनाने लगी। पीछे  ो आया, बोला, "नेहा, खाना नहीं, दूध ाहि... ़ा।" मैंने ों किया, "पहले बता तो सही, अब शाम को लाऊंगी।" उसने पीछे से पकड़ लिया। उसका छड़ मेरी गांड पर िपक गया। चूचियों पर  रन लगा, ीमे  ोला, "इस दूध  जररत है े, बहन के ताज़ा दूध ी।" चूत में   गर्मी ी। ैंने झटका दिा, "छोड़ो, ऐसा क्यों कर रहे हो? मैं तुम्हारी बहन हूँ, लजा नहीं आती?"

गर्दन पर राुल  ों सरकन लगे। पायजामे में उसक  तन गया, मा दर घुसने की जल ें हो। मैंने फिर कहा, "भाई, ऐस मत करो, छोड़ दो मुे!" पर वो  डट रहा। चूचियों पर गलिां सरकती रहीं, गांड पर लंड का दबाव े-े बढ़ता गया।  भी  ो गई मैं। ी, "अरे भाई...उफ्फ...ऐसा क्यों कर रहे?" मेरा हर उसने अपनी ओर ींा, होंठों पर होंठ ों दिए। उसकी  ने इतन ि ि ि चकर लगा। फिर मुझे उठाया, कमरे तक ले गया, बितर पर लिटा दिया।

मेरी चूत ें खुशी का ऐसा रं था,    रह ो। राहुल मेरे ऊपर ा, मेरे होंठों पर अपन ुँ को रने लगा, ीरे  ी को ूने लगा। मैं कहा, “अरे भाई, ये गलत  है, बस कर,” पर दिल चा रहा था कि वो सुने  उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर उठ। मेरी  हव ें  गई। वो िठक गया, रन लगा। बोला, “इन्हें देखे िना  ि ां नहीं  था।” मैंने कहा, “ि पी ले न, किसने ोका ै? ओह, जै  ो,  !”

राहुल मेरी चूचियों को चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे निप्पलों पर नाच रही थी। मैं सिसक रही थी, “आहह भाई, उफ्फ, हाईई, बहुत मज़ा आ रहा है!” मैंने उसका लोअर नीचे खींचा। उसने कच्छा नहीं पहना था। उसका 6.5 इंच का लंड मेरे सामने था, फनफनाता हुआ। मैंने उसे हाथ में लिया और चूमने लगी। फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। राहुल सिसक रहा था, “आहह नेहा, मेरी जान, खा जाओ इसे! आहह, क्या मस्त चूस रही हो!” मैंने उसका लंड पूरा मुँह में लिया, जीभ से चाटा, लॉलीपॉप की तरह चूसा। उसका पानी निकल गया, और मैंने उसे पी लिया।

राहुल ने मुझे जम पर लिटा िया, िर पैंटी  ीं दी। ो मेरी ी चूत को रन लगा, बोला - "ो दिन, तुम्हारी पैंटी बाथरूम में पड़ी थी। उसकी  ने िमा िा दिया ा मेा।" ैं मन ही मन ि उठी। उसने मेरी चूत   मुँह  कर साँस ़ी। गर्मी  ेरे शर में नझ भर ी। ीरे- उसने जीभ चल  ी, अंदर तक  ी। मैं चीखन लगी - "ऊऊउ, भाई… हा, … मेरी चूत को ो,  ुमा!" उसने क्लिट पर ां चढ़ा, ि  लिया। मेरे   गए। मैं चिल्लाई - "अब लंड डाल दे… आओ दर… चोद दे  ा!"

 लग कर राहुल ने अपनी लंड मेरी चूत पर िका ी। एक झटके में आधी लंड तर चली गई। मैं ची उठी - “अब मौ हो जाएगी!” दूसर ार हु, ी लंड अंदर  गई दर  ा, मगर ुशी उसस कहीं ऊपर ी। आगे-े की  लग ो। मेरी चूत े उसकी लंड को   लगा रखा था। मैंने कमर ाकर अपन िस् बढ़ाा। “ओए… जोर से धका दे! इस चूत को फा ! ओहह, , बहुत अच लग रहा…”

राहुल मेरे तनों पर   रहा था, ीमे- दब बढ़ा रहा था। उसका लिं मेरे दर  रहा था, गर्माहट ा रहा था। कमरे में िर्  ांों की आव थी। ैं पहल  उठ ुकी ी, फिर भी शर  रहा था। "ओह, और गहरे... तूफा ा दे," मैं दब उसक गति ते हो गई। लगभग  मिनट बाद, दोनों एक साथ ढह गए। उसका गर्म तरल मे दर ैल गया। मेरे मुं  िकला, "अर खत्म हो गई!" ऐसा लगा, मानो वन े- हर निकल रहा हो।

राहुल मेरे ऊपर आकर लेट गया। आध   तर उसने अपना लंड निकालने  ि ी। मैंने कहा, "भाई, इसे े ही ़ दे।"   बाद उसने ाने िा और मेरी चूत को  से ाफ कर िया। बोला, "ी चूत ें नमक  है!" मैंने भी उसके लंड को  से ाफ किया। फिर मैंने ा, "अब ये मज़ा हर दि िेगा?" वो खुशी से  उठा। बोला, "हाँ बहना, मैं तो हर वक्त ुझे चो सकता हूँ!" मैंने उसे गले लगा िया।

उसके लंड को ैंने ीरे-    आध े में वो फिर खड़ा  गया। राहुल बोला, “नेहा, ये तेरी चूत के ि हर ि करार रहता है।” मैंने कहा, “भाई, मेरी चूी तो तेरी ही है। जब मन करे, अपन  कर ले।” उसक  हर ार जब  िलता, हम ों एक-दूसरे के साथ उलझ ाते।

ुम्ें  कह अच लगी, िसमें ैं और राहुल े? टिपणी में बता ो, कौ  िा सबसे ेज़ लगा।!

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