बचपन में छोटी बहन से हरकत की थी

Jan 3, 2026 - 11:07
Jan 6, 2026 - 19:25
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बचपन में छोटी बहन से हरकत की थी

ये बात आज से चार साल पुरानी है, जब मैं उन्नीस साल का था, कॉलेज में फर्स्ट ईयर में पढ़ रहा था, और मेरी छोटी बहन रिया, जो अठारह की थी, बारहवीं क्लास में थी। हमारा घर दिल्ली के एक पॉश इलाके में था, दो मंजिला, ऊपर मेरे और रिया के अलग-अलग कमरे, नीचे मम्मी-पापा का बेडरूम। पापा का ट्रांसपोर्ट बिजनेस था, जिसके चलते वो रात को देर से, दस-ग्यारह बजे घर लौटते, थके-हारे सो जाते। मम्मी, जो चालीस के आसपास थीं, घर संभालती थीं, सुबह किचन में, दोपहर को सफाई में, और शाम को टीवी पर सीरियल देखते हुए टाइम पास करती थीं। वो सख्त नहीं थीं, लेकिन अपने रूटीन में व्यस्त रहती थीं। रिया पढ़ाकू टाइप थी, स्कूल से लौटते ही किताबें खोल लेती, रात तक पढ़ाई में डूबी रहती। वो देखने में कमाल की थी, फिगर ३४-२६-३४, हल्का सांवला रंग, लंबे काले बाल, और ऐसी हंसी जो किसी का भी दिल पिघला दे। मैंने उसे कभी गलत नजर से नहीं देखा था, वो मेरी बहन थी, बस। मैं खुद पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों के साथ घूमता, कंप्यूटर पर गेम खेलता, या टाइम पास करता।

एक दोपहर, घर में सन्नाटा था, मम्मी नीचे सो रही थीं। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर था, हेडफोन लगाए एक ब्लू फिल्म देख रहा था। स्क्रीन पर हॉट सीन चल रहा था, लड़की के मोअन की आवाजें, फच-फच की साउंड, मैं पूरी तरह डूबा हुआ था। तभी अचानक दरवाजा खुला, रिया अंदर आ गई, स्कूल यूनिफॉर्म में, बैग कंधे पर। मैंने झट से स्क्रीन बंद की, लेकिन वो सब देख चुकी थी। उसकी आंखों में हल्का सा शॉक, पर वो चुप रही। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई, पसीना छूटने लगा। वो मेरे पास आई, किताब खोली, और बोली- भईया, ये सवाल समझ नहीं आ रहा, हेल्प करो। उसकी आवाज में कुछ अजीब था, पर वो नॉर्मल दिखने की कोशिश कर रही थी।



मैंने कांपते हाथों से किताब ली, बोला- ठीक है, दिखा। सवाल सॉल्व करते वक्त मेरी नजरें उससे नहीं मिल रही थीं, शर्मिंदगी सी महसूस हो रही थी। सवाल हल करके मैंने किताब लौटाई। वो जाने लगी, तो मैंने कहा- रिया, जो तूने देखा, किसी को मत बताना, प्लीज। वो रुकी, हल्का सा मुस्कुराई, और बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताऊंगी, पर ये सब ठीक नहीं है, ऐसी चीजें मत देखा करो। मैंने कहा- ठीक है, अब नहीं देखूंगा। वो चली गई, पर उस पल मेरे दिमाग में कुछ बदल गया। रात को बेड पर लेटे-लेटे उसका चेहरा, उसका फिगर, उसकी स्कर्ट से दिखती टांगें दिमाग में घूमने लगीं। पहली बार उसे बहन की जगह किसी हॉट लड़की की तरह देखने लगा।

दो दिन बाद ा दोपहर का समय था। ऊपर कमरे में ैं किताब खोलकर बैठा था, पर पढ़मन नहीं कर रहा था। मम गई ीं। तभी अचनक रिया गई, हाथ में मैथ्स की किताब लिउसनकहा - भईया, इस सवाल ो समझा दो, समझ नहीं आ रहा। मैंने जगह कहा - बैठ जा। वो मेरे बेड पर टाइट जींस और टी-शर्ट में गई। उसके परफ्यूम की खुशबू हवा में ैल रही थी। टी-शर्ट पर ों झलक साफ दिख रही थी। मैंे सवाल पढिा, पर ध्यान उसकी सांसों पर ि गया, जो मेरे कंधे के पास ी महसूस हो रही थीं।

थरथरहट महस होने लगी, ि में झनझनाहट-ी। उसकुंह िकला - ें कुछ पर कर रहा है? मौन ा - बस आखें लग रही हैं, नहीं जम रहा। वो बोली - मेी भी आंें हो गई ैं, थोड़ी ्रेस ऊपर से दबाव महस रहा। े वो उठी, मैंने िया - इधर ी सो जा , आराम कर ो। एक पल को िठकी, फिर मा गई - कहो। बगल में लेट गई, मैं भी िल ो गया, पर घरहट ैसे िसी को? हवा में उसकांों का दन रहा था।

थोड़ी देर े बाद, मैंने हौे अपना हाथ उसके तन पर रख िा, ानो ींद में गलती गई ो। वो नहीं हिली, ि ी उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने े से उसके बीच में ा, शरीर गया। वो चुप रही, कोई आव नहीं आई। मेरा डर कम हु, मैंने तन दबा शुरू किा, निप्पल पर उंगली । अचानक ो बोली - भईया, ऐसा क्यों कर रहे हो? आवाज में डर ा, पर कहीं झलक भी आई। मैंने कहा - रिया, तुमसे प्यार है, तुम आती हो ो मैं भल नहीं पाता।

वो बोली- भईया, ये गलत है, हम भाई-बहन हैं, अगर मम्मी-पापा को पता चला तो? मैंने कहा- किसी को कुछ नहीं पता चलेगा, और भाई-बहन हैं, पर लड़का-लड़की भी तो हैं, ये सब तो चलता है। एक दिन तुझे किसी से चुदना ही है, तो अपने भाई से क्यों नहीं? वो चुप रही, जैसे सोच रही हो। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला, पैंटी में हाथ डाला, चूत गीली थी। उंगली से सहलाया, वो सिसकारी- आह… भईया… मैंने कहा- रिया, मेरा साथ दे, बहुत मजा आएगा, घर की बात घर में रहेगी। वो करवट लेकर मेरे सामने आई, बोली- ठीक है, भईया, पर किसी को पता नहीं चलना चाहिए। मैंने कहा- तू फिकर मत कर, मेरा वादा है।

उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, हम किस करने लगे, जीभ एक-दूसरे से उलझी, सलाइवा मिक्स हो रहा था। दस मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे, मैंने उसकी जीभ को हल्के से काटा, वो सिसकारी- उह… भईया… मैंने उसका कुरता ऊपर किया, ब्रा खोली। चूचे बाहर आए, गोल, टाइट, निप्पल ब्राउन और सख्त। मैंने एक चूचा मुंह में लिया, जीभ से निप्पल को घुमाया, चूसा, दूसरा हाथ से मसला। वो मोअन करने लगी- आह… भईया… और करो… उसने मेरी पैंट का बटन खोला, लंड बाहर निकाला, सात इंच लंबा, तीन इंच मोटा। वो उसे सहलाने लगी, हल्के से दबाया। मुझे लगा जैसे करंट दौड़ गया, स्वर्ग का मजा आ रहा था।

उसकी जींस पैंटी े नीचे िसकी, इधर मेरी टी-शर्ट उसकों िसल गई। अब खड़े े एक-दूसरे के सामने, ि नंे। उसे कसकर गललगिा, आव़ में बततन - रिया, तेरे शर की गर्मजी महसूस करना चाहता हूं, तेतर जाना चाहता हूं। वो बोली, भईया, मुे भी यही चाहि, तुम्हारा प्यार चाहिए। ऐसकहने बा उसकखर िस् े मुकर िा।

मैंने उसकी गर्दन पर जीभ फेरी, धीरे-धीरे नीचे आया, पेट पर चूमा, नाभि में जीभ डाली। वो कसमसाई- उह… भईया… क्या कर रहे हो… मैं उसकी टांगों के बीच पहुंचा, चूत गुलाबी, हल्के बाल, गीली और गर्म। मैंने जीभ लगाई, क्लिट को चूसा, वो उछली- आह्ह्ह… भईया… ये तो… मर जाऊंगी! मैंने जीभ अंदर डाली, चूत के होंठ चाटे, वो सिसकारियां ले रही थी- आह… उह… भईया… और… वो बोली- भईया, मुझे भी तेरा लंड चूसना है। हम ६९ की पोजीशन में आए, मैं ऊपर, वो नीचे। मैं उसकी चूत चूस रहा था, उंगली डालकर अंदर-बाहर कर रहा था, वो मेरा लंड मुंह में ले रही थी, जीभ से टिप को चाट रही थी, गले तक ले रही थी। दस मिनट तक हम एक-दूसरे को चूसते रहे, वो झड़ी- आह्ह्ह… भईया… मैं… निकल रहा… मैं भी उसके मुंह में झड़ गया, हमारी सांसें तेज, बदन पसीने से तर।

थोड़ी देर बाद फिर गर्मी चढ़ी। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली, क्लिट को रगड़ा। वो बोली- भईया, अब बर्दाश्त नहीं होता, लंड डालो, चोदो मुझे। मैं उसकी टांगों के बीच आया, लंड पर थूक लगाया, चूत पर मालिश की। लंड सेट किया, धीरे दबाया, चूत टाइट थी, कुंवारी। हल्का धक्का मारा, सुपारा अंदर गया, वो चीखी- आह्ह्ह… भईया… दर्द… मैं रुका, उसके चूचे चूसे, निप्पल काटे। वो बोली- धीरे… फिर मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर डाला, बीच-बीच में हल्के धक्के मारे। वो सिसकारी- उह… आह… भईया… धीरे… मैंने उसके होंठों पर किस की, चीख दबाई। पूरा लंड अंदर, चूत ने जकड़ लिया। मैंने धीरे-धीरे पेलना शुरू किया, फच-फच की आवाज कमरे में गूंज रही थी। वो दर्द से मजा में आई, गांड उठाकर साथ देने लगी- भईया… और जोर से… चोदो… मैं बोला- देख, रिया, भाई से चुदने में कितना मजा है। वो बोली- हां, भईया, बहुत मजा… ये तो हर किसी को करना चाहिए… रिश्ते क्या, मर्द-औरत का प्यार ही सब कुछ है।

हम बातें करते, चुदाई चलती रही। मैंने पोजीशन बदली, उसे घोड़ी बनाया, पीछे से लंड डाला, चूत और गहरी लगी। वो मोअन- आह… उह… भईया… और गहरे… मैं धक्के मारता, उसके चूतड़ हिल रहे थे। फच-फच की साउंड, पसीने की गंध, सब मिलकर जन्नत का अहसास। वो एक बार झड़ी- आह्ह्ह… भईया… निकल गया… मैं भी चरम पर था, तेज धक्के मारे, अंदर झड़ गया, हमारा पानी मिक्स। एक-दूसरे को जकड़कर लेट गए, सांसें तेज, बदन गर्म। दस मिनट बाद बाथरूम गए, नंगे। एक-दूसरे को साफ किया, पानी की छींटों के बीच हंसी-मजाक। उसके चूतड़ दिखे, गोल, गोरे, चिकने। मेरा लंड फिर खड़ा। उसे उठाकर बेड पर लाया। वो बोली- भईया, अब क्या? मैंने कहा- रिया, तेरी गांड मारनी है। वो डर गई- नहीं, भईया, बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- आराम से करूंगा, दर्द नहीं होने दूंगा। वो बोली- अभी नहीं, मम्मी उठ जाएंगी, अगली बार। मैं मान गया, उसके होंठ चूसे, चूचे दबाए। हमने कपड़े पहने, रिया चाय बनाने किचन चली गई। हमने साथ चाय पी, वो अपने कमरे में चली गई।

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