लालच में पड़कर उसने मौसी की बेटी संग हरकत की।

Jan 3, 2026 - 15:36
Jan 6, 2026 - 19:50
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लालच में पड़कर उसने मौसी की बेटी संग हरकत की।

हाय दोस्तों, मैं पहली बार अपनी रियल स्टोरी लिख रहा हूँ। मेरा नाम वरुण है और मैं अभी 20 साल का हूँ। मैं एक साधारण सा लड़का हूँ, ठीक-ठाक कद-काठी, गेहुंआ रंग, और चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान। अब स्टोरी पर आता हूँ। कई साल बाद मैं अपनी मौसी के घर गया था। उस वक्त मेरी 12वीं के एग्जाम की छुट्टियाँ थीं और मैं 18 साल का था। मौसी का घर दिल्ली में है, एक छोटा सा लेकिन प्यारा सा घर, जहाँ गर्मियों में हमेशा हल्की सी ठंडक रहती थी। मौसी की तीन बेटियाँ हैं, और तीनों मुझसे उम्र में काफी बड़ी हैं। सबसे बड़ी दीदी की शादी हो चुकी थी, बीच वाली, जिसके साथ ये सब हुआ, उसका नाम ममता है, और सबसे छोटी दीदी कॉलेज में थी। ममता उस वक्त 24-25 साल की थी, गोरी, लंबी, और उसकी फिगर ऐसी कि कोई भी देखकर पागल हो जाए। उसकी चूचियाँ भरी-भरी, कमर पतली, और गाँड ऐसी कि पैंट में भी उभरकर दिखती थी।

बचपन में जब मैं सा-आठ ाल का था, तो ीनों दीदियों के साथ ों खेलत रहता। उस उम में कु पत नहीं  ा, ि ी याद है कि मैं उनके साथ लिपलॉक करता था। मौसी बोलतीं - “इतन े बच्चे के साथ ऐसा क्ों करत ो?” पर दीदियाँ हँ देतीं और  खत। उस वक्त कुछ समझ नहीं आता था, ि़ मज़ा आता था।  साल बाद जब मौसी के घर गया, तो  पल िर याद आए। टॉयलेट में बैठा, हा चल ुए सोचता - अगर उस वक्त एहस ोता, तो तीनों के साथ ेक् करता। अब उम बढ़ चुकी थी, और दिमाग में बस वह ें चल रही थीं।

पहली रात की बात है। मैं बिस्तर पर सो रहा था, और ममता दीदी मेरे पास ही लेटी थीं। रात का सन्नाटा था, सिर्फ़ बाहर से कुत्तों की भौंकने की आवाज़ आ रही थी। अचानक मुझे लगा कि ममता दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। मैं हैरान था, लेकिन सोने की एक्टिंग करता रहा। मुझे लगा शायद वो सो रही हैं और गलती से मेरा हाथ पकड़ लिया। लेकिन फिर दीदी ने मेरा हाथ खींचकर अपनी चूचियों पर रख दिया। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उन्होंने मेरे हाथ को अपनी चूचियों पर ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू किया। मैं हैरान था, लेकिन मज़ा भी आ रहा था। ये मेरा पहला ऐसा अनुभव था। मैं चुपचाप एक्टिंग करता रहा, लेकिन ममता दीदी को पता था कि मैं जाग रहा हूँ।

गर्मी बढ़ गई। उनके हा मेरे हाथ ो सलवार के तर ीं ले गए, उंगलियाँ उनक नम जगह पर िसने लगीं। ी इतना था कि उंगलियाँ िटक रही थीं। एक उंगली े से दर गई, तो ओष्… जै आव आई ांें ी हो गई थीं। मैं अभी भी ी नीं ें था, पर लं ने पैंट में ऊपर उठन  कर िा था। ़ी देर बाद ो मेरा हाथ ींचकर हर ले आईं, चुपक े लेट गईं।  समझ नहीं आया, पर आँ लग गई। दोनों सो गए।

अगली बह मैं ममता दीदी  तरफ  नहीं पाा। शर्म  रही थी, घबरहट भी कि कहीं वो  किसी को न बता दें। ि ी दीदी ीक- थीं, ो कुछ घटा ही न हो। मन में झर ी - क् उनों नबझकर किया था या गलती हो गई? दिनभर यह  चक्र में मती रही। रात ें जब घर ें सन  गया, दीदी फिर मेरे पास लेट गईं। मैंने सोचा, आज फिर कुछ होगा। पहले से हाथ उनके बिस्तर के िना रख िा। पर इस बार उन्हों उसे नहीं  े-े मुझे ुकारने लगीं, "वरुण... वरुण..." मैं बस ें  कि ेटा रहा,  ीं  

एकदम े दीदी ा गुस्सा  पड़ा, मेरा हाथ झटके से ़ दिया। मैं समझ ुका ा, उनक ि खर है। पर मुझमें अब  उतकत  चुकी थी। डरते हु मैंे उनके गाल पर हाथ रख िा। आँखें बंद थीं, लेकिन हरा गुस्से  तन  ीमे कदम बढ़ा, मैंने उनके ुँह पर अपना ुँह रख लिा।  ें को हलचल नहीं, फिर आहिा-आहिा वो भी जव े लगीं। जीभें टकरां, मैंे उनकी जीभ को चूस िा। मेरा लंड अब पूरी तरह ऊपर उठ चुका था।

उसन कहा, "कल तो तू हर तरफ  रहा था, आज  क्यों?" मैं िझकते हुए ा, "ूँ लगा ि ें सिर्फ मेरे हाथ  जररत ै, इसलिए मैं सो बन रहा था।" वो ठहे पड़ी, "पता था तू ें  ि जाग रहा था, ों ़।"  ें उनोंने मेरे ोंों पर लगार किस ि। मैंने उनके भारी तनों को ीरे  दबाया। उनकी ी इतनी कोमल थी ि हथी में बस नहीं ा रही थी। मैंने सलवार के अंदर हाथ ैलाा, उंगली उनक ि ें डाल दी। वो कराह उठीं, "ओह... वरुण... ऐस  चलत रख..." पर उनोंने मेरे लिं   तक नहीं।

मेे हा ां रह  जब मैंे अपना 6 इंच का लंड उनकी ओर बढ़ाया। वो ुस्, ि मेरे ोंों पर झट से किस कर िा। ीरे े बोलीं, “आज बस इतना, ाकी कभी और करेंगे।” ऐसे ही दोनों िस्तर ें  गए। अगले  दिन ी यही घटन ोहरा हर रात एक-सरे के कर आन ा सिलसि चला। मैं उनके तन ूता, चूत में उंगली लता, लेकिन वो मेरे लंड  ूने से बचती रहीं। कभी लगा कि डर रही हैं, कभ लगा शर्म  रही है।

Gifs of couple having sex

एक दिन हम दोनों घर में अकेले थे। तब दिन का समय था, मौसी बाहर गई थीं। पल पर लेटी रहीं ममत ी, मैं  े उनके पास ा बैा। उनक ुँ  िकला - “करेगा?” मैंने ों किया, “ करना?” हँ  ो, ि बोलीं, “इतन ोला बन मत, आग बढ़ो।” कमर  शनी बंद , और मुझे खींचकर लि िया अपन ऊपर। मैंे उनके तन दबा, वो मेरे लिं को पैंट के ऊपर  से । मैंने कपड़े े कि, ो सलवार के ऊपर से  िं ो अपनी ोनि पर िसने लगी। मैंने कहा, “ूँ नहीं ा, सलवार उतार ो।” डर गई ो, बोली, “नहीं, इतना नहीं करूँी।”

मैंने पूा, "फ़ोन में पोर्न देखन ोगी?" वो िझकी, पर आखिरकार हामी कह ी। एक गर वीडियो  कर दिया। उसमें लड़का लड़की के तन चूस रहा था। ममता दीदी बोलीं, "अबे, ऐसे ही करो ो।" मैंने उनकी ब्रा  ी, गुलाबी निप्पल्स को अपने मुँह में ाल लिया।  कठ हो चुके थे, वो सां भर-भरकर ी, "उफ़... वरुण... और ज़ोर से ..." मैं उनके तन चूस रहा था, वो मेरे लिं को   ू रही थीं।

वीडियो में अब लड़की लड़के का लंड चूस रही थी। मैंने कहा, “तुम भी करो ना।” वो बोलीं, “ये अच्छा नहीं लगता, मैं नहीं करूँगी।” मैंने ज़िद की, “तुमने कहा तो मैंने तुम्हारे चूचे चूसे ना, अब तुम भी करो।” वो थोड़ा गुस्सा हुईं, लेकिन फिर बोलीं, “ठीक है, बस टॉप को किस करूँगी, ज्यादा अंदर नहीं लूँगी।” उन्होंने मेरे लंड के टॉप को अपनी जीभ से छुआ, और फिर धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह में ले लिया। वो चूस रही थीं, और मैं सातवें आसमान पर था। मैंने कहा, “तुम तो मना कर रही थीं।” वो बोलीं, “मस्त है यार, करने दे।” मैं झड़ने वाला था, और मैंने कहा, “रुक, मैं झड़ने वाला हूँ।” वो बोलीं, “मेरे मुँह में झड़ जा।” मैं उनके मुँह में झड़ गया, और वो सारा माल पी गईं।

फिर मैंने उसकी चूत में उंगली , ि चाटने लगा। उसक ्राइव  का स्वाद नमकीन ा, गर्म ी था। वो े-े सिसक रही थी, "आह्ह... वरुण... ऐस   रख..." हम दोनों  शर थरथरा चुका था। अचनक बाहर से मौसी जी के आने की आवाज़ आई। हमने  कपड़े पहने, जलदब़ी ें। उस रात मैंने मौसी जी से कहा - “इधर मच्छर बहुत हैं, मैं कहीं और सोऊँगा।” ममता दीदी ने भी कहा, “हाँ माँ, मैं भी उस कमर ें रहूँगी।” मौसी जी ने  कहा, “ठीक है, दोनों आर से ो जा।” हम दोनों दर ही दर खुश थे, बह

ेरा ाते ही हम दूसरे कमरे में सरक गए। सभ ी नींद जमन पर, ैं आसप ांका - कहीं जागता तो नहीं। ीरे े ममता दीदी के पास  गया, उनके होंों पर मुं लग िा। उनके कपड़े  कर दिए, अपने भी ोल े।    बल थीं, मैंे उनके तन चूसन ू कि। फिर पीछे  िसटकर  गया, टाँगें ऊपर उठाकर अपन  उनकी चूत में सने लगा। वो ीं, “ ा वरुण, ऐस नहीं हो ि।” मैं िठक गया, पच उनसे सटकर ले गया। उन्हें लगा, मैं ी हो गया ूँ।

फिर दीदी ने मेरा लंड अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया और बोलीं, “कर ले।” मैंने कहा, “पहले मेरा लंड चूसो।” वो मेरा लंड चूसने लगीं, और मैं उनकी टाँगें उठाकर उनकी चूत में लंड डालने लगा। उनका सील टूट गया, और उन्हें बहुत दर्द हुआ। मैं रुक गया। मेरा लंड उनकी चूत में था। कुछ देर बाद उन्हें मज़ा आने लगा, और वो बोलीं, “कर ना, अच्छा लग रहा है।” मैंने धक्के मारना शुरू किया, और वो चिल्ला रही थीं, “आह्ह… और तेज़… चोद मुझे…” मैं उनके ऊपर आ गया और उनकी चूत में लंड डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। मैं उनके चूचों को दबा रहा था, और वो सिसक रही थीं, “आह्ह… वरुण… और ज़ोर से…”

हम दोनों िर पड़े, ि मैं सब  उसकी चूत में उड़ेल दिया। थककर  में नींद  गई बह उठ ो चादर पर खून के ि िे। मेरा लंड ूरी ात उसक दर िा रहा था। मैंने ममता दीदी को जगाया, ा - "चादर पर खून है"।   उठी, चादर धो ी, ि कपड़े पहनकर काम ें  गईं। बोलीं, "   है किसी  पता नहीं चला।" मैं वहाँ एक महीने तक ठहरा, हर रोज़ उसकी चूत में  गया। अब मैं मेरठ में रहता हूँ, जब भी दिल्ली जाता हूँ, मौका नहीं मिलता उसे चोदने का।

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