भाई के मोटे लंड से बहन की गीली चूत में धक्के लगे।
फ्लैट में रिया रहती थी, साथ उसके भाई रोहन का भी घर। उम्र तेईस की थी वो, कॉलेज जाती, गोरी चमड़ी, बदन पर अंदाज़ा लगाना मुश्किल। उसकी जींस चुस्त, ऊपर का कपड़ा छोटा, बदन के हर हिस्से पर नज़र ठहर जाती। रोहन था पाँच साल बड़ा, लंबा, छाती चौड़ी, शरीर में ताकत। उसके पास कुछ ऐसा था जो दिखने में सामान्य नहीं लगता था। माता-पिता दूर गाँव में, शहर में बच्चे अपने काम से जुड़े। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, फिर एक दिन बदलाव आया।
एक गर्म रात को बिजली चली गई। रिया सिर्फ पैंटी और ब्रा में सोफे पर लेटी हुई थी, उसका गोरा जिस्म पसीने से चमक रहा था, चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। रोहन शॉर्ट्स में आया और उसे देखकर रुक गया, उसका लंड शॉर्ट्स में तनकर खड़ा हो गया। रिया ने उसकी नजरें पकड़ीं और शरारत भरे अंदाज में बोली, “क्या देख रहा है भाई?” रोहन हँसते हुए बोला, “तेरी चूत का उभार देख रहा हूँ रिया, जो लंड माँग रहा है।” रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया, लेकिन उसकी चूत अंदर से गीली हो चुकी थी, पानी टपकने लगा।
उस रात के बाद आँखों की चुपचाप बातें शुरू हो गईं। टब से बाहर निकलकर रिया जान-जानकर टॉवल ढीला रखती, मोटी जाँघें झांकतीं, सामने का हिस्सा खुला छोड़ देती। रोहन की नजरें चिपकी रहतीं उसकी ऊपर नीचे की हर चीज पर। एक बार नहाते वक्त दरवाजे में दरार रह गई। छिपकर भीतर आया रोहन, तो सब कुछ साफ देख लिया – नंगी पीठ, पानी के कण उसकी गुलाबी चूत पर लुढ़क रहे थे, चूचे साबुन से चमक रहे थे। डरकर चीख पड़ी रिया - “भाई, बाहर जा!” आगे बढ़कर उसने उसकी चूत पर हाथ रख दिया, फुसफुसाते हुए बोला - “अब चोदूंगा बहन।” रिया की सांस तेज, धड़कन ऊपर, कोई हिलती नहीं थी।
बारिश की एक शाम ने सबकुछ बदल दिया। माता-पिता ने फोन पर कहा कि वे दो हफ्ते में लौटेंगे। रिया के पहनावे में छोटी शॉर्ट्स थीं, ऊपर क्रॉप टॉप, और उसकी मोटी पिछवाड़ी धीरे से झांक रही थी। रोहन अपने अंडरवियर में था, उसका भारी लंड आसानी से दिख रहा था। उसने रिया को पास खींचा, सीधे मुंह से बोला - "आज तेरी चूत फाड़ दूंगा"। रिया लजाई, पर उसकी चूत से रस टपकने लगा, वो बोली, "भैया... ऐसा नहीं करना चाहिए..." फिर भी उसका शरीर पूरी तरह तैयार था।
सोफे पर रिया को खींचते हुए रोहन ने उसका टॉप पकड़ा, झट से फाड़ दिया। बाहर आए भारी स्तन, ब्रा उतारकर फेंक दी गई। मुँह में लिए उसके नंगे स्तन, चमट गया मुँह निप्पल पर। जोर से चूसा, तो रिया की सांस थमी, "आह्ह... भाई, चूस ले मेरे चूचे…ओह्ह ह्ह्ह" कहते हुए वह लड़खड़ा गई। निप्पल पर दाँत पड़े, हल्का सा काटा। चूत से तर सड़क बहने लगी। शॉर्ट्स नीचे उतारे, गीली पैंटी नाक तक ले गया। सूंघा गहराई से, फिर बोला - “तेरी चूत की खुशबू कमाल है, बहन।”
अब रिया पूरी नंगी थी, उसकी गुलाबी चूत गीली चमक रही थी। रोहन ने अपना अंडरवियर उतारा, उसका 8 इंच का मोटा लंड लहराने लगा। रिया ने उसे देखकर डरते हुए बोली, “भाई ये तो मेरी चूत फाड़ देगा!” रोहन मुस्कुराया, “फटने के लिए ही तो है रिया।” उसने रिया की जाँघें चौड़ी कीं, लंड को चूत पर रगड़ा, रिया की चीख निकली, “डाल दे भाई, चोद मुझे, आह्ह इह्ह” रोहन ने एक जोरदार झटका मारा और पूरा लंड रिया की चूत में पेल दिया। रिया चीख उठी, “आअह्ह्ह मर गई भाई, ओह्ह ह्ह्ह्ह” लेकिन रोहन नहीं रुका, जोर-जोर से धक्के मारने लगा, चूत से फच-फच फच की आवाजें आने लगीं। वो रिया के चूचों को जोर से दबाता, गांड पर थप्पड़ मारता, रिया चिल्लाती, “और जोर से चोद भाई, आह ह ह ह ह्हीईई”
उस रात का सिलसिला जारी रहा। सोफे से रिया को उठाकर रोहन ने उसे टेबल पर लिटा दिया, पीछे से अपना लंड धीरे से गांड में घुसा दियa। उसकी गांड डगमगा रही थी, चूत बार-बार छूट रही थी, वो आवाज़ निकाल रही थी - “ऊऊऊ ओह्ह्ह, भाई, इतनी तेज़ चोदने से लग रहा है अच्छा, आआआ” रोहन ने कहा, “अभी तेरी चूत का हर एक फोड़ा सूख जाएगा बहन।” रिया चिल्लाई, “सूख जाने दे भाई, मुझे खूब रगड़कर चोद दे, ऐइय्य्य”
अचानक रोहन ने रिया को पलंग पर धकेल दिया। उसकी जांघें कंधे पर टिक गईं, फिर वो तेजी से भीतर घुसने लगा, इतना गहरा कि आँखों से आंसू छलक पड़े। मुंह में जीभ घुसाकर चाटने लगा, होंठों को चूसता रहा। गर्म और तरबतर चुतड़ में लंड आ-जा रहा था, घिसटता हुआ। रिया चीखी, “यार… तेरे लंड ने मेरी चुतड़ फुला दी, ओह्ह्ह्ह आऊ”
रातभर जमकर सेक्स हुआ। रोहन ने रिया को चौपट कर दिया, उसकी गांड में उंगली डालकर मसलने लगा। रिया की आवाजें भारी हो गईं, "अबे भाई इधर भी घुसा दे" – ऐसे बोलते हुए वो बेचैन हो उठी। रोह ने अपना लंड उसकी गांड पर घिसा, फिर झट से चूत में धपा दिया, जोरदार धक्के लगाए। अंत में उसका गाढ़ा पानी रिया की चूत में छलक गया, रिया भी तेजी से ऑर्गेज्म पर पहुंच गई। दोनों खूब पसीने में नहाए, सांसें तेजी से चल रही थीं।
सुबह उठते ही रिया रोहन के सीने पर पड़ी थी, बिल्कुल नंगी। उसकी चूत लाल धब्बों से भरी थी, फूली हुई, पण मुख पर एक खुशी छाई थी। रोहन ने उसकी पिछवाड़ी पर हाथ फेरा, आहट भरी आवाज़ में बोला, "अब तू मेरी है, तेरी चूत सिर्फ मेरे लिए।" रिया ने उसके लंड को घेर लिया, दबाव डाला, "ये मोटा लंड अब मेरा है, बस मेरा।" उन्हें पता था - इसके पीछे गलती छिपी है, फिर भी शरीर ऐसा करने को मजबूर कर रहा था।
अगली सुबह रिया ने एक और ज्यादा टाइट कपड़ा पहना। रोहन का लंड फिर से ऊपर उठ गया। किचन में उसने रिया को पकड़ लिया। स्कर्ट ऊपर खींची, फिर चूत में दो उंगलियाँ घुसा दीं। रिया ने सांस भरकर कहा – "आह्ह भाई, फिर से चोदने वाले हो क्या?" धीमे-धीमे आवाज़ बदल गई। रोहन ने उसे टेबल पर झुका दिया। अब चूत पर जीभ फेरने लगा। अंदर तक जीभ डाली, फिर रस चूसने लगा। रिया की टांगें कांपने लगीं। बस इतना कह पाई – "ओह्ह... भाई... तेरी जीभ तो जादू कर रही है..."
चलता रहा दोनों का ये सिलसिला। एक शाम को रोहन ले गया रिया को छत पर, वहीं बारिश में भीगते हुए चढ़ाई शुरू कर दी। लंबे समय तक रिया की आवाजें घेरे में टकराती रहीं। उसने अपने होठों में लपेट लिया रोहन का लंड, नीचे तक खींचा, गले में डालते हुए धम्म की आवाज के साथ माल निगल लिया। अब ये सब आदत बन चुका था, हर रात ज्यादा तेज होता जा रहा था।
समय था कि माता-पिता आने वाले थे, पर रिया और रोहन का संबंध जारी रहा। दिन के उजाले में भी वे छुपकर मौके बना लेते। एक बार रिया नहा रही थी, तभी रोहन शौचालय में घुस आया, फव्वारे के नीचे उसे धकेलकर चोदने लगा, पानी के साथ झाग भी उठने लगा। रिया के मुँह से निकला - “ओए, तू ही मेरा सब कुछ है, ऐसे ही चलता रहे,”
अंत में जब माता-पिता वापस आ गए, रिया और रोहन ने अपना हरकत छुपा लिया। फिर भी दृष्टि आपस में जुड़ी रहती, जैसे कुछ बचा हो। रात ढलते ही सबके नींद में डूब जाने पर, रोहन धीरे से रिया के कक्ष में घुस जाता, उसकी चूत में झोंक लगाकर तनाव कम करता। इस आग का खत्म होना कहीं दूर था, ऐसा लगता था।
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