मौसी के साथ बारिश वाली रात की चुदाई

Jan 6, 2026 - 12:11
Jan 6, 2026 - 13:20
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मौसी के साथ बारिश वाली रात की चुदाई

बारिश की एक पुरानी रात में मौसी के साथ

मौसी की चुदाई सेक्स कहानी – आंटी सेक्स कहानी:
राज हूँ मैं, अहमदाबाद, गुजरात में रहता हूँ। परिवार में माँ-बाप के अलावा एक बहन थी, उसकी शादी हो चुकी है। वो अब ससुराल चली गई है, घर में बस तीन लोग रहते हैं।

एक दोस्त की तरह, मैं अपने पिता के काम में साथ देता हूँ। वैसे, मेरी उम्र इबारत 27 साल की है। छोटा था तब से ही मुझे ये चीज आकर्षित करती थी।

शाम को जब घर पहुँचा, तो मम्मी ने बताया - रचना मौसी आई हुई हैं। वो लगभग चालीस दिन तक यहीं ठहरेंगी। मैंने सिर्फ हैलो कहा। खाने के वक्त सब एक साथ बैठ गए।

बातचीत के बाद हम धीरे-धीरे करीब आए, उनकी आदत थी कि रातभर टीवी पर चैनल घुमाती रहतीं व मेरे साथ बातें करतीं, इसी तरह लगभग एक तिहाई महीना बीत गया।

थोड़ी साँवली त्वचा के बावजूद मौसी का शरीर काफी ध्यान खींचता था। उनकी ऊँचाई पाँच फुट तीन इंच के आसपास थी। एक ऐसी चुस्त काया जो देखने में भी अजीब लगे। छोटे से बोब्स थे, हालाँकि कहीं न कहीं बहुत मनमोहक। लगभग इकतीस साल की उम्र में वो अभी भी अविवाहित थीं।

तुम्हारे हाथ में यह कहानी है, जो मौसी के साथ घटित हुई। यह पल एक ऐसी जगह से आया है जहाँ कोई शब्द छिपा नहीं होता। पढ़ना शुरू कर दिया है तुमने, बस इतना पता होना चाहिए।



Rain bathroom - MyTeenWebcam

बारिश के दिन थे। एक शाम मैं जल्दी लौट आया। मम्मी ने बताया - पापा के साथ वो किसी ज़रूरत के काम से दोस्त के घर जा रही हैं, रात गए तक वापस आएंगी। अगर रचना को खरीदारी करनी है, तो वो मौसी के साथ निकल जाए।

अच्छा, मम्मी, मैंने कहा। बाइक पर सवार होकर मौसी के साथ चल पड़े हम दुकानों की ओर। खरीदारी में उन्हें कुछ देर लग गई। फिर आखिरकार जब तैयार हुईं, वापसी का रास्ता अपनाया हमने।

बारिश ने रस्ता बदल दिया, कहीं छुपने को मिला नहीं, आगे बढ़ना ही पड़ा, फिर कुछ समय में दोनों गीले से भीग उठे।

हवा तेज थी, बारिश के साथ। हम दोनों काँप उठे, इतनी ठण्ड लग रही थी। मौसी की मुट्ठी मेरे कंधे पर धीमे-धीमे सख्त हो गई।

बाइक को किनारे खड़ा कर मैंने पूछा - मौसी, सब ठीक है न? उनकी आवाज़ काँप रही थी, बोलीं - ठंड लग रही है, पानी-हवा दोनों जमते जा रहे हैं।

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थोड़ी देर में पहुंच जाएंगे, मैंने कहा। फिर बाइक चलानी शुरू कर दी। बारिश हवा के साथ और भी तेज हो गई। मौसी के हाथ में सामान था, दूसरा हाथ मेरे कंधे पर टिका हुआ।

थर-थर कांप रही थी वो, सिहरन से जमी हुई। मैंने कहा, "ठीक से पकड़कर बैठो", फिर झट से मेरी कमर पर हाथ डाल दिया। चिपक गई मेरे साथ, इतनी नजदीक कि उनके बोब्स पीठ से टच कर रहे थे।

उसके बोब्स की नरमाहट महसूस होती रही, जैसे गर्माहट चिपक गई हो। पूरे शरीर में एक सिकुड़न-सी फैल गई। लंड सीधा होने लगा, धीरे-धीरे, बिना किसी जल्दबाजी के।

थोड़ी देर में वापस आ गए थे हम, पूरे कपड़े नम हो चुके थे। अंदर कदम रखते ही जला दिया बल्ब, फिर मौसी को देखकर सांस अटक गई।

उनकी पीली ड्रेस पानी से भीग गई थी, अब उसमें नीली ब्रा और पैंटी साफ झलक रही थी। मैं देखता ही रह गया, मौसी को एहसास हो गया। उनकी नज़र मेरे ऊपर टिक गई, वो जान गईं कि मेरा लंड खड़ा है। वो शर्म से लाल हो उठीं, मम्मी के कमरे की ओर चली गईं।

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शायद मौसी नाराज हो जाएँ, ऐसा लगा मुझे। पर खुद को संभाल नहीं पा रहा था। घर में मम्मी-पापा कहीं बाहर थे। अब रात के लगभग नौ बजकर तीस हो चुके थे। और इधर बाहर भारी बारिश हो रही थी।

अचानक मुझे लगा कि कपड़े बदलने का समय हो गया। कमरे में जाकर ऐसा किया। फिर सोफे पर ढीला पड़ा, आंखें टीवी से चिपक गईं। तभी धीमे कदमों की आहट हुई। मौसी अंदर आईं। उन पर एक भूरी ड्रेस थी, तंग। घुंघराले बाल झूल रहे थे। शरीर के हर हिलता हुआ हिस्सा साफ दिख रहा था।

आखिर मैं उन्हीं को ताकता रहा, सिर में अजीब खयाल घूम रहे थे। मौसी बोली, ध्यान कहीं और लगा दे, अब तो देर हो चुकी है, खाना बनाती हूँ मैं।

बस मज़े करने थे हमें, क्योंकि मम्मी ने पहले ही सब कुछ तैयार कर रखा था। मैंने कहा अब कुछ और चाहिए नहीं। उसने मेरी बात सुनी, फिर शरारत भरी मुस्कान आई आँखों में।

खाने के बाद हम पट्टीदार सोफे पर बैठ गए। टीवी की तरफ़ झुके रहे, मगर नज़रें ज़मीन को चिरती रहीं। दिमाग़ में उलझन थी, बातें धुंधली-सी। मौसी के चेहरे पर मुस्कान थी, पर आंखों में लावा उबल रहा था।

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थोड़ी देर के बाद मैंने घोषणा की कि साढ़े दस बज चुके हैं, मुझे सो जाना है। इधर मौसी ने एकदम से कह दिया - अभी मम्मी-पापा आए नहीं, मेरे पास बैठ जाओ। उन्हें अकेले रहने में डर लग रहा था, इसलिए बातचीत चलती रहे, ऐसा वो चाहती थी।

ठीक है कहकर मैं पास बैठ गया, फिर भी अंदर कुछ उबल रहा था। मेरा लंड सख्त खड़ा था, धक्के देता रहा, चुभने वाला दर्द नहीं जा रहा था।

वो मेरी ओर अटक-अटक के देख रही थीं, धीमे से बोला - तुम इतनी आकर्षक हो कि पलक नहीं झपकती। सिर नीचे कर लिया, चुपचाप मुस्कुरा दीं। उसी पल समझ गया, ज़रूरत नहीं थी कुछ और कहने की।

उसके सामने आते ही मैंने उन्हें तेज़ी से छाती से लगा लिया, फिर मुँह पर चुम्मा दे दिया। मौसी धकेलने लगीं, पर पलट नहीं पाईं।

मैंने तेजी से पकड़ लिया, फिर उसके बोब्स को होंठों से चूमते हुए दबाया, सहलाया। थोड़ी देर में वो खुद को रोकना भूल गई। आगे झटपट गर्माहट छा गई। अब वो इसे महसूस कर रही थी।

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मगर वो बार-बार कह रही थीं, ऐसा मत करो, ये पाप है, बस अब छोड़ दो। पर मैं तो एकदम से बहका हुआ था, कुछ समझ ही नहीं रहा था। ऊपर से जोर-जोर से उनके स्तन दबा रहा था। उनके होठों से आह… ऊफ़… की ध्वनि टूट रही थी।

वो हटाने की कोशिश तो कर रही थीं, पर नाकाम रहीं। मेरा एक हाथ सलवार के ऊपर से उनकी जांघों पर फिरने लगा, दूसरा सीने पर दबाव डालने लगा। कुछ देर बाद वो खामोश हो गईं।

उसके हाथ को नाड़ी पर जाते देख, वो बोली - ये सब नहीं होगा। धीरे से उसकी कलाई पकड़ते हुए कहा, बस करो, इतना काफी है।

मैंने उसके कान में फुसफुसाया - इस बार रोकना मत। कोई घटना हो गई तो मैं तुमसे विवाह कर लूँगा। चाहे तुम माँ की दूर की रिश्तेदार हो, किसी को आपत्ति नहीं होगी।

उसकी मौसी बोली, अब तक कभी नहीं किया है, इसीलिए घबरा रही हूँ। मैंने सुना, फिर कहा, चिंता मत करो, धीरे-धीरे करूँगा। थोड़ा सा दर्द होगा शुरू में, लेकिन बाद में आराम मिलेगा। फिर मैंने कहा, अब सब कपड़े निकाल दो।

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थर-थर कांपती मौसी ने धीरे धीरे सभी कपड़े तन से अलग किए। मैं उनकी लटकती छातियों को घूरता रह गया, आवाज भी फूट न पाई। बीच शरीर से उठाकर वो मेरी बांहों में आईं। कमरे तक पहुंचते-पहुंचते दिमाग सूख चुका था। बिस्तर पर लेटे हुए उनके चेहरे पर डर था, मगर आंखें बोल रही थीं।

एक भूखे शेर की तरह मैं झपटा। सेक्स अभी तक नहीं किया था मेरे हाथों में, पर आँखों ने कई वीडियो घूरे थे। उसके होंठों पर मेरा मुँह आया, फिर छाती पर चला, गर्दन पर टिका, धीरे-धीरे सारे शरीर पर फैल गया।

उसके बोब्स पर मेरा मुँह था, हल्के से चूसने लगा। कितने नरम थे वो गोल-गोल। जानू के पास थोड़े बाल दिखे। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया। एक उंगली धीरे से अंदर घुसाई। वो कांप रही थी। आवाजें निकल रही थीं - आह्ह्ह… स्स्सईई…

एक पैर फैला, दूसरा भी धीरे से हटा। आगे झुककर चूत के पास मुँह ले गया। सूंघने लगा, फिर चुम्मा खाया। थोड़ा अंदर तक खोला, लाल रंग दिखा। ऊपर एक छोटा गुलाबी हिस्सा था। उंगली डाली, आगे-पीछे करने लगा।

थोड़ी देर में तपन आई, भय धीरे-धीरे घट गया। एक हाथ चूत के अंदर उंगली में व्यस्त था, वहीं दूसरा बोब्स पर दबाव डाल रहा था। चूत कमजोर तंग थी, ऐसा लगा जैसे वो पहले से अभ्यास कर चुकी थी।

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एक बार मैंने पूछा कि तुम अपनी चूत में कितनी बार उंगली डालती हो। उसने जवाब दिया, "तुम्हें ऐसा कैसे पता?" मैंने कहा, "बस इतना जान लिया।" इसके बाद धीरे-धीरे हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़ने लगे। फिर मुंह से मुंह को छूते हुए किस करने लगे।

खड़ा लंड उनके हाथ में सौंपते हुए मैंने कहा – हिलाओ, चूसो। मौसी ने मुट्ठी बनाकर पकड़ लिया, धीरे-धीरे हिलाने लगीं। पहली बार किसी का लंड था हाथ में, इसलिए थोड़ी झिझक भी थी।

थोड़ी देर के बाद मैंने कहा - अब इसे मुंह में ले लो। उसने हल्का सा झिझकते हुए आंखें बंद कीं, फिर मुंह खोला। धीरे से लंड को अंदर लिया और चूसना शुरू कर दिया। जीभ सुपारे पर घूम गई।

मज़े के इशारे दिखने पर वो धीरे-धीरे तेज़ हो गई, आइसक्रीम की तरह चूसते हुए अंदर बाहर करने लगी। उसके मुँह से निकली आवाज़ें - गगग गी गी गों गोग - छत तक जा पहुँची। एकदम भावुक होकर उसने दोनों हाथों से पकड़ा, फिर चाटना शुरू किया, फिर चूसना।

लंड मेरा तन गया, मैंने उसे हाथ से बाहर निकाला। पैर फैलाए, सुपारी को चूत के ऊपर टिकाया, धीरे से दबाव डाला। अंदर थोड़ा घुसा, तभी मौसी के होठों से आह के साथ चीख निकल पड़ी।

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नमी छूट गई थी चूत से, भीग चुकी थी। बाहर खींचा लंड को धीरे से, फिर झटका दिया तेजी से। मौसी की आवाज़ निकली ऊपर की ओर, शरीर हिला एकदम से।

उसकी मुट्ठी मेरे हाथ में आई, फिर एक तेज खींचा डाला - आधा साइज भीतर घुस गया। आंखों से पानी छलक पड़ा, फिर भी संभलकर रहा।

मौसी की चीख सुनते ही मैंने कई बार झटके दिए। होंठों पर छू गया, फिर आवाज बदली। वो लड़खड़ा रही थीं, मैं धीमा हो गया। पर ठिकाना खो बैठा, तब तेजी से धक्के डालने लगा।

धीमे-धीमे आवाज़ें आने लगीं, बोब्स पर दबाव डालते हुए मैंने धक्का दिया। कुछ पलों के बाद तकलीफ कम हो गई। अब वो सांस भरती हुई सीख रही थी। आह… इह… ओह… फिर एक लंबी सी सांस छूटी, हल्की हल्चल छोड़कर।

उसके पैर कंधे पर आए, मैंने धीमे हलचल से शुरू किया। लंड भीतर तक जा रहा था, बाद में गति तेज हो गई। कुछ तेज धक्कों के बाद, गर्म वीर्य अंदर छूट गया। फिर मैं उनके ऊपर ढह गया।

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जब होश आया, मौसी की आवाज़ सुनकर दिल भारी हो गया। उनकी आंखें लाल थीं, आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। चूत से खून-मिश्रित तरल बह रहा था, जमीन पर फैल चुका था। घड़ी में साढ़े ग्यारह बजे थे, रात की सन्नाटा डरावना लग रहा था। मैंने धीरे से उनके गाल, आंख और सिर पर हाथ फेरा। एक शब्द छोटा, पर पूरे जी से बोला - वफादारी तोड़ूंगा नहीं।

गले लगाते ही मौसी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। फिर मैंने कहा, एक बार और चाहिए। उन्होंने जवाब दिया, नहीं, बहुत तकलीफ हो रही है। मैंने कहा, मेरे लिए थोड़ी सी पीड़ा भी नहीं झेल पा रही? ये सुनकर वो झेंप गईं।

उठकर वो बाथरूम आए, मेरा लंड और उनकी चूत पानी से धोई। छूते ही मेरा लंड सीधा हो गया। मैंने मुंह के पास बोब्स घसीटे, चुम्मे लगाए।

उसने संकेत किया - लंड चूसो। फिर वहीं पर उसने मुँह में ले लिया, गहरे स्वर में आवाजें निकलने लगीं। थोड़े समय बाद बोला - दीवार की ओर झुक जा, हाथ टिका ले। बस फिर क्या था, उसने ऐसा ही किया।

पीठ के पीछे हाथ फेरा, तभी मोटा लंड चूत में सरक गया। धीमे झटके देने लगा, छाती पर दबाव डाला। उसकी सांसें तेज हो गईं, आवाज़ें बदलने लगीं। अचानक कराहने लगी - आह्ह्ह… ओऊउ… ऊईईई।

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कुछ देर बाद मैं जोर जोर से धक्के देने लगा करीब दस मिनट बाद फिर उनकी चूत में झड़ गया जाता है।ंंं

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