उसने बहन को सेक्स के लिए तैयार कर लिया।

Jan 3, 2026 - 16:32
Jan 6, 2026 - 19:47
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उसने बहन को सेक्स के लिए तैयार कर लिया।

अनिल मैं ूँ। एक छोटे से गाँव में पला, वहीं 12वीं खत की। शहर  ओर फार्मेसी की पढ़ाई के लिए कदम बढ़ाया। अब ो दो साल े हो चुके थे। उम्र बीस ाल की है, जिम जाे की आदत लग गई है, े- शर ढलन लगा है। कद भी  नहीं, लगभग ाँ फुट दस इंच  आसप अगर लंड की बात ो तो छह आध इंच लंबा, ो इंच ़ा। इसक  रखना मैंने हमेशा जर समझा, तेल लगा, कभी कु ोलिाँ भी चबा लीं, ताकि कत बन रहे। पर सच ूँ, किसी लड़की के ाथ कभ तज नहीं  ि मुठ मारकर ही भल रहा।

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खत होने वाली थी पढ़ा, तभी मैंने शुरू कर दिया एक दव ी दुकान पर । एक बह िी गाँव े आई एक औरत आई ुका पर ऐसी थी वो, ैसे कह  िकलकर आई ो। ी इतनी  , ो बड़े-बड़े कटे लगे हों। ाथ लकर  ो शायद ि  ँ। े का िा भी था धम, मो और ा। ज्यादा देर तक नहीं देख पाया, पर दिमा ें िपक गया झलक। उन्होंने ाँा एक कंडोम। ढूँे लगा ैं, लेकिन अचनक िमा ें आया – पूछ लूँ ो? किसके लिए ले रही हैं े? डर लगा, कहीं मालिक को बता न दे। फिर भी, मुँ ोल िया ैंे। ोला, "इसक जररत ि ै?"

ो मुस्कुराते हुए ़ा ी, सिर िाया। ि बोलीं, "अभ तक  शादी नहीं हुई,  ही  ्रेी है… ऐस ें भाई से ही  बना लूँगी।" इतना कहकर वो ठह लगी हु चली गईं। मैं जम पर खड़ा, तब िर् एक   दिमाग में घू रह ी।

ाम  ऐस लगा, सु ो मेरी ही बहन है। अब उम उसक अठरह साल की हो चुकी थी। पूरा दिन इस  में ा।  दुकान पर नहीं रहा। िचारों में उलझा रहा। िर कहीं हर निकल पड़ा। खेतों के िे एक पेड़ के नीचे ा बैा। घटि सफ वच उसकी,  ैसी। कपड़ों में  अब निखरन लगी थी। बढ उम के साथ शर बदल रहा था। कमर भी चौड़ी  गई थी। एक ि गलती से तौलिया उसका खुल गया। नंगी वचा देखकर शरीर  गया।

मन में तय कर लिया था, सुहानी के  ही  करना है, भले ही   ो जाए। ीरे- िों ें तरीके ूँढन लगा। घर  समय रास्ते में एक ुका पर ुका, कु ऐसी गोलियाँ खरीं  मन   समझत ीं। दर पहुँचा तो रस ें सुहानी आट ूँ रही थी। माँ कमर ें झपक लगा रही थीं, पिता ो शहर में ही रहते थे। इस , उस  िना रह नहीं ाया। वह रोटी बेल रही थी, हर बार जब हाथ  हटता, िछवाड़े की रे झलक जाी। सलव पर उभर इतना सा ा, मा   े रहा हो। शरीर तुरंत तन गया।

ि अचनक सुहानी  नज मे ऊपर पड़ी। उसन ा, "अरे, यहाँ क्या ो रहा है?" मैं हं पड़ा, ि ा, "तुझे  रहा हूँ, तेरे शर ो देखकर ा लंड ऊपर उठ गया।"  झट से ी, "अपनी ी बहन को ऐसे देखता है? े शर्म नहीं आई?" दरअसल, हम आपस ें ऐसी ही ातें करते रहते थे। मगर आज बात थो़ी अलग ी। मेरे हन ें कुछ और चल रहा था।

 ने मौका पकड ी उसकी  पर सरक गया। सुहानी झटक   हटी, आव़ काँ रह ी - “अचनक क्यों ़ा े? ऐसे   लग।” मैंने  लहजे में कहा, “इच    ै, सुहानी। बस कहो,  े बदले क्या ोगी?” उसक ों में लाि ा गई। चुनरी   ी से िपक ी, धमक भर वर ें बोली - “घटिा, इतन शर्मी से रता है?”

बिना  कह ैं वहाँ  हट गया, ि कमरे में जाकर टीवी  ओर देखने लगा।  देर े बाद सुहानी जन लेकर आई। ी रखते समय वो आगे झुकी, चुनरी  े नीचे सरक गई। उसके स्तन सलवार के ऊपर  गए थे। इतने बड़े, गोरे स्तन देखकर मेरे मुँह में   गई एकदम से उसने हाथ से ी ढक ी,  में ें िकर पस चली गई।

कुछ दिनों तक मैं हर  उससे पूछता रहा - "सुहानी, अब  ै चुदाई के लिए?" ुरू ें वो झल्ला ी, ि धीरे-धीरे सि ऊबकर नक ेने लगी। एक  मैंने उसकी ब्रा देख ली, जो छत पर लटकी थी। उठाकर देखा - 34D ा साइज़ था। ी उसके स्तन वाकई ी थे। पास में उसकी पैंटी पड़ी थी, जिसमें चूत  नमी आ ी थी। मैंने सूँघ िा, और मेरा लंड  हो गया।

एक दिन ि मिली। सुहानी कपड़े धो रही थी, पीछे से उसकी गांड पकड़ ली ैंे। झटका देकर ो मुझे हटा गई, ि घर  तर चल गई गुस्से में। तभ िमा ें एक नया ्या आया। खरी सेक्स की गोलियाँ, िर पकर ोज ़ी-़ी ा सुहानी के जन में डालने लगा। ंद िनों में बदल नजर आने लगा। सुहानी का व्यवह  पड लगा। अब ो मेरे छेड़ने पर इतन ि नहीं ी थी। हौसल   गया मेा। अब हर मौके पर उसकी गांड या बूब्स दबा देता ैं।

एक दिन वो सोफे पर लेटी ीवी देख रही थी। मम्मी सामने बैठी थीं, ालाँकि उनका ध्यान पूरा टीवी ें था। शायद नींद भी आ रही थी उनें। मैंने आव  कर दी, ि सुहानी के पास कर बैठ गया। धीरे से उसकी चूत पर हाथ रख दिया ैंे। वो डर गई, फुसफुसा - “अरे बीसी, मम्मी सामने हैं, इतना बेशर्म?” मैंने कहा, “चुप रह, मज़ा आएगा।” सलवार के ऊपर से  उसक  ो रगड़ना शुरू कर दिया। वो रोकने लगी, पर मैंने एक हाथ से उसके दोनों हाथ दबा लिए। उस ि मैंने उसके खाने में दो सेक्स गोलियाँ और एक नींद की गोली मिला दी थी, तभ ो वो इतनी कमज़ोर पड़ गई थी।

पाँच मिनट तक उसकी चूत रगड़ी ो सलवार तर हो गई। ि मैंने नाड़ा खोलकर कपड़े नीचे ीं ि। पैंटी के ऊपर से ही  चला दी। सुहानी सिसकी, “आह… भाई, बस कर ऐस नहीं करन ाहि…” मगर मेरा लंड अब  नहीं  रहा था। मैंने झट े मम्मी की ओर नजर ी – वो रदरी सांसें े हु झपक लग ुकी ीं। ि सलवार और पैंटी को घटन  बह ें और नीचे धक दिया। उसकी चूत मेरे सामने  गई, ुंधले बालों से ी। मैंने उंगलियों से बाल सरकाए, और जीभ  उसक नम   िा।

सुहानी  ोंों से एक िसक िकली - “आह… भाई… बस कर… म्म्म…” ों   बहने लगे, पर मुझे ऐस लग रहा था ैसे  अच  रह ै। इतन ें उसकी चूत से पन   गया। लगभग दस िनट  मम्मी े हिलन  आव आई। तु मैंने उस धक्का देकर  कर िया। वो झट से सलवार  करके बाथरूम  ओर भाग खड़ी । मम्मी उठीं, टीवी बंद िा, और पस िस्तर ें  गईं।

मैं और ठहर नहीं ा। मौका िलत ी सुहानी के कमरे  ओर बढ़ गया। उसे पकड़ लिया, दरवाज़ा बंद िा, ि लाइट  कर दी। सुहानी बोली, "अब ू क्या हता है, भाई? और क्या करेगा?" मैंने जव दिा, "सुहानी, अब रुकना नहीं ै। तुझे भी मज़ा आएगा।" उसे ज़ो े पकड़ा, सलवार नी ीं ी। बेड पर लिटाया, टाँगें फैला ीं। उसकी चूत मेरे सामने थी। अपना लंड वहाँ रखा, एक झटके में दर  िा। खून की ार निकल पड़ी। सुहानी चि, "आह… भाई… बस कर बह दर्द है…" पर मैं नहीं रुका। और ेज़ी से चोदन लगा। उसकी चीखें  पडकर सिसकियाँ बन गईं। मैंने जमकर चोदा, अपना मज़ा लिा।

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